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ग्वालियर हाईकोर्ट सख्त: शिवपुरी की डाटा एंट्री ऑपरेटर भर्ती निरस्त, अधिकारियों पर जुर्माना

ग्वालियर

 MP हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने शिवपुरी में निकाली गई डाटा एंट्री ऑपरेटर भर्ती प्रक्रिया में अनियमितता पाते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। आनंद सिंह बहारावत की एकलपीठ ने योगेश कुमार कुशवाह की याचिका पर सुनवाई करते हुए 26 सितंबर 2014 को जारी भर्ती विज्ञापन को रद कर दिया। उसके आधार पर हुई सभी नियुक्तियों को भी निरस्त कर दिया है।

याचिकाकर्ता की ओर से क्या दी गई दलील

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता जय प्रकाश कुशवाह ने दलील दी कि यह विज्ञापन राज्य सरकार के 11 सितंबर 2014 के आदेश के आधार पर जारी किया गया था, लेकिन भर्ती प्रक्रिया को 14 जुलाई 2011 के लोक सेवा प्रबंधन विभाग के सर्कुलर के अनुसार होना था। इस सर्कुलर में केवल स्नातक योग्यता और मेरिट के आधार पर चयन का प्रविधान था, जबकि शिवपुरी प्रशासन ने नियमों के खिलाफ जाकर न्यूनतम 60 प्रतिशत अंक की शर्त जोड़ दी और विषय संबंधी शर्तों का भी सही पालन नहीं किया, जिससे कई योग्य उम्मीदवार आवेदन से वंचित हो गए।

तीन महीने के भीतर नया विज्ञापन जारी करने का आदेश

राज्य की ओर से शासकीय अधिवक्ता रिंकेश गोयल ने विज्ञापन का समर्थन किया, लेकिन कोर्ट ने रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद पाया कि अतिरिक्त कलेक्टर, शिवपुरी ने निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया और गलत तरीके से विज्ञापन जारी किया। इस आधार पर कोर्ट ने कलेक्टर, शिवपुरी को निर्देश दिए कि वे तीन महीने के भीतर नियमों के अनुसार नया विज्ञापन जारी करें और संबंधित दोषी अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई भी करें।

आयु सीमा के आधार पर खारिज नहीं होग आवेदन

कोर्ट ने यह भी माना कि प्रशासन की गलती के कारण याचिकाकर्ता योगेश कुमार कुशवाह भर्ती प्रक्रिया में शामिल नहीं हो सके, इसलिए जब नई भर्ती निकलेगी तो उनके आवेदन को आयु सीमा के आधार पर खारिज नहीं किया जाएगा। साथ ही, हाई कोर्ट ने प्रशासन की लापरवाही को गंभीर मानते हुए याचिकाकर्ता को 1.50 लाख रुपये का मुआवजा देने और 25 हजार रुपये नगर निगम ग्वालियर के स्वच्छता फंड में जमा कराने का आदेश दिया। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह कुल 1.75 लाख रुपये की राशि बाद में संबंधित दोषी अधिकारी से वसूली जा सकती है।

 

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