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बहू की पेंशन और पोती से ₹15 हजार महीने की मांग, 83 वर्षीय सास की याचिका पर कोर्ट का फैसला

तिरुवनंतपुरम
क्या सास अपनी बहू को मिल रही पेंशन में हिस्सा मांग सकती है? एक 83 साल की दादी ने न सिर्फ बहू की पेंशन में हिस्सा मांगा, बल्कि पोती से हर महीने 15,000 रुपये खर्चे के लिए भी मांगे। वह अपने दिवंगत बेटे की पत्नी को मिल रही पेंशन में भी हिस्सा मांग रही थी। मामला कोर्ट पहुंचा तो दोनों मांगों पर बड़ा फैसला आया। आखिर कोर्ट ने उनकी मांग क्यों नहीं मानी बहू को पेंशन का हिस्सा और पोती को खर्चे का पैसा देने से क्यों मना कर दिया?

क्या है पूरा मामला?
मामला 83 साल की एस. थैंकम्मा से जुड़ा है। वह केरल सरकार के फिशरीज डिपार्टमेंट (Fisheries Department) से रिटायर हुई हैं और खुद पेंशन लेती हैं। उनके पति भी फिशरीज डिपार्टमेंट में सीनियर अधिकारी रह चुके हैं और उन्हें भी पेंशन मिलती है। थैंकम्मा के बेटे टी राज कुमार की नौकरी के दौरान मौत हो गई थी। वह केरल स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड यानी KSEB में सीनियर सुप्रीटेंडेट थे।

पेंशन में मांगा बहू से हिस्सा
 रिपोर्ट के मुताबिक उनकी मौत के बाद उनकी पत्नी को विधवा फैमिली पेंशन मिलने लगी, जबकि उनकी बेटी यानी थैंकम्मा की पोती कॉलेज में पढ़ाई कर रही है। दादी ने पोती और बहू के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने 15,000 रुपये महीने के खर्चे के पैसे की मांग की। साथ ही बेटे की मौत के बाद उसकी पत्नी को मिल रही फैमिली पेंशन में भी अपना हिस्सा मांगा।

दादी को पहले ही मिले थे 12 लाख रुपये
इस मामले में कोर्ट के सामने यह भी आया कि बेटे की मौत के बाद मिलने वाले सर्विस बेनेफिट में से करीब 12.28 लाख रुपये दादी को पहले ही मिल चुके थे। यह रकम KSEB ने सीधे उन्हें दिये थे। बाकी रकम बेटे की पत्नी को मिले थे।

पोती से खर्चे का पैसा की मांग क्यों नहीं मानी?
कोर्ट ने कहा कि पोती अभी कॉलेज की छात्रा है। व
ह अपनी पढ़ाई के लिए यूनियन बैंक ऑफ इंडिया से एजुकेशन लोन लेकर पढ़ रही है। ऐसे में उससे दादी का पैसे की मांग करना उचित नहीं है। दादी की ओर से दलील दी गई थी कि सीनियिर सिटीजन एक्ट के तहत पोती को उनकी देखभाल करनी चाहिए। लेकिन कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने माना कि पढ़ाई कर रही पोती पर ऐसी आर्थिक जिम्मेदारी डालना उचित नहीं होगा। खासकर, तब जब वह खुद एजुकेशन लोन के सहारे पढ़ाई कर रही है।

पेंशन में नहीं मिल सकता हिस्सा
दादी ने बहू को मिल रही फैमिली पेंशन में भी हिस्सा मांगा था। लेकिन कोर्ट ने कहा कि सीनियर सिटीजन एक्ट में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसके आधार पर दादी को बेटे की विधवा को मिल रही फैमिली पेंशन का हिस्सा दिलाया जा सके। कोर्ट ने दोनों मांगों 15,000 रुपये महीने के हिसाब से खर्च का पैसा और फैमिली पेंशन में हिस्से को खारिज कर दिया। यानी सिर्फ उम्र अधिक होने के आधार पर पोती से खर्चे का पैसा या बहू की फैमिली पेंशन में हिस्सा मांगने का अधिकार अपने आप नहीं मिल जाता। मामले में लागू कानून और संबंधित व्यक्ति की आर्थिक स्थिति भी देखी जाती है।

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