भोपाल
भोपाल मास्टर प्लान-2047 के ड्राफ्ट पर आपत्ति और सुझाव दर्ज कराने की अंतिम तारीख को लेकर असमंजस बढ़ गया है। शनिवार रात 12 बजे तक ऑनलाइन दावे-आपत्तियां दर्ज की जा सकेंगी, लेकिन लगातार अवकाश के कारण नागरिकों को परेशानी होने की आशंका है। इसी को देखते हुए पर्यावरणविद राशिद नूर खान, क्रेडाई भोपाल के अध्यक्ष मनोज मीक और संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति ने समय-सीमा को लेकर सवाल उठाए हैं। समिति ने अंतिम तारीख 27 अक्टूबर तक बढ़ाने की मांग की है। अब तक मास्टर प्लान के प्रारूप पर 5 हजार से ज्यादा आपत्तियां मिलने की जानकारी सामने आई है। इनकी छंटनी में करीब 15 दिन लगने का अनुमान है। इसके बाद सुनवाई का कार्यक्रम जारी किया जाएगा। सबसे ज्यादा आपत्तियां बड़े तालाब के कैचमेंट एरिया में बदलाव, कृषि भूमि के भू-उपयोग, भोजताल संरक्षण जोन और सड़कों की चौड़ाई से जुड़े प्रस्तावों पर मिली हैं।
कैचमेंट और सड़क चौड़ीकरण पर उठे सवाल
मास्टर प्लान के ड्राफ्ट में प्रस्तावित बदलावों को लेकर अलग-अलग समूहों ने चिंता जताई है। बड़ा तालाब के कैचमेंट क्षेत्र में बदलाव का मुद्दा खास तौर पर चर्चा में है। कैचमेंट क्षेत्र जलाशय में पानी पहुंचाने वाली भूमि और प्राकृतिक जल प्रवाह से जुड़ा होता है। ऐसे क्षेत्रों में नियोजन संबंधी बदलावों को लेकर पर्यावरणीय प्रभाव और जल संरक्षण जैसे सवाल उठ सकते हैं। सड़क चौड़ीकरण के प्रस्तावों पर भी आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। स्थानीय नागरिकों और कारोबारियों की चिंताएं प्रस्तावित सड़क मार्गों, निर्माण और आसपास की संपत्तियों पर संभावित प्रभाव से जुड़ी हो सकती हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में प्रत्येक आपत्ति का विस्तृत विवरण या विभाग की ओर से उन पर दिया गया जवाब शामिल नहीं है।
छुट्टियों के बीच अंतिम तारीख पर सवाल
मास्टर प्लान का प्रारूप 25 सितंबर 2026 को मध्यप्रदेश राजपत्र में प्रकाशित हुआ था। आपत्ति और सुझाव देने के लिए 30 दिन का समय निर्धारित किया गया है। पर्यावरणविद राशिद नूर खान ने नगर तथा ग्राम निवेश विभाग के अधिकारियों को पत्र भेजकर अंतिम तारीख पर स्पष्टीकरण मांगा है। उन्होंने मध्यप्रदेश सामान्य खंड अधिनियम, 1957 की धारा 7 का उल्लेख करते हुए कहा है कि यदि निर्धारित अंतिम दिन कार्यालय बंद रहता है और संबंधित प्रावधान लागू होता है, तो अगले कार्यदिवस 27 अक्टूबर को प्रस्तुत आपत्तियों को समय-सीमा के भीतर स्वीकार किया जाए। क्रेडाई भोपाल के अध्यक्ष मनोज मीक ने भी संयुक्त संचालक, नगर तथा ग्राम निवेश को आवेदन देकर आवेदन स्वीकार करने की प्रक्रिया स्पष्ट करने की मांग की है। उनका कहना है कि आखिरी समय में कार्यालय बंद होने या ऑनलाइन आवेदन में तकनीकी परेशानी के कारण किसी नागरिक की आपत्ति छूटनी नहीं चाहिए। उन्होंने काउंटर, ईमेल और पोर्टल पर आवेदन लेने की तारीख व समय लिखित रूप में स्पष्ट करने तथा आवेदन की रसीद पर तारीख, समय और आवक नंबर दर्ज करने की मांग की है।
शनिवार रात तक ऑनलाइन आवेदन की समय-सीमा
ड्राफ्ट पर दावे-आपत्तियां दर्ज करने के लिए निर्धारित 30 दिन की अवधि शनिवार रात 12 बजे समाप्त होने की जानकारी दी गई है। शनिवार को सरकारी अवकाश होने के कारण आवेदकों के लिए ऑनलाइन माध्यम से आवेदन करने पर जोर रहेगा। क्रेडाई भोपाल के अध्यक्ष मनोज मीक ने समय-सीमा के अंतिम चरण को लेकर संयुक्त संचालक, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग को आवेदन भेजा है। उन्होंने कहा कि क्रेडाई के साथ अन्य संस्थाएं और नागरिक समूह भी मास्टर प्लान पर सुझाव तथा आपत्तियां जुटा रहे हैं। आवेदन में यह आग्रह किया गया है कि अंतिम दिन कार्यालय बंद रहने या ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया में तकनीकी परेशानी आने से किसी नागरिक या संगठन की आपत्ति दर्ज होने से न छूट जाए। इस संबंध में विभाग की ओर से क्या अतिरिक्त व्यवस्था की गई है, इसकी जानकारी उपलब्ध सामग्री में नहीं दी गई है।
सुनवाई के कार्यक्रम का इंतजार
प्राप्त आपत्तियों की छंटनी में लगभग 15 दिन लगने का अनुमान है। इस प्रक्रिया के बाद सुनवाई की तारीखें और कार्यक्रम जारी किए जाने की बात कही गई है। सुनवाई के दौरान अलग-अलग मुद्दों पर दर्ज आपत्तियों और सुझावों पर विचार किया जाएगा।
संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति भी समय बढ़ाने के पक्ष में
संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति ने भी भोपाल मास्टर प्लान-2047 पर आपत्ति और सुझाव प्रस्तुत करने की अंतिम तारीख 27 अक्टूबर तक बढ़ाने की मांग की है। समिति के संयोजक और याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी के अनुसार, प्रकाशन का दिन छोड़कर 30 दिनों की गणना करने पर अंतिम तारीख 25 अक्टूबर बनती है। समिति ने मध्यप्रदेश सामान्य खंड अधिनियम, 1957 की धारा 7 का हवाला देते हुए कहा है कि निर्धारित अंतिम दिन कार्यालय बंद रहने की स्थिति में अगले कार्यदिवस कार्रवाई की जा सकती है। समिति का कहना है कि 24 से 26 अक्टूबर तक अवकाश की स्थिति को देखते हुए नागरिकों को अतिरिक्त समय दिया जाना चाहिए, ताकि वे मास्टर प्लान का अध्ययन कर अपनी आपत्तियां और सुझाव दे सकें। हालांकि, अंतिम तारीख बढ़ाने को लेकर विभाग की ओर से निर्णय की पुष्टि नहीं हुई है।
कैचमेंट एरिया और कृषि भूमि पर किसानों का विरोध
मास्टर प्लान के ड्राफ्ट के खिलाफ विरोध लगातार बढ़ रहा है। शाहपुरा स्थित टीएनसीपी कार्यालय में पिछले दो दिनों से आपत्तियां दर्ज कराने वालों की भीड़ पहुंच रही है। शुक्रवार को भारतीय किसान संघ के साथ व्यापारी और रहवासी भी पहुंचे। किसानों ने अपनी कृषि भूमि के भविष्य को लेकर चिंता जताई, जबकि अन्य लोगों ने निर्माण और सड़क संबंधी प्रस्तावों पर आपत्तियां दर्ज कराईं। किसानों की मांग है कि उनकी जमीन का उपयोग खेती के लिए ही सुरक्षित रखा जाए। अनोखी सिंह पटेल के मुताबिक, खेती अनेक किसानों की आजीविका का प्रमुख साधन है। किसानों ने भोजताल संरक्षण जोन-1 और जोन-2 यानी बीआईजेड-1 और बीआईजेड-2 को हटाने तथा कृषि भूमि का भू-उपयोग कृषि ही रखने की मांग की है। उनका आरोप है कि ड्राफ्ट में बड़े तालाब के आसपास की कृषि भूमि के उपयोग में बदलाव का प्रस्ताव है, जिससे उनकी आजीविका और जमीन के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ी है।





