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CCL ने दी बड़ी सौगात: दामोदर नदी पर गिद्दी-भुरकुंडा पुल का होगा पुनर्निर्माण

 गिद्दी (रामगढ़)  हजारीबाग और रामगढ़ जिलों को जोड़ने वाली गिद्दी-भुरकुंडा दामोदर नदी पर स्थित जर्जर पुल को लेकर लंबे समय से चल रही मांग आखिरकार रंग लाई है। सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) बोर्ड की बीते 23 अप्रैल को हुई बैठक में इस महत्वपूर्ण पुल की मरम्मत और नए पुल के निर्माण के लिए 19 करोड़ 44 लाख 64 हजार 400 रुपये की स्वीकृति दे दी गई है। इस फैसले से गिद्दी और भुरकुंडा समेत आसपास के क्षेत्रों के लोगों में खुशी की लहर है। यह फैसला न सिर्फ दो जिलों, बल्कि हजारों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को सीधे तौर पर प्रभावित करेगा। दो जिलों की धड़कन, अब मिलेगी नई सांस गिद्दी-भुरकुंडा दामोदर पुल हजारीबाग और रामगढ़ जिलों के साथ-साथ मांडू और बड़कागांव को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग है। प्रतिदिन हजारों भारी वाहन, स्कूली बच्चे, मजदूर और व्यापारी इसी पुल से गुजरते हैं। ऐसे में इसकी जर्जर हालत लंबे समय से खतरे की घंटी बनी हुई थी। प्रतिदिन हजारों लोग और भारी वाहन इस पुल से गुजरते हैं, जिससे इसकी महत्ता और भी बढ़ जाती है। गिद्दी-भुरकुंडा दामोदर पुल का मरम्मत भी, नया पुल भी बनेगाः जीएम सीसीएल अरगडा जीएम सत्यजीत कुमार ने बताया कि बीते 23 अप्रैल को बोर्ड की बैठक में गिद्दी-दामोदर नद की जर्जर पुल की मरम्मत व नए पुल निर्माण को ले राशि की स्वीकृति मिल गई है। बताया कि 19 करोड़ 44 लाख 64 हजार 400 रुपये की लागत से राज्य सरकार द्वारा पुराने पुल की तत्काल मरम्मत की जाएगी। साथ ही इसके समानांतर नया आधुनिक पुल बनाया जाएगा। कुल स्वीकृत राशि का 25 प्रतिशत करीब 4 करोड़ 75 लाख शुरुआती चरण में राज्य सरकार को दिया जाएगा। हालांकि अभी बोर्ड मीटिंग के आधिकारिक मिनट्स आने बाकी हैं। प्रबंधन ने मुख्यालय से इसकी मांग की है। इसके बाद ही फंड ट्रांसफर और कार्य प्रक्रिया स्पष्ट होगी। खतरे की जद में था पुल गौरतलब है कि गिद्दी-भुरकुंडा दामोदर पुल की स्थिति पिछले कई वर्षों से काफी जर्जर बनी हुई थी। तकनीकी जांच में पुल के एक पिलर को कमजोर पाया गया था। विशेषज्ञों ने भारी वाहनों के संचालन पर सावधानी बरतने की सलाह दी थी। इसके बाद अरगडा-बरकासयाल प्रबंधन ने पुल के दोनो ओर एक बोर्ड लगाया था। जिसमें एक बार में एक तरफ से एक ही भारी वाहन पुल से गुजरने का संदेश अंकित था। साथ ही इसके अनुपालन के लिए दोनों ओर सुरक्षा कर्मी की ड्यूटी लगा दी थी। परंतु रिभर साइड भुरकुंडा की ओर पुल पर तैनात सूरक्षा कर्मी पुल पर एक समय में एक बाड़ी पार कराने के प्रति उतनी संजीदगी नहीं दिखती थाी। जिससे कई बाद पुल के बीच में दोनों ओर से भारी वाहन प्रवेश कर जाने पर पुल पर घंटो जाम लग जाता था। पुल के जर्जर होने से पुल पर कंपन भी महसुस होता है। इसके बावजूद मजबूरी में लोग हर दिन जोखिम उठाकर इसी पुल से गुजर रहे थे। श्रेय लेने की लगी है होड़ गिद्दी-भुरकुंडा दामोदर पुल निर्माण के लिए बोर्ड द्वारा राशि स्वीकृत करने के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं द्वारा इसे अपनी उपलब्धि बताने का सिलसिला शुरू हो गया है। क्षेत्र में बयानबाजी और सोशल मीडिया के माध्यम से श्रेय लेने की कोशिशें देखी जा रही हैं। हालांकि, आम लोगों का कहना है कि पुल का निर्माण जल्द शुरू होना चाहिए, ताकि आवागमन सुरक्षित हो सके। शुरुआत में निर्माण एजेंसी को लेकर असमंजस थाः एसओसी गिद्दी-भुरकुंडा दामोदर पुल निर्माण एजेंसी को लेकर असमंजस की स्थिति थाी। यह बाते अरगडा एसओसी नोसिर तौहिद ने कही। कहा कि जनहित से जूड़ा सवाल होने के कारण अरगडा महाप्रबंधक सत्यजीत कुमार व अरगडा के तत्कालित जीएम एसके झा ने पुल निर्माण को लेकर काफी गंभीरता दिखाया। बाद में असैनिक विभाग ने सीसीएल हेडक्वार्टर रांची व झारखंड सरकार के बीच सामांजस बनाकर मामले की जमीन लाने का कार्य किया है। अब जाकर यह तय हो गया है कि सीसीएल राशि उपलब्ध कराएगा, जबकि झारखंड सरकार पुल का निर्माण कार्य कराएगी। पुल मरम्मत व नए पुल निर्माण होने से आवागमन होगा सुगम गिद्दी-भुरकुंडा दामोदर नद की जर्जर पूराने पुल की मरम्मत व नए पुल के निर्माण होने से क्षेत्र में आवागमन सुगम होने के साथ-साथ व्यापार, परिवहन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। फिलहाल लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि निर्माण कार्य कब शुरू होता है। अब आगे क्या? अब सबकी नजर इस बात पर है कि बोर्ड मीटिंग के मिनट्स कब आते हैं और टेंडर प्रक्रिया कब शुरू होती है। साथ ही गिद्दी-भुरकुंडा दामोदर नद पर पूराने पुल की मरम्मत व नए पुल निर्माण कार्य जमीन पर कब दिखता है। पुल निर्माण व मरम्मत की राशि स्वीकृत होने पर लोगों में जो पुल कभी डर का कारण था, वही अब विकास की नई पहचान बनने जा रहा है। लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रक्रिया कितनी तेजी से आगे बढ़ती है और निर्माण कार्य कब शुरू होता है। अगर सब कुछ तय समय पर हुआ, तो जल्द ही यह क्षेत्र एक सुरक्षित और आधुनिक पुल की सौगात पा सकता है।  

रामनवमी पर बदल जाता है हजारीबाग का रंग, चौक-चौराहों के नाम भी हो जाते हैं खास

हजारीबाग झारखंड के हजारीबाग में मनाई जाने वाली रामनवमी पूरे देश में अपनी अनोखी परंपरा के लिए जानी जाती है। यहां इस पर्व के दौरान पूरे शहर का रूप ही बदल जाता है, जिससे यह अयोध्या की झलक देता है। जिले में रामनवमी का त्योहार बहुत खास तरीके से मनाया जाता है। इस दौरान शहर के अलग-अलग मोहल्लों, चौक-चौराहों और सड़कों के नाम बदल दिए जाते हैं। इन जगहों को नए धार्मिक नाम दिए जाते हैं, जो अयोध्या के स्थानों से प्रेरित होते हैं। रामनवमी के समय शहर के कई प्रमुख चौक नए नामों से जाने जाते हैं। जैसे जादो बाबू चौक को परशुरामगढ़, कुआं चौक को भारतगढ़, झंडा चौक को दशरथगढ़, पंच मंदिर चौक को कृष्णगढ़, गोल चौक को अभिमन्युगढ़, ग्वालटोली चौक को नारायणगढ़ और सुभाष मार्ग को अंगदगढ़ कहा जाता है। इन नए नामों के बोर्ड भी लगाए जाते हैं। खास बात यह है कि रामनवमी जुलूस के दौरान लोग इन जगहों को उनके पुराने नाम से नहीं, बल्कि इन्हीं नए धार्मिक नामों से पुकारते हैं। इससे पूरा शहर एक धार्मिक माहौल में बदल जाता है। यह परंपरा कोई नई नहीं है, बल्कि करीब 100 साल से चली आ रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, हजारीबाग के राम भक्त इस शहर को अयोध्या के रूप में देखते हैं। इसी वजह से यहां के चौक-चौराहों का नाम अयोध्या की तर्ज पर रखा जाता है। रामनवमी के मौके पर लाखों श्रद्धालु सड़कों पर निकलते हैं और भव्य जुलूस निकालते हैं। इस पूरे आयोजन की जिम्मेदारी रामनवमी महासमिति और अन्य समितियों की होती है, जो हर साल इसे और भव्य बनाने का काम करती हैं। आज भी यह परंपरा उतनी ही जोश और आस्था के साथ निभाई जा रही है। नई पीढ़ी भी इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही है। यही वजह है कि हजारीबाग की रामनवमी देशभर में एक अलग पहचान रखती है।  

हजारीबाग में बम विस्फोट में लापरवाही या साजिश की जांच में जुटीं सुरक्षा एजेंसियां

हजारीबाग. हजारीबाग के खिरगांव हबीबी नगर में हुए बम धमाके के बाद यह इलाका एक बार फिर सुरक्षा एजेंसियों और खुफिया तंत्र के रडार पर आ गया है। विस्फोट में तीन लोगों की मौत के बाद केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि खुफिया एजेंसियों के बीच भी गंभीर मंथन शुरू हो गया है। फिलहाल पुलिस और जांच एजेंसियां सबूत जुटाने में लगी हैं। फोरेंसिक जांच, डॉग स्क्वॉड और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि यह विस्फोट स्थानीय लापरवाही का नतीजा था या किसी बड़ी साजिश की कड़ी है। क्योंकि आप पहले विस्फोट की बड़ी घटना हो चुकी है इसलिए लोग इसे पुरानी घटना से जोड़कर भी देख रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने तक किसी भी तरह के निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है। खिरगांव के हबीबीनगर की घटना ने एक बार फिर यह चेतावनी दी है कि शहर के भीतर मौजूद संवेदनशील इलाकों को नजरअंदाज करना भविष्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। अब देखना यह है कि जांच के बाद क्या निष्कर्ष सामने आते हैं और क्या इस घटना से सबक लेकर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाता है या नहीं। घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि वर्षों से निगरानी में रहे क्षेत्र में इस तरह का विस्फोट कैसे हुआ। खिरगांव इलाका पहले भी सुरक्षा कारणों से चर्चा में रहा है। बीते वर्षों में यहां कुछ मामलों में संदिग्ध गतिविधियों और गैरकानूनी तत्वों को पनाह देने के आरोप सामने आ चुके हैं, जिनकी जांच विभिन्न एजेंसियों ने की थी। अप्रैल 2016 में इसी क्षेत्र में बम बनाते समय हुए धमाके में छह लोगों की मौत ने पूरे राज्य को हिला दिया था। उस घटना के बाद इलाके पर विशेष निगरानी बढ़ाई गई थी। इसके बावजूद ताजा धमाके ने खुफिया तंत्र की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोई इलाका लंबे समय से संवेदनशील माना जाता रहा है, तो वहां इस तरह की घटना का दोहराव गंभीर चूक की ओर इशारा करता है। सवाल यह भी उठ रहा है कि स्थानीय स्तर पर मिलने वाली सूचनाओं का सही विश्लेषण और समय पर कार्रवाई क्यों नहीं हो पाई। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल एक घटना के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी, लेकिन बार-बार ऐसे मामलों का सामने आना यह संकेत देता है कि संवेदनशील इलाकों में सतत और निष्पक्ष निगरानी की जरूरत है। राजनीतिक या अन्य किसी भी दबाव से मुक्त होकर यदि गहन तलाशी और जांच की जाए, तो कई अहम सुराग सामने आ सकते हैं। विस्फोट के बाद खुफिया तंत्र हुआ सक्रिय धमाके के बाद स्थानीय पुलिस के साथ-साथ खुफिया इकाइयां भी सक्रिय हो गई हैं। यह जांच की जा रही है कि विस्फोट में इस्तेमाल सामग्री स्थानीय स्तर पर छिपाई गई थी या इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा था। फिलहाल किसी भी अंतरराष्ट्रीय या बाहरी संपर्क की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन जांच एजेंसियां संभावित पहलुओं को खंगाल रही हैं।

हजारीबाग में भव्य पासिंग आउट परेड, BSF के 345 नए जवान हुए तैयार

हजारीबाग सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में शामिल हुए कुल 345 जवानों ने सोमवार को झारखंड के हजारीबाग जिले में आयोजित पासिंग आउट परेड में हिस्सा लिया। यह जानकारी एक अधिकारी ने दी। परेड का आयोजन मेरू स्थित बीएसएफ प्रशिक्षण केंद्र एवं स्कूल के रानी झांसी परेड ग्राउंड में किया गया। अधिकारी ने बताया कि ये 345 जवान सहायक प्रशिक्षण केंद्र (एसटीसी) के सातवें और आठवें बैच से हैं। उन्होंने 44 सप्ताह का प्रशिक्षण पूर्ण किया और राष्ट्र की सेवा की शपथ ली। बीएसएफ प्रशिक्षण केंद्र एवं स्कूल के निरीक्षक महानिरीक्षक (आईजी) धीरेंद्र संभाजी कुटे ने परेड की सलामी ली और जवानों को उत्कृष्ट परेड प्रस्तुति के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि जवानों ने अनुशासन और देश की सीमाओं की रक्षा के प्रति समर्पण का शानदार प्रदर्शन किया है।  

हजारीबाग में कुख्यात गैंगस्टर दानिश इकबाल गिरफ्तार

हजारीबाग झारखंड के हजारीबाग जिले में पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर रविवार की देर रात नगवा हवाई अड्डा के पास कुख्यात अपराधी दानिश इकबाल को गिरफ्तार कर एक बड़ी सफलता हासिल की है। 23 वर्षीय दानिश इकबाल बिहार के गया जिले के शेरघाटी थाना अंतर्गत रमना मोहल्ला का निवासी है और वह हत्या, रंगदारी, लूट, अपहरण, फिरौती तथा गोलीबारी जैसे संगीन अपराधों में सक्रिय रहा है। वह कई राज्यों की पुलिस की भी तलाश में था। पुलिस को सूचना मिली कि दानिश इकबाल अपने साथियों के साथ नगवा टोल प्लाजा के आसपास आने वाला है। थाना प्रभारी लोहसिंघना के नेतृत्व में सशस्त्र बल ने घेराबंदी कर दानिश को धर दबोचा। तलाशी में उसके पास से कई मोबाइल फोन, 11 सिम काडर्, फर्जी आधार और पैन काडर्, एक राउटर, नोटबुक व अन्य संदिग्ध सामान बरामद हुआ। आरोपी ने पूछताछ में अपने आपराधिक गिरोह की विस्तार से जानकारी दी। हजारीबाग एसपी अंजनी अंजन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस बड़ी सफलता की जानकारी दी तथा कहा कि पुलिस अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रखेगी। पूछताछ के दौरान दानिश ने बताया कि वह उत्तम यादव, शक्ति गिरी उफर् साईको टाइगर, फोटो खान समेत 15-20 युवकों के साथ मिलकर संगठित अपराध करता है। उनका मुख्य काम विभिन्न कारोबारियों व कंपनियों से रंगदारी वसूलना है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि दानिश दिसंबर 2024 में हजारीबाग के उदय साव हत्याकांड में शामिल था। इसके अलावा गया जिले के आमस में अनवर अली हत्या कांड, गुरुआ थाना क्षेत्र में भारत माला प्रोजेक्ट कैंप में मजदूरों पर हमला और 4 जनवरी 2025 को डॉ. तपेश्वर प्रसाद के क्लिनिक पर बम फेंकने का मामला भी उसके गिरोह की ओर से किया गया था। दानिश इकबाल पर गया, शेरघाटी, आमस, गुरुआ और हजारीबाग थानों में हत्या, रंगदारी, विस्फोटक अधिनियम और हथियार अधिनियम के तहत कई गंभीर मामले दर्ज हैं। पुलिस के मुताबिक यह गिरफ्तारी क्षेत्र में अपराध रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इस छापेमारी को थाना प्रभारी लोहसिंघना और सशस्त्र बल की टीम ने अंजाम दिया।