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राशिफल 26 मार्च 2026: मेष से मीन तक, जानें आज का दिन किसके लिए होगा शुभ

मेष 26 मार्च के दिन अपने साथी के साथ समय बिताते हुए अपनी भावनाओं को साझा करें। दफ्तर में उत्पादक बनें और सभी सौंपे गए काम पूरे करें। लंबी दूरी की यात्रा करते समय, मेडिकल किट तैयार रखें। खर्च पर कंट्रोल रखना महत्वपूर्ण है। वृषभ 26 मार्च के दिन पार्टनर से बहस करने से दूर रहें। काम पर ध्यान केंद्रित करें। ध्यान रखें कि आप अपनी बेस्ट परफॉर्मेंस दें। पैसे को फालतू न उड़ाएं। छोटी-मोटी स्वास्थ्य समस्या भी हो सकती है। मिथुन 26 मार्च के दिन धन विभिन्न स्रोतों से आएगा। हर बदलाव को आत्मविश्वास के साथ संभालें। आज के दिन आपको सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे। अपने खान-पान के प्रति सचेत रहना चाहिए। कर्क 26 मार्च के दिन प्रोफेशनल स्किल्स साबित करने के लिए कई अवसर सामने आएंगे। रोमांटिक डिनर या सरप्राइज गिफ्ट रिश्ते को मजबूत बनाने का एक आसान तरीका है। आज नई साझेदारी पर हस्ताक्षर कर सकते हैं, जिससे धन प्राप्त होगा। सिंह 26 मार्च के दिन रोमांटिक रूप से, आज आप भाग्यशाली रहेंगे। व्यावसायिकता कार्यालय में सफलता सुनिश्चित करती है। आज धन और स्वास्थ्य दोनों अच्छी स्थिति में हैं। कोई बड़ी समस्या आपको परेशान नहीं करेगी। कन्या 26 मार्च के दिन लव लाइफ में शांति बनाए रखें। अपने पार्टनर को बहस से दूर रखें। ऑफिस के मामलों में भावनाओं को हावी न होने दें। आज आपका स्वास्थ्य भी उत्तम रहने वाला है। प्रेम संबंधों को बनाए रखने के लिए रिश्तों से जुड़ी समस्याओं को सुलझाएं। तुला 26 मार्च के दिन ऑयली या जंक फूड्स से ज्यादा सेहतमंद खाना खाएं। रिश्ते में अपनी ईमानदारी जारी रखें। कोई बड़ी पेशेवर बाधा आपके प्रदर्शन को प्रभावित नहीं करेगी। वित्तीय रूप से आप शेयर में निवेश करने के लिए समृद्ध हैं लेकिन एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें। वृश्चिक 26 मार्च के दिन आप अपने रोमांटिक जीवन में प्रॉब्लम्स का पता लगाएं। लाइफ में बैलेंस बनाए रखें। प्रोफेशनल जीवन में चुनौतियां मौजूद रहेंगी, लेकिन आज धन और सेहत दोनों सकारात्मक रहेंगे। धनु 26 मार्च के दिन बात करते समय आपको सावधान रहना चाहिए। आपको पिछले इन्वेस्टमेंट से धन प्राप्त हो सकता है। सावधानी से वाहन चलाएं, खासतौर पर शाम के समय। सट्टेबाजी के कारोबार में निवेश न करें। मकर 26 मार्च के दिन आप डेडलाइन वाले महत्वपूर्ण टास्क भी पूरा कर सकते हैं। छोटी-मोटी फाइनेंशियल प्रॉब्लम्स हो सकती हैं। कुछ महिला जातक पुराने रिश्ते की ओर लौट सकती हैं, जिससे उन्हें खुशी मिल सकती है। कुंभ 26 मार्च के दिन ऑफिस में नई जिम्मेदारियां आपको बिजी रखेंगी। स्वास्थ्य और धन दोनों ही पॉजिटिव रहेंगे। कुछ छोटे-मोटे प्रोफेशनल मुद्दे हो सकते हैं, जो आपकी प्रोडक्टिविटी को गंभीर रूप से प्रभावित करेंगे। मीन 26 मार्च के दिन प्रेम जीवन को नॉर्मल बनाए रखें। कोई बड़ी प्रोफेशनल चुनौती आज के दिन को प्रभावित नहीं करेगी। डिटेल्स पर ध्यान दें। आर्थिक रूप से आज आपको सावधान रहने की जरूरत है।

जल संरक्षण और जनकल्याण को दी सर्वोच्च प्राथमिकता

भोपाल  मंत्री  टेटवाल ने सारंगपुर में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में विकास कार्यों, आधारभूत संरचना, जल संरक्षण और जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रगति का समग्र मूल्यांकन किया। बैठक में विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली की विभागवार समीक्षा करते हुए प्रशासनिक दक्षता, समयबद्धता और गुणवत्ता को केंद्र में रखने के निर्देश दिए गए। मंत्री  टेटवाल ने स्पष्ट कहा कि विकास कार्य केवल स्वीकृतियों तक सीमित न रहें, बल्कि धरातल पर परिणाम दिखाई दें। सभी निर्माण कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण हों, पूर्ण परियोजनाओं का त्वरित हस्तांतरण हो और उनका प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने दोहराया कि लापरवाही या अनावश्यक विलंब की स्थिति में जवाबदेही तय की जाएगी। जल संरक्षण को दी रणनीतिक दिशा जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत संचालित जल संरचनात्मक कार्यों की समीक्षा करते हुए मंत्री  गौतम टेटवाल ने वर्षा जल संचयन, नाला उपचार और भू-जल संवर्धन से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता से पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण को जनांदोलन का स्वरूप देना आवश्यक है, जिससे दीर्घकालीन जल सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। नदियों के पुनर्जीवन और श्रमदान आधारित पहलों में व्यापक जनसहभागिता पर बल दिया गया। निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और अनुशासन पेयजल, शिक्षा एवं अन्य आधारभूत परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए मंत्री  टेटवाल ने लंबित कार्यों को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि अधूरे या विलंबित कार्य जनता के विश्वास को प्रभावित करते हैं, इसलिए गुणवत्ता और समयबद्धता दोनों पर समान रूप से ध्यान दिया जाए। आवश्यकता होने पर संबंधित एजेंसियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्यवाही सुनिश्चित करने को कहा गया। कृषि और पर्यावरणीय संतुलन पर विशेष फोकस प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने, किसानों को प्रशिक्षण उपलब्ध कराने और पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियों के विस्तार पर जोर दिया गया। नरवाई जलाने पर रोक के लिए प्रभावी जागरूकता अभियान संचालित करने और निगरानी तंत्र को सुदृढ़ करने के निर्देश दिए गए। ‘हरित सारंगपुर’ के लक्ष्य के अंतर्गत व्यापक पौधारोपण को सामाजिक दायित्व के रूप में अपनाने का आह्वान किया गया। जनसेवाओं की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश बैठक में विद्युत, स्वास्थ्य और पेयजल सेवाओं की समीक्षा करते हुए आवश्यक संस्थानों में निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने पर बल दिया गया। स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने तथा टीकाकरण जैसे अभियानों को गति देने के निर्देश दिए गए। ग्रीष्मकालीन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए पेयजल स्रोतों की मरम्मत, संरक्षण और वैकल्पिक व्यवस्थाओं की अग्रिम तैयारी सुनिश्चित करने को कहा गया। साथ ही आगामी सामूहिक विवाह एवं निकाह कार्यक्रम की तैयारियों की समीक्षा कर सभी व्यवस्थाएं गरिमापूर्ण और सुव्यवस्थित रूप से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मंत्री  गौतम टेटवाल ने कहा कि शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना प्रशासन की मूल प्रतिबद्धता है। उन्होंने अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे समन्वित, पारदर्शी और परिणाम आधारित कार्यसंस्कृति के माध्यम से विकास की गति को स्थायी और प्रभावी स्वरूप दें।   

रामनवमी पर बदल जाता है हजारीबाग का रंग, चौक-चौराहों के नाम भी हो जाते हैं खास

हजारीबाग झारखंड के हजारीबाग में मनाई जाने वाली रामनवमी पूरे देश में अपनी अनोखी परंपरा के लिए जानी जाती है। यहां इस पर्व के दौरान पूरे शहर का रूप ही बदल जाता है, जिससे यह अयोध्या की झलक देता है। जिले में रामनवमी का त्योहार बहुत खास तरीके से मनाया जाता है। इस दौरान शहर के अलग-अलग मोहल्लों, चौक-चौराहों और सड़कों के नाम बदल दिए जाते हैं। इन जगहों को नए धार्मिक नाम दिए जाते हैं, जो अयोध्या के स्थानों से प्रेरित होते हैं। रामनवमी के समय शहर के कई प्रमुख चौक नए नामों से जाने जाते हैं। जैसे जादो बाबू चौक को परशुरामगढ़, कुआं चौक को भारतगढ़, झंडा चौक को दशरथगढ़, पंच मंदिर चौक को कृष्णगढ़, गोल चौक को अभिमन्युगढ़, ग्वालटोली चौक को नारायणगढ़ और सुभाष मार्ग को अंगदगढ़ कहा जाता है। इन नए नामों के बोर्ड भी लगाए जाते हैं। खास बात यह है कि रामनवमी जुलूस के दौरान लोग इन जगहों को उनके पुराने नाम से नहीं, बल्कि इन्हीं नए धार्मिक नामों से पुकारते हैं। इससे पूरा शहर एक धार्मिक माहौल में बदल जाता है। यह परंपरा कोई नई नहीं है, बल्कि करीब 100 साल से चली आ रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, हजारीबाग के राम भक्त इस शहर को अयोध्या के रूप में देखते हैं। इसी वजह से यहां के चौक-चौराहों का नाम अयोध्या की तर्ज पर रखा जाता है। रामनवमी के मौके पर लाखों श्रद्धालु सड़कों पर निकलते हैं और भव्य जुलूस निकालते हैं। इस पूरे आयोजन की जिम्मेदारी रामनवमी महासमिति और अन्य समितियों की होती है, जो हर साल इसे और भव्य बनाने का काम करती हैं। आज भी यह परंपरा उतनी ही जोश और आस्था के साथ निभाई जा रही है। नई पीढ़ी भी इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही है। यही वजह है कि हजारीबाग की रामनवमी देशभर में एक अलग पहचान रखती है।  

बस्तर के नन्हे ललित की आंखों में लौटी रोशनी जिला अस्पताल में हुआ जन्मजात मोतियाबिंद का सफल ऑपरेशन

रायपुर जिला अस्पताल में हुआ जन्मजात मोतियाबिंद का सफल ऑपरेशन बस्तर के नौ वर्षीय बालक ललित मौर्य के जीवन में अब खुशियों का एक नया सवेरा हुआ है। जिले के विकासखंड बस्तर के अंतर्गत ग्राम पंचायत नदीसागर के आश्रित ग्राम पराली का निवासी ललित जन्म से ही मोतियाबिंद जैसी गंभीर समस्या से जूझ रहा था। इस जन्मजात विकार के कारण वह दुनिया की खूबसूरती देखने में पूरी तरह असमर्थ था और उसका बचपन अंधेरे के साये में बीत रहा था। हालांकि ललित के मोतियाबिंद की पहचान पूर्व में ही हो गई थी, लेकिन सर्जरी को लेकर मन में बैठे डर और संशय के कारण उसके परिजन ऑपरेशन के लिए तैयार नहीं हो रहे थे।       ललित के उजाले की ओर बढ़ने का सफर 20 मार्च को बस्तर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आयोजित दिव्यांग सशक्तिकरण शिविर से शुरू हुआ, जहाँ वह दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाने पहुँचा था। कलेक्टर  आकाश छिकारा की पहल पर आयोजित इस विशेष शिविर में स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान नेत्र विशेषज्ञों ने ललित की स्थिति को समझा। इस दौरान पलारी के नेत्र सहायक अधिकारी  अनिल नेताम ने विशेष सक्रियता दिखाते हुए परिजनों को ऑपरेशन के महत्व के बारे में विस्तार से समझाया। उनके अथक प्रयासों और निरंतर दी गई समझाइश का ही परिणाम था कि परिजन अंततः सर्जरी के लिए राजी हुए, जिसके बाद ललित को तत्काल बेहतर उपचार के लिए जिला अस्पताल रेफर किया गया।        कलेक्टर बस्तर  आकाश छिकारा के विशेष दिशा-निर्देशों के अनुरूप स्वास्थ्य विभाग ने तत्परता दिखाते हुए इस केस को प्राथमिकता दी। मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सेवा योजना और जिला प्रशासन के कुशल समन्वय से 24 मार्च को जिला महारानी अस्पताल जगदलपुर में डॉ सरिता थॉमस द्वारा ललित का सफल मोतियाबिंद ऑपरेशन संपन्न हुआ। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय बसाक, सिविल सर्जन डॉ. संजय प्रसाद और जिला कार्यक्रम प्रबंधक कुमारी रीना लक्ष्मी के मार्गदर्शन में मेडिकल टीम ने इस चुनौतीपूर्ण सर्जरी को अंजाम दिया।       इस पुनीत कार्य में नेत्र सहायक अधिकारी कुमारी दिव्या पाण्डे,  सुंकर अमृत राव,  देवकरण व्यास सहित वार्ड इंचार्ज मती अन्नपूर्णा साहू और स्टाफ नर्स मती स्मृता कच्छ व नमिता मौर्य का महत्वपूर्ण योगदान रहा। साथ ही ऑपरेशन थिएटर में सहायक  डोलेश्वर जोशी की सक्रियता ने इस पूरी प्रक्रिया को सुगम बनाया। ऑपरेशन के बाद जब ललित की आंखों से पट्टी हटाई गई, तो उसके चेहरे पर आई चमक ने पूरी मेडिकल टीम की मेहनत को सफल कर दिया। अब ललित न केवल अपनी आंखों से दुनिया को देख पा रहा है, बल्कि अपने परिजनों और आसपास की वस्तुओं को स्पष्ट रूप से पहचानने भी लगा है। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की इस संवेदनशीलता ने एक मासूम के जीवन से अंधेरा मिटाकर एक परिवार के घर में उम्मीद का दीया जला दिया है।  

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को मिली अग्रिम जमानत, यौन शोषण मामले में कोर्ट का फैसला

प्रयागराज यौन शोषण के मामले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी को इलाहाबाद हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुकुंदनंद ब्रह्मचारी को यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत उनके खिलाफ दर्ज मामले में अग्रिम जमानत दे दी। यह आदेश न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा ने अविमुक्तेश्वरानंद और मुकुंदानंद की अग्रिम जमानत याचिका पर दिया है। कोर्ट ने शिकायतकर्ता और याची दोनों को इस संबंध में मीडिया के सामने कोई बयान नहीं देने का निर्देश भी दिया है। आपको बता दें कि आशुतोष ब्रह्मचारी की अर्जी पर विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट के आदेश के क्रम में अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ प्रयागराज के झूंसी थाने में पॉस्को एक्ट व बीएनएस की धाराओं में मुकदमा दर्ज़ किया गया। इस पर गिरफ्तारी से बचने के लिए अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल की गई है। पॉक्सो एक्ट की विशेष अदालत के आदेश पर झूंसी थाने में अविमुक्तेश्वरानंद व उनके शिष्य मुकुंदानंद समेत तीन अज्ञात के खिलाफ दर्ज मुकदमे की विवेचना के क्रम में पुलिस ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वालों का मेडिकल परीक्षण करवाया। पुलिस ने मेडिकल परीक्षण कराने की बात स्वीकार की। पुलिस सूत्रों का कहना है कि उम्र के साथ उनके द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोप से संबंधित जांच भी की गई है। पुलिस के मुताबिक इस बारे में अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी क्योंकि इस परीक्षण के बाद अभी फोरेंसिक जांच होना बाकी है, निष्कर्ष उसी से निकाला जा सकता है। पुलिस ने बताया कि गुरुवार को ही दोनों का मजिस्ट्रेट के सामने कलमबंद बयान भी हुआ है, जिसके बाद दोनों प्रयागराज से वापस चले गए। बयान में क्या निकला, इस बारे में अधिकृत तौर पर कोई भी कुछ बोलने को तैयार नहीं है। फॉरेंसिक एक्सपर्ट व पोस्टमार्टम प्रभारी डॉ. राजीव रंजन ने बताया कि फॉरेंसिक चिकित्सा में 25 साल से कम उम्र की वास्तविक जानकारी के लिए दांत का एक्स-रे किया जाता है। साथ ही भौतिक रूप से दांतों की गिनती की जाती है। वहीं, 25 साल से अधिक उम्र के लोगों में गुस्ताफसन विधि का प्रयोग किया जाता है।  

स्वास्थ्य विभाग एवं यूनिसेफ छत्तीसगढ़ के तकनीकी सहयोग से बच्चों में गैर-संचारी रोगों पर राज्य स्तरीय परामर्श आयोजित

रायपुर बच्चों में बढ़ते गैर-संचारी रोगों (एनसीडी), विशेषकर बाल मधुमेह, सिकल सेल रोग एवं जन्मजात हृदय रोग की रोकथाम, शीघ्र पहचान तथा प्रभावी प्रबंधन को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से रायपुर में  संजीव कुमार झा (संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं) की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय परामर्श का आयोजन किया गया। इस परामर्श का मुख्य उद्देश्य राज्य में बाल स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाना, बहु-विभागीय समन्वय को बढ़ावा देना तथा गुणवत्तापूर्ण उपचार एवं सुदृढ़ रेफरल सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना रहा। कार्यक्रम के दौरान बच्चों में एनसीडी की वर्तमान स्थिति, प्रमुख चुनौतियों एवं भावी प्राथमिकताओं पर विस्तृत चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने शीघ्र पहचान, दवाओं की सतत उपलब्धता, उपचार अनुपालन तथा मजबूत रेफरल तंत्र को सुदृढ़ करने पर विशेष बल दिया। सिकल सेल रोग प्रबंधन हेतु जशपुर मॉडल को एक प्रभावी एवं अनुकरणीय पहल के रूप में प्रस्तुत किया गया। पैनल चर्चाओं में बाल मधुमेह एवं सिकल सेल रोग के समग्र प्रबंधन, निजी क्षेत्र की भागीदारी, सामुदायिक सहयोग तथा सामाजिक कलंक को कम करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। समूह कार्य के माध्यम से प्रतिभागियों ने स्क्रीनिंग बढ़ाने, उपचार अनुपालन सुधारने तथा सेवा वितरण को अधिक प्रभावी बनाने हेतु व्यावहारिक सुझाव प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथियों के रूप में AIIMS रायपुर एवं पं. जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय, रायपुर के विशेषज्ञों के साथ-साथ भारतीय चिकित्सा संघ (IMA) एवं भारतीय शिशु रोग अकादमी (IAP) के प्रतिनिधियों ने भी सक्रिय सहभागिता निभाई। कार्यक्रम का सफल संचालन यूनिसेफ छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. गजेन्द्र सिंह के नेतृत्व में, एकम फाउंडेशन के सहयोग से किया गया। तकनीकी सत्रों में डॉ. खेमराज सोनवानी (उप संचालक, सिकल सेल), डॉ. वी.आर. भगत (उप संचालक, शिशु स्वास्थ्य)एवं  सुबोध धर शर्मा (राज्य सलाहकार, NP-NCD)  सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं सलाहकार उपस्थित रहे। परामर्श में ट्राइबल वेलफेयर विभाग, स्कूल शिक्षा, समाज कल्याण विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रतिनिधियों की सहभागिता से बहु-विभागीय समन्वय को और सुदृढ़ किया गया। सहयोगी संस्थाओं की ओर से विश्व स्वास्थ्य संगठन, संगवारी, क्लिंटन फाउंडेशन, NASCO, प्रतिनिधि जुवेनाइल डायबिटीज तथा पिरामल फाउंडेशन के प्रतिनिधियों ने भी सक्रिय योगदान दिया। इस राज्य स्तरीय परामर्श में कुल 50 प्रतिभागियों ने भाग लिया। साथ ही राज्य के उच्च प्राथमिकता वाले 8 जिलों—रायपुर, कांकेर, बिलासपुर, दुर्ग, कोरबा, महासमुंद, रायगढ़ एवं राजनांदगांव से जिला स्तर के प्रतिनिधि उपस्थित रहे, जिनमें जिला एनसीडी नोडल अधिकारी, सिकल सेल नोडल अधिकारी तथा एनसीडी सलाहकार/सहायक नोडल अधिकारी शामिल थे। इन प्रतिनिधियों ने अपने-अपने जिलों के अनुभव साझा करते हुए जमीनी स्तर की चुनौतियों एवं संभावित समाधान प्रस्तुत किए। अंत में प्रतिभागियों ने राज्य में बच्चों हेतु एनसीडी सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ करने तथा बहु-विभागीय समन्वय के माध्यम से कार्ययोजना को प्रभावी रूप से आगे बढ़ाने की सहमति व्यक्त की गई। कार्यक्रम को सहयोग करने तथा सफल बनाने के लिए राज्य द्वारा यूनिसेफ की सराहना की गई और भविष्य में इस तरह के कार्यक्रम को करने के लिए विशेष सहयोग के लिए कहा गया।

अभियान अंतर्गत गतिविधियों की विभागवार प्रगति की समीक्षा

भोपाल  पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव  दीपाली रस्तोगी ने कहा है कि जल गंगा संवर्धन अभियान-2026 के लक्ष्यों का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को जल गंगा संवर्धन अभियान के लिये शासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप कार्य करते हुए उद्देश्यों को प्रभावी रूप से पूरा करने के निर्देश दिए। अपर मुख्य सचिव  रस्तोगी विकास भवन, भोपाल में आयोजित समीक्षा बैठक में “जल गंगा संवर्धन अभियान-2026” के अंतर्गत संचालित गतिविधियों की विभागवार प्रगति की समीक्षा कर रही थीं। बैठक में आयुक्त म.प्र. राज्य रोजगार गारंटी परिषद  अवि प्रसाद ने सहभागी विभागों के उपस्थित अधिकारियों को बताया कि अभियान की प्रभावी मॉनिटरिंग एवं रिपोर्टिंग के लिए एक सिंगल डैशबोर्ड विकसित किया जा रहा है। इससे विभागों की प्रगति की नियमित समीक्षा के साथ विभागवार रैंकिंग भी की जाएगी।सहभागी विभागों द्वारा अभियान अंतर्गत संचालित गतिविधियों की जानकारी प्रस्तुत की गई। एमआईएस पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर विभागों ने अपने कार्यों की प्रगति से अवगत कराया। बैठक में जल संरक्षण, जल संवर्धन एवं जल प्रबंधन से संबंधित गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाने और  जनभागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि अभियान के तहत निर्धारित कार्यों की सतत निगरानी की जा रही है। “जल गंगा संवर्धन अभियान-2026” का प्रदेशभर में क्रियान्वयन 19 मार्च 2026 से प्रारंभ हो चुका है। अभियान का उद्देश्य जल संरक्षण एवं प्रबंधन से जुड़े कार्यों को जनसहभागिता के साथ प्रभावी रूप से लागू करना है। बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास, नगरीय प्रशासन, वन, जल संसाधन, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, उद्यानिकी, किसान कल्याण एवं कृषि विकास, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, पर्यावरण, महिला एवं बाल विकास, स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, राजस्व, संस्कृति, जन अभियान परिषद एवं जनसंपर्क विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।

AAP का महिला कार्ड: गुजरात में सत्ता आई तो हर महिला के खाते में ₹1000 – केजरीवाल

अमरेली आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने गुजरात में आप की जीत होने पर महिलाओं को 1000 रुपये देने का ऐलान किया है। अमरेली में विजय विश्वास सभा को संबोधित करते हुए केजरीवाल ने कहा- "आम आदमी पार्टी की सरकार बनाओ, गुजरात में भी सभी महिलाओं के खाते में हजार-हजार रुपये आने शुरू हो जाएंगे।" केजरीवाल ने गिनाईं पंजाब की उपलब्धियां सभा को संबोधित करते समय अरविंद केजरीवाल गुजरात में लोगों को मिलने वाली उपलब्धियां गिना रहे थे। तभी उन्होंने बताया- पंजाब के अंदर हर महीने 18 साल से ऊपर की महिला के अकाउंट में 1000 रुपये जाया करेंगे। अगर एक घर में मां, बहू और बेटी है, तो तीन हजार रुपये महीने उस परिवार को मिला करेंगे। इन विपक्षी पार्टियों ने इतना गालियां दीं कि महिलाएं तो बिगड़ जाएंगी। 'आप' की सरकार बनने पर महिलाओं को देंगे 1000 रुपये मैंने कहा- तुम इतना करोड़ों रुपये डकार गए, तुम नहीं बिगड़े महिलाएं बिगड़ जाएंगी। इसके बाद केजरीवाल ने ऐलान करते हुए कहा- आम आदमी पार्टी की सरकार बनाओ, गुजरात में भी सभी महिलाओं के खाते में हजार-हजार रुपये आने शुरू हो जाएंगे।" केजरीवाल ने कहा- जिला परिषद का चुनाव एक तरह से सेमीफाइनल है। अगले दो-डेढ साल के बाद विधानसभा का चुनाव है। उससे पहले आप लोग आम आदमी की सरकार बनाएं।

क्या भारत में फिर लगेगा लॉकडाउन? पीएम मोदी के बयान पर फैली अफवाहों की पूरी सच्चाई

नई दिल्ली क्या भारत में एक बार फिर से लॉकडाउन लगने वाला है? छह साल पहले साल 2020 में कोरोना वायरस महामारी की वजह से देशभर में लॉकडाउन लगाया गया था, जिसकी चपेट में लंबे समय तक देशभर के लोग रहे। अब ईरान-अमेरिका युद्ध की वजह से एक बार फिर से भारत में लॉकडाउन को लेकर लोगों के मन में सवाल उठने लगे हैं। संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए भाषण के बाद लोग इंटरनेट पर भारत में लॉकडाउन (Lockdown in India) जैसे कीवर्ड सर्च कर रहे हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या इसको लेकर चल रहीं अटकलें सही हैं या नहीं। पीएम मोदी ने भाषण में ऐसा क्या कहा? अमेरिका-ईरान युद्ध की वजह से पूरी दुनिया में तेल का संकट पैदा हो गया है। हाल ही में पीएम मोदी ने संसद में पश्चिम एशियाई संकट पर बयान दिया। लोकसभा में चल रहे बजट सत्र के दौरान बोलते हुए, नरेंद्र मोदी ने सोमवार को याद दिलाया कि कैसे कोरोना वायरस के समय में ग्लोबल सप्लाई चेन बाधित हो गई थीं, और इसकी तुलना अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे संघर्ष से हो रही मौजूदा बाधाओं से की। उन्होंने कहा, "पहले भी हमारी सरकार ने ग्लोबल संकटों का बोझ किसानों पर नहीं पड़ने दिया था।'' उन्होंने सदन को पश्चिम एशिया में तनाव के संदर्भ में भारत की स्थिति से भी अवगत कराया। पीएम मोदी ने कहा, ''हम कोरोना के समय में भी एकजुटता से ऐसी चुनौतियों का सामना कर चुके हैं। अब हमें फिर से उसी तरह तैयार रहने की जरूरत है। धीरज, संयम के साथ शांति मन से हर चुनौती का सामना करना है।'' क्यों ट्रेंड हो रहा लॉकडाउन शब्द? छह साल पहले पूरे देश में लॉकडाउन की औपचारिक घोषणा 24 मार्च, 2020 को की गई थी। उस समय, पीएम मोदी ने चेतावनी दी थी कि अगर सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो भारत दशकों पीछे चला जाएगा। उसके बाद लंबे समय तक लॉकडाउन लगाया गया। अब पहली बार लॉकडाउन को लगे छह साल पूरे हो गए हैं। ऐसे में लोग लॉकडाउन को सर्च कर रहे हैं। वहीं, एक दूसरा कारण संसद में पीएम मोदी का कोरोना का जिक्र करना और उसी तरह की चुनौतियों के लिए फिर से तैयार रहने की जरूरत पर जोर देने की बात कहना भी। पीएम मोदी के बयान का यह हिस्सा सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिससे लोग लॉकडाउन का जिक्र और उसे सर्च कर रहे हैं। युद्ध के बीच लग सकता है लॉकडाउन? अगर हम बात करें कि क्या अमेरिका-ईरान युद्ध की वजह से भारत में लॉकडाउन लगेगा? तो इसका जवाब है नहीं, लॉकडाउन नहीं लगेगा। पीएम मोदी या फिर सरकार की ओर से कोई संकेत भी नहीं दिया गया है। कोरोना महामारी के समय उसे फैलने से रोकने के लिए लगाया गया था। उस समय दुनियाभर के देशों ने इस लॉकडाउन को अपने यहां लागू किया था। लेकिन ईरान अमेरिका युद्ध के समय हालात ऐसे नहीं हैं कि लॉकडाउन लगाया जा सके। हालांकि, कुछ कदम जरूर उठाए जा रहे हैं, जैसे तेल संकट को दूर करने के लिए, एलपीजी संकट से निपटने के लिए सरकार विभिन्न फैसले ले रही है। गैस सिलेंडर के कालाबाजारी को रोका जा रहा है, पीएनजी कनेक्शन पर जोर दिया जा रहा है आदि। अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी युद्ध के जल्द खत्म होने के संकेत दिए हैं और हमले कुछ समय के लिए रोके हुए हैं। ऐसे में यह साफ तौर पर कहा जा सकता है कि भले ही लॉकडाउन फिर से इंटरनेट पर सर्च किया जा रहा हो, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है। देश में कोई भी लॉकडाउन जैसी स्थिति नहीं होने जा रही है।

शून्य दुर्घटना पर कार्यशाला में दिया गया जोर

रायपुर शून्य दुर्घटना पर कार्यशाला में दिया गया जोर औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग द्वारा आज बिलासपुर के पं. देवकीनंदन दीक्षित सभागृह में आयोजित एकदिवसीय औद्योगिक सुरक्षा जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम में औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया। कार्यक्रम में बिलासपुर के संभागायुक्त  सुनील जैन, कलेक्टर  संजय अग्रवाल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक  रजनेश सिंह, आईएचएस के संचालक  मनीष वास्तव ने संबोधित किया। कार्यशाला में औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा के डिप्टी डायरेक्टर विजय कुमार सोरी, प्रदेश के विभिन्न जिलों से औद्योगिक इकाइयों के प्रबंधन एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में शामिल हुए। इस कार्यशाला का उद्देश्य क्षेत्र की स्पॉन्ज आयरन फैक्ट्रियों में सुरक्षा मानकों के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा सुरक्षित कार्य वातावरण सुनिश्चित करना था।       कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संभागायुक्त  सुनील जैन ने स्पष्ट कहा कि औद्योगिक सुरक्षा में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि उद्योगों का उद्देश्य केवल लाभ अर्जित करना नहीं, बल्कि देश के विकास में योगदान देने के साथ-साथ श्रमिकों के जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है। दुर्घटनाएं भले ही क्षणिक होती हैं, लेकिन उनके दुष्परिणाम लंबे समय तक प्रभावित करते हैं। इसलिए औद्योगिक इकाइयों में जोखिम की पहचान कर समय रहते उचित प्रबंधन, आधुनिक सुरक्षा उपकरणों की स्थापना, नियमित प्रशिक्षण एवं मेंटेनेंस सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है।         कलेक्टर  संजय अग्रवाल ने कहा कि उद्योग देश के विकास और रोजगार सृजन का प्रमुख माध्यम हैं, लेकिन किसी भी दुर्घटना से न केवल आर्थिक नुकसान होता है, बल्कि संस्थान की साख भी प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि प्रबंधन और श्रमिकों के सामूहिक प्रयास से ही सुरक्षित कार्य वातावरण निर्मित किया जा सकता है। श्रमिकों को नियमित प्रशिक्षण देने, सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित करने तथा उनमें स्वामित्व की भावना विकसित करने पर उन्होंने विशेष बल दिया।           कार्यक्रम में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक  रजनेश सिंह ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्र में छोटी-छोटी लापरवाहियां बड़ी दुर्घटनाओं का कारण बनती हैं। सुरक्षा उपकरणों का उपयोग न करना गंभीर घटनाओं को जन्म देता है, जिसमें मानव लापरवाही प्रमुख कारण होती है। उन्होंने “जीरो टॉलरेंस” नीति अपनाने तथा किसी भी घटना की स्थिति में उसे छुपाने के बजाय तत्काल प्रशासन को सूचित करने की आवश्यकता बताई। कार्यक्रम में औद्योगिक इकाइयों द्वारा सुरक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों पर प्रस्तुतियां दी गईं तथा नुक्कड़ नाटक के माध्यम से श्रमिकों एवं प्रबंधन को जागरूक किया गया। पावर पॉइंट प्रस्तुति एवं संवादात्मक सत्रों के जरिए प्रतिभागियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। कार्यशाला में सुरक्षा की शपथ भी ली गई। इस आयोजन के माध्यम से औद्योगिक सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का प्रयास किया गया।