samacharsecretary.com

मेधावी विद्यार्थियों की शिक्षा में बाधा ना बने आर्थिक अभाव : ए. श्रीजा

स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, भारत सरकार और राज्य शिक्षा केंद्र स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय मीन्स-कम-मेरिट छात्रवृत्ति योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर भोपाल में हुआ राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन
आर्थिक रूप से कमजोर प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति का लाभ दिलाने पर हुआ मंथन

भोपाल
आर्थिक अभाव के कारण किसी भी मेधावी विद्यार्थी की शिक्षा बाधित न हो, इस दिशा में राष्ट्रीय मीन्स-कम-मेरिट छात्रवृत्ति योजना (एनएमएमएसएस) देश में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों की शैक्षिक निरंतरता के लिए एक बड़ा संबल है। यह बात भारत सरकार के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की आर्थिक सलाहकार तथा भारतीय आर्थिक सेवा की अधिकारी श्रीमती ए. श्रीजा ने राजधानी भोपाल में कही।

स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, भारत सरकार और राज्य शिक्षा केंद्र स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को एक निजी होटल में राष्ट्रीय मीन्स-कम-मेरिट छात्रवृत्ति योजना (एनएमएमएसएस) विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस दौरान भारत सरकार के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की आर्थिक सलाहकार तथा भारतीय आर्थिक सेवा की वरिष्ठ अधिकारी श्रीमती ए. श्रीजा ने कहा कि अक्सर कमजोर आर्थिक स्थिति वाले परिवारों के बच्चे किशोरावस्था में ही पढ़ाई के स्थान पर आजीविका अर्जित करने की ओर ध्यान देने लगते हैं। इसके परिणामस्वरूप उनकी शिक्षा प्रभावित होती है। वहीं, छोटी-मोटी मेहनत-मजदूरी से वे न तो अपने परिवार की आर्थिक कठिनाइयों को दूर कर पाते हैं और न ही अपने भविष्य को बेहतर बना पाते हैं। ऐसे परिवारों के मेधावी विद्यार्थियों को शिक्षा से जोड़े रखने और उनकी शैक्षणिक निरंतरता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय मीन्स-कम-मेरिट छात्रवृत्ति योजना संचालित की जा रही है।

कक्षा 9 से 12 तक प्रतिवर्ष 12 हजार रुपये की छात्रवृत्ति
राज्य शिक्षा केंद्र के संयुक्त संचालक श्री प्राचीश जैन ने कहा कि राष्ट्रीय मीन्स-कम-मेरिट छात्रवृत्ति योजना भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना है। इसका प्रमुख उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के मेधावी विद्यार्थियों को कक्षा 8 के बाद उन्हें माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक स्तर तक शिक्षा जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करना है। योजना के अंतर्गत चयनित विद्यार्थियों को कक्षा 9 वीं से 12 वीं तक, निर्धारित पात्रता एवं नवीनीकरण संबंधी शर्तें पूरी करने पर, प्रतिवर्ष 12 हजार रुपये छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है। इस प्रकार पात्र विद्यार्थी अधिकतम चार वर्षों में कुल 48 हजार रुपये की छात्रवृत्ति का लाभ प्राप्त कर सकते हैं। छात्रवृत्ति की राशि सीधे विद्यार्थियों के बैंक खातों में अंतरित की जाती है।

संयुक्त संचालक श्री जैन ने कहा कि, कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पात्र एवं मेधावी विद्यार्थियों को जानकारी के अभाव, आवेदन में त्रुटियों अथवा सत्यापन में देरी के कारण छात्रवृत्ति के लाभ से वंचित न रहना पड़े। इसके लिए अधिकारियों एवं शिक्षकों को योजना की पात्रता शर्तों, आवेदन प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेजों, राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल पर पंजीयन तथा संस्थान एवं जिला स्तर पर सत्यापन की प्रक्रिया के संबंध में भारत सरकार के अधिकारियों और योजना से जुडी टीम के सदस्यों ने सहभागियों को समुचित मार्गदर्शन भी प्रदान किया है। प्रदेश में योजना के और अधिक प्रभावी क्रियान्वयन से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को आगे पढ़ने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही विद्यालयों, शिक्षकों और संबंधित अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर छात्रवृत्ति का लाभ अधिक पारदर्शी, समयबद्ध एवं प्रभावी ढंग से पात्र विद्यार्थियों तक पहुंचाने में सहायता मिलेगी।

पात्रता और चयन के प्रमुख नियम
उल्लेखनीय है कि योजना अंतर्गत शासकीय, शासकीय अनुदान प्राप्त एवं स्थानीय निकाय के विद्यालयों में कक्षा 8 में अध्ययनरत ऐसे विद्यार्थियों को लाभ प्राप्त होता है, जिनके अभिभावकों की वार्षिक आय 3.50 लाख रुपये से अधिक ना हो। साथ ही विद्यार्थी ने कक्षा 7 में न्यूनतम 55 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हों। अनुसूचित जाति एवं जनजाति के विद्यार्थियों को प्राप्तांक में 5 प्रतिशत की छूट प्रदान की जाती है। योजना के अंतर्गत विद्यार्थियों का चयन मानसिक योग्यता एवं शैक्षिक अभिरुचि परीक्षण के आधार पर राज्य स्तरीय परीक्षा के माध्यम से होता है। कार्यशाला में भारत सरकार के राष्ट्रीय स्कॉलरशिप प्रकोष्ठ की संचालक श्रीमती श्रीकला पी. वेणुगोपाल, सलाहकार श्री राघवेन्द्र खरे, मध्यप्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, योजना से जुड़े विभिन्न जिलों के नोडल अधिकारी तथा अन्य प्रतिभागी उपस्थित रहे। कार्यशाला में योजना के अंतर्गत छात्रवृत्ति से लाभान्वित चयनित विद्यार्थियों ने भी सहभागिता की। विद्यार्थियों ने अपने परिवारों की आर्थिक एवं सामाजिक परिस्थितियों को साझा करते हुए बताया कि राष्ट्रीय मीन्स-कम-मेरिट छात्रवृत्ति योजना से प्राप्त आर्थिक सहायता ने उनकी शिक्षा जारी रखने में महत्वपूर्ण सहयोग दिया है। उन्होंने छात्रवृत्ति से मिले संबल के आधार पर अपनी वर्तमान शैक्षणिक उपलब्धियों और भविष्य की तैयारियों के बारे में भी जानकारी दी।

 

Leave a Comment

हम भारत के लोग
"हम भारत के लोग" यह वाक्यांश भारत के संविधान की प्रस्तावना का पहला वाक्य है, जो यह दर्शाता है कि संविधान भारत के लोगों द्वारा बनाया गया है और उनकी शक्ति का स्रोत है. यह वाक्यांश भारत की संप्रभुता, लोकतंत्र और लोगों की भूमिका को उजागर करता है.
Click Here
जिम्मेदार कौन
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here
Slide 3 Heading
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here