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बिहार के सरकारी स्कूलों का होगा कायाकल्प, स्मार्ट क्लास से रोबोटिक्स लैब तक सुविधा

 पटना
बिहार के सरकारी स्कूल प्राइवेट स्कूलों को टक्कर देंगे। सम्राट सरकार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने बताया है कि हर जिले में बच्चों को अब अत्याधुनिक और उन्नत शैक्षणिक परिवेश उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए सभी 38 जिले में कम से कम एक स्कूल को ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ के रूप में विकसित किया जाएगा। ऐसे स्कूलों में छात्रों को राष्ट्रीय स्तर के निजी स्कूलों जैसी सुविधाएं मिलेंगी। शिक्षा विभाग ने इसकी विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर ली है, जिसमें पुराने और प्रतिष्ठित विद्यालयों को आधुनिक बुनियादी ढांचे, डिजिटल क्लासरूम, उन्नत प्रयोगशालाओं और खेल-कूद की बेहतर सुविधाओं से लैस किया जाएगा।

विभाग की और से तैयार की गई कार्य योजना के अनुसार राज्य के चुनिंदा उच्च और उच्च माध्यमिक स्कूलों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में अपग्रेड किया जाएगा। इसमें पुराने, प्रतिष्ठित और बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यालयों को प्राथमिकता दी जाएगी। इन विद्यालयों में कॅरियर ओरिएंटेड सारे विकल्प मौजूद होंगे। यहां छात्रों को कॅरियर की सभी संभावनाओं के लिए तैयार किया जाएगा। विज्ञान व तकनीक आधारित शिक्षा पर फोकस होगा, जिसके तहत रोबोटिक्स, कोडिंग, एआई की जानकारी दी जाएगी। बच्चों के खेल कॅरियर पर भी ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा कला और संस्कृति को भी समान रूप से महत्व दिया जाएगा। इसी तरह बच्चों का व्यावसायिक कौशल विकसित करने की ‌विशेष योजना है। उन्हें डिजिटल स्किल, कम्युनिकेशन और लीडरशिप ट्रेनिंग मिलेगी।

सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में ये होगा खास
● बुनियादी ढांचा: स्कूल भवन, कक्षाएं, प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, शौचालय, पेयजल और खेल मैदान को बेहतर बनाया जाएगा

● डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर: आईसीटी लैब, कंप्यूटर, प्रोजेक्टर, इंटरनेट और स्मार्ट क्लासरूम की व्यवस्था की जाएगी

● शिक्षण सामग्री: डिजिटल शिक्षण सामग्री के जरिए पढ़ाई को अधिक रोचक और व्यावहारिक बनाया जाएगा

● क्विज और प्रतियोगिताएं: इन स्कूलों में छात्रों के बीच क्विज, स्पोर्ट्स और सांस्कृतिक प्रतियोगिताएं नियमित आयोजित कराई जाएंगी

पुराने स्कूल को एक्सीलेंस चुनने पर अनेक चुनौतियां
यह योजना काफी महत्वाकांक्षी है। हालांकि पुराने स्कूलों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में बदलने में चुनौतियां कम नहीं हैं। सबसे बड़ी समस्या बुनियादी ढांचे की कमी है। कई पुराने विद्यालयों में पर्याप्त जगह नहीं है। इससे नई लैब या स्मार्ट क्लासरूम बनाना मुश्किल होगा। बिहार के स्कूलों में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर अभी भी कमजोर है। सिर्फ 24 फीसदी स्कूलों में कंप्यूटर और 85 फीसदी विद्यालयों में इंटरनेट है।

इसी प्रकार तकनीकी और मानव संसाधन को लेकर भी बड़ी परेशानी है। प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी सबसे बड़ी बाधा है। खासकर आईसीटी और रोबोटिक्स जैसे विषयों में विशेषज्ञ शिक्षकों को भारी कमी है। उधर, पुराने शिक्षकों को नई तकनीक से जोड़ने के लिए निरंतर प्रशिक्षण की आवश्यकता है, जो बेहद कठिन कार्य है। इसके अलावा पर्याप्त धनराशि की व्यवस्था भी एक समस्या है। सेंटर ऑफ एक्सलेंस के लिए सामाजिक और भौगोलिक चुनौतियां तथा बेहतर शैक्षणिक वातावरण बनाना भी बड़ी चुनौती होगी। छात्रावास की व्यवस्था भी एक प्रमुख समस्या हो सकती है।

डिजिटल, तकनीकी सुविधाएं
● स्मार्ट क्लासरूम: इंटरएक्टिव पैनल और स्मार्ट बोर्ड से लैस कक्षाएं

● आईसीटी लैब: इस स्कूलों में आईसीटी लैब की स्थापना का अलग से प्रावधान किया गया है

● कंप्यूटर लैब: आधुनिक हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर से सुसज्जित कंप्यूटर
प्रयोगशाला

● इनोवेशन लैब: अटल टिंकरिंग लैब या इनोवेशन लैब की स्थापना की योजना

● रोबोटिक्स लैब: इन स्कूलों को रोबोटिक्स लैब और एस्ट्रोनॉमी किट से लैस करने की योजना है

● हाई-स्पीड इंटरनेट: वाई-फाई कनेक्टिविटी और डिजिटल लाइब्रेरी की व्यवस्था होगी

शैक्षणिक सुविधाएं
उन्नत प्रयोगशालाएं: भौतिकी, रसायन, जीव विज्ञान, गणित और कंप्यूटर विज्ञान की सुसज्जित लैब

पुस्तकालय: विस्तृत संग्रह वाली लाइब्रेरी, डिजिटल संसाधन और शांत अध्ययन कक्ष

ऑडियो-विजुअल सुविधाएं: प्रोजेक्टर, स्कैनर और मल्टीमीडिया सिस्टम।

अन्य सुविधाएं
लड़कियों के लिए विशेष सुविधाएं: उचित शौचालय, पेयजल और सुरक्षा व्यवस्था।

पोषण कार्यक्रम: कुछ स्कूलों में प्रयोग के तौर पर शेफ-क्यूरेटेड न्यूट्रिशन प्रोग्राम होंगे।

हाइजेनिक कैंपस: स्वच्छ और आधुनिक परिसर

खेल मैदान: फुटबॉल, क्रिकेट, बास्केटबॉल, वॉलीबॉल, बैडमिंटन और टेनिस की सुविधा।

इंडोर स्पोर्ट्स हॉल: टेबल टेनिस और अन्य इनडोर गेम्स।

स्विमिंग पूल: कुछ प्रमुख केंद्रों में तापमान नियंत्रित स्विमिंग पूल।

योग और फिटनेस सेंटर: जिम और योग रूम

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