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अंतिम छोर तक पानी पहुंचने से बदलेगी तस्वीर

भोपाल अनूपपुर जिले का आदिवासी बहुल विकासखंड पुष्पराजगढ़ अब कृषि विकास की नई दिशा की ओर अग्रसर है। ‘‘जल गंगा संवर्धन अभियान’’ के अंतर्गत झिलमिल जलाशय की नहरों के निर्माण, सुदृढ़ीकरण एवं विस्तार कार्य से यहाँ किसानों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आयेगा। वर्षों से इस क्षेत्र के किसान वर्षा आधारित खेती या सीमित जल स्त्रोतों पर निर्भर थे। नहर प्रणाली की जर्जर स्थिति के कारण जल अंतिम छोर तक नहीं पहुँच पाता था, जिससे सिंचाई में बाधा आती थी। अब जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत झिलमिल जलाशय के मुख्य नहर तथा माइनर नहर के निर्माण एवं सुदृढ़ीकरण का कार्य तेजी से प्रगति पर है। करीब 19 करोड़ 60 लाख रुपये की लागत से यह कार्य पूर्ण होने पर 5.04 एमसीएम क्षमता वाले जलाशय का जल अंतिम छोर के खेतों तक पहुँच सकेगा। इससे सिंचाई व्यवस्था में स्थायी सुधार होगा। लगभग 905 हेक्टेयर सिंचाई क्षमता को सुदृढ़ बनाया जा रहा है। करीब 11 किलोमीटर लंबा नहर तंत्र विकसित किया जा रहा है। इस योजना से सीधे तौर पर बीजापुरी, पीपाटोला, कछरा टोला और झिलमिल गाँवों के लगभग एक हजार किसान परिवार लाभान्वित होंगे। उनकी आय में वृद्धि और आजीविका में स्थिरता आयेगी। अनूपपुर कलेक्टर श्री हर्षल पंचोली परियोजना की नियमित निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने जल संसाधन विभाग को निर्देश दिए हैं कि कार्य गुणवत्ता के साथ समयबद्ध रूप से पूर्ण किया जाए। स्थानीय किसानों में इस परियोजना को लेकर उत्साह देखा जा रहा है। किसान जगत सिंह, ठाकुर सिंह और कमलेश्वर सिंह सहित कई कृषकों का कहना है कि नहरों के सुधार से अब अंतिम खेत तक पानी पहुँचने की समस्या समाप्त हो जाएगी, जिससे वे दोनों मौसमों में बेहतर खेती कर सकेंगे। पुष्पराजगढ़ में झिलमिल जलाशय से प्रवाहित यह जल न केवल खेतों को सिंचित करेगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई ऊर्जा प्रदान करेगा। ‘‘जल गंगा संवर्धन अभियान’’ के तहत यह पहल भविष्य में अन्य क्षेत्रों के लिए भी एक मॉडल साबित हो सकती है।  

जल गंगा संवर्धन अभियान से जल संरक्षण की दिशा में हुआ अभूतपूर्व कार्य

विभिन्न जिलों से मिल रहे है सकारात्मक परिणाम जल प्रबंधन से कृषि, पर्यावरण एवं आजीविका में आया उल्लेखनीय सुधार भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में संचालित जल गंगा संवर्धन अभियान जल संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन और ग्रामीण विकास का प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। अभियान के तहत जल स्रोतों के पुनर्जीवन और नई जल संरचनाओं के निर्माण को गति मिली है। जनभागीदारी से जल प्रबंधन सशक्त हुआ है। इसके परिणामस्वरूप प्रदेश के विभिन्न जिलों में जल उपलब्धता में वृद्धि हुई है, कृषि उत्पादन में सुधार हुआ है और जैव विविधता को संरक्षण मिला है। साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी सुदृढ़ हुई है और लोगों की आजीविका में सकारात्मक परिवर्तन आया है। छिंदवाड़ा: पालाचौरई में तालाब निर्माण से बढ़ी कृषि उत्पादकता छिंदवाड़ा जिले के विकासखंड जुन्नारदेव का ग्राम पालाचौरई हरियाली और समृद्धि की मिसाल बनकर उभरा है। अभियान में ग्राम में जल संरचनाओं के निर्माण और पुराने जल स्रोतों के पुनर्जीवन को प्राथमिकता दी गई। मत्स्य पालन तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के समन्वित प्रयासों से आधा एकड़ से लेकर ढाई एकड़ तक के तालाबों का निर्माण किया गया, जिससे वर्षभर जल उपलब्धता सुनिश्चित हुई है। जल स्तर में वृद्धि का सीधा लाभ कृषि क्षेत्र को मिला है। पूर्व में वर्षा पर निर्भर रहने वाले किसान अब सिंचित खेती कर रहे हैं। वर्तमान में किसान 3 फसलें लेकर उत्पादन और आय दोनों में वृद्धि कर रहे हैं। रबी सीजन में गेहूं, चना, मसूर, सरसों, मटर का उत्पादन बढ़ा है। जायद सीजन में मूंग एवं उड़द की खेती भी संभव हो पाई है। इसके अतिरिक्त किसानों ने मछली पालन, मोती उत्पादन एवं सिंघाड़ा जैसी गतिविधियों से आय के वैकल्पिक स्रोत विकसित किए हैं। ग्राम की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, पलायन में कमी आई है और युवा कृषि से जुड़कर आत्मनिर्भर बन रहे हैं। ग्वालियर: पृथ्वी ताल पुनर्जीवन से हुआ पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन विकास ग्वालियर जिले में जल गंगा संवर्धन अभियान में ऐतिहासिक पृथ्वी ताल का कायाकल्प किया गया है। इसे आधुनिक, उपयोगी और आकर्षक जलाशय के रूप में विकसित किया गया है। लगभग 7.27 हैक्टेयर में फैला यह तालाब पहले गाद, जलकुंभी और अतिक्रमण से प्रभावित था। इसकी उपयोगिता लगभग समाप्त हो गई थी। अब यह पुनर्जीवित होकर जल संरक्षण का प्रभावी केंद्र बन गया है। अभियान के तहत व्यापक स्तर पर गाद निकासी, गहरीकरण और सफाई कार्य किए गए, जिससे जल संग्रहण क्षमता बढ़ी। निकाली गई उपजाऊ मिट्टी का उपयोग आसपास के खेतों में किया गया,जिससे कृषि को भी लाभ मिला। सौंदर्यीकरण कार्यों के बाद यह स्थल अब नागरिकों के लिए प्रमुख पिकनिक स्पॉट और स्वास्थ्यवर्धक गतिविधियों का केंद्र बन गया है। सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि जैव विविधता का पुनरुद्धार है। वर्तमान में 120 से अधिक देशी-विदेशी पक्षियों की प्रजातियां यहां निवास कर रही हैं। कछुए और अन्य जलीय जीव भी यहां पाए जा रहे हैं,जिससे यह क्षेत्र एक जीवंत पारिस्थितिक तंत्र के रूप में विकसित हुआ है। मंदसौर: थडोद की ऐतिहासिक बावड़ी के पुनरुद्धार से मिला स्थायी जल स्रोत मंदसौर जिले के ग्राम थडोद में प्राचीन हजरत गालिब की बावड़ी का पुनर्जीवन एक प्रेरणादायक उपलब्धि के रूप में सामने आया है। वर्षों से उपेक्षित यह बावड़ी गंदगी, मलबे और अव्यवस्था के कारण अनुपयोगी हो गई थी। अभियान में प्रशासन और ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी से इस बावड़ी का व्यापक जीर्णोद्धार किया गया। श्रमदान कर मलबा हटाया गया, जल स्रोत की सफाई की गई और आसपास के क्षेत्र को व्यवस्थित किया गया। इससे यह बावड़ी पुनः स्वच्छ, सुरक्षित और उपयोगी जल स्रोत के रूप में स्थापित हुई है। अभियान से न केवल एक ऐतिहासिक धरोहर का संरक्षण हुआ है, बल्कि ग्रामवासियों को एक स्थायी जल स्रोत भी उपलब्ध हुआ है। भू-जल स्तर में सुधार की संभावनाएं बढ़ी हैं और यह प्रयास अन्य ग्रामों के लिए प्रेरणा बनकर उभरा है। सतत विकास की दिशा में प्रभावी पहल प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत किए जा रहे प्रयास जल संसाधनों के संरक्षण और उपयोग में ठोस परिवर्तन ला रहे हैं। छिंदवाड़ा, ग्वालियर और मंदसौर के उदाहरण यह दर्शाते हैं कि योजनाबद्ध क्रियान्वयन और जनसहभागिता से स्थानीय स्तर पर स्थायी परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। यह पहल वर्तमान आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ भविष्य के लिए जल सुरक्षा की मजबूत नींव भी तैयार कर रही है और प्रदेश में संतुलित एवं दीर्घकालिक विकास को गति दे रही है।  

अभियान” जनभागीदारी से आकार ले रहीं संरचनायें पेश कर रही हैं जल संरक्षण की नई मिसाल

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर संचालित “जल गंगा संवर्धन अभियान” ग्वालियर–चंबल संभाग में जन-आंदोलन का रूप लेता जा रहा है। इस अभियान के तहत जहां एक ओर वर्षों पुरानी जल संरचनाओं को पुनर्जीवित किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर नई जल संरचनाओं का निर्माण कर जल संरक्षण की दिशा में ठोस कार्य किए जा रहे हैं। जनभागीदारी, श्रमदान और जागरूकता के माध्यम से यह अभियान जल संरक्षण के साथ-साथ पर्यटन संवर्धन का भी माध्यम बन रहा है। ग्वालियर में ऐतिहासिक बावड़ियां बनीं जल संरक्षण का केंद्र ग्वालियर शहर में स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत तीन ऐतिहासिक बावड़ियों का पुनर्जीवन किया गया है। इन बावड़ियों में प्रतिवर्ष लगभग 50 लाख लीटर पानी सहेजने की क्षमता विकसित की गई है। सुरक्षा के लिए लोहे के जाल लगाए गए हैं तथा आरओ प्लांट की व्यवस्था भी की गई है, जिससे नागरिकों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध हो सकेगा। ग्वालियर दुर्ग स्थित प्राचीन सूरज कुण्ड को स्वच्छ एवं आकर्षक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। साथ ही जलालपुर कुण्ड और केआरजी कॉलेज की बावड़ी की साफ-सफाई भी कराई जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी अभियान ने गति पकड़ी है। जिले में कुल 2300 जल संरचनाओं के निर्माण का लक्ष्य है, जिनसे लगभग 31.50 लाख घन मीटर जल संरक्षित होगा। अब तक 71 खेत तालाब और 249 कुओं के रिचार्ज कार्य पूर्ण हो चुके हैं। शिवपुरी में 587 ग्राम पंचायतों में जनसहभागिता से कार्य शिवपुरी जिले की सभी ग्राम पंचायतों में तालाबों की सफाई, गहरीकरण, गाद निकासी और पेयजल व्यवस्था जैसे कार्य जनसहयोग से किए जा रहे हैं। विभिन्न ग्राम पंचायतों में अभियान की शुरुआत के साथ ही ग्रामीण स्तर पर जल संरक्षण के प्रति जागरूकता तेजी से बढ़ी है। गुना में खेत तालाब और रिचार्ज कार्यों में उल्लेखनीय प्रगति गुना जिले में 1547 खेत तालाबों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है, जिनमें से 547 पूर्ण हो चुके हैं। डगवेल रिचार्ज के 2206 कार्यों में से 1889 कार्य पूरे किए जा चुके हैं। इसके अलावा 1007 नई जल संरचनाएं बनाई जा रही हैं, जिनमें से 193 पूर्ण हो चुकी हैं। जिले में 57 सार्वजनिक प्याऊ भी शुरू की गई हैं। अशोकनगर में श्रमदान से दिया जल संरक्षण का संदेश अशोकनगर जिले में प्राचीन बावड़ियों, तालाबों और धार्मिक स्थलों पर श्रमदान कर जल संरक्षण का संदेश दिया जा रहा है। तुलसी सरोवर सहित कई जल स्रोतों का सौंदर्यीकरण किया जा रहा है। गांव-गांव में कलश यात्रा, पूजन और श्रमदान के माध्यम से जनजागरण किया जा रहा है। दतिया में सीवरेज प्रबंधन से तालाब संरक्षण दतिया जिले में सीतासागर तालाब में गंदे पानी के प्रवाह को रोकने के लिए नालों को सीवर पंपिंग स्टेशन से जोड़ा गया है। अब यह पानी एसटीपी प्लांट में शोधन के बाद पुनः उपयोग में लाया जा रहा है। आंगनबाड़ियों में रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग मॉडल भी विकसित किए गए हैं। मुरैना और भिण्ड में लक्ष्य आधारित कार्यों की तेज प्रगति मुरैना जिले में 1000 खेत तालाब निर्माण का लक्ष्य है, जिनमें से 200 पूर्ण हो चुके हैं। साथ ही 2382 अन्य जल संरचनाओं में से 250 कार्य पूरे किए जा चुके हैं। भिण्ड जिले में गौरी सरोवर सहित कई ऐतिहासिक जल स्रोतों की सफाई, गाद हटाने और संरक्षण का कार्य जनभागीदारी से किया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में तालाब गहरीकरण और जल संरक्षण के प्रयास तेज हुए हैं। श्योपुर में भी गांव-गांव जल संरचनाओं का निर्माण श्योपुर जिले में भी जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत जल संरचनाओं का तेजी से निर्माण हो रहा है, जिसमें जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिल रही है। जल चौपाल और प्याऊ से बढ़ी जनभागीदारी अभियान के तहत जल चौपाल आयोजित कर लोगों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक किया जा रहा है। साथ ही गर्मी के मौसम में राहगीरों को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए जगह-जगह सार्वजनिक प्याऊ स्थापित किये गये हैं। जल संरक्षण से जुड़ रहा जन-जन, बन रहा सतत विकास का आधार “जल गंगा संवर्धन अभियान” केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी का प्रतीक बन चुका है। जल स्रोतों के संरक्षण, पुनर्जीवन और विकास के इन प्रयासों से न केवल जल संकट का समाधान संभव होगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए सतत जल उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी। 

जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत सूरज कुण्ड को स्वच्छ और सुंदर बनाने की चली मुहिम

भोपाल जल संरक्षण व संवर्धन के लिये मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा अनुसार सम्पूर्ण प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत जल संरचनाओं को संरक्षित करने एवं संवारने का कार्य किया जा रहा है। ग्वालियर दुर्ग पर स्थित ऐतिहासिक सूरज कुण्ड को स्वच्छ और सुंदर बनाने के उद्देश्य से ऊर्जा मंत्री  प्रद्युम्न सिंह तोमर के नेतृत्व में शनिवार को प्रशासनिक अधिकारियों, सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों, गुरुद्वारा प्रबंध समिति के सदस्यों और नागरिकों ने सूरज कुण्ड की सफाई का कार्य विशेष अभियान चलाकर किया। ऊर्जा मंत्री  तोमर के नेतृत्व में सूरज कुण्ड की काई को साफ करने के लिये सभी लोगों ने मिल-जुलकर प्रयास किए। नगर निगम आयुक्त  संघ प्रिय के नेतृत्व में निगम का अमला मय संसाधनों के विशेष सफाई अभियान में लगा रहा। ऊर्जा मंत्री  तोमर ने सभी से आग्रह किया कि जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत सम्पूर्ण जिले में जल संरचनाओं के संरक्षण व संवर्धन का कार्य सभी के सहयोग से हाथ में लिया जाए। बरसात का पानी अधिक से अधिक संग्रहीत हो, इसके लिये शहरी तथा ग्रामीण क्षेत्र में सार्थक प्रयास किए जाएं। उन्होंने यह भी कहा कि जल संरक्षण का कार्य केवल सरकार के भरोसे ही नहीं बल्कि समाज के सभी वर्गों के साथ मिलकर किया जाना चाहिए।  

अभियान अंतर्गत गतिविधियों की विभागवार प्रगति की समीक्षा

भोपाल  पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव  दीपाली रस्तोगी ने कहा है कि जल गंगा संवर्धन अभियान-2026 के लक्ष्यों का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को जल गंगा संवर्धन अभियान के लिये शासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप कार्य करते हुए उद्देश्यों को प्रभावी रूप से पूरा करने के निर्देश दिए। अपर मुख्य सचिव  रस्तोगी विकास भवन, भोपाल में आयोजित समीक्षा बैठक में “जल गंगा संवर्धन अभियान-2026” के अंतर्गत संचालित गतिविधियों की विभागवार प्रगति की समीक्षा कर रही थीं। बैठक में आयुक्त म.प्र. राज्य रोजगार गारंटी परिषद  अवि प्रसाद ने सहभागी विभागों के उपस्थित अधिकारियों को बताया कि अभियान की प्रभावी मॉनिटरिंग एवं रिपोर्टिंग के लिए एक सिंगल डैशबोर्ड विकसित किया जा रहा है। इससे विभागों की प्रगति की नियमित समीक्षा के साथ विभागवार रैंकिंग भी की जाएगी।सहभागी विभागों द्वारा अभियान अंतर्गत संचालित गतिविधियों की जानकारी प्रस्तुत की गई। एमआईएस पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर विभागों ने अपने कार्यों की प्रगति से अवगत कराया। बैठक में जल संरक्षण, जल संवर्धन एवं जल प्रबंधन से संबंधित गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाने और  जनभागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि अभियान के तहत निर्धारित कार्यों की सतत निगरानी की जा रही है। “जल गंगा संवर्धन अभियान-2026” का प्रदेशभर में क्रियान्वयन 19 मार्च 2026 से प्रारंभ हो चुका है। अभियान का उद्देश्य जल संरक्षण एवं प्रबंधन से जुड़े कार्यों को जनसहभागिता के साथ प्रभावी रूप से लागू करना है। बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास, नगरीय प्रशासन, वन, जल संसाधन, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, उद्यानिकी, किसान कल्याण एवं कृषि विकास, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, पर्यावरण, महिला एवं बाल विकास, स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, राजस्व, संस्कृति, जन अभियान परिषद एवं जनसंपर्क विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।

शहरी-ग्रामीण क्षेत्रों में शुरू हुए जल संचय के कार्य

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में जल संरक्षण और जल स्त्रोतों को नया जीवन देने के लिए प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के अंतर्गत विभिन्न विभागों द्वारा जल स्रोतों को संरक्षित करने और जागरूकता बढ़ाने के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं। विभिन्न विभागों के समन्वय से गांव-गांव में तालाब, कुएं, चेकडेम और अन्य जल संरचनाओं के संरक्षण एवं पुनर्जीवन का कार्य किया जा रहा है। जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत कार्य आरंभ हो गये है। शासन के 18 विभाग की अभियान में सहभागिता हैं। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग अभियान’ को नोडल तथा नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग के सह-नोडल विभाग बनाया गया है। "जल गंगा संवर्धन अभियान" के अंतर्गत समाज की भागीदारी और विभिन्न सहभागी विभागों के माध्यम से नवीन जल संग्रहण संरचनाओं के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। भूजल संवर्धन, जल संग्रहण संरचनाओं की साफ-सफाई व मरम्‍मत तथा नवीनीकरण, जल संग्रहण संरचनाओं के अतिक्रमण हटाने के कार्य अभियान में किये जायेंगे। स्कूलों में पेयजल गुणवत्‍ता परीक्षण, आंगनवाड़ि‍यों तथा औद्योगिक इकाईयों में रूफ वाटर हार्वेस्टिंग के कार्य भी किये जायेंगे। जल स्‍त्रोतों में प्रदूषण के स्‍तर को कम करने, जल स्‍त्रोतों तथा जल वितरण प्रणालियों की साफ सफाई की जायेगी। राजस्‍व रिकार्ड में जल संग्रहण संरचनाओं व नहरों को अंकित करने और मानसून सत्र में किये जाने वाले पौधारोपण के लिए आवश्‍यक तैयारियों के कार्य किये जाएंगे। अठारह विभागों की है सहभागिता जल गंगा संवर्धन अभियान में पंचायत एवं ग्रामीण विकास, नगरीय प्रशासन एवं आवास, वन, जल संसाधन, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, उद्यानिकी, किसान कल्याण तथा कृषि विकास, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, पर्यावरण, महिला एवं बाल विकास, स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, राजस्व, संस्कृति, जन अभियान परिषद और जनसंपर्क विभाग शामिल हैं। नगरीय विकास विभाग द्वारा निकायों में अमृत 2.0 अंतर्गत जल संग्रहण संरचनाओं का जीर्णोद्धार, नदियों में मिलने नालों के शोधन की कार्य योजना बनाई गई है। तालाब, नदी, बावड़ी के संवर्धन एवं अतिक्रमण मुक्‍त करने का लक्ष्य रखा गया है। रेन वॉटर हार्वेस्टिंग प्रणाली स्थापित कराने के साथ हरित क्षेत्र विकसित किये जायेंगे। जल संरक्षण में युवाओं की भागीदारी के लिए अमृत मित्र बनाकर 'माय भारत' पोर्टल पर पंजीकरण किये जायेंगे। नगरीय निकायों के प्रमुख स्‍थलों पर गर्मियों में पेय जल सुविधा के लिए जनसहयोग से सार्वजनिक प्‍याऊ की व्‍यवस्‍था करना जैसे कार्य भी कि‍ए जाएंगे। अभियान में वन विभाग द्वारा जलग्रहण क्षेत्र उपचार योजना के तहत लगभग सवा लाख हेक्टेयर में भूजल संवर्धन के कार्य, कृषि विभाग द्वारा बलराम तालाब और लाइन फ़ार्म पोंड का निर्माण और पर्यावरण विभाग द्वारा विशेष तौर पर बेतवा, क्षिप्रा, कान्ह और गंभीर नदियों के उद्गम से अंतिम सीमा तक सर्वेक्षण कर दूषित जल के मिलने के स्थानों का चिन्हांकन किया जाएगा। स्कूल शिक्षा, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के साथ सभी स्कूलों में पेयजल स्रोतों के जल की गुणवत्ता का परीक्षण करेगा। उच्च शिक्षा विभाग अपनी गतिविधियों के माध्यम से विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में जागरूकता आधारित गतिविधियां आयोजित करेगा। जल संसाधन विभाग एवं नर्मदा घाटी विकास विभाग द्वारा लघु सिंचाई योजनाओं के तालाबों की मरम्मत के साथ नहरों की सफ़ाई और स्टॉप डैम तथा बैराज की मरम्मत तथा नहर प्रणालियों के सुदृढ़ीकरण का कार्य किया जाएगा। उद्यानिकी विभाग सूक्ष्म सिंचाई क्षेत्र का विस्तार कार्य करेगा एवं विकासखंडों में पानी चौपाल का आयोजन कर लगभग 55 हज़ार हेक्टेयर में पौधरोपण का कार्य करेगा। जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत राजस्व विभाग, पूर्व में बनाई गई ऐसी जल संरचनाएं जो राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है, उन्हें राजस्व अभिलेख में दर्ज करने का कार्य करेगा। राजस्व विभाग द्वारा समस्त विभागों द्वारा पूर्व में बनाए गए तालाबों, चेकडेम और स्टॉपडेम एवं अन्य जल संरचनाओं के साथ ही जल संसाधन विभाग की नहरों को राजस्व अभिलेखों में दर्ज किया जाएगा।