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मानवाधिकार मामलों की सुनवाई के लिए पंजाब में बनेगी खास अदालतें, RTI में सामने आई जानकारी

 चंडीगढ़ पंजाब में मानवाधिकार उल्लंघन से जुड़े अपराधों की सुनवाई के लिए प्रत्येक जिले में विशेष अदालत नामित करने का प्रावधान है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मिली जानकारी और पंजाब सरकार की अधिसूचना से यह सामने आया है। पीपल वेलफेयर सोसायटी चंडीगढ़ ने मानवाधिकार संरक्षण कानून के प्रभावी क्रियान्वयन और लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने की मांग उठाई है। पंजाब सरकार ने मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 30 के तहत विशेष अदालतों के गठन के संबंध में अधिसूचना जारी की थी। इसमें प्रत्येक जिले में दूसरी अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत को विशेष अदालत के रूप में नामित करने का प्रावधान है। जिस जिले में केवल एक अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत है, वहां पहली अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत को यह जिम्मेदारी देने की व्यवस्था है। इस व्यवस्था का उद्देश्य अधिनियम के तहत आने वाले अपराधों की सुनवाई संबंधित क्षेत्राधिकार में कराना है। सोसायटी ने कहा कि कानूनी प्रावधानों के साथ यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि आम लोगों, पीड़ितों और संबंधित संस्थाओं को विशेष अदालतों की व्यवस्था, अपने अधिकारों और उपलब्ध कानूनी उपायों की जानकारी हो। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के जनसूचना अधिकारी की ओर से 13 अक्तूबर 2026 को जारी पत्र में अधिवक्ता कंवर पहल सिंह को आरटीआई अधिनियम, 2005 के तहत मांगी गई जानकारी से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने का उल्लेख है। पत्र में 11 सितंबर 2026 को दिए गए दो आवेदनों के संबंध में दस्तावेजों की प्रतियां भेजने की जानकारी दी गई है। विशेष अदालतों में सुनवाई का प्रावधान मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 30 के तहत राज्य सरकार उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की सहमति से प्रत्येक जिले में सत्र न्यायालय को विशेष अदालत के रूप में निर्दिष्ट कर सकती है। पंजाब सरकार की अधिसूचना में दूसरी अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत को नामित करने का प्रावधान बताया गया है। जहां ऐसी दूसरी अदालत नहीं है, वहां पहली अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत को यह जिम्मेदारी देने की व्यवस्था है। 

हॉकी मैच देखने पहुंचे अरुण साव, खिलाड़ियों की हौसला अफजाई की

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने की खिलाड़ियों की हौसला अफजाई, मैच देखने पहुंचे हॉकी स्टेडियम युवराज वाल्मीकि की हैट्रिक ने संस्कारधानी स्ट्राइकर्स को किया परास्त, चक्रधर चैंपियंस पॉइंट्स टेबल में टॉप पर रायपुर.  छत्तीसगढ़ हॉकी लीग का रोमांच जोर पकड़ रहा है।लीग के दूसरे दिन आज के दूसरे मैच में चक्रधर चैंपियंस ने संस्कारधानी स्ट्राइकर्स को 6-4 से मात दी। उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव भी इस मैच को देखने पहुंचे थे। उन्होंने दोनों टीमों के खिलाड़ियों की हौसला अफजाई की। मैच की शुरुआत अनुभवी इंडिया प्लेयर एस.वी. सुनील के शानदार प्रदर्शन से हुई। जब चक्रधर चैंपियंस के लिए मौके नहीं आ रहे थे, तो उन्हें बस मिडफील्ड से एक पास की जरूरत थी। वहां से उन्होंने सर्कल में युवराज वाल्मीकि को एक सटीक पास दिया, जिन्होंने शॉट मारने की कोशिश की और रिबाउंड पर गोल कर दिया। ठीक एक मिनट बाद, चक्रधर चैंपियंस ने एक और मौका बनाया जिससे गोल हो गया। अर्जुन यादव ने सर्कल के ठीक बाहर संस्कारधानी स्ट्राइकर्स के डिफेंडर से बॉल छीनकर गोलपोस्ट के सामने पास कर दी। कार्तिक यादव ने एक बड़ा डाइव लगाकर बढ़त को 2-0 कर दिया।  दूसरे क्वार्टर में चक्रधर चैंपियंस को अपना तीसरा गोल करने में ज़्यादा समय नहीं लगा। इस बार यह एक पेनाल्टी कार्नर कन्वर्ज़न था, एक रेयर कॉम्बिनेशन जिसमें ड्रैग फ़्लिकर ने बॉल सुनील की ओर भेजी, और फिर वाल्मीकि की ओर, जिन्होंने बॉल को पोस्ट में गाइड किया। इन मुश्किलों के बावजूद संस्कारधानी स्ट्राइकर्स ने क्वार्टर में एक गोल वापस कर लिया जब शाहरुख ने रिबाउंड पर बोर्ड पर गेंद डाली। वैभव सिंह चंदेल सर्कल के अंदर से बुलेट स्ट्राइक को रोक नहीं सके। स्ट्राइकर्स के लिए चीजें और खराब हो गईं जब कीपर आदित्य कुमार नेताम ने कार्तिक के खिलाफ टैकल करने की कोशिश की। नतीजतन, वाल्मीकि को पेनल्टी स्ट्रोक मिला और उन्होंने एक और गोल किया। तीसरा क्वार्टर संस्कारधानी स्ट्राइकर्स के लिए पूरी तरह से बदल गया जहां उन्होंने दो और गोल किए। पहला शाहरुख का फील्ड गोल था, जबकि दूसरा शमशेर के आखिरी पेनाल्टी स्ट्रोक से आया, जिससे स्कोर 4-3 हो गया। चौथे क्वार्टर में चक्रधर चैंपियंस ने पूरी ताकत झोंक दी। मनीष ने सर्कल में एक बढ़िया डिफ्लेक्शन से गोल कर दिया। इस गोल ने एक तरह से स्ट्राइकर्स की सारी उम्मीदें खत्म कर दीं। एक और पेनाल्टी कार्नर का मतलब था सुनील की टीम के लिए गोल करने का एक और मौका। हालांकि इस बार गोल आया वाल्मीकि के रिबाउंड पर, जिन्होंने रात का अपना तीसरा गोल किया। शमशेर ने फील्ड गोल के साथ मैच खत्म किया, जिससे स्कोर 6-4 हो गया। शाहरुख को स्ट्राइकर ऑफ द मैच का अवॉर्ड मिला, जबकि वाल्मीकि को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। मैनपाट टाइटन्स और बैलाडीला बुल्स ने 3-3 से करीबी ड्रॉ खेला इससे पहले मैनपाट टाइटन्स और बैलाडीला बुल्स ने 3-3 से करीबी मुकाबला ड्रॉ खेला। पहले दो क्वार्टर में प्रदीप मोर की मैनपाट टाइटन्स ने दबदबा बनाया, जबकि आखिरी दो क्वार्टर में चिंगलेनसाना सिंह की बैलाडिला बुल्स बेहतर रही। हाफ टाइम तक टाइटन्स दो गोल से आगे थे, लेकिन जसकरण सिंह और राहुल यादव ने अपनी टीम को वापसी दिलाई, जब किसी को उम्मीद नहीं थी। मैच इतना बराबरी का था कि दोनों टीमें मैच के आखिरी मिनटों में दो-दो गोल करने में सफल रहीं। अपने शानदार खेल के लिए प्रहलाद को स्ट्राइकर ऑफ द मैच का अवॉर्ड दिया गया, जबकि करण धानुक प्लेयर ऑफ द मैच रहे।

UP में सड़क हादसों में 9% और मौतों में 10% की कमी, DGP ने पेश किए आंकड़े

लखनऊ  पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कृष्ण ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में अपराध और अपराधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति को केंद्र में रखकर पुलिस की कार्यप्रणाली बेहतर बनाने के लिए 10 प्राथमिकताएं निर्धारित की गई थीं। इनमें से कई प्राथमिकताओं को सफलतापूर्वक धरातल पर उतारा जा चुका है। गैंगस्टर और माफिया के खिलाफ कार्रवाई के साथ छोटे अपराधों पर भी प्रभावी अंकुश लगाने के प्रयास किए गए हैं, जिससे ऐसे अपराधों में उल्लेखनीय कमी आई है। साइबर अपराध मामलों में 635 करोड़ रुपये सीज उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस आईजीओटी कर्मयोगी पोर्टल पर एक करोड़ पाठ्यक्रम पूरे करने वाला देश का पहला विभाग बन गया है। डीजीपी ने बताया कि पिछले एक वर्ष में साइबर अपराध से संबंधित मामलों में विभिन्न बैंकों में 635 करोड़ रुपये की धनराशि सीज कराई गई। सड़क हादसों में मौतों में 10 प्रतिशत की कमी मुख्यमंत्री योगी के निर्देशों के अनुरूप सुगम यातायात और सड़क सुरक्षा के लिए जीरो फैटेलिटी डिस्ट्रिक्ट (ZFD) तथा अन्य अभियान संचालित किए जा रहे हैं। वर्ष 2025 की पहली छमाही की तुलना में वर्ष 2026 की पहली छमाही में सड़क दुर्घटनाओं में नौ प्रतिशत और उनसे होने वाली मौतों में 10 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। इन प्रयासों से 1,000 से अधिक लोगों का जीवन बचाने में मदद मिली है। 6,000 से अधिक तस्करों को गिरफ्तार किया गया उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश पुलिस नशा तस्करों की गिरफ्तारी तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उनके नेटवर्क, अवैध कमाई और तस्करी में इस्तेमाल होने वाले साधनों पर भी कार्रवाई कर रही है। वर्ष 2026 में अब तक इस अभियान के तहत 6,000 से अधिक तस्करों को गिरफ्तार किया गया है तथा 36,000 किलोग्राम से अधिक मादक पदार्थ बरामद किए गए हैं। इसके अतिरिक्त 26 कार्टेल ध्वस्त किए गए हैं।  

अभ्युदय-2026 सम्मेलन का आगाज करेंगे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, HR और CSR क्षेत्र पर रहेगा फोकस

मुख्यमंत्री डॉ. यादव करेंगे चतुर्थ राष्ट्रीय एचआर-सीएसआर सम्मेलन अभ्युदय-2026 का शुभारंभ भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 24 अक्टूबर, शनिवार को कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में चतुर्थ राष्ट्रीय एचआर-सीएसआर सम्मेलन 'अभ्युदय-2026' का सुबह 10 बजे शुभारंभ करेंगे। सम्मेलन का विषय 'अभ्युदय: समग्र कल्याण के लिए पर्यावरण-सामाजिक उत्तरदायित्व-सुशासन और सभ्यतागत ज्ञान का समन्वय' है। उद्घाटन सत्र में मुख्यमंत्री डॉ. यादव सम्मेलन को संबोधित करेंगे एवं प्रतिभागियों के साथ संवाद भी करेंगे। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में इंडोनेशिया से पद्मश्री डॉ. अगुस इंद्र उदयाना, एस-व्यासा के कुलाधिपति पद्मश्री डॉ. एच. आर. नागेंद्र, श्रीकृष्ण पाथेय न्यास के प्रतिनिधि श्रीराम तिवारी तथा सम्मेलन के संयोजक डॉ. विक्रांत सिंह तोमर उपस्थित रहेंगे।  संस्कृति विभाग के श्रीकृष्ण पाथेय न्यास एवं यूनाइटेड ग्लोबल पीस फाउंडेशन द्वारा डॉ. विक्रांत सिंह तोमर (यूनाइटेड काउंसिल फॉर एंशिएंट विजडम-यूनाइटेड कॉन्शसनेस) के सहयोग से यह आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन मध्यप्रदेश के लिए उपयोगी साझेदारियों के नए अवसर सृजित करेगा, जिससे उद्योग, सरकार, विश्वविद्यालय और सामाजिक संस्थाएं मिलकर कौशल, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में व्यावहारिक मॉडल विकसित कर सकेंगी। सम्मेलन में देशभर से प्रमुख कॉर्पोरेट प्रतिनिधि, प्रख्यात शिक्षाविद, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और सामाजिक क्षेत्र के विशेषज्ञ सहभागिता कर रहे हैं।

पंजाब में जनगणना के दौरान जाति, शादी और बैंक खाते से जुड़े सवाल, ठिकाना बदलने की वजह भी पूछेंगे

चंडीगढ़  पंजाब में जनगणना का दूसरा फेज अगले महीने से शुरू होगा। 16 से 30 नवंबर तक लोग घर बैठे ऑनलाइन जनगणना की जानकारी भर सकेंगे। जनगणना में जाति, शादी, धर्म और बैंक खातों से जुड़े सवाल भी पूछे जाएंगे। कुल 40 सवालों में ठिकाना बदलने और कोराना का टीका लगाने के बारे में भी पूछा जायेगा।  खास बात ये भी है कि देश में पहली बार डिजिटल साक्षरता के बारे में भी जानकारी जुटाई जाएगी। जिसमें पूछा जाएगा कि आपको मोबाइल, कंप्यूटर और इंटरनेट चलाना आता है या नहीं। इसके बाद 1 दिसंबर से 4 जनवरी 2027 तक कर्मचारी घर-घर जाकर जनगणना करेंगे। इसके लिए पंजाब में अफसरों ने तैयारी शुरू कर दी है। इसे पंजाब में 2027 में होने वाले चुनाव से पहले पूरा करने का टारगेट रखा गया है। 3 चरणों में होगी जनगणना फाइनल 1. ऑनलाइन- लोग घर बैठे जवाब भरेंगे, रेफरेंस नंबर दिखाना होगा लोग जनगणना की वेबसाइट se.census.gov.in पर जाकर ऑनलाइन जानकारी भर सकते हैं। सभी 40 सवालों का जवाब देने के बाद जनगणना पूरी हो जाएगी। फॉर्म जमा होने के बाद एक यूनिक रेफरेंस नंबर मिलेगा। जब जनगणना कर्मचारी वेरिफिकेशन के लिए घर आएंगे, तो केवल वह रेफरेंस नंबर दिखाकर काम तुरंत पूरा हो जाएगा। 2.ऑफलाइन- कर्मचारी घर आएंगे, 40 सवाल पूछेंगे जो लोग ऑफ लाइन जनगणना करवाना चाहते हैं उनके घर 1 दिसंबर से सरकारी कर्मचारी आएंगे और उनसे सभी 40 सवालों के जवाब पूछेंगे। लोगों को इन 40 सवालों के जवाब जनगणना कर्मचारी को देने होंगे। यह प्रक्रिया 4 जनवरी 2027 तक चलेगी। 3. संशोधन- गलतियां सुधार सकेंगे ऑनलाइन व ऑफ लाइन फार्म जमा होने के बाद 5 जनवरी 2027 से 9 जनवरी तक छूटे हुए लोगों व जनगणना की गलतियों को सुधारने का मौका रहेगा। इसी दौरान जनगणना कर्मी डेटा की जांच करेंगे और गलतियों को दूर करेंगे। ऑनलाइन जनगणना फॉर्म भरने की स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया जानिए…     पोर्टल पर जाएं: जनगणना के आधिकारिक वेबसाइट se.census.gov.in खोलें। यह विंडो 16 नवंबर से 30 नवंबर तक खुली रहेगी। इसी पीरियड में लोग ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।     राज्य चुनें: पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन के लिए 'State/UT' के ड्रॉपडाउन मेन्यू में Punjab चुनें और स्क्रीन पर दिख रहा CAPTCHA दर्ज करें। उसके बाद रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।     रजिस्ट्रेशन: परिवार के मुखिया का नाम और एक सक्रिय मोबाइल नंबर डालें। यह मोबाइल नंबर एक परिवार के लिए केवल एक ही मोबाइल नंबर मान्य होगा। जो मोबाइल नंबर भरेंगे उसी पर ओटीपी आएगा और उसके बाद ही प्रक्रिया शुरू होगी। मुखिया का नाम फार्म सब्मिट होने के बाद बदला नहीं जाएगा।     घर का पता एवं लोकेशन दर्ज करें: ऑनलाइन आवेदन भरते समय अपना जिला, शहर/गांव, मोहल्ला, लैंडमार्क और पिन कोड भरें। डिजिटल मैप पर अपने मकान की सटीक लोकेशन मार्क करें। इसके लिए लैपटॉप/कंप्यूटर का उपयोग करना अधिक सुविधाजनक रहेगा।     फार्म भरते समय दें सही जानकारी: ऑनलाइन व ऑफ लाइन भरते समय लोगों की सही जानकारी दें ताकि आवेदन फार्म में सही जानकारी उपलब्ध करवाई जा सके।     फॉर्म सबमिट करें और SE ID संभालें: ऑनलाइन फार्म भरते समय सही तथ्यों की जानकारी दें। फार्म कंप्लीट होने के बाद एक बार चेक करें। चेक करने के बाद ही फार्म को सब्मिट करें। उसके बाद एक आईडी स्क्रीन पर शो होगी और उसके संभालकर रखें। 1 दिसंबर के बाद जब कर्मचारी आपके पास आएंगे तो उन्हें यह आईडी बतानी होगी। डेटा की सुरक्षा और गोपनीयता जनगणना कानून, 1948 के तहत इकट्ठा की गई सभी व्यक्तिगत जानकारियां पूरी तरह से गुप्त (कॉन्फिडेंशियल) रखी जाएंगी। जनगणना अधिकारियों द्वारा जुटाई गई व्यक्तिगत जानकारी का इस्तेमाल सिर्फ सरकारी आंकड़े तैयार करने और योजनाएं बनाने के लिए ही किया जाएगा।

इंदौर में जुटेंगे संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी, 28 अक्टूबर से शुरू होगी अखिल भारतीय बैठक

 इंदौर  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की वार्षिक अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक मध्य प्रदेश के इंदौर में 28 से 30 अक्टूबर तक आयोजित होगी। आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने संगठन की वेबसाइट पर जारी बयान में बताया कि बैठक में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले, सभी छह सह-सरकार्यवाह और संगठन के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल होंगे। संगठनात्मक गतिविधियों की होगी समीक्षा बैठक में देशभर में संघ की संगठनात्मक गतिविधियों की पिछले एक वर्ष की समीक्षा की जाएगी। इसमें देश के 46 प्रांतों के प्रांत संघचालक, कार्यवाह और प्रचारक भी हिस्सा लेंगे। इसके अलावा 11 क्षेत्रों के संघचालक, कार्यवाह, प्रचारक तथा क्षेत्रीय पदाधिकारी उपस्थित रहेंगे। विजयादशमी के संदेश पर भी होगी चर्चा बैठक में विजयादशमी के अवसर पर मोहन भागवत द्वारा उठाए गए मुद्दों पर चर्चा होगी। साथ ही संघ के शताब्दी वर्ष के दौरान संचालित गतिविधियों की समीक्षा की जाएगी। देश को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण विषय भी बैठक के एजेंडे में शामिल हैं। इनमें नशीले पदार्थों की बढ़ती चुनौती, देश के आंतरिक मामलों में बाहरी ताकतों का हस्तक्षेप तथा पर्यावरण का संरक्षण और संवर्धन प्रमुख हैं।  

भारतीय सेना को मिला नागास्त्र-2 ड्रोन, सफल परीक्षण के बाद हुई डिलीवरी

 नागपुर भारतीय थल सेना ने नागपुर स्थित सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड से स्वदेशी नागस्त्र-2 एंटी-टैंक लॉइटिरिंग म्यूनिशन प्राप्त कर लिया है. यह सिस्टम अगस्त 2026 में राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में सफल परीक्षणों के बाद सेना को सौंपा गया. लॉइटिरिंग म्यूनिशन आधुनिक युद्ध का महत्वपूर्ण हथियार है. ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान के खिलाफ इसका पुराना वर्जन इस्तेमाल किया गया था।  यह लक्ष्य के ऊपर मंडराता रहता है, सटीक जानकारी इकट्ठा करता है. फिर हमला करता है. नागस्त्र-2 के आने से सेना की टैंक रोधी क्षमता और मजबूत हुई है. कंपनी के पुराने वर्जन पहले से ही सेना में शामिल हैं, इसलिए यह डिलीवरी निरंतरता को भी दर्शाती है।  नागस्त्र-2 एक फिक्स्ड-विंग लॉइटिरिंग म्यूनिशन है. इसमें दिन और रात दोनों समय काम करने वाले कैमरे लगे हैं, जिससे किसी भी मौसम या अंधेरे में लक्ष्य की पहचान संभव है. इसका 4 किलोग्राम का वॉरहेड 650 मिलीमीटर मोटी कवच को भेदने में सक्षम है. यह क्षमता आधुनिक टैंकों के खिलाफ प्रभावी साबित हो सकती है।  सिस्टम की अधिकतम रेंज 50 किलोमीटर तक है. फायर-एंड-फॉरगेट मोड में यह 60 मिनट तक हवा में रह सकता है. फायर-एंड-फॉरगेट का मतलब है कि लॉन्च के बाद ऑपरेटर को लगातार नियंत्रण रखने की जरूरत नहीं पड़ती. इसमें ईसीसीएम यानी इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-काउंटर मेजर्स सूट भी है, जो जैमिंग का विरोध करता है. दुश्मन अगर सिग्नल जाम करने की कोशिश करे तो भी सिस्टम काम करता रहता है. ये विशेषताएं इसे सीमा क्षेत्रों और संघर्ष क्षेत्रों में बहुत उपयोगी बनाती हैं।  आत्मनिर्भरता और स्वदेशी सामग्री  नागस्त्र-2 में 80 प्रतिशत से अधिक सामग्री स्वदेशी है. यह आंकड़ा आत्मनिर्भर भारत अभियान की सफलता को रेखांकित करता है. पहले कई ऐसे हथियार आयात पर निर्भर थे, जिससे न सिर्फ खर्च बढ़ता था बल्कि आपूर्ति की अनिश्चितता भी रहती थी. अब घरेलू कंपनी द्वारा विकसित और निर्मित सिस्टम सेना को मिल रहा है।  इससे लागत कम होती है, रखरखाव आसान होता है और जरूरत पड़ने पर तेजी से उत्पादन बढ़ाया जा सकता है. नागपुर जैसी जगह पर रक्षा उद्योग का विकास क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा देता है. कंपनी के पहले संस्करणों का सेना में पहले से उपयोग होना इस बात का प्रमाण है कि स्वदेशी तकनीक भरोसेमंद साबित हो रही है।  रणनीतिक प्रभाव और भविष्य  लॉइटिरिंग म्यूनिशन आज के युद्ध में ड्रोन और सटीक हमले की भूमिका को बदल रहे हैं. यूक्रेन संघर्ष समेत कई जगहों पर इनके प्रभावी इस्तेमाल ने साबित किया है कि ये सस्ते और घातक दोनों हो सकते हैं. नागस्त्र-2 की 50 किलोमीटर रेंज और लंबे समय तक मंडराने की क्षमता सेना को दुश्मन के बख्तरबंद वाहनों पर दूर से हमला करने का विकल्प देती है।  जैमिंग प्रतिरोधक क्षमता इसे इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के माहौल में भी प्रभावी बनाए रखती है. कुल मिलाकर यह डिलीवरी भारतीय सेना की आधुनिकीकरण प्रक्रिया और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में ठोस कदम है. आगे और उन्नत संस्करण आने की उम्मीद है, जो सीमा सुरक्षा को और मजबूत करेंगे। 

चंडीगढ़ में बच्ची को ससुराल वालों ने मां से किया था अलग, हाईकोर्ट ने मां को सौंपी कस्टडी

चंडीगढ़  पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने छह साल की बच्ची की अभिरक्षा मां को सौंपने का आदेश दिया है। बच्ची अक्तूबर 2025 से पिता के परिवार के पास रह रही थी। मां ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर बेटी को पेश कराने और कस्टडी देने की मांग की थी। सुनवाई में अदालत ने बच्ची की कम उम्र और कल्याण पर विचार करते हुए कहा कि उसके विकास में मां की देखभाल और स्नेह महत्वपूर्ण हैं। हाईकोर्ट ने इसी आधार पर बच्ची की कस्टडी मां को सौंपने का निर्देश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि उसकी स्थायी अभिरक्षा के प्रश्न पर सक्षम अदालत तथ्यों और परिस्थितियों का विस्तृत आकलन कर निर्णय ले सकती है। चंडीगढ़ निवासी याचिकाकर्ता की शादी दिसंबर 2014 में हुई थी और मार्च 2020 में बेटी का जन्म हुआ। महिला का पति रोजगार के सिलसिले में कुवैत चला गया था। महिला ने आरोप लगाया कि ससुराल में उसके साथ दुर्व्यवहार हुआ और शिकायत करने पर उसकी बात नहीं सुनी गई। इसके बाद वह चार अक्तूबर 2025 को बेटी के साथ ससुराल से निकल गई। महिला के अनुसार, रास्ते में ससुराल पक्ष के लोगों ने उससे बच्ची को अलग कर दिया। उसने पुलिस से शिकायत की और परिवार स्तर पर भी बच्ची की वापसी का प्रयास किया, लेकिन बेटी की कस्टडी नहीं मिली। इसके बाद उसने हाई कोर्ट का रुख किया। ससुराल पक्ष ने महिला के आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि बच्ची की उचित देखभाल की जा रही है। उनका पक्ष था कि महिला अपनी मर्जी से ससुराल छोड़कर गई थी।

MP में अल्पसंख्यकों के नागरिकता आवेदनों की पड़ताल तेज, लंबित मामलों का ब्योरा तलब

ग्वालियर  मध्य प्रदेश में अल्पसंख्यकों की नागरिकता को लेकर सरकार पड़ताल कर रही है। अल्पसंख्यकों की नागरिकता के कितने आवेदन किस किस जिलों में लंबित हैं, इसको लेकर पूरा डाटा मध्य प्रदेश के गृह विभाग ने मांगा है। इसको लेकर जनगणना के निदेशक से गृह विभाग ने कई बिंदुओं पर जानकारी मांगी है। प्रदेश के महानगरों में नागरिकता आवेदनों को डील करने वाले अधिकारियों के स्तर पर आंकड़ा क्या है, इसके अलावा नान सीएए अल्पसंख्यक संबंधी आवेदन, जिलेवार और प्रदेश में नागरिकता मामले के आवेदनों को लेकर क्या स्थिति है, यह बारीक आंकड़े मांगे गए हैं। गृह विभाग के वरिष्ठ अफसरों को पूरी रिपोर्ट जाएगी गृह विभाग के वरिष्ठ अफसरों को यह पूरी रिपोर्ट जाएगी। इस जानकारी में इंटेलिजेंस ब्यूरो की रिपोर्ट भी शामिल होगी। बता दें कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नागरिकता (संशोधन) नियम, 2026 को अधिसूचित किया है, जिससे पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आने वाले गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यकों (हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई) की नागरिकता से जुड़ी प्रक्रियाओं में बड़े बदलाव किए गए हैं। जनगणना निदेशक से कई बिंदुओं पर विस्तार से जानकारी मांगी नए संशोधन के बाद से ही प्रदेशों और जिलों में इसको लेकर सभी मापदंडों पर पड़ताल बढ़ी और नागरिकता आवेदनों को लेकर अलग अलग स्तर से दिशा निर्देश जारी हुए। गृह विभाग ने जनगणना निदेशक से इसको लेकर कई बिंदुओं पर जानकारी विस्तार से मांगी है । जिससे मौजूदा स्थिति के विषय में पूरी जानकारी का चल सके। मप्र में लंबित नागरिकता मामलों की स्थिति इंदौर में कुल लंबित मामलों की संख्या 374 है और आईबी रिपोर्ट लंबित का आंकड़ा 31 है। इसी तरह भोपाल में 55, जलबपुर में आठ, रतलाम में सात, उज्जैन में तीन, होशंगाबाद और विदिशा में दो दो व सीहोर,बालाघाट, बैतूल व मंदसौर में एक एक आवेदन लंबित है। इस तरह जिलों में लंबित नागरिकता मामलों का आंकड़ा 460 है। नॉन सीएए अल्पसंख्यक संबंधी लंबित आवेदनों की स्थिति इंदौर में कुल आवेदन संख्या 2896 है। प्रदान की गई नागरिकता 2399 और अस्वीकृत आवेदन 48 है। वहीं लंबित आवेदनों की संख्या 449 है। इसी तरह भोपाल में कुल आवेदन 244, प्रदान की गई स्वीकृति का आंकड़ा 184 और अस्वीकृत आवेदन की संख्या छह है।

अयोध्या में दीपोत्सव की भव्य तैयारी, 30 लाख दीप जलाकर अपना ही रिकॉर्ड तोड़ने का लक्ष्य

अयोध्या  कल्पना कीजिए. सरयू का किनारा हो, राम की पैड़ी हो और दूर-दूर तक सिर्फ दीपों की रोशनी दिखाई दे. एक-दो हजार नहीं, लाखों दीप. इन्हें सजाने और जलाने के लिए हजारों हाथ एक साथ जुटें. अयोध्या इस बार कुछ ऐसी ही तस्वीर तैयार करने की कोशिश में है. रामनगरी में दसवें दीपोत्सव की तैयारियों का विधिवत शंखनाद हो गया है. सरयू तट पर भूमि पूजन के साथ आयोजन की शुरुआत हो गई. इस बार लक्ष्य है 30 लाख दीप जलाने का. इसके लिए डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के करीब 35 हजार स्वयंसेवक जुटेंगे।  इस बार चुनौती सिर्फ लाखों दीप जलाने की नहीं है. चुनौती अपने ही पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ने की भी है. पिछले दीपोत्सव में 26 लाख 17 हजार 215 से अधिक दीप प्रज्ज्वलित करने का रिकॉर्ड बनाया गया था. अब दसवें दीपोत्सव में इससे आगे निकलने की तैयारी है।  दीपोत्सव की तैयारियों की शुरुआत धार्मिक परंपरा के साथ की गई. अवध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विजेंद्र सिंह ने विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों और स्वयंसेवकों के साथ भूमि पूजन किया. इसके बाद मां सरयू की पूजा-अर्चना की गई. इसके बाद काम शुरू होता है- लाखों दीपों को तय जगहों पर रखना, उनकी व्यवस्था करना और फिर निर्धारित समय पर उन्हें प्रज्ज्वलित करना।  जब लक्ष्य 30 लाख दीपों का हो, तो जरा सोचिए कि इस पूरे इंतजाम में कितनी मेहनत और तालमेल की जरूरत होगी. सरयू तट और राम की पैड़ी इस आयोजन के प्रमुख केंद्र होंगे. यहां दीपों की कतारें सजाने के लिए विश्वविद्यालय के स्वयंसेवक बड़ी संख्या में जुटेंगे।  30 लाख का लक्ष्य, लेकिन पिछला रिकॉर्ड भी कम नहीं अब जरा पिछले रिकॉर्ड पर नजर डालिए. नौवें दीपोत्सव में 26 लाख 17 हजार 215 से अधिक दीप प्रज्ज्वलित किए गए थे. यह अपने आप में बड़ा आंकड़ा है. इस बार लक्ष्य 30 लाख दीपों का रखा गया है. यानी पिछले रिकॉर्ड के मुकाबले करीब 3 लाख 82 हजार 785 दीप अधिक जलाने होंगे. इस आयोजन में अवध विश्वविद्यालय की भूमिका अहम है. विश्वविद्यालय के करीब 35 हजार स्वयंसेवक दीपों को निर्धारित स्थानों पर सजाने और उन्हें प्रज्ज्वलित करने की तैयारियों में हिस्सा लेंगे।  दीपोत्सव की तस्वीरों में अक्सर लाखों दीपों की चमक दिखाई देती है. उस चमक के पीछे काम करने वाले हजारों लोगों की मेहनत भी होती है. जब लाखों दीपों को एक साथ सजाना हो, तो हर दीप के लिए जगह तय करनी पड़ती है. फिर उन्हें व्यवस्थित तरीके से रखना होता है, ताकि पूरा परिसर खूबसूरत भी दिखे और आयोजन भी तय योजना के मुताबिक आगे बढ़े. इस बार करीब 35 हजार स्वयंसेवकों की टीम इसी काम में जुटेगी. इतने बड़े स्तर पर लोगों को एक साथ काम में लगाना अपने आप में एक बड़ी व्यवस्था है।  भूमि पूजन के साथ तैयारियों का शंखनाद हो चुका है. अवध विश्वविद्यालय के करीब 35 हजार स्वयंसेवकों को इस भव्य आयोजन में भूमिका निभानी है. लक्ष्य 30 लाख दीप प्रज्ज्वलित करने का है और पिछली बार के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ने की कोशिश की जाएगी. सरयू तट और राम की पैड़ी पर लाखों दीप सजाने की तैयारी है. अब सबकी निगाहें उस शाम पर टिकी हैं, जब अयोध्या की रोशनी इस मेहनत और तैयारी की असली तस्वीर सामने लाएगी।