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‘ईज ऑफ डूइंग’ से पहले जरूरी ‘ईज ऑफ जस्टिस’ : प्रधानमंत्री का बड़ा बयान

नई दिल्ली
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राजधानी दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट में कानूनी सहायता वितरण तंत्र को मजबूत करने पर राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कानूनी सहायता वितरण तंत्र की मजबूती और कानूनी प्रक्रिया देश से जुड़ा ये कार्यक्रम हमारी न्यायिक व्यवस्था को नई मजबूती देगा। मैं 20वीं नेशनल कॉन्फ्रेंस की आप सभी को शुभकामनाएं देता हूं। उन्होंने कहा कि अब न्याय सबके लिए पहुंच योग्य हो गया है। अब समय से न्याय होता है और किसी भी तरह की सामाजिक या आर्थिक पृष्ठभूमि देखे बिना हर व्यक्ति तक पहुंचता है। तभी वह सामाजिक न्याय की नींव बनता है। कानूनी सहायता इस बात में बहुत बड़ी भूमिका निभाती है कि न्याय सभी के लिए पहुंच योग्य हो।

पीएम मोदी ने कहा कि 'ईज ऑफ डूइंग' और 'ईज ऑफ लिविंग' तभी संभव है जब 'ईज ऑफ जस्टिस' भी सुनिश्चित हो। पिछले कुछ सालों में 'ईज ऑफ जस्टिस' को बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं और आगे भी हम इस दिशा में तेजी लाएंगे। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता (मीडिएशन) हमेशा हमारी सभ्यता का हिस्सा रही है। नया मीडिएशन एक्ट इसी परंपरा को आगे बढ़ा रहा है, उसे आधुनिक स्वरूप दे रहा है। मुझे विश्वास है कि इस प्रशिक्षण मॉड्यूल के माध्यम से सामुदायिक मध्यस्थता के लिए ऐसे रिसोर्स तैयार होंगे, जो विवादों को सुलझाने, सद्भाव बनाए रखने और मुकदमेबाजी को कम करने में मदद करेंगे।

उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी आज समावेशन और सशक्तिकरण का माध्यम बन रही है। न्याय वितरण में ई-कोर्ट परियोजना भी इसका एक शानदार उदाहरण है। जब लोग कानून को अपनी भाषा में समझते हैं तो इससे बेहतर अनुपालन होता है और मुकदमेबाजी कम होती है। इसके साथ ही ये भी आवश्यक है कि निर्णय और कानूनी दस्तावेज को स्थानीय भाषा में उपलब्ध कराया जाए। पीएम मोदी ने कहा कि यह वाकई बहुत सराहनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने 80 हजार से अधिक जजमेंट्स को 18 भारतीय भाषाओं में अनुवाद करने की पहल की है। मुझे पूरा विश्वास है कि यह प्रयास आगे हाईकोर्ट और जिला स्तर पर भी जारी रहेगा।

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