samacharsecretary.com

बच्चों के खिलाफ यौन शोषण रिपोर्ट पर विवाद, UN में इजरायल और प्रतिनिधियों में टकराव

नई दिल्ली
संयुक्त राष्ट्र (UN) की एक बैठक में दो राजनयिकों के बीच ऐसी बहस हुई कि दोनों तू-तड़ाक पर उतर आए। न्यूयॉर्क में 'युद्ध के दौरान बच्चों के खिलाफ यौन शोषण' जैसे गंभीर विषय पर चर्चा के दौरान इजरायली राजदूत और संयुक्त राष्ट्र महासचिव की प्रतिनिधि के बीच जमकर कहासुनी हो गई। इजरायली राजदूत डैनी डेनन गुतेरस की प्रतिनिधि प्रामिला पैटन से इस्तीफा मांगने लगे तो वह भड़क गईं और उन्होंने भी जमकर सुना दिया।

रिपोर्ट में इजरायल ब्लैकलिस्ट
प्रामिला पैटन ने बच्चों के खिलाफ अपराध को लेकर एक रिपोर्ट पेश की जिसमें इजरायल को ब्लैकलिस्ट किया गया था। इजरायली राजदूत ने कहा कि यह रिपोर्ट पक्षपातपूर्ण है और जानबूझकर इजरायल का टारगेट किया जा रहा है। इजरायली राजदूत ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासचिव पहले से ही इजरायल को निशाना बनाना चाहते हैं और तुम लोग उनके सामने नतमस्तक होकर रिपोर्ट तैयार कर रहे हो।

तू-तड़ाक पर उतरे इजरायली राजदूत
गुतेरस की एक और प्रतिनिधि वानेसा फ्रेजियर ने भी अपनी रिपोर्ट में इजरायल को ब्लैकलिस्ट किया था। डेनन जब भड़क गए और तू-तड़ाक पर उतर आए तो फ्रेजियर ने कहा कि उन्हें किसी पर व्यक्तिगत तौर पर हमला नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर इजरायल को ब्लैकलिस्ट किया गया है तो इसके बाकायदा सबूत मौजूद हैं। डेनन ने कहा, तुम लोग यूएन के लिए काम करते हो और हम इसके सदस्य हैं। तुम चुप हो जाए, तुम्हारी रिपोर्ट बहुत ही शर्मनाक है।

माल्टा की पूर्व राजनयिक फ्रेजियर ने गुतेरस की तरफ से इसी सप्ताह अपनी रिपोर्ट जारी की थी। इससे पहले गुतेरस ने भी कहा था कि इजरायल ने फिलिस्तीनियों के साथ जो कुछ किया है, उसके लिए उसे ब्लैकलिस्ट किया जाएगा। उन्होंने कहा था कि इजरायल ने गाजा में बच्चों पर कहर ढाया है। हजारों बच्चे अनाथ हो गए और हजारों अपाहिज हो गए।

पिछले महीने पैटेन ने जब अपनी रिपोर्ट जारी की थी तब डेनन ने इसे नीचता बताया था। इजरायल के विदेश मंत्रालय ने यहां तक कहा था कि वह गुतेरस के साथ सारे संबंध खत्म करना चाहते हैं। गौर करने वाली बात यह है कि इन दोनों रिपोर्ट्स में इजरायल के दुश्मन हमास को भी ब्लैकलिस्ट किया गया है।

Leave a Comment

हम भारत के लोग
"हम भारत के लोग" यह वाक्यांश भारत के संविधान की प्रस्तावना का पहला वाक्य है, जो यह दर्शाता है कि संविधान भारत के लोगों द्वारा बनाया गया है और उनकी शक्ति का स्रोत है. यह वाक्यांश भारत की संप्रभुता, लोकतंत्र और लोगों की भूमिका को उजागर करता है.
Click Here
जिम्मेदार कौन
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here
Slide 3 Heading
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here