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हरीश राणा का निधन: पिता का वो दिल छूने वाला आखिरी मैसेज, जिसने आंखों में आंसू ला दिए

  गाजियाबाद

कभी जिंदगी से भरे सपनों के साथ इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने निकले हरीश राणा की सांसें मंगलवार को गहरे सन्नाटे में बदल गई. 13 साल तक कोमा में रहने के बाद हरीश ने आखिरकार दुनिया को अलविदा कह दिया. आज सुबह उनका अंतिम संस्कार भी कर दिया गया. उनके जाने की खबर पिता अशोक राणा ने जैसे सोसाइटी के व्हाट्सऐप ग्रुप में जैसे ही दी लोगों की आंखें भर आईं. उन्होंने लिखा- सुबह 9 बजे पार्थिव शरीर (हरीश राणा जी) का अंतिम संस्कार ग्रीन पार्क, साउथ दिल्ली में किया जाएगा… ॐ शांति ॐ…

 उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के राजनगर एक्शटेंशन निवासी हरीश राणा का 13 सालों का इंतजार आखिरकार खत्म हुआ। जीवन-मृत्यु के बीच झूल रहे 32 वर्षीय युवक ने मंगलवार शाम दिल्ली एम्स में आखिरी सांस ली। सुप्रीम कोर्ट की ओर से 11 मार्च को इच्छामृत्यु की अनुमति दिए जाने के बाद हरीश को एम्स में भर्ती कराया गया था। वहां पर दर्दरहित मृत्यु की प्रक्रिया को पूरा कराया गया। जीवनरक्षक उपकरणों को हटाए जाने के बाद उन्होंने आखिरी सांस ली। बुधवार सुबह दिल्ली के ग्रीन पार्क स्थित श्मशान घाट में हरीश राणा का पार्थिव शरीर पहुंचा। हिंदू रीति रिवाज और ब्रह्माकुमारी के रिवाजों के साथ अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू हुई है।

राज एम्पायर सोसायटी में रहते थे हरीश
हरीश राणा गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन स्थित राज एम्पायर सोसाइटी में रहने थे। हरीश राणा की मंगलवार को एम्स में इच्छामृत्यु के बाद सोसायटी में गमगीन माहौल रहा। सोसायटी में रहने वाले लोगों को जैसे ही हरीश की मृत्यु की सूचना मिली, सभी भावुक हो गए। सोसायटी के लोगों ने परिवार के प्रति संवेदना जताई। सोसायटी के वॉट्सऐप ग्रुप में सुबह 9 बजे अंतिम संस्कार की सूचना में बाद मंगलवार की शाम ही लोगों ने तैयारियां कीं। हरीश के अंतिम संस्कार में सोसायटी से बड़ी संख्या में महिलाएं भी पहुंचीं।

हिमाचल के रहने वाले थे हरीश
हरीश राणा का परिवार मूल रूप से हिमाचल प्रदेश का रहने वाला है। हरीश राणा के पिता अशोक राणा मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के प्लेटा गांव के रहने वाले हैं। अशोक राणा वर्ष 1989 में दिल्ली आए। वह मुंबई के एक नामी होटल में शेफ का काम किया। 2013 में बेटे हरीश के साथ चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में दुर्घटना के बाद उन्होंने दिल्ली आकर परिवार की जिम्मेदारी संभाली। चंडीगढ़ में हादसे के बाद से हरीश कोमा में चले गए।

वेजिटेटिव स्टेट में गए हरीश के इलाज की काफी कोशिश की गई, लेकिन वे ठीक नहीं हुए। हरीश के इलाज में अशोक राणा ने दिल्ली वाला घर बेच दिया। राज एम्पायर सोसायटी में आकर रहने लगे। घर चलाने के लिए अशोक राणा ने आसपास के इलाकों में सैंडविच बनाकर बेचना शुरू किया।

11 को आया फैसला
13 सालों के अथक इंतजार के बाद भी हरीश के ठीक नहीं होने पर अशोक राणा ने सुप्रीम कोर्ट में बेटे के लिए इच्छामृत्यु की मांग वाली याचिका दायर की। सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च को हरीश को इच्छा मृत्यु की अनुमति दी। 14 मार्च को एम्स में इच्छा मृत्यु की आगे की प्रक्रिया के लिए भर्ती कराया गया था। वहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में इच्छा मृत्यु की प्रक्रिया हुई। मंगलवार दोपहर को कोमा में चल रहे हरीश राणा ने अंतिम सांस ली।

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