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मेमोरेंडम जमा करने की डेडलाइन बढ़ी, 8वें पे कमीशन को लेकर बढ़ी गतिविधियां

 नई दिल्ली

8वें वित्त आयोग को लेकर इस समय खूब चर्चाएं कर्मचारियों के बीच हो रहा है। इस बीच अच्छी खबर आई है। कोलकाता में 8वें पे कमीशन की एक बड़ी बैठक होने जा रही है। जिसकी तारीखों का ऐलान हो गया है। पे कमीशन 9 और 10 जुलाई को कोलकाता में मीटिंग करेगा। इस मीटिंग में आयोग के सदस्य केंद्रीय कर्मचारियों से जुड़े संगठन सहित अन्य सभी स्टेकहोल्डर्स से बातचीत करेगा। बता दें, इसके अलावा मोमेरेंडम जमा करने की आखिरी तारीख 31 मई 2026 से बढ़कर 15 जून 2026 कर दी गई है। 29 मई जारी किए गए नोटिस में साफ कर दिया गया है कि आगे डेडलाइन में कोई भी इजाफा नहीं किया जाएगा।

क्यों जरूरी हैं मोमेरेंडम जमा करना
अगर आप भी कोलकाता में होने जा रहे पे कमीशन की मीटिंग हिस्सा लेना चाहते हैं तो आपको मोमेरेंडम जमा करना होगा। पे कमीशन ने कहा है कि 8वें वित्त आयोग की वेबसाइट पर मोमेरेंडम जमा करने के के बाद एक यूनिक मेमो आईडी बनेगी। उसे भी पे कमीशन के पास जमा करवाना होगा।

कौन ले सकता है मीटिंग में हिस्सा?
8वें वित्त आयोग की कोलकाता मीटिंग में केंद्रीय कर्मचारियों से जुड़े संगठन, इंस्टीट्यूशंस, यूनियन और बंगाल में मौजूदा एसोसिएशन हिस्सा ले सकते हैं। लेकिन उन्हें पूरी प्रक्रिया का पालन करना होगा। बिना मेमोरेंडम जमा किए वो इस मीटिंग का हिस्सा नहीं हो सकते हैं। बता दें, मेमोरेंडम सिर्फ 8वें पे कमीशन की वेबसाइट पर जाकर ही जमा करवाया जा सकता है।

आयोग ने कहा है कि स्थान आदि की चर्चा जल्द ही साझा कर दिया जाएगा।
जून में कहां-कहां 8वें वित्त आयोग की मीटिंग

श्रीनगर, जम्मू और कश्मीर में 1 जून से 4 जून 2026 तक 8वें वित्त आयोग की मीटिंग होगी। लद्दाख में पे कमीशन की मीटिंग 8 जून 2026 को प्रस्तावित है।

आयोग के पास 18 महीने का समय
8वें वित्त आयोग का गठन पिछले साल नवंबर में किया गया था। इस आयोग के पास 18 महीने का समय है। आयोग की ही रिपोर्ट के आधार पर सरकारी कर्मचारियों की सैलरी आदि का फैसला सरकार लेगी। यही वजह है कि आयोग देश के अलग-अलग हिस्सो में समाज के सभी वर्गों से लगातार बातचीत कर रहा है। जिससे रिपोर्ट में सभी के विचार समाहित रहें।

8वें वित्त आयोग की मांग सरकारी कर्मचारी लम्बे समय से कर रहे थे। अंततः उनकी मांग को सरकार ने मान लिया है। अब देखना है कि इस बार कितना फिटमेंट फैक्टर आयोग तय करता है। बता दें, फिटमेंट फैक्टर के ही आधार पर सैलरी आदि का फैसला होता है।

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