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क्यों अहम है जनगणना? विकास, संसाधन और राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर दिखेगा व्यापक प्रभाव

लखीमपुर  खीरी में जनगणना-2027 के प्रथम चरण से मिले शुरुआती संकेत बताते हैं कि जिले की आबादी 46.59 लाख के करीब पहुंच गई है। पिछले 15 वर्षों में जनसंख्या और परिवारों की संख्या में हुई उल्लेखनीय वृद्धि का सीधा असर विकास योजनाओं पर पड़ेगा। अकेले खीरी जिले में 6.37 लाख की आबादी बढ़ी है। बढ़ती आबादी के अनुरूप शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क, बिजली और आवास जैसी बुनियादी सुविधाओं की मांग भी बढ़ेगी। जनगणना के आंकड़े सरकार को यह तय करने में मदद करेंगे कि किन क्षेत्रों में नए विद्यालय, अस्पताल, आंगनबाड़ी केंद्र और अन्य सार्वजनिक सुविधाएं स्थापित की जाएं। परिवारों की बढ़ती संख्या से आवास, रोजगार और शहरीकरण की चुनौतियां भी सामने आएंगी। वहीं, पक्के मकानों की बढ़ती संख्या ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन स्तर में सुधार का संकेत दे सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार जनगणना केवल आबादी गिनने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि भविष्य की विकास नीतियों, संसाधनों के वितरण और सरकारी योजनाओं की प्राथमिकताओं का आधार है। इससे जिले के समग्र विकास की नई रूपरेखा तैयार होगी। क्या कहते हैं विशेषज्ञ     लखीमपुर खीरी की बढ़ती आबादी और परिवारों की संख्या में हो रही वृद्धि जिले की विकास आवश्यकताओं को नए सिरे से परिभाषित करेगी। जनगणना के आंकड़ों से यह स्पष्ट होगा कि जिले के किन क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, पेयजल और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं की सबसे अधिक जरूरत है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच विकास के अंतर को समझने में भी ये आंकड़े महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इसके आधार पर जिले में नए विद्यालयों, स्वास्थ्य केंद्रों, सड़कों और आवासीय योजनाओं की बेहतर योजना बनाई जा सकेगी। साथ ही सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की वास्तविक स्थिति सामने आने से उनके लिए लक्षित योजनाएं तैयार करना आसान होगा।     डॉ. सुभाष चन्द्रा, प्रोफेसर, वाईडीसी     लखीमपुर खीरी में जनसंख्या और परिवारों में हुई वृद्धि प्रशासन के लिए नई चुनौतियां और अवसर दोनों लेकर आएगी। जनगणना से प्राप्त आंकड़े यह तय करने में मदद करेंगे कि जिले में सरकारी संसाधनों का वितरण किस प्रकार किया जाए ताकि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से लोगों तक पहुंच सके। बढ़ती आबादी के अनुरूप आधारभूत ढांचे का विस्तार भी जरूरी होगा। जनगणना के आंकड़े जिले की सामाजिक और आर्थिक स्थिति का वास्तविक चित्र प्रस्तुत करेंगे, जिससे विकास योजनाओं को स्थानीय जरूरतों के अनुसार तैयार किया जा सकेगा।     डॉ. एससी मिश्रा, प्रोफेसर (सेवानिवृत्त)     लखीमपुर खीरी की अनुमानित आबादी 46 लाख से अधिक पहुंचना जिले के विकास की नई दिशा तय करेगा। जनगणना केवल लोगों की संख्या बताने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह जिले की भविष्य की जरूरतों का रोडमैप भी तैयार करती है। बढ़ती आबादी के कारण शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, आवास और रोजगार के क्षेत्र में मांग बढ़ेगी। जनगणना के आधार पर शासन और प्रशासन यह तय कर सकेंगे कि किन क्षेत्रों में अतिरिक्त संसाधनों और निवेश की आवश्यकता है। आने वाले वर्षों में जिले के संतुलित और समावेशी विकास के लिए ये आंकड़े सबसे महत्वपूर्ण आधार साबित होंगे।     राम मोहन गुप्ता, समाजसेवी  

जनगणना में पूछे जाएंगे 33 सवाल, क्या जवाब देना अनिवार्य है? जानिए गलत जानकारी देने के परिणाम

नई दिल्ली जनगणना 2027 की प्रक्रिया पूरे जोर-शोर से जारी है। सबसे पहले मकानों की गणना की जा रही है। इसके लिए लोगों से 33 सवाल पूछे जा रहे हैं। मकानों की गणना के दौरान भी घर-परिवार और रहन-सहन के बारे में पूछे जाने वाले सवालों को लेकर लोगों के मन में कई तरह की आशंकाएं भी रहती हैं। एक तो यह कि क्या सभी सवालों का जवाब देना जरूरी है? दूसरा यह कि अगर किसी सवाल का गलत जवाब दिया गया तो क्या ऐक्शन हो सकता है? क्या है जनगणना की रूपरेखा जनगणना 2027 की रूपरेखा दो प्रमुख चरणों में बंटी है। सबसे पहले हाउसिंग सेंसस हो रहा है। इसके लिए जनगणना अधिकारी एक-एक घर तक पहुंच रहे हैं और उनकी स्थिति, सुविधाएं और घर में रहने वाले लोगों से जुड़ी बुनियादी जानकारियां इकट्ठी कर रहे हैं। इन जानकारियों के लिए परिवार के मुखिया से 33 सवाल किए जाते हैं और उन्हें ऑनलाइन दर्ज कर लिया जाता है। रजिस्ट्रार जनरल का कहना है कि इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य जमीनी हकीकत का को ठीक से समझना और मुख्य जनगणना के कार्य को आसान करना है। इसके बाद 1 फरवरी से जनगणना का दूसरा चरण शुरू होगा। क्यों पूछे जा रहे हैं 33 सवाल जनगणना के पहले चरण में यह पता लगाने का प्रयास है कि लोगों के जीवन का स्तर क्या है। इसी वजह से जो 33 सवाल किए जा रहे हैं उनमें सुविधाओं की जानकारी को मुख्य रखा गया है। इसमें घर में कितने लोग रहते हैं, फर्श कैसी है, दीवार की छत किस सामग्री से बनी है, पीने की पानी की क्या सुविधा है, घर का मुखिया कौन है। ऐसे सवाल शामिल किए गए हैं। इन सवालों में पानी, शौचालय, इंटरनेट, मोबाइल जैसे सुविधाओं को ध्यान में रखा गया है। इसके अलावा कार,बाइक, साइकल और वाहनों की भी जानकारी जुटाई जा रही है। जिससे लोगों के जीवन स्तर के सही आंकड़े जुटाए जा सकें। जवाब ना देने पर क्या होगा सवाल है कि अगर कोई जनगणना में पूछे गए सवालों का जवाब नहीं देता है तो क्या होगा। देश के नागरिक होने के नाते कोई भी सवालों का जवाब देने से इनकार नहीं कर सकता। वहीं जनगणना अधिकारी की भी जिम्मेदारी होती है को वह इन जानकारियों को पोर्टल पर ही अपडेट करे और कहीं प्रचारित ना करे। अगर कोई जानकारी गलत देता है तो सेंसस ऐक्ट 1948 के मुताबिक उस पर जुर्माना भी लग सकता है। हालांकि इससे नागरिकता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। सरकार के लिए आपके सवाल इसलिए भी जरूरी हैं ताकि जिन सुविधाओँ तक आपकी पहुंच नहीं हैं, उन्हें भविष्य में सुलभ बनाया जा सके। सरकार का कहना है कि नागरिकों के हित में ही ये सवाल किए जा रहे हैं। क्या हैं जनगणना के 33 सवाल? 1. भवन संख्या 2. जनगणना घर संख्या 3- फर्श में उपयोग की गई सामग्री 4. घऱ की दीवार में उपयोग की गई सामग्री 6. घर के छत में उपयोग की गई प्रमुख सामग्री 7. घर का उपयोग 7. घर की स्थिति (नया या पुराना) 8. घर में रहने वाले लोगों की संख्या 9. परिवार में आम तौर पर उपलब्ध रहने वालों की संख्या 10. परिवार के मुखिया का नाम 11- परिवार के मुखिया का लिंग 12. परिवार के मुखिया की जाति 13. घर किराये का या खुद का 14. आवासीय कमरों की संख्या 15. परिवार में रहने वाले विवाहितों की संख्या 16. पीने के पानी का स्रोत 17. प्रकाश की व्यवस्था 18. शौचालय की उपलब्धता 19. शौचालय का प्रकार 20. जल निकासी की व्यवस्था 21. स्नान की सुविधा 22. रसोईघर में एलपीजी या पीएनजी कनेक्शन 23. खाना पकाने के लिए मुख्य ईंधन 24. रेडियो या ट्रांजिस्टर 25. टेलीविजन 26. इंटरनेट 27. लैपटॉप या कंप्यूटर 28. मुख्य रूप से खाया जाने वाला अनाज 29. कार जीप की उपलब्धता 30. मोबाइल नंबर

ताजमहल से लेकर बटेश्वर तक सभी स्मारक, सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं की होगी संख्या अंकन

आगरा  जन-जन की गणना का कार्य गति पकड़ रहा है। प्रगणक प्रत्येक मकान की जियो टैगिंग करते हुए नंबर आवंटित कर रहे हैं। इसमें ताजमहल, आगरा किला सहित सभी स्मारक, कमिश्नरी, कलक्ट्रेट भी शामिल हैं। जनगणना ताजमहल को एक नंबर, आगरा किला को 150 और बटेश्वर को 170 नंबर में अंकित किया गया है। जनगणना ठीक तरीके से करने के लिए जिले को 23 जोन में बांटा गया है। जनगणना के लिए 11 हजार प्रगणक लगाए गए हैं। जिले में 16 साल के बाद 22 मई से जनगणना शुरू हुई है जो 20 जून तक चलेगी। प्रत्येक प्रगणक को 180 से 200 मकानों का सर्वे करना होगा। सबसे पहले प्रत्येक मकान की जियो टैगिंग की जाएगी। जिला जनगणना अधिकारी संदीप कुमार ने बताया कि विश्वदाय स्मारक ताजमहल को एक नंबर, आगरा किला को 150, सिकंदरा स्मारक को 47, फतेहपुर सीकरी स्मार को 40, बटेश्वर को 170 नंबर में चिन्हित किया गया है। सभी स्मारकों, सरकारी और गैर सरकारी कार्यालयों, स्कूल-कालेजों की जियो टैगिंग होगी। फील्ड में उतरेंगे सुपरवाइजर, लापरवाही पर मुकदमा नगर निगम को चार जोन में बांट जनगणना हो रही है। जनगणना कार्य को गति देने और प्रत्येक वार्ड में प्रगति को लेकर बुधवार को अपर नगरायुक्त शिशिर कुमार ने बैठक की। बैठक में अपर नगरायुक्त ने कहा कि सभी सुपरवाइजर प्रतिदिन फील्ड में जाकर प्रगणकों से गणना कार्य कराएं और कार्य की नियमित मानीटरिंग करें। जिन प्रगणकों और सुपरवाइजरों द्वारा कार्य में रुचि नहीं दिखाई जा रही है, उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। कई स्थानों पर प्रगणकों द्वारा अभी तक ड्यूटी ज्वाइन नहीं की गई है, जिससे कार्य प्रभावित हो रहा है। ऐसे प्रगणकों और सुपरवाइजरों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। बैठक में उपनगर आयुक्त डा. सरिता सिंह, सहायक नगर आयुक्त अशोक प्रिय गौतम मौजूद रहे। सही और सटीक दें जानकारी जनगणना प्रमुख मनीष बंसल ने कहा कि प्रगणकों द्वारा मकानों का सूचीकरण किया जा रहा है। प्रत्येक व्यक्ति से 33 प्रश्नों के उत्तर पूछे जाएंगे। लोगों को प्रश्नों के उत्तर सही और सटीक देने होंगे। प्रश्नों के उत्तर गलत न दें और न ही टालमटोल करें।  

Census 2026: पटियाला में पहले चरण की शुरुआत, आंकड़े जुटाने का काम तेज

पटियाला पंजाबी विश्वविद्यालय पटियाला के परिसर के चार निर्धारित ब्लॉकों में भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अधीन जनगणना 2027 का पहला चरण (घर सूचीकरण कार्य) औपचारिक रूप से शुरू किया गया। विश्वविद्यालय के डीन अकादमिक मामलों के प्रो. जसविंदर सिंह बराड़ और रजिस्ट्रार डॉ. देविंदर पाल सिंह सिद्धू ने इस कार्य में शामिल विश्वविद्यालय कर्मचारियों को पहचान पत्र और नियुक्ति पत्र वितरित कर इस कार्य की औपचारिक शुरुआत आज पटियाला में की। डीन अकादमिक मामलों के प्रो. जसविंदर सिंह बराड़ ने इस अवसर पर कहा कि एक उच्च शिक्षा संस्थान के रूप में उनकी जिम्मेदारी है कि इस कार्य में अपना महत्वपूर्ण योगदान दें। उन्होंने कहा कि इस कार्य के माध्यम से एकत्र किए जाने वाले आंकड़े अगले दशक की नीतियां बनाने में सहायक सिद्ध होंगे। रजिस्ट्रार डॉ. देविंदर पाल सिंह सिद्धू ने कहा कि पहली बार जनगणना का कार्य मोबाइल एप्लिकेशनों और डिजिटल पोर्टलों के माध्यम से किया जा रहा है, जिससे इस कार्य को अधिक सुव्यवस्थित ढंग से पूरा किया जा सकेगा। उन्होंने विश्वविद्यालय के सभी अधिकारियों, शोधार्थियों और कर्मचारियों से गणनाकर्मियों को पूरा सहयोग देने और सही जानकारी उपलब्ध करवाने की अपील की। विशेष सिविल चार्ज अधिकारी इंजीनियर मनप्रीत सिंह बुढ़ैल ने इस अवसर पर जनगणना के इतिहास में पहली बार अपनाई जा रही डिजिटल प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी। उन्होंने विश्वास जताया कि यह कार्य निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा कर लिया जाएगा। इस अवसर पर लखविंदर सिंह को सुपरवाइजर तथा रमनप्रीत कौर, बिंदू बाला, कुलजीत सिंह और राज किशोर को गणनाकर्मी (एन्यूमरेटर) नियुक्त किया गया।

जनगणना 2027 में MP ने पकड़ी रफ्तार, 2.39 करोड़ मकानों की गणना पूरी; फील्ड वर्क अंतिम चरण में

जनगणना 2027 : मध्यप्रदेश में 2 करोड़ 39 लाख से अधिक मकानों की गणना पूर्ण, फील्ड कार्य अंतिम चरण में डिजिटल जनगणना अभियान को प्रदेशवासियों का व्यापक सहयोग 30 मई तक पूर्ण होगा मकान सूचीकरण कार्य भोपाल मध्यप्रदेश में जनगणना 2027 के प्रथम चरण अंतर्गत मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य तेज गति से अंतिम चरण की ओर अग्रसर है। प्रदेश में 01 मई से प्रारंभ हुआ यह फील्ड कार्य 30 मई 2026 तक संचालित किया जा रहा है। राज्य के नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में प्रगणकों द्वारा घर-घर जाकर प्रत्येक मकान, परिवार एवं अन्य संरचनाओं से संबंधित जानकारी डिजिटल माध्यम से संकलित की जा रही है। सचिव गृह एवं नोडल अधिकारी जनगणना कार्य श्रीमती शिल्पा गुप्ता ने बताया कि प्रदेश में जनगणना कार्य निर्धारित समय-सीमा के अनुसार निरंतर प्रगति पर है। राज्य में 1 लाख 37 हजार से अधिक मकान सूचीकरण ब्लॉक बनाए गए हैं। दिनांक 25 मई 2026 तक प्राप्त जानकारी के अनुसार 1 लाख 34 हजार 309 मकान सूचीकरण ब्लॉक में कार्य पूर्ण किया जा चुका है तथा 2 करोड़ 39 लाख 9 हजार 808 मकानों की गणना की जा चुकी है। शेष कार्य भी निर्धारित समयावधि में पूर्ण किए जाने के लिये सतत प्रयास किए जा रहे हैं तथा 30 मई 2026 तक पूरे प्रदेश में मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा। इसके पूर्व 16 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 तक प्रदेश में स्व-गणना प्रक्रिया संचालित की गई थी, जिसमें 7 लाख 46 हजार 158 परिवारों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए स्वयं अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज की। नागरिकों की इस सक्रिय भागीदारी से जनगणना अभियान को गति एवं व्यापक सहयोग प्राप्त हुआ। इस बार जनगणना प्रक्रिया पूर्णतः डिजिटल माध्यम से संचालित की जा रही है। प्रगणकों द्वारा एचएलओ ऐप के माध्यम से जानकारी दर्ज की जा रही है तथा कार्य की निगरानी भी डिजिटल प्रणाली से की जा रही है, जिससे कार्य की गुणवत्ता, पारदर्शिता एवं गति सुनिश्चित हो रही है। आधुनिक तकनीक के उपयोग से जनगणना कार्य अधिक प्रभावी एवं व्यवस्थित रूप से संपादित किया जा रहा है। मध्यप्रदेश में जनगणना 2027 को सफल बनाने के लिये जिला प्रशासन, जनगणना अधिकारियों, प्रगणकों एवं आमजन द्वारा सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जा रही है। प्रदेशवासियों से अपील की गई है कि वे प्रगणकों को आवश्यक एवं सही जानकारी उपलब्ध कराकर जनगणना कार्य में सहयोग प्रदान करें। जनगणना से प्राप्त आँकड़े शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं, नीतियों एवं विकास कार्यक्रमों के निर्माण में महत्वपूर्ण आधार के रूप में उपयोग किए जाते हैं।  

जनगणना को लेकर प्रशासन अलर्ट, बलिया में घर-घर पहुंचेंगी गणना टीमें

 बलिया  आठवीं जनगणना को लेकर तहसील प्रशासन तैयारियों के दावे कर रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर व्यवस्थाएं अधूरी नजर आ रही हैं। 22 मई से मकान गणना कार्य शुरू होना है, जबकि बड़ी संख्या में प्रगणकों और सुपरवाइजरों को अब तक जरूरी जनगणना किट नहीं मिल सकी है। इससे अभियान की शुरुआत को लेकर सवाल उठने लगे हैं। जनगणना प्रक्रिया में सबसे पहले “नजरी नक्शा” तैयार किया जाएगा। इसके तहत मोहल्लों, गलियों और मकानों का चिन्हांकन कर प्रारूप बनाया जाएगा। इसके बाद मकानों की गणना और डाटा संग्रहण का कार्य होगा। कर्मचारियों का कहना है कि बिना पूरी किट के फील्ड कार्य प्रभावित हो सकता है। तहसील क्षेत्र में 799 प्रगणक और 138 सुपरवाइजर तैनात किए गए हैं। प्रगणकों को वाटर रेजिस्टेंट बैग, राइटिंग बोर्ड, नोटपैड, पेन, मार्कर व आई-कार्ड पाउच सहित 10 प्रकार की सामग्री उपलब्ध कराई जानी है। प्रभारी तहसीलदार देवेंद्र कुमार पांडेय ने बताया कि किट लखनऊ से डाक के जरिए भेजी जा रही है। कुछ किट पहुंच चुकी हैं और उनका वितरण शुरू कराया जाएगा।

स्व-गणना पूरी, अब होगी डोर-टू-डोर जांच; 30 जून तक देना होगा गाड़ी से इंटरनेट तक का पूरा ब्योरा

लुधियाना पंजाब में जनगणना के पहले चरण के तहत स्व-गणना की प्रक्रिया पूरी हो गई है। सिर्फ 1.5 लाख लोगों ने ही इसका लाभ उठाया है, जो 2011 की जनगणना के हिसाब से राज्य की कुल जनसंख्या का मात्र 0.54% है।   लुधियाना में लगभग 25,000 निवासियों ने स्व-गणना प्रक्रिया पूरी की है, जो राज्य में सबसे अधिक है। मोहाली में लगभग 10,000 लोगों ने स्व-गणना की है। अब शुक्रवार से गणनाकर्मी घर-घर जाकर जानकारी जुटाएंगे और 30 जून तक यह प्रक्रिया चलेगी। स्व-गणना के तहत लोगों को मोबाइल एप या वेब पोर्टल के जरिए अपनी जानकारी खुद दर्ज करने की सुविधा दी गई थी लेकिन अधिक लोग इसके लिए आगे नहीं आए हैं। घरों की गणना के दौरान लोगों से कुल 33 सवाल पूछे जाएंगे। इनमें घर में गाड़ियों की संख्या, लैपटॉप या कंप्यूटर की उपलब्धता, इंटरनेट सुविधा और पीने के पानी का मुख्य स्रोत जैसी जानकारियां शामिल हैं। इसके अलावा घर की बुनियादी सुविधाओं और स्थिति से जुड़े सवाल भी इसमें शामिल होंगे। केंद्र सरकार ने 30 सितंबर 2026 के बीच पहले चरण का काम पूरा करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत पंजाब के स्थानीय निकाय विभाग ने गणना की प्रक्रिया को जून माह तक पूरे करने का फैसला लिया है। इससे पहले अमृतसर, जालंधर और मलेरकोटला में प्री-टेस्ट भी किया गया था और जो भी दिक्कतें सामने आई थीं, उन्हें दूर किया गया है। जनगणना प्रक्रिया को सुचारु बनाने के लिए अतिरिक्त, संयुक्त और सहायक आयुक्त के साथ नगर योजनाकार और अधीक्षक अभियंता की तैनाती की है, जो जनगणना अधिनियम 1948 के तहत अपनी जिम्मेदारियां निभाएंगे। ये जानकारी भी की जाएगी दर्ज   घरों की सूची तैयार करते समय गणनाकर्मी भवन संख्या, फर्श दीवार और छत की सामग्री, घर के उपयोग और उसकी स्थिति से जुड़ी जानकारी दर्ज करेंगे। इसके साथ परिवार संख्या, परिवार के मुखिया का नाम और दंपतियों की संख्या भी पूछी जाएगी। स्नान सुविधा, रसोईघर और एलपीजी या पीएनजी कनेक्शन जैसी सुविधाओं का ब्योरा भी लिया जाएगा।

ट्रेनिंग ली, फिर भी ड्यूटी से नदारद! लुधियाना में 1000 कर्मियों पर FIR का खतरा

लुधियाना लुधियाना में जनगणना ड्यूटी से भागने वाले 1000 से ज्यादा कर्मचारियों पर FIR दर्ज होगी। नगर निगम कमिश्नर डॉ नीरू कत्याल गुप्ता ने चारों जोनों के जनगणना अफसरों को हिदायतें दे दी हैं कि जो कर्मचारी किट लेकर नहीं गया है. लुधियाना में जनगणना की जिम्मेदारी नगर निगम कमिश्नर को सौंपी गई। निगम कमिश्नर डॉ नीरू कत्याल ने अलग-अलग विभागों के साथ निजी संस्थानों 6500 के करीब कर्मचारियों को जनगणना ड्यूटी सौंपी। निगम ने जनगणना के लिए कर्मचारियों को ट्रेनिंग भी दी। कर्मचारी ट्रेनिंग में भी शामिल हुए, लेकिन जब उन्हें किट ले जाने के लिए कहा तो 1000 से ज्यादा कर्मचारी पहुंचे ही नहीं। नगर निगम कमिश्नर समेत तमाम अफसर रात तक कर्मचारियों को बुलाने के लिए तरले काटते रहे। जोनल कमिश्नर कर्मचारियों से करते रहे संपर्क जोनल कमिश्नर जसदेव सिंह सेखों वीरवार को सुबह से ही कर्मचारियों को किट व आईकार्ड ले जाने के लिए संपर्क करते रहे। नगर निगम पिछले 3-4 दिन से कर्मचारियों को किट बांट रहा था। निगम अफसरों को कर्मचारियों के न पहुंचने का अंदेशा नहीं था क्योंकि वह लगातार ट्रेनिंग में हिस्सा ले रहे थे। एक कर्मचारी के हिस्से 150 घर डॉ नीरू कत्याल गुप्ता ने बताया कि जनगणना के पहले चरण में हाउस होल्ड की गणना होनी है। लुधियाना नगर निगम एरिया में एक कर्मचारी को 150 घरों की जिम्मेदारी दी गई है। कर्मचारियों को 15 मई से 13 जून तक यह गणना करनी है। रोजाना पांच से छह घरों की गणना भी करता है तो इस दौरान वो आसानी से 150 घरों की गणना पूरी कर सकता है। उन्होंने बताया कि लुधियाना में काफी संख्या में लोग स्वगणना कर चुके हैं। इसके बावजूद वो जनगणना ड्यूटी से भाग रहे हैं। जनगणना एक्ट 1948 के तहत हो सकती है यह कार्रवाई, जानिए.. सीधे दर्ज होगी FIR: जोनल कमिश्नर जसदेव सिंह सेखों ने बताया कि जनगणना की ड्यूटी पर न आने या काम बीच में छोड़ने पर पुलिस केस (FIR) दर्ज किया जा सकता है। जेल और जुर्माना: सेखों ने बताया कि एफआईआर दर्ज होने के बाद अगर दोषी पाए गए तो कर्मचारी या अधिकारी को सजा व जुर्माना दोनों का प्रावधान है। नौकरी पर संकट: ऐसे मामलों में पुलिस कार्रवाई के साथ-साथ विभाग की तरफ से भी कड़ी कार्रवाई की जाती है, जिससे नौकरी पर खतरा बन सकता है। सटीक जानकारी जरूरी: यह कानून सिर्फ कर्मचारियों पर ही नहीं, आम जनता पर भी लागू होता है। गलत जानकारी देने या गणनाकार को रोकने पर भी कार्रवाई हो सकती है। आज से शुरू होनी है डोर-टू डेार हाउस लिस्टिंग नगर निगम कमिश्नर डॉ नीरू कत्याल गुप्ता ने बताया कि आज से डोर-टू-डोर हाउस लिस्टिंग का काम शुरू किया जाएगा। इसके लिए कर्मचारी घर-घर जाकर सर्वे करेंगे। उन्होंने बताया कि जिन लोगों ने स्वगणना कर दी है उन्हें सिर्फ एसई आईडी देनी होगी। नगर निगम कमिश्नर ने कहा कि इस प्रक्रिया में जो भी सूचनाएं देंगे वो पूरी तरह से सुरक्षित रहेंगी।

जनगणना फार्म में ओबीसी कॉलम नहीं, पिछड़ा वर्ग ने उठाई जाति आधारित गणना की आवाज

फिरोजपुर  फिरोजपुर में जनगणना 2027 के तहत शुरू की गई स्वैच्छिक ऑनलाइन जानकारी भरने की प्रक्रिया को लेकर नया विवाद सामने आया है। इस प्रक्रिया में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए अलग कॉलम शामिल न किए जाने पर पिछड़े वर्गों में रोष बढ़ गया है। इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुरभेज सिंह टिब्बी ने इसे गंभीर मामला बताते हुए कहा कि यह पिछड़े वर्गों के साथ बड़ा अन्याय है। उन्होंने कहा कि जब सरकार सामाजिक न्याय और समानता की बात करती है, तो जनगणना जैसे महत्वपूर्ण कार्य में ओबीसी वर्ग की अनदेखी समझ से परे है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जाति आधारित जनगणना समय की मांग है और इससे ही समाज के सभी वर्गों की वास्तविक स्थिति का सही आकलन हो सकेगा। कॉलम न होना चिंता का विषय टिब्बी ने बताया कि जनगणना 2027 के तहत नागरिकों को सुविधा देने के लिए स्वयं जानकारी भरने की व्यवस्था शुरू की गई है, जो 14 मई 2026 तक उपलब्ध रहेगी। इस प्रक्रिया के माध्यम से लोग घर बैठे अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं, लेकिन इसमें ओबीसी वर्ग के लिए अलग कॉलम न होना चिंता का विषय है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि तुरंत इस त्रुटि को सुधारते हुए ऑनलाइन फार्म में ओबीसी के लिए अलग कॉलम जोड़ा जाए, ताकि पिछड़े वर्गों की सही गणना सुनिश्चित हो सके। उनका कहना है कि बिना सटीक आंकड़ों के नीतियां बनाना संभव नहीं है और इससे सामाजिक संतुलन भी प्रभावित हो सकता है। तत्काल ध्यान देने की जरूरत इसके साथ ही उन्होंने पंजाब सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग द्वारा कई बार निर्देश दिए जाने के बावजूद राज्य में पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण से जुड़े प्रावधान सही तरीके से लागू नहीं हो रहे हैं। यह स्थिति भी चिंता का विषय है और इस पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। टिब्बी ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया, तो ओबीसी समुदाय को मजबूर होकर आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यह केवल एक वर्ग का नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय से जुड़ा बड़ा मुद्दा है, जिस पर संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ निर्णय लिया जाना चाहिए।  

प्रदेश में जनगणना 2027 की शुरुआत, 33 सवालों का जवाब देना होगा घर आए कर्मचारियों को

भोपाल  मध्य प्रदेश में 1 मई से जनगणना-2027 के 'हाउस लिस्टिंग' यानी मकानों की सूची बनाने का काम शुरू हो गया है। इस बार की जनगणना खास है क्योंकि यह पूरी तरह डिजिटल है। आपके घर पहुंचने वाले प्रगणक आपसे 33 मुख्य सवाल पूछेंगे। इसमें आपके मकान की स्थिति, दीवारों में इस्तेमाल सामग्री से लेकर घर में कौन सा अनाज खाया जाता है, इसकी जानकारी भी ली जाएगी। इन चीजों का देना होगा ब्यौरा पहले फेज में मुख्य रूप से सुविधाओं और संपत्तियों पर फोकस रहेगा: घर की संपत्ति: गाड़ी, लैपटॉप, कंप्यूटर और इंटरनेट कनेक्शन। मकान की बनावट: दीवार और छत की सामग्री। खान-पान: परिवार में इस्तेमाल होने वाला मुख्य अनाज। जातिगत गणना: ध्यान रहे कि जाति से जुड़े सवाल इस बार नहीं, बल्कि फरवरी 2027 में होने वाले दूसरे चरण में पूछे जाएंगे। पूरी तरह गुप्त रहेगी जानकारी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के जनगणना निदेशक कार्तिकेय गोयल ने स्पष्ट किया है कि लोगों को अपनी संपत्ति बताने में हिचकिचाना नहीं चाहिए। गोपनीयता: आपकी दी गई जानकारी पूरी तरह गुप्त रहेगी और किसी भी एजेंसी के साथ साझा नहीं की जाएगी। सरकारी लाभ: जनगणना का मकसद केवल विकास की योजनाएं बनाना है। इससे किसी के सरकारी लाभ या पात्रता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। सुरक्षा: डेटा पूरी तरह 'एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड' है, यानी सर्वर तक पहुंचने के दौरान इसे कोई नहीं देख सकता। यह देश की पहली डिजिटल जनगणना है और डेटा प्रोटेक्शन हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। लोग बेझिझक और सही जानकारी साझा करें। आपके सहयोग से ही बेहतर सरकारी नीतियां बन सकेंगी। कार्तिकेय गोयल, निदेशक (जनगणना-2027, MP & CG) 1.5 लाख कर्मचारियों की फौज तैनात इस महा-अभियान के लिए मध्य प्रदेश में करीब 1.5 लाख कर्मचारियों को लगाया गया है, जिनमें से ज्यादातर स्कूल शिक्षक हैं। हाउस लिस्टिंग का यह काम एक महीने के भीतर पूरा कर लिया जाएगा।