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भोपाल में जनगणना का अपडेट: प्रशासन की रिपोर्ट के मुताबिक, 6000 से ज्यादा घरों की जानकारी डिजिटली दर्ज

भोपाल  जनगणना 2027 के तहत जिले के चार लाख घरों की मैपिंग व रिकॉर्ड ऑनलाइन मिल जाएगा। स्व गणना के तहत अपने घर व परिवार की ऑनलाइन पोर्टल से जानकारी देने में भोपाल के नागरिक सबसे तेजी से काम कर रहे हैं। प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार बीते पांच दिन में 6000 से अधिक घरों की जानकारी डिजिटली दर्ज हो चुकी है। इसमें तेजी आ रही है। अगले 10 दिनों में चार लाख घरों की मैपिंग होने का अनुमान है। ये कुल घरों का 70 फीसदी है। यानी एक मई से प्रगणकों को घर पहुंचने पर ज्यादा मशक्कत नहीं करना होगी। सिर्फ स्व गणना का 11 डिजिट का नंबर दर्ज करने से उन्हें स्थिति पता चल जाएगी। गौरतलब है कि एक प्रगणक को 200 घरों की मैपिंग का लक्ष्य दिया गया है। मौजूदा स्थिति में भोपाल में दस दिन में प्रगणक इस लक्ष्य का प्राप्त कर सकेंगे। जनवरी 2027 से आबादी की जातिगत गणना शुरू होगी। स्वगणना अभी 74 फीसदी अभी स्वगणना के लिए सेंसस के ऑनलाइन पोर्टल पर भोपाल अभी करीब 74 फीसदी पर है। आबादी के अनुसार स्वगणना की संख्यात्मक स्थिति देखें तो भोपाल के साथ सिर्फ मंदसौर व सागर ही बेहतर कर रहे हैं। इंदौर जैसे बड़े शहर भोपाल से काफी पीछे हैं। भोपाल में वेब पोर्टल पर प्रति 90 सेकंड में एक फार्म सबमिट हो रहा है। ये संख्या शुरुआत में डेढ़ मिनट थी। अफसरों के अनुसार अगले दो दिन में ये 20 से 22 सेकंड तक पहुंचेगी तो फार्म बढ़ेंगे। बता दें कि जिला प्रशासन का उद्देश्य है कि जनगणना कार्य को तय समयसीमा में पूरी सटीकता और पारदर्शिता के साथ पूरा किया जाए। 32 फीसदी आवास शेड वाले स्वगणना के तहत जो तथ्य सामने आ रहे हैं, उनमें जिले में 32 फीसदी आवास शेड व कच्चे सामने आ रहे हैं। यानि यहां पर आगामी समय में मकानों को लेकर बड़ा काम होगा। आवासीय उपयोग के इंफास्ट्रक्चर की बड़ी संभावना है। सरकारी स्तर पर भी आवास की बड़ी योजनाएं हैं। जर्जर व पुराने घरों को लेकर भी बड़ा आंकड़ा सामने आ रहा है। रेडियो ट्रांजिस्टर को भी शामिल किया है… मकान सूचीकरण की गणना में रेडियो ट्रांजिस्टर को भी शामिल किया है। हालांकि बदलते समय के साथ इसके लिए दिए ऑप्शन में स्मार्टफोन से एमपी रेडियो चलाने का विकल्प है। आप इसे सबमिट कर सकते हैं। स्वगणना का फार्म भरने की तकनीकी दिक्कतें खत्म हो गई है। घर की जियो टैगिंग के साथ आसानी से फार्म जमा हो रहे हैं। लोगों में काफी उत्साह है। भुवन गुप्ता, उप जिला जनगणना अधिकारी

जनगणना में गलत नाम भरने पर नहीं मिलेगा सुधार का मौका, सावधानी से भरें फार्म

भोपाल  जनगणना 2027 के तहत गुरुवार से स्वगणना का पोर्टल एसईडॉटसेंससडॉटजीओवीडॉटइन se.census.gov.in खुल गया है। यहां स्वगणना के प्रति खासा उत्साह रहा, लेकिन ऑनलाइन फार्म में तकनीकी दिक्कतें आने से लोगों को परेशान होते भी देखा गया। तीसरे पेज पर जैसे ही घर की लोकेशन जियो टैगिंग से करने का बॉक्स आया, फार्म अटक गया। यहां दर्ज किए पते के आधार पर खुद ही जियो टैगिंग के लिए मैप खुलता है। इसमें लोग बार- बार सटीक लोकेशन को लेकर प्रयास करते रहे। स्व गणना में नाम भरने में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है अन्यथा गलत नाम ही जुड़ जाएगा। इसमें स्पष्ट बताया जा रहा है कि नाम सुधारने का दूसरा मौका नहीं मिलेगा। लोकेशन को लैटिट्यूड- लॉन्गिट्यूड में बताकर कंफर्म करने का पूछा जा रहा है। इसमें लोग भ्रमित हो रहे हैं। अरेरा कॉलोनी में रहने वाले अवधेश सिंह ने बताया कि आधे से पौन घंटे तक टैगिंग की कोशिश की। लोकेशन में दिक्कत आई। काम पर जाना था, इसलिए फिर नहीं किया। अब शुक्रवार को फिर कोशिश करेंगे। ऐसे समझें जनगणना की टाइम लाइन स्व गणना के लिए 30 अप्रैल 2026 तक पार्टल खुला रहेगा। प्रगणक घर-घर जाकर मकान सूचीकरण का काम 1 मई से शुरु करेंगे। यह कार्य 30 मई 2026 तक होगा। पोर्टल पर राज्य का चयन कर परिवार के मुखिया का नाम और मोबाइल नंबर दर्ज करना होगा। यहां ऑनलाइन मैप पर घर की जियो टैंगिंग होगी। स्व गणना के तहत ऑनलाइन पोर्टल पर खुद की डिटेल जमा करेंगे तो आखिर में 11 अंकों की एक विशिष्ट स्व गणना पहचान संख्या बनेगी। ये मोबाइल और ई-मेल पर भी प्राप्त होगी। जनगणना के दौरान इसकी जरूरत पड़ेगी। किसी भी व्यक्ति को अपने परिवार की महिला सदस्य का नाम बताने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। फार्म में नाम बिल्कुल सही दर्ज करें, उसे सुधारने का दूसरा मौका नहीं मिलेगा स्व गणना में तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इसमें स्पष्ट बताया जा रहा है कि फार्म में नाम बिल्कुल सही दर्ज करें, उसे सुधारने का दूसरा मौका नहीं मिलेगा। गलत नाम ही जनगणना में जुड़ जाएगा। सुबह फार्म खुल रहा था, लेकिन दोपहर बाद इसमें बाधा आने लगी। बताया जा रहा है देशभर से लोग इसे ओपन करने की प्रक्रिया करने लगे, जिससे ये अटकता रहा। जिला प्रशासन के संबंधित अफसरों के अनुसार एक बैठक में 20 से 22 मिनट में फार्म भरा जा सकता है। थोड़े धैर्य के साथ काम करेंगे तो दिक्कत नहीं होगी। एक बार लोकेशन को सर्च करने के बाद उसे पुख्ता करने के लिए पूछा जाता है।

ग्वालियर-इंदौर संभाग में जनगणना के राष्ट्रीय महत्व के कार्य में नागरिकों की स्वेच्छिक भागीदारी

ग्वालियर  जनगणना जैसे कार्य में शासकीय सेवकों को महत्वपूर्ण दायित्व निभाने के लिए शासन द्वारा सभी सुविधाएं और मानदेय दिया जाता है। वहां ऐसे भी भारतीय नागरिक हैं जो बिना किसी शासकीय सुविधा के स्वप्रेरणा से जनगणना जैसे राष्ट्रीय महत्व के कार्य में अपना समय और पैसा खर्च करके प्रत्येक नागरिक को जागरूक करने के लिए दूर-दूराज के ग्रामीण इलाकों में भ्रमण कर रहे हैं। 5-4-26 से ग्वालियर क्षेत्र में यह कार्य प्रख्यात पुस्तक लेखक डॉ अजित बाबू जैन के नेतृत्व में उनकी पूरी टीम द्वारा संचालित किया जा रहा है। उनकी टीम में श्री अक्षय कुमार दानी, श्री अमित कुमार, श्रीमती सुधा जैन , प्रख्यात समाजसेवी श्री महेन्द्र कुमार जैन, एवं पुष्पराज के नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है जिन्होंने 11 दिनों में सोशल मीडिया, व्हाट्सएप, फेसबुक आदि संचार माध्यमों और स्वयं सभी स्थानों पर दौरा करते हुए सभी क्षेत्रों तक अपनी पहुंच बनाकर लोगों को जागरूक किया है। इंदौर क्षेत्र में यही कार्य भारत सरकार से राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षाविद डॉ मनोरमा जैन के मार्गदर्शन में उनकी टीम कर रही है। उनकी टीम में मुख्य रूप से श्री योगेश कुमार जागीचा देपालपुर, श्रीमती मनीषा मंडोवरा गौतमपुरा, श्रीमती नयन जैन बेटमा, श्रीमती मधु नाहर इंदौर और श्री अमिष जैन बेटमा द्वारा उल्लेखनीय कार्य किया जा कर संपूर्ण इंदौर क्षेत्रों में पहुंच बनाई गई है। ग्वालियर और इंदौर दोनों ही टीमों में बहुत लोग स्वेच्छा से जुड़ते जा रहे हैं जिससे कार्य अधिक आसान हो रहा है।

गृह विभाग की नई गाइडलाइन: जनगणना में महिला का नाम बताने के लिए परिवार को नहीं किया जा सकेगा बाध्य

 भोपाल  मध्य प्रदेश में आगामी जनगणना को लेकर गृह विभाग ने विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। इन निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि जनगणना कार्य में लगे कर्मचारी किसी परिवार के सदस्य को महिला का नाम बताने के लिए बाध्य नहीं कर सकेंगे। जनगणना के दौरान गलत जानकारी देने या कार्य में बाधा डालने पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान भी किया गया है, तो दोषी पाए जाने पर तीन वर्ष तक की सजा और आर्थिक दंड लगाया जा सकता है। दो चरणों में होगी जनगणना राज्य में जनगणना दो चरणों में संपन्न होगी। पहला चरण एक से 30 मई के बीच होगा, जिसमें मकान सूचीकरण का कार्य किया जाएगा। दूसरा चरण फरवरी 2027 से शुरू होगा, जिसमें जनसंख्या से संबंधित विस्तृत जानकारी एकत्र की जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया के लिए गृह विभाग को नोडल एजेंसी बनाया गया है। कर्मचारियों को दिए गए विशेष अधिकार दिशा-निर्देशों के अनुसार, जनगणना कर्मचारी केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित सभी प्रश्न पूछ सकेंगे और नागरिकों का उत्तर देना अनिवार्य होगा। साथ ही, कर्मचारी घर, परिसर या अन्य स्थानों में प्रवेश कर आवश्यक जानकारी एकत्र कर सकेंगे, बशर्ते वह स्थान प्रतिबंधित श्रेणी में न आता हो। जनगणना अधिकारियों को प्रवेश से नहीं रोक सकेंगे नोटिफिकेशन में कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति जनगणना अधिकारियों को अपने घर, अहाते, जलयान या अन्य स्थानों में प्रवेश करने से नहीं रोक सकेगा। बशर्ते वह स्थान परंपरागत रूप से प्रतिबंधित न हो। साथ ही अधिकारियों को जरूरी आंकड़े दर्ज करने से भी नहीं रोका जा सकेगा। गृह विभाग ने चेतावनी दी है कि अगर कोई व्यक्ति गलत जानकारी देता है या जनगणना कार्य में बाधा उत्पन्न करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे मामलों में एक हजार रुपए तक का जुर्माना है। साथ ही तीन साल तक की सजा का प्रावधान है। कई विभागों का अमला होगा तैनात जनगणना कार्य को सुचारू रूप से पूरा करने के लिए राज्य सरकार ने राजस्व, पुलिस, नगरीय निकाय, पंचायत और शिक्षा विभाग सहित कई विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों को तैनात करने का फैसला किया है। दस्तावेज जांच और जानकारी लेने के अधिकार अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि नियुक्त अधिकारी अपने-अपने क्षेत्र में आवश्यक जानकारी एकत्र करने, दस्तावेजों की जांच करने और जनगणना से जुड़े कार्यों को प्रभावी ढंग से पूरा करने के लिए अधिकृत होंगे। जरूरत पड़ने पर वे किसी भी व्यक्ति से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। संबंधित अभिलेखों का निरीक्षण भी कर सकेंगे। जनगणना फॉर्म में 29 कॉलम, केवल SC-ST की डिटेल 2011 तक जनगणना फॉर्म में कुल 29 कॉलम होते थे। इनमें नाम, पता, व्यवसाय, शिक्षा, रोजगार और माइग्रेशन जैसे सवालों के साथ केवल SC और ST कैटेगरी से ताल्लुक रखने को रिकॉर्ड किया जाता था। अब जाति जनगणना के लिए इसमें एक्स्ट्रा कॉलम जोड़े जा सकते हैं। बाधा डालने पर होगी कार्रवाई यदि कोई व्यक्ति जनगणना कार्य में बाधा उत्पन्न करता है या कर्मचारियों को जानकारी एकत्र करने से रोकता है, तो उसके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में एक हजार रुपये तक का जुर्माना और तीन वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। अभिलेखों की जांच का भी अधिकार कर्मचारियों को संबंधित दस्तावेजों और अभिलेखों का निरीक्षण करने का अधिकार भी दिया गया है, ताकि जनगणना प्रक्रिया को पारदर्शी और प्रभावी तरीके से पूरा किया जा सके।

Census 2026: छत्तीसगढ़ में एक मई से शुरू होगा सर्वे, पहले गिने जाएंगे घर

रायपुर. भारत सरकार द्वारा आयोजित जनगणना 2027 के अंतर्गत प्रथम चरण में मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना (House Listing & Housing Census) का कार्य छत्तीसगढ़ में 01 मई से 30 मई 2026 तक 30 दिनों की अवधि में संचालित किया जाएगा। यह चरण जनगणना प्रक्रिया का अत्यंत महत्वपूर्ण भाग है, जिसके माध्यम से प्रत्येक आवासीय एवं गैर-आवासीय भवन, मकान की स्थिति, उपयोग एवं उपलब्ध सुविधाओं से संबंधित विस्तृत जानकारी एकत्रित की जाएगी। डिजिटल इंडिया के अंतर्गत इस बार आम जनता की सुविधा के लिए स्व-गणना (Self-Enumeration) का विकल्प भी उपलब्ध कराया गया है। इच्छुक नागरिक 16 अप्रैल 2026 से 30 अप्रैल 2026 के मध्य निर्धारित ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से स्वयं अपने परिवार एवं मकान से संबंधित जानकारी दर्ज कर सकते हैं। स्व-गणना करने वाले परिवारों को एक स्व-गणना आईडी (Self-Enumeration ID) प्रदान की जाएगी, जिसे सुरक्षित रखना आवश्यक होगा तथा प्रगणक के आने पर प्रगणकों को देना होगा। आपके द्वारा भरी जानकारी की पुष्टि के बाद प्रगणक उसे सब्मिट कर देगा। इन बिंदुओं पर एकत्रित की जाएगी जानकारी प्रत्येक भवन एवं मकान की संख्या, स्थिति एवं प्रकार, मकान का उपयोग, (आवासीय/व्यावसायिक/अन्य), निर्माण की प्रकृति (कच्चा/पक्का/अर्ध-पक्का), परिवारों की संख्या एवं उनके आवासीय विवरण, उपलब्ध बुनियादी सुविधाएं, जैसे- पेयजल की उपलब्धता, शौचालय की सुविधा, विद्युत कनेक्शन, रसोई गैस/ईंधन का प्रकार, इंटरनेट/संचार सुविधाएं यह जानकारी देश की सामाजिक-आर्थिक योजनाओं, शहरी एवं ग्रामीण विकास, आवास योजनाओं, जल एवं स्वच्छता कार्यक्रमों तथा बुनियादी ढांचे के विकास हेतु अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी। प्रगणक निर्धारित अवधि के दौरान प्रत्येक घर पर जाकर जानकारी एकत्रित करेंगे। प्रगणक अधिकृत पहचान पत्र के साथ जाएंगे, जिसकी पुष्टि नागरिकों द्वारा की जा सकती है। नागरिकों से अनुरोध है कि वे प्रगणकों को सही एवं पूर्ण जानकारी प्रदान करें। स्व-गणना कर चुके परिवारों को अपनी (Self-Enumeration ID) प्रगणक को बतानी होगी। पूर्णतः गोपनीय रखी जाएगी सभी जानकारी जनगणना के दौरान एकत्रित की गई सभी जानकारी पूर्णतः गोपनीय रखी जाएगी। इस जानकारी का उपयोग केवल सांख्यिकीय उद्देश्यों एवं नीतिगत निर्णयों के लिए किया जाएगा। किसी भी व्यक्ति विशेष की जानकारी को सार्वजनिक नहीं किया जाएगा। जनगणना कार्य में सक्रिय सहयोग प्रदान करें। निर्धारित समयावधि में स्व-गणना का लाभ उठाएं। केवल अधिकृत गणनाकर्मियों को ही जानकारी प्रदान करें। सटीक एवं सत्य जानकारी देना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। निगरानी के लिए जिला, राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर खुलेंगे नियंत्रण कक्ष जिला, राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर नियंत्रण कक्ष स्थापित किए जाएंगे। वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा नियमित निरीक्षण किया जाएगा। शिकायत निवारण के लिए हेल्पलाइन/ऑनलाइन प्रणाली उपलब्ध होगी। जनगणना कार्य निदेशालय छत्तीसगढ़ के निदेशक ने सभी नागरिकों से अनुरोध किया है कि वे इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करें। आपकी सटीक एवं पूर्ण जानकारी देश की विकास योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने में सहायक सिद्ध होगी। जनगणना से प्राप्त आंकड़े देश की आर्थिक, सामाजिक एवं बुनियादी विकास योजनाओं की आधारशिला होते हैं। यह प्रक्रिया सरकार को सटीक नीति निर्माण, संसाधन आवंटन एवं भविष्य की योजनाओं के निर्धारण में सहायता प्रदान करती है।जनगणना देश की सबसे व्यापक प्रशासनिक प्रक्रिया है, जो सरकार को जनसंख्या, आवास एवं बुनियादी सुविधाओं की वास्तविक स्थिति का आंकलन करने में सहायता प्रदान करती है। इससे प्राप्त आंकड़ों के आधार पर भविष्य की योजनाएं अधिक प्रभावी एवं समावेशी बनाई जाती है।

मकान सूचीकरण कार्य को लेकर सरायकेला में फील्ड ट्रेनर्स को प्रशिक्षण

 सरायकेला झारखंड के सरायकेला-खरसावां उपायुक्त-सह-प्रधान जनगणना पदाधिकारी, नीतिश कुमार सिंह के निर्देशानुसार भारत की जनगणना 2027 के प्रथम चरण अंतर्गत मकान सूचीकरण और मकानों की गणना (HLO) कार्य के सफल लागू करने के लिए जिला स्तर पर आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन हो गया. प्रखंड कार्यालय सभागार, सरायकेला में आयोजित प्रशिक्षण के समापन में मुख्य अतिथि के रूप में अपर उपायुक्त जयवर्धन कुमार मौजूद थे. तीन दिवसीय प्रशिक्षण में अधिकारियों और फील्ड ट्रेनर्स की सहभागिता प्रशिक्षण 8 अप्रैल से 10 अप्रैल तक आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न प्रखंडों के प्रखंड विकास पदाधिकारी, नगर परिषद और नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी-सह-चार्ज जनगणना पदाधिकारी और नामित फील्ड ट्रेनर्स ने सहभागिता की. प्रशिक्षण कार्यक्रम राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर एम.डी. तासिकुर रहमान और अविनाश ठाकुर द्वारा प्रदान किया गया. तकनीकी जानकारी और व्यावहारिक प्रशिक्षण पर जोर प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना (HLO) से संबंधित तकनीकी और व्यवहारिक पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी गई तथा उनकी शंकाओं का समाधान किया गया. प्रशिक्षण के क्रम में सभी प्रशिक्षार्थियों को नगरीय नक्शा निर्माण हेतु व्यावहारिक प्रशिक्षण सरायकेला प्रखंड अंतर्गत अवस्थित मानिक बाजार क्षेत्र में कराया गया, जिससे उन्हें क्षेत्रीय स्तर पर कार्य निष्पादन की वास्तविक समझ प्राप्त हो सके. निष्पक्ष और समयबद्ध जनगणना कार्य के निर्देश प्रशिक्षण उपरांत सभी फील्ड ट्रेनर्स को निर्देशित किया गया कि वे अपने-अपने प्रखंड और नगर क्षेत्रों में प्रगणक एवं पर्यवेक्षकों को निर्धारित मानकों के अनुरूप प्रशिक्षण प्रदान करना सुनिश्चित करेंगे, जिससे जनगणना कार्य निष्पक्ष, पारदर्शी एवं समयबद्ध रूप से संपन्न हो सके. अपर उपायुक्त जयवर्धन कुमार ने प्रशिक्षणार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि विभागीय दिशा-निर्देशों के आलोक में मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना (HLO) कार्य निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूर्ण किया जाना है. उन्होंने क्षेत्र में कार्य करते समय धैर्य, अनुशासन एवं आमजनों के प्रति सहयोगात्मक व्यवहार बनाए रखते हुए दायित्वों का निर्वहन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया,साथ ही यह भी निर्देश दिया गया कि जनगणना कार्य के दौरान आंकड़ों की शुद्धता एवं गोपनीयता का विशेष ध्यान रखा जाए और भारत सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा निर्गत दिशा-निर्देशों का पूरी तरह अनुपालन सुनिश्चित किया जाए. प्रशिक्षण कार्यशाला में अपर जिला जनगणना पदाधिकारी कमलेश कुमार दास सहित अन्य संबंधित पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित रहे.

जनगणना 2026: 1 अप्रैल से देशभर में शुरू होगी, जानें कौन-से 33 सवाल होंगे आपसे पूछे

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने 2026 की जनगणना के पहले चरण के लिए 33 सवाल जारी किए हैं, जो आज 1 अप्रैल 2026 से शुरू हो रहा है। इसमें कहा गया है कि स्थिर रिश्ते में रहने वाले लाइव-इन कपल्स को भी शादीशुदा माना जाएगा। ऐसा तब ही होगा जब कपल मानेगा की उनका रिश्ता लंबा चलने वाला है। पहले चरण के लिए ऑनलाइन पोर्टल भी शुरू किया गया है, जहां लोग खुद अपनी जानकारी भर सकेंगे। उनकी मदद के लिए इस पोर्टल पर FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल) भी दिए गए हैं। यह चरण ‘हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना’ कहलाता है। इसका मकसद देश में घरों और बुनियादी सुविधाओं की जानकारी जुटाना है, ताकि सरकार बेहतर योजनाएं बना सके। दूसरे चरण में आबादी से जुड़ी डिटेल जानकारी ली जाएगी। 2027 जनगणना का पहला चरण क्या होगा केंद्र सरकार ने गैजेट नोटिफिकेशन जारी कर पहले फेज का फ्रेमवर्क बना दिया है. 1 अप्रैल से शुरू होने वाला यह फेज हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस पर बेस्ड होगा. जनगणना अधिकारी घरों की गिनती करेंगे और उनकी रहन-सहन से जुड़ी जानकारियां दर्ज करेंगे. भारत के रजिस्ट्रार जनरल के मुताबिक इसका मकसद यह है कि देश की वास्तविक सामाजिक और आर्थिक स्थिति का सटीक डेटा तैयार हो. इससे सरकार को विकास योजनाएं ज्यादा टारगेटेड तरीके से लागू करने में मदद मिलेगी।  33 सवालों में क्या क्या शामिल रहेगा? इस बार पूछे जाने वाले सवाल घर की संरचना और परिवार की स्थिति को लेकर होंगे. मकान पक्का है या कच्चा, दीवार और छत किस चीज की है, घर में कितने सदस्य रहते हैं और कितने विवाहित जोड़े हैं, यह दर्ज किया जाएगा. घर का मुखिया पुरुष है या महिला और वह किस सामाजिक वर्ग से है. यह भी पूछा जाएगा।  सुविधाओं पर भी खास फोकस रहेगा. पीने का पानी, शौचालय, बिजली, रसोई गैस, इंटरनेट और मोबाइल कनेक्टिविटी की उपलब्धता दर्ज होगी. परिवार के पास साइकिल, बाइक, कार जैसे साधन हैं या नहीं, यह भी जानकारी ली जाएगी. यहां तक कि रोजमर्रा में किस तरह का अनाज ज्यादा खाया जाता है. यह भी नोट किया जाएगा।  जवाब न देने पर क्या होगा? जनगणना एक लीगल प्रोसेस है और जानकारी देना नागरिक कर्तव्य माना जाता है. अगर कोई व्यक्ति जानकारी देने से इनकार करता है या गलत सूचना देता है. तो जुर्माने का प्रावधान है. लेकिन इससे नागरिकता पर कोई असर नहीं पड़ता. नागरिकता तय करने के लिए अलग कानून और प्रोसेस लागू होती है।  जनगणना का मकसद किसी की पहचान पर सवाल उठाना नहीं है. असल मकसद यह समझना है कि देश के किस हिस्से में किन सुविधाओं की जरूरत है. सही जानकारी मिलने पर ही स्कूल, अस्पताल, सड़क और अन्य योजनाओं का बजट सही ढंग से तय किया जा सकता है. इसलिए सहयोग देना आपके इलाके के डेवलपमेंट से जुड़ा हुआ है।  जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी सरकार ने बताया कि इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी। करीब 30 लाख कर्मचारी मोबाइल एप के जरिए जानकारी जुटाएंगे। मोबाइल एप, पोर्टल और रियल टाइम डेटा ट्रांसफर से जनगणना बहुत हद तक पेपरलेस होगी। ये ऐप Android और iOS दोनों पर काम करेंगे। जाति से जुड़ा डेटा भी डिजिटल तरीके से इकट्ठा किया जाएगा। आजादी के बाद पहली बार जनगणना में जाति की गिनती शामिल होगी। इससे पहले अंग्रेजों के समय 1931 तक जाति आधारित जनगणना हुई थी। यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ने अप्रैल में लिया था। 2011 की पिछली जनगणना के अनुसार, भारत की आबादी करीब 121 करोड़ थी, जिसमें लगभग 51.5% पुरुष और 48.5% महिलाएं थीं। मैप पर हर घर ‘डिजी डॉट’ बनेगा, इसके 5 फायदे होंगे 1. आपदा में सटीक राहत- जियो टैगिंग से बना डिजिटल लेआउट मैप बादल फटने, बाढ़ या भूकंप जैसी आपदा के समय उपयोगी साबित होगा। सुदूर हिमालयी क्षेत्र में बसे किसी गांव में बादल फटने जैसी घटना के समय इस मैप से तुरंत पता चल जाएगा कि किस घर में कितने लोग रहते हैं। होटलों में क्षमता के हिसाब से कितने लोग रहे होंगे। इस ब्योरे से बचाव के लिए जरूरी तमाम नौका, हेलिकॉप्टर, फूड पैकेट आदि की व्यवस्था करने में मदद मिलेगी। 2. परिसीमन में मदद मिलेगी- राजनीतिक सीमाएं जैसे संसदीय या विधानसभा क्षेत्रों का युक्तिसंगत तरीके से निर्धारण करने में भी इससे मदद मिलेगी। जियो टैगिंग से तैयार मैप से यह तस्वीर साफ हो जाएगी कि क्षेत्र में ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र का संतुलित बंटवारा कैसे हो। समुदायों को ऐसे न बांट दिया जाए कि एक मोहल्ला एक क्षेत्र में और दूसरा मोहल्ला किसी अन्य क्षेत्र में शामिल हो जए। घरों के डिजी डॉट से डिलिमिटेशन की प्रक्रिया में आसानी होगी। 3. शहरी प्लानिंग में आसानी– शहरों में सड़कों, स्कूलों, अस्पतालों या पार्कों की प्लानिंग करने में भी यह मैप उपयोगी साबित होगा। अगर किसी जगह के घरों के डिजिटल लेआउट में बच्चों की अधिकता होगी तो पार्क और स्कूल प्राथमिकता से बनाने की योजना तैयार की जा सकेंगी। यदि किसी बस्ती में कच्चे मकानों या खराब घरों की अधिकता दिखेगी तो वहां किसी मेडिकल इमरजेंसी के समय तत्काल मोबाइल राहत वैन भेजी जा सकेंगी। 4. शहरीकरण और पलायन दर का डेटा मिलेगा- इस जनगणना के दस साल बाद होनी वाली जनगणना में डिजिटल मैप के परिवर्तन आसानी से दर्ज किए जा सकेंगे। देश के विभिन्न हिस्सों में शहरीकरण की दर और पलायन के क्षेत्रों की मैपिंग की तुलना सटीक ढंग से की जा सकेगी। 5. मतदाता सूची से डुप्लीकेट नाम हट जाएंगे- आधार की पहचान के साथ जियो टैगिंग मतदाता सूची को सटीक और मजबूत बनाने में सहायक होगी। जब वोटर किसी भौगोलिक स्थान से डिजिटली जुड़ा होगा तो दोहरे पंजीकरण के समय उसके मूल निवास का पता भी सामने आएगा।

इंदौर में जनगणना के लिए आज से प्रशिक्षण कार्यक्रम, जल्द ही पहुंचेगी टीम आपके घर

इंदौर जनगणना 2027 के सफल और सटीक संचालन के लिए इंदौर जिले में फील्ड ट्रेनर्स के प्रशिक्षण की सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा जारी किए गए विशेष निर्देशों के पालन में इंदौर जिले में तीन दिवसीय गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम का खाका तैयार किया गया है। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य जनगणना जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य को त्रुटिहीन तरीके से संपन्न कराना है।  दो चरणों में होगा प्रशिक्षण अतिरिक्त जिला जनगणना अधिकारी से प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम शासकीय होलकर साइंस कॉलेज में आयोजित किया जा रहा है। कॉलेज का परिसर ए.बी. रोड स्थित भंवरकुआं चौराहे के पास है। कार्यक्रम को दो चरणों में विभाजित किया गया है। पहला चरण आज 24 मार्च से शुरू होकर 26 मार्च 2026 तक चलेगा, जिसमें मुख्य रूप से नगर निगम एवं बाह्यवृद्धि क्षेत्रों के ट्रेनर्स शामिल होंगे। इसके पश्चात दूसरा चरण 28 मार्च से 30 मार्च 2026 तक आयोजित होगा, जो जिला स्तर के नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों के लिए निर्धारित किया गया है। हर दिन होंगे तीन बैच प्रशासनिक योजना के अनुसार, इस पूरे कार्यक्रम के दौरान कुल 129 फील्ड ट्रेनर्स को मास्टर ट्रेनर्स द्वारा प्रशिक्षित किया जाएगा। प्रशिक्षण की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए इन्हें अलग-अलग बैचों में बांटा गया है। प्रत्येक दिन तीन बैच संचालित होंगे, जिनमें प्रति बैच लगभग 28 प्रतिभागी शामिल होंगे। वहीं, जिला स्तरीय सत्रों के लिए दो बैच बनाए गए हैं, जिनमें 23-23 प्रतिभागियों को बारीकियों से अवगत कराया जाएगा। कॉलेज परिसर में ही की सभी व्यवस्थाएं शिक्षण कार्य को सुचारू रूप से चलाने के लिए होलकर साइंस कॉलेज के कक्ष क्रमांक बी-101, बी-102 एवं बी-103 को विशेष रूप से आरक्षित किया गया है। अतिरिक्त जिला जनगणना अधिकारी ने कॉलेज प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रशिक्षण स्थल पर सभी मूलभूत सुविधाएं अनिवार्य रूप से उपलब्ध हों। इसमें बैठने के लिए टेबल-कुर्सी, तकनीकी सहायता के लिए प्रोजेक्टर और कंप्यूटर ऑपरेटर के साथ-साथ पेयजल और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने को कहा गया है। यह प्रशिक्षण जनगणना के राष्ट्रीय मिशन को प्रभावी ढंग से जमीन पर उतारने की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है। 

2027 की जनगणना के लिए यूपी में तेज़ी से काम शुरू, अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में जनगणना 2027 की तैयारियां तेज हो गई हैं. पहले चरण में मकानों की सूची तैयार करने और उनकी गणना का काम किया जाएगा. इस चरण में स्व-गणना की प्रक्रिया 7 मई से 21 मई तक चलेगी. इसके बाद 22 मई से 20 जून तक अधिकारी घर-घर जाकर फील्ड कार्य पूरा करेंगे. राज्य में तय समय सीमा के अंदर काम हो सके इसके लिए प्रशिक्षण व्यवस्था को भी चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है.  राज्य में जनगणना के लिए अधिकारियों को सभी काम तय समय-सीमा के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं. ये प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और बिना त्रुटि के पूरी की जाए इसके लिए भी अधिकारियों को निर्देशित किया गया है. जनगणना की प्रक्रिया पूरी तरह से डिजिटल तरीके से की जाएगी. इसमें डेटा संग्रह, प्रविष्टि और निगरानी सब कुछ ऑनलाइन होगा.  छह लाख कर्मचारियों की लगेगी ड्यूटी उत्तर प्रदेश में जनगणना 2027 के लिए क़रीब छह लाख से ज्यादा कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाएगी. यही नहीं इस बार पहली बार ऐसा होगा जब लोगों को मोबाइल एप के ज़रिए ख़ुद गणना करने का ऑप्शन भी मिलेगा. इसका मतलब ये होगा कि लोग ख़ुद भी अपनी जानकारी ऑनलाइन या डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के जरिए जमा कर सकेंगे.  डिजिटल तरीके से की जाएगी जनगणना राज्य में जनगणना का काम काफी बड़ा है जिसे देखते हुए बड़ी संख्या में कर्मचारियों को लगाया जाएगा. जो घर-घर जाकर लोगों की गिनती और आवास की संख्या का डेटा जुटाएंगे. डेटा इकट्ठा करने और उसे सत्यापित करने का काम डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से किया जाएगा. इसके लिए राज्य स्तर प एक राज्य नोडल कार्यालय भी स्थापित किया जाएगा, जहां पूरी प्रक्रिया की निगरानी रखी जाएगी और ये सुनिश्चित किया जाएगा कि काम तय योजना के अनुसार हो रहा है.  नियमों के मुताबिक इस साल होने वाली जनगणना के कार्यक्रम को देखते हुए एक जनवरी 2026 से 31 मार्च 2027 तक राज्य में नए तहसीलों, शहरी निकायों, ग्राम पंचायतों आदि के गठन पर रोक लगा दी जाएगी. ताकि जनगणना के दौरान किसी तरह का बदलाव न हो जिससे डेटा पर कोई प्रभाव न आए. 

घर-घर दस्तक देने जाएंगे जनगणना कर्मचारी, प्रशासन ने साफ किया – यह 1 चीज पूछी नहीं जाएगी

भोपाल  एमपी के भोपाल जिले में अब जनगणना 2027 की हलचल तेज हो गई है। जिले में लोग मतदाता सूची गहन पुनरीक्षण के तहत मतदाता सूची में नाम बनाए रखने के लिए प्रशासन को दस्तावेज देने की जद्दोजहद करते नजर आए थे, लेकिन अब जनगणना में स्थिति पूरी तरह से उलट होगी। यह मौखिक होगी। कोई दस्तोवज नहीं लिया जाएगा। आधार नंबर मांगा जा सकता हैं। हालांकि ये केंद्र की सूची में नहीं है, इसलिए वैकल्पिक ही रहेगा। मोबाइल नंबर जरूर जनगणना के लिए लिया जाएगा। जनगणना फार्म डिजिटली भरा जाएगा। इसके बाद आप डिजिटल रसीद दी जाएगी। ये 1 चीज नहीं पूछेगा प्रशासन अभी पूरी प्रक्रिया प्रशासनिक कार्यालयों में ट्रेनिंग-तैयारियों के तौर पर हो रही है। अप्रैल से हर घर दस्तक देना शुरू होगी। एसआइआर में साढ़े चार लाख मतदाताओं के नाम हटाए थे, जनगणना में सिर्फ 33 हजार को ही मृत श्रेणी में रखा जाएगा। जनगणना में बैकिंग की डिटेल नहीं मांगी जाएगी। जनधन खातों व यूपीआइ के तहत हर व्यक्ति की बैकिंगग डिटेल सरकार के पास है। इंटरनेट की पहुंच, स्मार्टफोन के साथ घरेलू उपयोग में एलपीजी/पीएनजी की उपलब्धता व कनेक्शन को लेकर सवाल जरूर होंगे। स्वगणना के लिए 15 दिन मिलेंगे जनगणना में एक अप्रेल 2026 से सितंबर 2026 तक घर का सर्वे-मैपिंग होगी। 30 दिन गहन काम होगा। इससे पंद्रह दिन पहले लोगों को खुद ही ऑनलाइन फार्म भरकर स्वगणना का विकल्प खोला जाएगा। यानी नागरिक खुद ही अपना डिजिटल फार्म डिटेल के साथ जमा कर सकेंगे। 10 लाख घरों होगी मैपिंग 1 मई से शुरू होने वाली जनगणना को लेकर मध्यप्रदेश में तैयारियां तेज हो गई हैं। जिला प्रशासन ने इस महाअभियान के लिए व्यापक स्तर पर तैयारी पूरी कर ली है। इस बार जनगणना प्रक्रिया में डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी उपयोग किया जाएगा, जिससे नागरिक स्वयं अपनी जानकारी ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से दर्ज कर सकेंगे। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि नागरिक इंडियन सेंसस डाटा कलेक्शन पोर्टल पर लॉग-इन कर अपनी जानकारी उपलब्ध करा सकेंगे। इसके साथ ही पारंपरिक तरीके से डोर-टू-डोर सर्वे भी किया जाएगा। जनगणना कार्य के लिए करीब 8000 कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। 16 फरवरी से प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू होगा। अभियान के तहत लगभग 10 लाख घरों की जियो-टैगिंग और मैपिंग की जाएगी। मैपिंग पूरी होने के बाद कर्मचारियों को सर्वे कार्य के लिए तैनात किया जाएगा। कितने सवाल पूछे जाएंगे 2 मई से 31 मई 2026 के बीच लोगों से कुल 33 सवाल पूछे जाएंगे. इन सवालों का सही और स्पष्ट जवाब देना अनिवार्य होगा. सबसे पहले घर से जुड़े सवाल होंगे, जैसे मकान नंबर, मकान की स्थिति, दीवार और छत की सामग्री, घर का उपयोग और फर्श की स्थिति आदि. इसके बाद परिवार से जुड़े प्रश्न पूछे जाएंगे. इसमें परिवार के सदस्यों की संख्या, घर में रहने वाले लोगों की जानकारी, परिवार के मुखिया का नाम, लिंग और जाति (अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/अन्य) जैसी जानकारी ली जाएगी. साथ ही यह भी पूछा जाएगा कि घर अपना है या किराए का, कितने कमरे हैं और कितने विवाहित परिवार उसमें रहते हैं. घर की बुनियादी सुविधाओं से जुड़े सवाल भी शामिल हैं. जैसे पीने के पानी का सोर्स, शौचालय है या नहीं, बिजली की सुविधा, खाना पकाने का ईंधन और गंदे पानी के निकालने की व्यवस्था. इसके अलावा घरेलू समानों की जानकारी भी ली जाएगी. जैसे घर में रेडियो, टीवी, इंटरनेट, लैपटॉप या कंप्यूटर, मोबाइल फोन, साइकिल, मोटरसाइकिल, कार है या नहीं. मोबाइल नंबर भी दर्ज किया जाएगा, लेकिन यह केवल जनगणना से जुड़ी सूचना के लिए होगा. ये 33 प्रमुख सवाल पूछे जाएंगे? जनगणना के दौरान नागरिकों से घर की स्थिति, निर्माण सामग्री (फर्श, दीवार, छत), परिवार के सदस्यों की संख्या, मुखिया का नाम व लिंग, सामाजिक वर्ग (SC/ST/अन्य), स्वामित्व की स्थिति, कमरों की संख्या, विवाहित जोड़ों की संख्या, पेयजल स्रोत, बिजली की उपलब्धता, शौचालय की स्थिति व प्रकार, रसोई और ईंधन का प्रकार, एलपीजी/पीएनजी कनेक्शन, अपशिष्ट जल निकास, स्नान सुविधा, इंटरनेट और डिजिटल उपकरणों की उपलब्धता, वाहन, मुख्य खाद्यान्न और मोबाइल नंबर सहित अन्य जानकारियां ली जाएंगी। जनगणना-2027 पर सीएम का बयान? भोपाल में आयोजित राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में ऐतिहासिक जनगणना होने जा रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि मध्यप्रदेश इस प्रक्रिया में देश के लिए आदर्श मॉडल बनेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनगणना देश की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण डाटा प्रक्रिया है। इसी के आधार पर सरकारी योजनाएं, संसाधनों का वितरण और विकास की रणनीतियां तय की जाती हैं। एसआइआर में इन्हें हटाया, जनगणना में शामिल होंगे -1.01 लाख के फार्म संग्रहित नहीं किए जा सके -2.86 लाख स्थायी तौर पर शिफ्ट हो गए -14171 दोहरे नाम थे -33791 मृत हो गए नोट नोट: मृत पाए मतदाताओं को छोड़े तो परिजनों के कहने पर बाकी का नाम जनगणना में शामिल रहेगा। धूप तीखी हुई तो बड़ा तालाब स्थित बोट क्लब पर सन्नाटा पसर गया। आग से फैक्ट्री खाक होने के बाद संचालक के बेटा और बेटी विलाप करते हुए।