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पंजाब में जनगणना के दौरान जाति, शादी और बैंक खाते से जुड़े सवाल, ठिकाना बदलने की वजह भी पूछेंगे

चंडीगढ़  पंजाब में जनगणना का दूसरा फेज अगले महीने से शुरू होगा। 16 से 30 नवंबर तक लोग घर बैठे ऑनलाइन जनगणना की जानकारी भर सकेंगे। जनगणना में जाति, शादी, धर्म और बैंक खातों से जुड़े सवाल भी पूछे जाएंगे। कुल 40 सवालों में ठिकाना बदलने और कोराना का टीका लगाने के बारे में भी पूछा जायेगा।  खास बात ये भी है कि देश में पहली बार डिजिटल साक्षरता के बारे में भी जानकारी जुटाई जाएगी। जिसमें पूछा जाएगा कि आपको मोबाइल, कंप्यूटर और इंटरनेट चलाना आता है या नहीं। इसके बाद 1 दिसंबर से 4 जनवरी 2027 तक कर्मचारी घर-घर जाकर जनगणना करेंगे। इसके लिए पंजाब में अफसरों ने तैयारी शुरू कर दी है। इसे पंजाब में 2027 में होने वाले चुनाव से पहले पूरा करने का टारगेट रखा गया है। 3 चरणों में होगी जनगणना फाइनल 1. ऑनलाइन- लोग घर बैठे जवाब भरेंगे, रेफरेंस नंबर दिखाना होगा लोग जनगणना की वेबसाइट se.census.gov.in पर जाकर ऑनलाइन जानकारी भर सकते हैं। सभी 40 सवालों का जवाब देने के बाद जनगणना पूरी हो जाएगी। फॉर्म जमा होने के बाद एक यूनिक रेफरेंस नंबर मिलेगा। जब जनगणना कर्मचारी वेरिफिकेशन के लिए घर आएंगे, तो केवल वह रेफरेंस नंबर दिखाकर काम तुरंत पूरा हो जाएगा। 2.ऑफलाइन- कर्मचारी घर आएंगे, 40 सवाल पूछेंगे जो लोग ऑफ लाइन जनगणना करवाना चाहते हैं उनके घर 1 दिसंबर से सरकारी कर्मचारी आएंगे और उनसे सभी 40 सवालों के जवाब पूछेंगे। लोगों को इन 40 सवालों के जवाब जनगणना कर्मचारी को देने होंगे। यह प्रक्रिया 4 जनवरी 2027 तक चलेगी। 3. संशोधन- गलतियां सुधार सकेंगे ऑनलाइन व ऑफ लाइन फार्म जमा होने के बाद 5 जनवरी 2027 से 9 जनवरी तक छूटे हुए लोगों व जनगणना की गलतियों को सुधारने का मौका रहेगा। इसी दौरान जनगणना कर्मी डेटा की जांच करेंगे और गलतियों को दूर करेंगे। ऑनलाइन जनगणना फॉर्म भरने की स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया जानिए…     पोर्टल पर जाएं: जनगणना के आधिकारिक वेबसाइट se.census.gov.in खोलें। यह विंडो 16 नवंबर से 30 नवंबर तक खुली रहेगी। इसी पीरियड में लोग ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।     राज्य चुनें: पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन के लिए 'State/UT' के ड्रॉपडाउन मेन्यू में Punjab चुनें और स्क्रीन पर दिख रहा CAPTCHA दर्ज करें। उसके बाद रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।     रजिस्ट्रेशन: परिवार के मुखिया का नाम और एक सक्रिय मोबाइल नंबर डालें। यह मोबाइल नंबर एक परिवार के लिए केवल एक ही मोबाइल नंबर मान्य होगा। जो मोबाइल नंबर भरेंगे उसी पर ओटीपी आएगा और उसके बाद ही प्रक्रिया शुरू होगी। मुखिया का नाम फार्म सब्मिट होने के बाद बदला नहीं जाएगा।     घर का पता एवं लोकेशन दर्ज करें: ऑनलाइन आवेदन भरते समय अपना जिला, शहर/गांव, मोहल्ला, लैंडमार्क और पिन कोड भरें। डिजिटल मैप पर अपने मकान की सटीक लोकेशन मार्क करें। इसके लिए लैपटॉप/कंप्यूटर का उपयोग करना अधिक सुविधाजनक रहेगा।     फार्म भरते समय दें सही जानकारी: ऑनलाइन व ऑफ लाइन भरते समय लोगों की सही जानकारी दें ताकि आवेदन फार्म में सही जानकारी उपलब्ध करवाई जा सके।     फॉर्म सबमिट करें और SE ID संभालें: ऑनलाइन फार्म भरते समय सही तथ्यों की जानकारी दें। फार्म कंप्लीट होने के बाद एक बार चेक करें। चेक करने के बाद ही फार्म को सब्मिट करें। उसके बाद एक आईडी स्क्रीन पर शो होगी और उसके संभालकर रखें। 1 दिसंबर के बाद जब कर्मचारी आपके पास आएंगे तो उन्हें यह आईडी बतानी होगी। डेटा की सुरक्षा और गोपनीयता जनगणना कानून, 1948 के तहत इकट्ठा की गई सभी व्यक्तिगत जानकारियां पूरी तरह से गुप्त (कॉन्फिडेंशियल) रखी जाएंगी। जनगणना अधिकारियों द्वारा जुटाई गई व्यक्तिगत जानकारी का इस्तेमाल सिर्फ सरकारी आंकड़े तैयार करने और योजनाएं बनाने के लिए ही किया जाएगा।

इंदौर में जुटेंगे संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी, 28 अक्टूबर से शुरू होगी अखिल भारतीय बैठक

 इंदौर  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की वार्षिक अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक मध्य प्रदेश के इंदौर में 28 से 30 अक्टूबर तक आयोजित होगी। आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने संगठन की वेबसाइट पर जारी बयान में बताया कि बैठक में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले, सभी छह सह-सरकार्यवाह और संगठन के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल होंगे। संगठनात्मक गतिविधियों की होगी समीक्षा बैठक में देशभर में संघ की संगठनात्मक गतिविधियों की पिछले एक वर्ष की समीक्षा की जाएगी। इसमें देश के 46 प्रांतों के प्रांत संघचालक, कार्यवाह और प्रचारक भी हिस्सा लेंगे। इसके अलावा 11 क्षेत्रों के संघचालक, कार्यवाह, प्रचारक तथा क्षेत्रीय पदाधिकारी उपस्थित रहेंगे। विजयादशमी के संदेश पर भी होगी चर्चा बैठक में विजयादशमी के अवसर पर मोहन भागवत द्वारा उठाए गए मुद्दों पर चर्चा होगी। साथ ही संघ के शताब्दी वर्ष के दौरान संचालित गतिविधियों की समीक्षा की जाएगी। देश को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण विषय भी बैठक के एजेंडे में शामिल हैं। इनमें नशीले पदार्थों की बढ़ती चुनौती, देश के आंतरिक मामलों में बाहरी ताकतों का हस्तक्षेप तथा पर्यावरण का संरक्षण और संवर्धन प्रमुख हैं।  

भारतीय सेना को मिला नागास्त्र-2 ड्रोन, सफल परीक्षण के बाद हुई डिलीवरी

 नागपुर भारतीय थल सेना ने नागपुर स्थित सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड से स्वदेशी नागस्त्र-2 एंटी-टैंक लॉइटिरिंग म्यूनिशन प्राप्त कर लिया है. यह सिस्टम अगस्त 2026 में राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में सफल परीक्षणों के बाद सेना को सौंपा गया. लॉइटिरिंग म्यूनिशन आधुनिक युद्ध का महत्वपूर्ण हथियार है. ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान के खिलाफ इसका पुराना वर्जन इस्तेमाल किया गया था।  यह लक्ष्य के ऊपर मंडराता रहता है, सटीक जानकारी इकट्ठा करता है. फिर हमला करता है. नागस्त्र-2 के आने से सेना की टैंक रोधी क्षमता और मजबूत हुई है. कंपनी के पुराने वर्जन पहले से ही सेना में शामिल हैं, इसलिए यह डिलीवरी निरंतरता को भी दर्शाती है।  नागस्त्र-2 एक फिक्स्ड-विंग लॉइटिरिंग म्यूनिशन है. इसमें दिन और रात दोनों समय काम करने वाले कैमरे लगे हैं, जिससे किसी भी मौसम या अंधेरे में लक्ष्य की पहचान संभव है. इसका 4 किलोग्राम का वॉरहेड 650 मिलीमीटर मोटी कवच को भेदने में सक्षम है. यह क्षमता आधुनिक टैंकों के खिलाफ प्रभावी साबित हो सकती है।  सिस्टम की अधिकतम रेंज 50 किलोमीटर तक है. फायर-एंड-फॉरगेट मोड में यह 60 मिनट तक हवा में रह सकता है. फायर-एंड-फॉरगेट का मतलब है कि लॉन्च के बाद ऑपरेटर को लगातार नियंत्रण रखने की जरूरत नहीं पड़ती. इसमें ईसीसीएम यानी इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-काउंटर मेजर्स सूट भी है, जो जैमिंग का विरोध करता है. दुश्मन अगर सिग्नल जाम करने की कोशिश करे तो भी सिस्टम काम करता रहता है. ये विशेषताएं इसे सीमा क्षेत्रों और संघर्ष क्षेत्रों में बहुत उपयोगी बनाती हैं।  आत्मनिर्भरता और स्वदेशी सामग्री  नागस्त्र-2 में 80 प्रतिशत से अधिक सामग्री स्वदेशी है. यह आंकड़ा आत्मनिर्भर भारत अभियान की सफलता को रेखांकित करता है. पहले कई ऐसे हथियार आयात पर निर्भर थे, जिससे न सिर्फ खर्च बढ़ता था बल्कि आपूर्ति की अनिश्चितता भी रहती थी. अब घरेलू कंपनी द्वारा विकसित और निर्मित सिस्टम सेना को मिल रहा है।  इससे लागत कम होती है, रखरखाव आसान होता है और जरूरत पड़ने पर तेजी से उत्पादन बढ़ाया जा सकता है. नागपुर जैसी जगह पर रक्षा उद्योग का विकास क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा देता है. कंपनी के पहले संस्करणों का सेना में पहले से उपयोग होना इस बात का प्रमाण है कि स्वदेशी तकनीक भरोसेमंद साबित हो रही है।  रणनीतिक प्रभाव और भविष्य  लॉइटिरिंग म्यूनिशन आज के युद्ध में ड्रोन और सटीक हमले की भूमिका को बदल रहे हैं. यूक्रेन संघर्ष समेत कई जगहों पर इनके प्रभावी इस्तेमाल ने साबित किया है कि ये सस्ते और घातक दोनों हो सकते हैं. नागस्त्र-2 की 50 किलोमीटर रेंज और लंबे समय तक मंडराने की क्षमता सेना को दुश्मन के बख्तरबंद वाहनों पर दूर से हमला करने का विकल्प देती है।  जैमिंग प्रतिरोधक क्षमता इसे इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के माहौल में भी प्रभावी बनाए रखती है. कुल मिलाकर यह डिलीवरी भारतीय सेना की आधुनिकीकरण प्रक्रिया और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में ठोस कदम है. आगे और उन्नत संस्करण आने की उम्मीद है, जो सीमा सुरक्षा को और मजबूत करेंगे। 

चंडीगढ़ में बच्ची को ससुराल वालों ने मां से किया था अलग, हाईकोर्ट ने मां को सौंपी कस्टडी

चंडीगढ़  पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने छह साल की बच्ची की अभिरक्षा मां को सौंपने का आदेश दिया है। बच्ची अक्तूबर 2025 से पिता के परिवार के पास रह रही थी। मां ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर बेटी को पेश कराने और कस्टडी देने की मांग की थी। सुनवाई में अदालत ने बच्ची की कम उम्र और कल्याण पर विचार करते हुए कहा कि उसके विकास में मां की देखभाल और स्नेह महत्वपूर्ण हैं। हाईकोर्ट ने इसी आधार पर बच्ची की कस्टडी मां को सौंपने का निर्देश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि उसकी स्थायी अभिरक्षा के प्रश्न पर सक्षम अदालत तथ्यों और परिस्थितियों का विस्तृत आकलन कर निर्णय ले सकती है। चंडीगढ़ निवासी याचिकाकर्ता की शादी दिसंबर 2014 में हुई थी और मार्च 2020 में बेटी का जन्म हुआ। महिला का पति रोजगार के सिलसिले में कुवैत चला गया था। महिला ने आरोप लगाया कि ससुराल में उसके साथ दुर्व्यवहार हुआ और शिकायत करने पर उसकी बात नहीं सुनी गई। इसके बाद वह चार अक्तूबर 2025 को बेटी के साथ ससुराल से निकल गई। महिला के अनुसार, रास्ते में ससुराल पक्ष के लोगों ने उससे बच्ची को अलग कर दिया। उसने पुलिस से शिकायत की और परिवार स्तर पर भी बच्ची की वापसी का प्रयास किया, लेकिन बेटी की कस्टडी नहीं मिली। इसके बाद उसने हाई कोर्ट का रुख किया। ससुराल पक्ष ने महिला के आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि बच्ची की उचित देखभाल की जा रही है। उनका पक्ष था कि महिला अपनी मर्जी से ससुराल छोड़कर गई थी।

MP में अल्पसंख्यकों के नागरिकता आवेदनों की पड़ताल तेज, लंबित मामलों का ब्योरा तलब

ग्वालियर  मध्य प्रदेश में अल्पसंख्यकों की नागरिकता को लेकर सरकार पड़ताल कर रही है। अल्पसंख्यकों की नागरिकता के कितने आवेदन किस किस जिलों में लंबित हैं, इसको लेकर पूरा डाटा मध्य प्रदेश के गृह विभाग ने मांगा है। इसको लेकर जनगणना के निदेशक से गृह विभाग ने कई बिंदुओं पर जानकारी मांगी है। प्रदेश के महानगरों में नागरिकता आवेदनों को डील करने वाले अधिकारियों के स्तर पर आंकड़ा क्या है, इसके अलावा नान सीएए अल्पसंख्यक संबंधी आवेदन, जिलेवार और प्रदेश में नागरिकता मामले के आवेदनों को लेकर क्या स्थिति है, यह बारीक आंकड़े मांगे गए हैं। गृह विभाग के वरिष्ठ अफसरों को पूरी रिपोर्ट जाएगी गृह विभाग के वरिष्ठ अफसरों को यह पूरी रिपोर्ट जाएगी। इस जानकारी में इंटेलिजेंस ब्यूरो की रिपोर्ट भी शामिल होगी। बता दें कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नागरिकता (संशोधन) नियम, 2026 को अधिसूचित किया है, जिससे पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आने वाले गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यकों (हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई) की नागरिकता से जुड़ी प्रक्रियाओं में बड़े बदलाव किए गए हैं। जनगणना निदेशक से कई बिंदुओं पर विस्तार से जानकारी मांगी नए संशोधन के बाद से ही प्रदेशों और जिलों में इसको लेकर सभी मापदंडों पर पड़ताल बढ़ी और नागरिकता आवेदनों को लेकर अलग अलग स्तर से दिशा निर्देश जारी हुए। गृह विभाग ने जनगणना निदेशक से इसको लेकर कई बिंदुओं पर जानकारी विस्तार से मांगी है । जिससे मौजूदा स्थिति के विषय में पूरी जानकारी का चल सके। मप्र में लंबित नागरिकता मामलों की स्थिति इंदौर में कुल लंबित मामलों की संख्या 374 है और आईबी रिपोर्ट लंबित का आंकड़ा 31 है। इसी तरह भोपाल में 55, जलबपुर में आठ, रतलाम में सात, उज्जैन में तीन, होशंगाबाद और विदिशा में दो दो व सीहोर,बालाघाट, बैतूल व मंदसौर में एक एक आवेदन लंबित है। इस तरह जिलों में लंबित नागरिकता मामलों का आंकड़ा 460 है। नॉन सीएए अल्पसंख्यक संबंधी लंबित आवेदनों की स्थिति इंदौर में कुल आवेदन संख्या 2896 है। प्रदान की गई नागरिकता 2399 और अस्वीकृत आवेदन 48 है। वहीं लंबित आवेदनों की संख्या 449 है। इसी तरह भोपाल में कुल आवेदन 244, प्रदान की गई स्वीकृति का आंकड़ा 184 और अस्वीकृत आवेदन की संख्या छह है।

अयोध्या में दीपोत्सव की भव्य तैयारी, 30 लाख दीप जलाकर अपना ही रिकॉर्ड तोड़ने का लक्ष्य

अयोध्या  कल्पना कीजिए. सरयू का किनारा हो, राम की पैड़ी हो और दूर-दूर तक सिर्फ दीपों की रोशनी दिखाई दे. एक-दो हजार नहीं, लाखों दीप. इन्हें सजाने और जलाने के लिए हजारों हाथ एक साथ जुटें. अयोध्या इस बार कुछ ऐसी ही तस्वीर तैयार करने की कोशिश में है. रामनगरी में दसवें दीपोत्सव की तैयारियों का विधिवत शंखनाद हो गया है. सरयू तट पर भूमि पूजन के साथ आयोजन की शुरुआत हो गई. इस बार लक्ष्य है 30 लाख दीप जलाने का. इसके लिए डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के करीब 35 हजार स्वयंसेवक जुटेंगे।  इस बार चुनौती सिर्फ लाखों दीप जलाने की नहीं है. चुनौती अपने ही पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ने की भी है. पिछले दीपोत्सव में 26 लाख 17 हजार 215 से अधिक दीप प्रज्ज्वलित करने का रिकॉर्ड बनाया गया था. अब दसवें दीपोत्सव में इससे आगे निकलने की तैयारी है।  दीपोत्सव की तैयारियों की शुरुआत धार्मिक परंपरा के साथ की गई. अवध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विजेंद्र सिंह ने विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों और स्वयंसेवकों के साथ भूमि पूजन किया. इसके बाद मां सरयू की पूजा-अर्चना की गई. इसके बाद काम शुरू होता है- लाखों दीपों को तय जगहों पर रखना, उनकी व्यवस्था करना और फिर निर्धारित समय पर उन्हें प्रज्ज्वलित करना।  जब लक्ष्य 30 लाख दीपों का हो, तो जरा सोचिए कि इस पूरे इंतजाम में कितनी मेहनत और तालमेल की जरूरत होगी. सरयू तट और राम की पैड़ी इस आयोजन के प्रमुख केंद्र होंगे. यहां दीपों की कतारें सजाने के लिए विश्वविद्यालय के स्वयंसेवक बड़ी संख्या में जुटेंगे।  30 लाख का लक्ष्य, लेकिन पिछला रिकॉर्ड भी कम नहीं अब जरा पिछले रिकॉर्ड पर नजर डालिए. नौवें दीपोत्सव में 26 लाख 17 हजार 215 से अधिक दीप प्रज्ज्वलित किए गए थे. यह अपने आप में बड़ा आंकड़ा है. इस बार लक्ष्य 30 लाख दीपों का रखा गया है. यानी पिछले रिकॉर्ड के मुकाबले करीब 3 लाख 82 हजार 785 दीप अधिक जलाने होंगे. इस आयोजन में अवध विश्वविद्यालय की भूमिका अहम है. विश्वविद्यालय के करीब 35 हजार स्वयंसेवक दीपों को निर्धारित स्थानों पर सजाने और उन्हें प्रज्ज्वलित करने की तैयारियों में हिस्सा लेंगे।  दीपोत्सव की तस्वीरों में अक्सर लाखों दीपों की चमक दिखाई देती है. उस चमक के पीछे काम करने वाले हजारों लोगों की मेहनत भी होती है. जब लाखों दीपों को एक साथ सजाना हो, तो हर दीप के लिए जगह तय करनी पड़ती है. फिर उन्हें व्यवस्थित तरीके से रखना होता है, ताकि पूरा परिसर खूबसूरत भी दिखे और आयोजन भी तय योजना के मुताबिक आगे बढ़े. इस बार करीब 35 हजार स्वयंसेवकों की टीम इसी काम में जुटेगी. इतने बड़े स्तर पर लोगों को एक साथ काम में लगाना अपने आप में एक बड़ी व्यवस्था है।  भूमि पूजन के साथ तैयारियों का शंखनाद हो चुका है. अवध विश्वविद्यालय के करीब 35 हजार स्वयंसेवकों को इस भव्य आयोजन में भूमिका निभानी है. लक्ष्य 30 लाख दीप प्रज्ज्वलित करने का है और पिछली बार के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ने की कोशिश की जाएगी. सरयू तट और राम की पैड़ी पर लाखों दीप सजाने की तैयारी है. अब सबकी निगाहें उस शाम पर टिकी हैं, जब अयोध्या की रोशनी इस मेहनत और तैयारी की असली तस्वीर सामने लाएगी। 

8वें वेतन आयोग में सैलरी बढ़ने का गणित, बेसिक पे और अलाउंस में किससे मिलेगा ज्यादा फायदा?

 नई दिल्ली 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों के बीच सबसे बड़ी चर्चा इस बात पर है कि नई वेतन व्यवस्था में ज्यादा फायदा किससे होगा- बेसिक सैलरी में बड़ी बढ़ोतरी से या महंगाई भत्ता, मकान किराया भत्ता और दूसरे अलाउंस बढ़ने से? दोनों का असर कर्मचारियों की जेब पर पड़ता है, लेकिन इनके फायदे अलग-अलग हैं. ज्यादा भत्ते रोजमर्रा के खर्चों में राहत दे सकते हैं, जबकि ऊंची बेसिक सैलरी का असर रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले फायदों पर पड़ सकता है।  8वें वेतन आयोग का गठन नवंबर 2025 में किया गया था. आयोग को अपनी सिफारिशें देने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है. वह आर्थिक हालात, महंगाई और कर्मचारियों की वित्तीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनरों के वेतन संशोधन पर सुझाव देगा. इस बीच कर्मचारी संगठनों ने ज्यादा वेतन, बेहतर भत्तों और ऊंचे फिटमेंट फैक्टर की मांग की है. फिटमेंट फैक्टर वह गुणक है, जिससे मौजूदा बेसिक सैलरी के आधार पर संशोधित बेसिक पे की गणना की जाती है।  8वें वेतन आयोग के लिए कर्मचारी संगठनों और दूसरे पक्षों की ओर से 3.2 से 4 या उससे अधिक फिटमेंट फैक्टर की मांगें सामने आई हैं. हालांकि, अभी किसी फिटमेंट फैक्टर को अंतिम रूप नहीं दिया गया है. इसे एक उदाहरण से समझ सकते हैं. अगर किसी कर्मचारी की मौजूदा बेसिक सैलरी 18,000 रुपये है और फिटमेंट फैक्टर 3 तय होता है, तो उसकी संशोधित बेसिक पे 54,000 रुपये हो जाएगी. इस तरह बेसिक सैलरी में 36,000 रुपये का अंतर होगा. इसी तरह, 44,500 रुपये की बेसिक सैलरी पर फिटमेंट फैक्टर 3 लागू होने की स्थिति में नई बेसिक पे 1,33,500 रुपये होगी. यह मौजूदा बेसिक पे से 89,000 रुपये ज्यादा है. ये केवल गणना के उदाहरण हैं, आयोग की ओर से घोषित वेतन या तय बढ़ोतरी नहीं।  ज्यादा भत्ते मिलने से क्या फायदा होगा? सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में बेसिक पे के अलावा महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA) और परिवहन भत्ता (TA) जैसे हिस्से भी शामिल हो सकते हैं. इन भत्तों का उद्देश्य कर्मचारियों के रोजमर्रा के खर्चों को संभालने में मदद करना है. अगर नई वेतन व्यवस्था में भत्तों में ज्यादा बढ़ोतरी होती है, तो कर्मचारियों को मकान किराये, यात्रा, ईंधन और दूसरी जरूरतों के खर्च में राहत मिल सकती है।  खासकर उन कर्मचारियों के लिए यह महत्वपूर्ण हो सकता है, जिनके शहर में रहने का खर्च ज्यादा है या जिनकी आय का बड़ा हिस्सा किराये और आने-जाने पर खर्च होता है. पुरानी टैक्स व्यवस्था चुनने वाले कुछ कर्मचारियों को पात्रता और लागू नियमों के अनुसार कुछ भत्तों पर टैक्स में छूट भी मिल सकती है. हालांकि, हर भत्ता टैक्स-फ्री नहीं होता. इसका लाभ भत्ते की प्रकृति और टैक्स नियमों पर निर्भर करेगा।  ज्यादा बेसिक पे क्यों अहम है? बेसिक सैलरी में बढ़ोतरी का फायदा सिर्फ हर महीने मिलने वाले वेतन तक सीमित नहीं रहता. इसका असर कुछ लंबी अवधि के वित्तीय लाभों पर भी पड़ सकता है।  1. पेंशन पर असर: सरकारी कर्मचारियों की पेंशन तय करने में बेसिक पे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. संबंधित पेंशन नियमों के तहत ज्यादा बेसिक पे से रिटायरमेंट के बाद मिलने वाला लाभ बढ़ सकता है।  2. नेशनल पेंशन सिस्टम का लाभ: नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में योगदान की गणना लागू नियमों और सैलरी के निर्धारित कंपोनेंट्स के आधार पर होती है. योगदान योग्य वेतन बढ़ने पर खाते में जमा होने वाली रकम भी बढ़ सकती है।  3. सालाना इंक्रीमेंट में फायदा: केंद्र सरकार 7वें वेतन आयोग के तहत अपने कर्मचारियों को फिलहाल सालाना आधार पर बेसिक पे का 3% इंक्रीमेंट देती है. नौकरी के दौरान, अधिक बेसिक पे का कंपाउंडिंग इफेक्ट पड़ता है. इसलिए बेसिक पे जितना अधिक होगा, हर साल होने वाले इंक्रीमेंट में भी उतना फायदा रहेगा. DA और HRA जैसे भत्ते बेसिक पे से जुड़े होते हैं, जिससे कुल कमाई बढ़ जाती है।  इसलिए जो कर्मचारी लंबी अवधि की वित्तीय सुरक्षा और रिटायरमेंट के बाद की जरूरतों को प्राथमिकता देते हैं, उनके लिए बेसिक पे में बढ़ोतरी अहम हो सकती है।  कर्मचारियों के लिए क्या ज्यादा फायदेमंद है? इसका जवाब हर कर्मचारी की जरूरत और वित्तीय स्थिति पर निर्भर करता है. अगर किसी कर्मचारी का बड़ा खर्च मकान किराया, ईंधन और रोजमर्रा की जरूरतों पर होता है, तो ज्यादा भत्ते उसे तत्काल राहत दे सकते हैं. वहीं, जो कर्मचारी रिटायरमेंट के बाद की आय, पेंशन और लंबी अवधि की बचत को प्राथमिकता देते हैं, उनके लिए बेसिक पे में बढ़ोतरी अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है. बेसिक पे में बढ़ोतरी होने से रिटायरमेंट के लाभ, जैसे कि पेंशन, ग्रेच्युटी और लीव एनकैशमेंट भी बढ़ जाते हैं, क्योंकि इनकी गणना अंतिम बेसिक पे के आधार पर की जाती है।  हालांकि, केवल बेसिक पे या भत्तों को अलग-अलग देखकर फैसला करना सही नहीं होगा. कुल वेतन, लागू टैक्स नियम, पेंशन व्यवस्था, PF या NPS में योगदान और संबंधित सेवा नियमों को साथ रखकर ही दोनों विकल्पों का वास्तविक फायदा समझा जा सकता है. फिलहाल 8वें वेतन आयोग ने फिटमेंट फैक्टर या नई वेतन संरचना को अंतिम रूप नहीं दिया है. इसलिए 3 या उससे अधिक फिटमेंट फैक्टर के आधार पर बताई जा रही नई सैलरी को संभावित गणना के रूप में ही देखना चाहिए. अंतिम लाभ आयोग की सिफारिशों और सरकार के फैसले के बाद ही स्पष्ट होगा। 

MP में इंदौर–राघौगढ़ फोरलेन की शुरुआत जल्द, सफर होगा आसान; जाम से मिलेगी राहत

इंदौर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग-47 (NH-47) पर इंदौर बायपास के एमआर-10 जंक्शन से राघौगढ़ स्थित नेमावर रोड तक 26.6 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड फोरलेन कॉरिडोर का निर्माण अंतिम चरण में है।  1011 करोड़ की लागत वाली इस परियोजना से वाहन चालकों को एक अतिरिक्त मार्ग मिलेगा। इससे स्थानीय यातायात के साथ हरदा, बैतूल और नागपुर की दिशा में आने-जाने वालों को भी सुविधा मिलने की उम्मीद है। फोरलेन पर एक प्रमुख पुल, चार छोटे पुल और 19 व्हीकुलर अंडरपास बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा 27 जंक्शनों को विकसित किया जा रहा है। इन व्यवस्थाओं से स्थानीय वाहनों को सड़क पार करने और अलग-अलग दिशाओं में आने-जाने में सुविधा मिलेगी। साथ ही मुख्य मार्ग पर यातायात का प्रवाह बनाए रखने में मदद मिलेगी।   चार गांवों को सर्विस रोड का फायदा कॉरिडोर के दोनों ओर कुल 26 किलोमीटर लंबी सर्विस रोड का प्रावधान है। इससे बेगमखेड़ी, खुड़ेल खुर्द, गोगाखेड़ी और मिर्जापुर सहित आसपास के गांवों के लोगों को बेहतर संपर्क मिलेगा। ग्रामीणों और सड़क किनारे स्थित प्रतिष्ठानों तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है।   बारिश में जलभराव रोकने के इंतजाम परियोजना में करीब 16.4 किलोमीटर लंबी जल निकासी व्यवस्था के साथ पुलिया संबंधी काम भी शामिल हैं। इसका उद्देश्य बारिश के पानी की निकासी बेहतर रखना और जलभराव से सड़क को होने वाले नुकसान की आशंका कम करना है।  रात में भी सुरक्षित सफर पर जोर सड़क पर हाईवे लाइटिंग, रोड मार्किंग, रिफ्लेक्टिव स्टड और सुरक्षा दीवारों जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। इनसे रात में सड़क की दृश्यता बढ़ाने और वाहन चालकों को लेन व सड़क की सीमाएं पहचानने में मदद मिलेगी।  माल परिवहन को भी मिल सकता है फायदा इंदौर प्रदेश का प्रमुख औद्योगिक और व्यापारिक केंद्र है। नए कॉरिडोर से हरदा और बैतूल की ओर संपर्क बेहतर होने के साथ नागपुर की दिशा में जाने वाले वाहनों को भी वैकल्पिक मार्ग मिलने की उम्मीद है। इससे माल परिवहन सुगम हो सकता है और यात्रा के समय व परिचालन लागत में संभावित कमी आ सकती है। फिलहाल निर्माण अंतिम चरण में है। यातायात शुरू करने की आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की गई है। 

भारतीय रक्षा निर्यात में 1600% का उछाल, यूरोप के 13 देशों तक पहुंची सप्लाई

नई दिल्ली यूरोप में हथियारों और गोला-बारूद की बढ़ती जरूरत भारत के डिफेंस सेक्टर के लिए बड़े कारोबारी मौके लेकर आई है. रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से भारतीय कंपनियों ने यूरोपीय देशों को कम से कम 87.2 करोड़ डॉलर यानी करीब 7,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का गोला-बारूद निर्यात किया है. भारत ने फाइटर जेट या मिसाइल नहीं बेचे. इसमें तोप के गोले, मोर्टार शेल, विस्फोटक और गोला-बारूद में इस्तेमाल होने वाली दूसरी सामग्री शामिल है. व्यापार के आंकड़ों के मुताबिक, यूक्रेन युद्ध से पहले के चार साल की तुलना में यूरोप को भारत का यह निर्यात 1,600% से ज्यादा बढ़ा है. यह दिखाता है कि दुनिया के हथियार मार्केट को भारत की जरूरत है।  किसे सप्लाई कर रहा भारत ब्लूमर्ग की रिपोर्ट में Trade Data Monitor के आंकड़े दिए गए हैं. भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, युद्ध शुरू होने के बाद से यूरोप को भारतीय हथियारों और गोला-बारूद का निर्यात तेजी से बढ़ा है. युद्ध से पहले के चार साल में यह आंकड़ा 4.92 करोड़ डॉलर था, जो अब बढ़कर कम से कम 87.2 करोड़ डॉलर हो गया है. रिपोर्ट के अनुसार, इस निर्यात का करीब तीन-चौथाई हिस्सा पूर्वी और मध्य यूरोप के 13 देशों को बेचा गया है. ये वह देश हैं, जो यूक्रेन को हथियारों की आपूर्ति में अहम भूमिका निभा रहे हैं और युद्ध के बाद इनके यहां गोला-बारूद की मांग बढ़ी है. आंकड़ों के मुताबिक, इस देशों को गोले, मोर्टार, विस्फोटक और उनसे जुड़ी सामग्री की आपूर्ति करने वाले देशों में भारत अब दक्षिण कोरिया के बाद दूसरे स्थान पर है. चार साल पहले भारत इस लिस्ट में 28वें स्थान पर था।  डिफेंस कंपनियों को मिला बड़ा मौका भारत के डिफेंस निर्यात में बढ़ोतरी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत अभियान को बढ़ावा देने और आयात पर निर्भरता घटाने की नीति से भी जुड़ी है. सरकार ने अप्रैल में बताया था कि मार्च में खत्म हुए वित्त वर्ष के दौरान भारत का कुल डिफेंस निर्यात 63% बढ़कर 4 अरब डॉलर हो गया. यह आंकड़ा 2023 के मुकाबले दोगुने से ज्यादा और करीब एक दशक पहले की तुलना में लगभग 25 गुना है. इसमें वे निर्यात सौदे भी शामिल हैं, जिनको ग्रीन सिग्नल मिल चुका है, लेकिन अभी उनकी डिलीवरी नहीं हुई है।  इस बढ़ोतरी में सरकारी डिफेंस कंपनियों की अहम भूमिका है. इनमें Munitions India Ltd. शामिल है, जो भारत में गोला-बारूद बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर रवि कांत का कहना है कि घरेलू बाजार के साथ विदेशी ग्राहकों तक पहुंच बनाना कंपनी के कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी था।  रूस के साथ रिश्तों पर क्यों उठ रहा सवाल? भारत लंबे समय से रूस का प्रमुख हथियार खरीदार रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के आधे से ज्यादा लड़ाकू विमान रूसी मूल के हैं. वहीं यूरोप के ज्यादातर देश रूस को अपना दुश्मन मानते हैं. ऐसे में यूरोपीय देशों को भारतीय कंपनियों की तरफ से हथियार दिए जाने को लेकर चर्चा है. हालांकि, भारतीय अधिकारियों और रक्षा उद्योग से जुड़े लोगों ने कहा है कि इन सौदों की मुख्य वजह कारोबारी मांग है. भारत की नीति भी बड़े अंतरराष्ट्रीय संघर्षों में किसी एक पक्ष के साथ पूरी तरह खड़े होने के बजाय रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखने की रही है।  रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत सीधे यूक्रेन को हथियार भेजने की पुष्टि नहीं करता. हालांकि, यूक्रेन के सीमा शुल्क रिकॉर्ड में फरवरी 2024 में भारतीय मूल के 155 मिलीमीटर तोप के गोलों की कम से कम 78 खेप दर्ज होने का उल्लेख है, जिनका मूल्य 6.28 करोड़ डॉलर बताया गया. इन दस्तावेजों में अमेरिका की कंपनी Regulus Global LLC को निर्यातक और यूक्रेन की सरकारी कंपनी SpetsTechnoExport को आयातक बताया गया है. रिकॉर्ड यह नहीं बताते कि इन हथियारों की आगे आपूर्ति कैसे हुई। 

MP के पन्ना-सीधी जिले पहली बार रेल नेटवर्क से जुड़ेंगे, यात्रियों का इंतजार खत्म

जबलपुर स्वतंत्रता के बाद पहली बार आज शनिवार को भारतीय रेल बुंदेलखंड के पन्ना और विंध्य के सीधी जिले तक यात्रियों को लेकर पहुंचेगी। ललितपुर-सिंगरौली रेलखंड के तहत सतना-देवेंद्र नगर और रीवा-चुरहट के बीच नई रेल लाइन बनकर तैयार है। पश्चिम मध्य रेल ने यात्री ट्रेनें चलाने की तैयारियां पूरी कर ली हैं। 24 अक्टूबर को नागौद और चुरहट रेलवे स्टेशन पर नई लाइन के उद्घाटन समारोह होंगे। इसी के साथ इन पटरियों पर पहली यात्री ट्रेन को हरी झंडी दिखाई जाएगी। शुभारंभ ट्रेन के लिए उत्तर मध्य रेल (एनसीआर) से विशेष रैक मंगाया गया है, जो सतना पहुंच चुका है। रीवा-चुरहट रेलखंड पर बनी प्रदेश की अब तक की सबसे लंबी रेल सुरंग से भी उद्घाटन के साथ नियमित रेल यातायात शुरू हो जाएगा। सुरंग बनने से विंध्य के दुर्गम क्षेत्र रेल नक्शे पर जुड़ गए हैं। देवेंद्र नगर-चुरहट-देवेंद्र नगर मेमू सेवा…     ट्रेन क्रमांक- 61629 देवेंद्र नगर-चुरहट मेमू: देवेंद्र नगर से सुबह 07:00 बजे प्रस्थान, दोपहर 13:15 बजे चुरहट पहुंचेगी।     ट्रेन क्रमांक- 61630 चुरहट-देवेंद्र नगर मेमू: चुरहट से दोपहर 15:00 बजे प्रस्थान, रात 21:45 बजे देवेंद्र नगर पहुंचेगी।     15 ठहराव- फुलवारी, नागोद, बरेठिया, करही, सतना, कैमा, सकरिया, हिनौतारामबन, बघाई रोड, तुरकी रोड, रीवा, सिलपरा, गोविंदगढ़, बघवार और रामपुर नैकिन। (नोट: रविवार छोड़कर सप्ताह के बाकी छह दिनों में संचालन होगा।) नया रेलवे नेटवर्क…     167 किमी है देवेंद्र नगर से चुरहट तक रेलमार्ग की दूरी।     52 किमी का सतना-देवेंद्र नगर तक रेलखंड नया बना है।     50 किमी का सतना-रीवा तक रेलखंड पहले से चालू है।     65 किमी का रीवा-चुरहट रेलखंड हाल में निर्मित हुआ है। ये नई शुरुआत होगी…     10 नए रेलवे स्टेशन/हाल्ट यात्रियों के लिए उपलब्ध होंगे।     05 सतना-देवेंद्र नगर और पांच रीवा-चुरहट के बीच है।     08 कोच वाली मेमू ट्रेन नियमित रूप से संचालित होगी।     3.33 किमी लंबी है रीवा-चुरहट रेलखंड में छुहिया घाटी सुरंग। दोनों जगह दो-दो सांसद रहेंगे, एक जगह डिप्टी सीएम, दूसरी जगह राज्य मंत्री नागौद में आयोजित कार्यक्रम में नगरीय विकास एवं आवास राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी, खजुराहो सांसद विष्णु दत्त शर्मा और सतना सांसद गणेश सिंह उपस्थित रहेंगे। चुरहट में उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल, रीवा सांसद जनार्दन मिश्रा और सीधी-सिंगरौली सांसद डा. राजेश मिश्रा अतिथि होंगे। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव कार्यक्रम से वर्चुअली जुड़ेंगे। उनके हरी झंडी दिखाने के साथ एक शुभारंभ विशेष ट्रेन देवेंद्र नगर से सतना आएगी और दूसरी चुरहट से रीवा तक चलेगी। 25 अक्टूबर से मेमू के एक रैक के जरिए देवेंद्र नगर-चुरहट के बीच नियमित सेवा शुरू होगी। अंडरग्राउंड टनल से 10 किमी की दूरी 3.33 किमी हुई रीवा-चुरहट रेलखंड पर गोविंदगढ़ और बघवार के बीच बनी छुहिया घाटी सुरंग 3.33 किमी लंबी है। इससे घाटी का 10 किमी का घुमावदार और चढ़ाई वाला रास्ता 3.33 किमी में सिमट गया है और रेलमार्ग की दूरी सात किमी कम हुई है। सतना-देवेंद्र नगर के बाद पन्ना और रीवा-चुरहट के बाद सीधी अगला पड़ाव होगा। दोनों जिला मुख्यालयों तक इस वर्ष के अंत तक ट्रेन पहुंचाने के लक्ष्य पर काम जारी है। नई कनेक्टिविटी से यात्रियों, छात्रों, नौकरीपेशा लोगों और व्यापारियों को सुविधा मिलेगी। धार्मिक व पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होने से पर्यटन और रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा।