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AISHE डाटा में गलती पर लगेगी रोक, संस्थानों को क्रॉस-वेरिफिकेशन के निर्देश

 लखनऊ
 उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने एआइएसएचई (अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण) में प्रत्येक जानकारी को मूल अभिलेखों से जांचकर ही दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।

सोमवार को राज्य स्तरीय एआइएसएचइ कार्यशाला में उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि उच्च शिक्षा से जुड़े सही और समय पर उपलब्ध आंकड़े ही नए संस्थान, शिक्षकों और संसाधनों की जरूरत तय करने का आधार बनेंगे। इसलिए में आंकड़े भरने को केवल औपचारिकता न माना जाए।

डा. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय लखनऊ में आयोजित कार्यशाला में उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाएं और नीतियां उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर बनती हैं। गलत या अधूरी जानकारी से योजना निर्माण प्रभावित हो सकता है।

विश्वविद्यालय, संबद्ध महाविद्यालयों और संस्थानों का एआइएसएचई डाटा नियमित रूप से अपडेट कराएं। कई संस्थान एआइएसएचई कोड मिलने के बाद समय पर डाटा नहीं देते, जिससे उनका स्टेटस निष्क्रिय हो सकता है और विद्यार्थियों पर असर पड़ सकता है।

पोर्टल खुलने के बाद अंतिम तिथि का इंतजार न करें। उन्होंने नामांकन, रिक्तियों, पाठ्यक्रम, परीक्षा, परिणाम और आधारभूत ढांचे की जानकारी का मूल रिकार्ड से मिलान करने और अंतिम अनुमोदन से पहले क्रास-वेरिफिकेशन और जरूरत के अनुसार रैंडम जांच के निर्देश दिए। कहा कि कोई पात्र और संचालित संस्थान प्रशासनिक लापरवाही से सर्वे से बाहर न रहे। लक्ष्य जीरो पेंडेंसी का होना चाहिए।

अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा अमित कुमार घोष ने कहा कि एआइएसएचई डाटा पूरे संस्थान की जिम्मेदारी है। विश्वविद्यालय और एआइएसएचई रिकार्ड में एकरूपता, संबद्धता सूची के मिलान और गलत या दोहरी रिपोर्टिंग रोकने के लिए अभिलेखों की जांच जरूरी है।

असामान्य बदलाव की भी समीक्षा हो। कार्यशाला के सुझावों के आधार पर एसओपी तैयार की जाएगी। उन्होंने कहा कि डाटा अपलोड करना प्रक्रिया है, जबकि उसका विश्लेषण और गैप एनालिसिस अधिक महत्वपूर्ण है।

कार्यशाला में निदेशक उच्च शिक्षा प्रो. मोनिका सिंह, आरएमएलएनएलयू के कुलपति प्रो. डा. अमर पाल सिंह, एआइएसएचइ की अपर महानिदेशक संगीता नर्मदेश्वर, रजिस्ट्रार केशव कुमार, राज्य नोडल अधिकारी प्रो. दिनेश चंद्र शर्मा और उच्च शिक्षा परिषद के अपर सचिव डा. दिनेश के. राजपूत समेत अधिकारी व विश्वविद्यालयों के नोडल अधिकारी मौजूद रहे। तकनीकी सत्र में डीसीएफ, एआइएसएचइ पोर्टल और विश्वविद्यालय-विशिष्ट समस्याओं पर चर्चा हुई।

 

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