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ED की कार्रवाई में ₹60 करोड़ से ज्यादा नकद लेनदेन के सबूत, डिजिटल डिवाइस भी जब्त

 रांची
 तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद नदीमुल हक के एक अखबार व उससे जुड़ी कंपनियों व उनके निदेशकों के विरुद्ध सात सोमवार से शुरू ईडी की छापेमारी बुधवार को समाप्त हो गई। रांची के कोकर इंडस्ट्रीयल एरिया स्थित अखबार के दफ्तर के अलावा, कोलकाता व दिल्ली स्थित नौ ठिकानों पर छापेमारी के दौरान ईडी ने मनी लांड्रिंग का साक्ष्य पाया है।

ईडी ने उक्त अखबार के बैंक खाते में पड़े 5.25 करोड़ रुपये को भी फ्रीज करवा दिया है। ईडी ने जिन ठिकानों पर छापेमारी की है, उनमें अखबार ए मशरिक प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स क्रेयांस एडवरटाइजिंग व मेसर्स मशरिक मीडिया प्राइवेट लिमिटेड के कार्यालय व टीएमसी सांस नदीमुल हक व अन्य के घर शामिल हैं।

ईडी ने विद्यानगर पुलिस कमिश्नरेट के माध्यम से उक्त अखबार व अन्य के विरुद्ध दर्ज प्राथमिकी के आधार पर जांच शुरू की थी। दर्ज प्राथमिकी में आरोप लगा था कि कंपनी अपने अखबार व इंटरनेट मीडिया, डिजिटल प्लेटफार्म के माध्यम से सांप्रदायिक अशांति फैलाने वाली सामग्री प्रकाशित व प्रसारित कर रही थी। उसके खाते में अवैध लेन-देन के भी आरोप लगे थे।

कई बैंक खातों में 60 करोड़ रुपये से ज्यादा नकद जमा होने के मिले सबूत
ईडी की जांच में पता चला कि उक्त अखबार के कर्नाटक बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, आइसीआइसीआइ बैंक व जम्मू एंड कश्मीर बैंक में कई खाते थे। उन खातों में करीब 60 करोड़ रुपये से ज्यादा नकदी जमा होने के सबूत मिले हैं।

कर्नाटक बैंक में मौजूद तीन खातों में लगभग 5.60 करोड़ रुपये नकद जमा किए गए थे। बाद में कंपनी ने उसे बंद करवा दिया था। खातों की जांच में यह भी पता चला है कि संदिग्ध स्रोतों से बिटक्वाइन खरीदने के लेनदेन भी किए गए थे। इसका कोई स्पष्ट व्यवसायिक कारण नहीं मिला है।

असल संख्या से ज्यादा बताई गई थी प्रकाशित प्रतियों की संख्या
ईडी ने जांच में पाया है कि उक्त उर्दू अखबार की छपी हुई प्रतियों की संख्या को असल संख्या से ज्यादा बताया गया था, ताकि अपने सर्कुलेशन के आंकड़ों को गलत तरीके से प्रस्तुत कर ज्यादा विज्ञापन राजस्व हासिल किया जा सके।

ईडी ने जब छापेमारी की तो मौके से कई आपत्तिजनक दस्तावेज व डिजिटल डिवाइस मिले हैं। इन सबूतों में मोबाइल, लैपटाप, हार्ड ड्राइव जब्त किए गए हैं।

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