samacharsecretary.com

Gold-Silver Price Crash: 10 महीने में सोने-चांदी के भाव में बड़ी गिरावट, क्या दिवाली पर निवेश का सही समय है?

 नई दिल्ली

'जब घर में पड़ा हो सोना, तो फिर काहे का रोना', भले ही ये एक विज्ञापन की लाइन है. लेकिन इसके मायने संकट में सहारे को दर्शाते हैं. वैसे भी जब-जब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संकट के बादल मंडराते हैं, महंगाई आसमान छूने लगती है, शेयर बाजारों में बिकवाली से हाहाकार मचता है, तब आम निवेशकों से लेकर बड़े-बड़े वित्तीय संस्थानों की निगाहें सोने-चांदी पर टिक जाती हैं। 

दरअसल, मौजूदा दौर ने निवेशकों को गहरी सोच में डाल दिया है. एक तरफ जहां महंगाई चरम पर है और दुनिया भर के केंद्रीय बैंक ब्याज दरें बढ़ा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सुरक्षित निवेशमाने जाने वाले सोने और चांदी की कीमतों में पिछले 10 महीनों से लगातार गिरावट और करेक्शन का सिलसिला जारी है. इसी साल जनवरी महीने में जो चांदी 4.20 लाख रुपये प्रति किलो और सोना 1.91 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर था, आज वही चांदी गिरकर 1.91 लाख रुपये के आसपास आ चुकी है. जबकि सोना 1.42 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास बना हुआ है। 

पिछले साल सोने-चांदी में एकतरफा रैली देखने को मिली थी. लेकिन पिछले 10 महीनों से जारी भारी गिरावट ने उन तमाम छोटे और बड़े निवेशकों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं, जिन्होंने हाल के दिनों में सोने-चांदी को सुरक्षित निवेश मानकर इनमें अपनी गाढ़ी कमाई झोंक दी. लेकिन अब लगातार गिरावट से निवेशक यह सोचने पर मजबूर हैं कि क्या इस संकट के दौर में सोना-चांदी फिर से सहारा बनेगा या दूरी बनाना ही बेहतर है?

इतिहास के पन्नों से…
इतिहास इस बात का गवाह है कि जब-जब दुनिया में कागजी मुद्रा, शेयर बाजार या जमीन-जायदाद के भाव गिरे हैं, तब-तब कीमती धातुओं ने निवेशकों की संपत्तियों को डूबने से बचाया है. 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान जब दुनिया भर के शेयर बाजार 50% तक टूट गए थे, तब सोने ने अगले 3 सालों में निवेशकों को 100 फीसदी से अधिक का धमाकेदार रिटर्न दिया था. साल 2020 में कोविड महामारी से जब वैश्विक अर्थव्यवस्थाएं ठप पड़ गई थीं, तब भी सोने और चांदी ने नए कीर्तिमान रचे और पोर्टफोलियो को मजबूती दी। 

जनवरी से अब तक इतनी बड़ी गिरावट क्यों?
अब सवाल उठता है कि अगर सोना और चांदी संकट के साथी हैं, तो पिछले 10 महीनों से इनमें गिरावट क्यों आ रही है? इसके पीछे मुख्य तौर पर दो कारण दिख रहे हैं।  

1. केंद्रीय बैंकों की सख्त नीतियां
दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने महंगाई को काबू में करने के लिए ब्याज दरों में लगातार बढ़ोतरी की है. जब बॉन्ड यील्ड और बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट में ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो बिना ब्याज देने वाली धातुओं की मांग में अस्थाई सुस्ती आ जाती है. खासकर अमेरिका और यूरोप में महंगाई बढ़ने से केंद्रीय बैंक सख्त फैसले ले रहे हैं। 

2. मुनाफावसूली भी अहम कारण
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना और चांदी का कारोबार अमेरिकी डॉलर में होता है. डॉलर के मजबूत होने से अन्य देशों की मुद्राओं में कीमती धातुओं की खरीदारी महंगी और मांग सुस्त हो जाती है. जनवरी 2026 में जब कीमतें अपने रिकॉर्ड स्तर पर थीं, तब बड़े संस्थागत निवेशकों ने भारी मुनाफावसूली की, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ा. हालिया करेक्शन ने यह साबित कर दिया है कि बाजार चाहे कोई भी हो, एकतरफा तेजी कभी नहीं चलता. क्योंकि पिछले साल देखते ही देखते चंद महीनों में ही सोने-चांदी के भाव डबल हो गए थे। 

क्या ये गिरावट खरीदारी का मौका?
बाजार के जानकारों का मानना है कि सोने-चांदी में आई यह गिरावट कोई संकट का संकेत नहीं है, बल्कि यह एक तकनीकी करेक्शन है. ऑल-टाइम हाई से चांदी में करीब 54% तक का करेक्शन हो चुका है. तकनीकी रूप से बाजार इस समय अत्यधिक बिकवाली की स्थिति में है. चांदी सिर्फ गहनों या सिक्कों की चीज नहीं है. यह सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) और इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री की रीढ़ है. आने वाले समय में ग्रीन एनर्जी और ई-व्हीकल्स की बढ़ती मांग के कारण चांदी में लंबी अवधि का ढांचागत उभार तय माना जा रहा है। 

वर्तमान दौर में फिर निवेशक क्या करें?
कीमतों में बॉटम पकड़ना लगभग असंभव है. अगर आप इस आर्थिक अनिश्चितता के दौर में सोना और चांदी को अपने पोर्टफोलियो का सहारा बनाना चाहते हैं, तो एकमुश्त पैसा लगाने के बजाय व्यवस्थित रणनीति को अपनाएं. अपने पोर्टफोलियो में 15% हिस्सा कीमती धातुओं में रखें. इसमें 70% हिस्सा सोने में और 30% हिस्सा चांदी में रखना एक संतुलित रणनीति मानी जाती है। 

एकमुश्त निवेश से बचें. हर महीने या हर बड़ी गिरावट पर सिल्वर ETF या गोल्ड म्यूचुअल फंड में SIP के जरिए खरीदारी करें. अगर आपको 1 लाख रुपये निवेश करना है, तो अभी 25% लगाएं, और बाकी 75% रकम को अगले 6 से 8 महीनों की किस्तों में विभाजित करें। 

क्या सोना-चांदी फिर सहारा बनेगा?
इतिहास अपने आप को दोहराता है. इस गिरावट के बीच चीन समेत दुनिया के तमाम बड़े देश सोना खरीद रहे हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि मौजूदा गिरावट एक मौका भी है. आर्थिक अनिश्चितता, शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव और महंगाई के इस दौर में सोना पोर्टफोलियो को स्थिरता प्रदान करेगा, वहीं चांदी सही समय पर तेज रिकवरी करके आपके पोर्टफोलियो को बेहतर रिटर्न देने का काम करेगी। 

हालांकि इतिहास केवल दिलासा दे सकता है, मौजूदा पोर्टफोलियो के नुकसान की भरपाई नहीं कर सकता. फिलहाल निवेशक डरे हुए हैं, क्योंकि वैश्विक हालात थोड़े अलग हैं. परंतु इस गिरावट में घबराकर  अपनी होल्डिंग बेचना या इनसे तौबा करना एक बड़ी भूल होगी. क्योंकि महंगाई की मार से बचने का इससे बेहतर और पुराना कोई हथियार आज भी नहीं है। 

कुछ वित्तीय जानकार कहते हैं कि सोने-चांदी में पिछले 10 महीनों से जारी गिरावट कोई आपदा नहीं, बल्कि बाजार की तरफ से समझदार निवेशकों के लिए दिया गया एक डिस्काउंट ऑफर है, बस जरूरत है तो डरने के बजाय धैर्य रखने और सही रणनीति के साथ कदम बढ़ाने की। 

Leave a Comment

हम भारत के लोग
"हम भारत के लोग" यह वाक्यांश भारत के संविधान की प्रस्तावना का पहला वाक्य है, जो यह दर्शाता है कि संविधान भारत के लोगों द्वारा बनाया गया है और उनकी शक्ति का स्रोत है. यह वाक्यांश भारत की संप्रभुता, लोकतंत्र और लोगों की भूमिका को उजागर करता है.
Click Here
जिम्मेदार कौन
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here
Slide 3 Heading
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here