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तनाव चरम पर: ईरान ने USS Abraham Lincoln को बनाया निशाना, पीछे हटने से किया इनकार

तेहरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमला भले ही कुछ दिनों के लिए रोक दिया हो, लेकिन तेहरान पीछे हटने को तैयार नहीं है। मिडिल ईस्ट में तनाव फिर से बढ़ गया है। ईरान ने दावा किया है कि बुधवार को उसने अमेरिकी युद्धपोत अब्राहम लिंकन पर क्रूज मिसाइलें दागी हैं। ईरानी सेना ने सरकारी टीवी पर जारी एक बयान में अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि जब इस स्ट्राइक ग्रुप के जहाज उनकी रेंज में आएंगे तो और भी मिसाइलें दागी जाएंगी। ईरान की सेना ने बयान में कहा गया, "ईरानी नौसेना की कादर क्रूज मिसाइलों (जमीन से दागी जाने वाली एंटी-शिप मिसाइलें) ने अमेरिका के USS अब्राहम लिंकन कैरियर को निशाना बनाया और उसे अपनी जगह बदलने पर मजबूर कर दिया।" बयान में नौसेना प्रमुख एडमिरल शहरम ईरानी का भी जिक्र किया गया, जिन्होंने कहा कि इस कैरियर ग्रुप की हरकतों पर लगातार नजर रखी जा रही है और जैसे ही यह दुश्मन बेड़ा हमारी मिसाइल प्रणालियों की रेंज में आएगा, ईरानी नौसेना उस पर जोरदार हमले करेगी।" इससे पहले, ईरानी नौसेना ने अमेरिका को सीधी चेतावनी जारी करते हुए कहा था कि उसके युद्धपोत अमेरिकी अब्राहम लिंकन पर कड़ी नजर रखी जा रही है, और यदि वह ईरानी क्षेत्र के करीब आता है, तो उस पर हमला किया जा सकता है। सरकारी प्रसारक 'प्रेस टीवी' की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी नौसेना के कमांडर रियर एडमिरल शहरम ईरानी ने चेतावनी दी कि अमेरिकी अब्राहम लिंकन लगातार निगरानी में है, और यदि वह ईरान की मिसाइल प्रणालियों की सीमा में प्रवेश करता है, तो नौसेना द्वारा उसे निशाना बनाया जाएगा। ट्रंप ने पीछे खींचे कदम यह नौसैनिक चेतावनी तेहरान के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों द्वारा अमेरिकी प्रभाव को व्यापक रूप से खारिज किए जाने के बाद आई है। इन अधिकारियों ने वॉशिंगटन के हालिया कूटनीतिक प्रयासों को केवल एक दिखावा करार दिया है। प्रेस टीवी ने बताया कि 'खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर' के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल इब्राहिम जोलफागरी ने बुधवार को कहा कि अमेरिका द्वारा पहले जिस रणनीतिक शक्ति का प्रदर्शन किया जाता था, वह अब एक रणनीतिक हार में बदल गई है। ये टिप्पणियां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा तनाव कम करने के लिए उठाए गए एक महत्वपूर्ण कदम के बाद आई हैं। ट्रंप ने हाल ही में ईरानी बिजली संयंत्रों पर हमला करने के लिए दिए गए 48 घंटे के अल्टीमेटम से कदम पीछे खींच लिए थे।

दिव्यांग बच्चों ने केक काटने के साथ हैप्पी बर्थ डे टू यू गाकर किया मुख्यमंत्री डॉ. यादव का अभिनंदन

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने जन्म दिवस पर दिव्यांग बच्चों के साथ सुखद संवाद करते हुए रवीन्द्र भवन परिसर एमपीटी कैफे कल्चर हाउस का शुभारंभ किया। इस अवसर पर बच्चों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव के जन्म दिवस का केक काटा, हैप्पी बर्थडे टू यू का गीत गाकर बधाई दी और उन्हें एक पेंटिंग भेंट की। इस अवसर पर बालिका सिहायना तिवारी ने जन्म दिवस पर कविता सुनाकर मुख्यमंत्री डॉ. यादव का अभिनंदन किया। कु. सिहायना ने प्रभु राम के संघर्ष पर भी कविता पाठ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिव्यांग बच्चों को प्रोत्साहन स्वरूप 5 लाख रूपए और कविता पाठ करने वाली बालिका कु. सिहायना तिवारी को पृथक से 21 हजार रूपए प्रदान करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बच्चों की प्रतिभा को प्रोत्साहित करने के लिए हरसंभव प्रयास किया जाएगा। यह बच्चे बाल निकेतन और आरूषि संस्थान से जुड़े हैं। इस अवसर पर पर्यटन, संस्कृति और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बच्चों से संवाद में बताया कि रवीन्द्र भवन प्रदेश की सांस्कृतिक गतिविधियों का केन्द्र रहा है। वर्षों से इस स्थान से कलाकारों, साहित्यकारों और संस्कृति प्रेमियों का जुड़ाव रहा है। यहां सांस्कृतिक और ग्राम्य जीवन की थीम पर विकसित कैफे कल्चर हाउस प्रदेश की सांस्कृतिक समृद्धि और पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह स्थान कला, संस्कृति और स्थानीय परंपराओं को प्रोत्साहित करने का एक सशक्त मंच बनेगा। यह मध्यप्रदेश पर्यटन का एक अनूठा प्रोजेक्ट है। इसमें प्रकृति, संस्कृति और विभिन्न प्रकार के विशेष भोजन का संयोजन है। इस प्रकार की पहल न केवल पर्यटन को बढ़ावा देती हैं, बल्कि स्थानीय व्यंजनों और संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। रवीन्द्र भवन परिसर स्थित एमपीटी कल्चर कैफे हाउस में लगभग 85 लोगों की बैठने की क्षमता है। यह कैफे आगंतुकों को शांत और सुकून भरा वातावरण प्रदान करता है। यहां का मेन्यू प्रदेश की समृद्ध क्षेत्रीय व्यंजनों की झलक प्रस्तुत करता है, जिसमें भुट्टे का कीस, अन्न को प्रोत्साहन देते हुए रागी बालूशा और कोदो अरंचिनी जैसे पारंपरिक एवं नवाचारी व्यंजन शामिल हैं। इसे एक लैंडस्केप-आधारित कैफ़े के रूप में डिज़ाइन किया गया है। हरी-भरी हरियाली और प्राकृतिक बनावटों को आधुनिक वास्तुशिल्प ढाँचे में समाहित करते हुए, यह कैफ़े रवीन्द्र भवन में आने-जाने वालों के लिए अनोखा अनुभव प्रदान करेगा। कैफे में हाथ से तराशी गई लकड़ी की बैठकों से लेकर विशेष रूप से तैयार टेराकोटा, पत्थर, लकड़ी, बांस और जूट के कलात्मक कार्य प्रदेश के सृजनकर्ताओं की सृजनशीलता को दर्शाते हैं। कैफे का इंटीरियर प्रदेश की हस्तशिल्प और कलाकृतियों से सुसज्जित है, जो भोजन के अनुभव को और भी यादगार बनाएगा। यहाँ का वातावरण 'क्रिएटिव हब' के रूप में विकसित किया गया है। उद्घाटन अवसर पर पर्यटन सचिव एवं मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक डॉ. इलैयाराजा टी, अपर प्रबंध संचालक डॉ. अभय अरविंद बेडेकर, वरिष्ठ अधिकारी एवं बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित थे।  

रेगिस्तान में नजर आया कैराकल, जैसलमेर बना वन्यजीव संरक्षण का नया केंद्र

जैसलमेर राजस्थान के पश्चिमी छोर पर स्थित भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे शुष्क मरुस्थलीय इलाकों में एक बेहद अहम वन्यजीव खोज सामने आई है। विलुप्ति की कगार पर पहुंच चुके दुर्लभ वन्य जीव कैराकल की मौजूदगी ने वन विभाग और वैज्ञानिकों में नई उम्मीद जगा दी है। जैसलमेर के सीमावर्ती क्षेत्र में इस प्रजाति की लगातार गतिविधियों के प्रमाण मिलने से यह इलाका अब संरक्षण के लिहाज से बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, जैसलमेर का यह पूरा क्षेत्र शुष्क मरुस्थलीय घासभूमि (डेजर्ट ग्रासलैंड) का हिस्सा है, जो कैराकल के प्राकृतिक आवास के लिए अत्यंत उपयुक्त माना जाता है। यहां खुले मैदान, कम वनस्पति और छोटे शिकार जीवों की उपलब्धता इस प्रजाति के लिए आदर्श परिस्थितियां बनाती हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय से यह प्रजाति मानव गतिविधियों और आवास खत्म होने के कारण नजर नहीं आ रही थी, लेकिन अब इसके फिर से दिखने से संकेत मिलते हैं कि यह क्षेत्र उनके लिए सुरक्षित ठिकाना बन सकता है। निगरानी के लिए हाईटेक इंतजाम इस दुर्लभ जीव की मौजूदगी की पुष्टि के बाद वन विभाग और Wildlife Institute of India ने मिलकर संरक्षण प्रयासों को तेज कर दिया है। क्षेत्र में कुल 9 मोशन सेंसिंग कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं, जो दिन-रात गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं। इन कैमरों से मिले फुटेज ने कई अहम जानकारियां सामने रखी हैं, जिनमें कैराकल की आवाजाही, उसके शिकार के तरीके और रहने के पैटर्न को समझने में मदद मिल रही है। रेडियो कॉलर से हो रही ट्रैकिंग वन विभाग ने दो महीने पहले एक नर कैराकल को पकड़कर उसे रेडियो कॉलर लगाया और फिर सुरक्षित तरीके से जंगल में छोड़ दिया। इसके बाद उसकी हर मूवमेंट को ट्रैक किया जा रहा है। रेडियो कॉलर से प्राप्त डेटा के अनुसार, यह कैराकल भारत-पाकिस्तान सीमा से लगे विस्तृत क्षेत्र में विचरण कर रहा है। इससे यह भी स्पष्ट हुआ है कि इस प्रजाति का आवास सीमाओं से परे फैला हुआ है, जो संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत को भी दर्शाता है। तीन कैराकल की पुष्टि, बढ़ी उम्मीद अब तक मिले कैमरा ट्रैप फुटेज में रेडियो कॉलर लगे कैराकल के अलावा एक अन्य नर और एक मादा कैराकल की मौजूदगी दर्ज की गई है। इस तरह क्षेत्र में कुल तीन कैराकल के होने की पुष्टि हो चुकी है। इसके अलावा एक गुफा में दो नर कैराकल के एक साथ रहने के संकेत भी मिले हैं, जो इस प्रजाति के व्यवहार को समझने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आमतौर पर कैराकल एकाकी जीवन जीते हैं, ऐसे में यह व्यवहार शोध का विषय बन गया है। फूड चेन की भी हो रही पहचान निगरानी के दौरान वैज्ञानिकों ने कैराकल की फूड चेन को भी आंशिक रूप से पहचान लिया है। यह जीव मुख्यतः छोटे स्तनधारियों, पक्षियों और सरीसृपों का शिकार करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्र में शिकार की पर्याप्त उपलब्धता इस प्रजाति के टिके रहने का एक बड़ा कारण हो सकती है। संरक्षण के लिए बढ़ी सक्रियता वन विभाग की टीमें लगातार क्षेत्र में गश्त कर रही हैं और कैराकल की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं। साथ ही स्थानीय लोगों को भी इस दुर्लभ जीव के महत्व के बारे में जागरूक किया जा रहा है, ताकि किसी प्रकार का खतरा न उत्पन्न हो।

पेट्रोलियम मंत्रालय का दावा: ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता, LPG की 92% बुकिंग अब ऑनलाइन

नई दिल्ली दुनिया भर में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस को लेकर मची हाहाकार के बीच भारत सरकार ने विश्वास दिलाया है कि देश में पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं है और कच्चे तेल से लेकर प्राकृतिक गैस तक पर्याप्त मात्रा में है। पश्चिम एशिया में हाल के घटनाक्रमों पर अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग में बुधवार को इसकी जानकारी दी गई। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शांति बहाली को लेकर भारत के प्रयासों की चर्चा की। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया की स्थिति को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके से बातचीत की। भारत ने तनाव कम करने, शांति बहाली और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को सुरक्षित व खुला रखने पर जोर दिया। दोनों वार्ताओं में समुद्री मार्गों की सुरक्षा और क्षेत्रीय शांति और ऊर्जा सुरक्षा पर समन्वय पर बल दिया गया, जिसमें भारत-श्रीलंका सहयोग भी शामिल है। भारत ईरान सहित क्षेत्रीय साझेदारों के संपर्क में है और अपने नागरिकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित कर रहा है। वहीं, विदेश मंत्री एस. जयशंकर की ईरानी राजदूत से मुलाकात हुई। कई भारतीय नागरिक आर्मेनिया और अजरबैजान मार्गों के जरिए लौटे हैं, जिसके लिए ईरान को धन्यवाद दिया। पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के सचिव राजेश सिन्हा ने जानकारी दी कि वर्तमान में 20 भारतीय जहाज पर्शियन गल्फ क्षेत्र में हैं, जिनमें 500 से ज्यादा भारतीय नाविक मौजूद हैं। उन्होंने बताया, "पिछले 24 घंटों में किसी भी भारतीय जहाज या नाविक से संबंधित कोई घटना रिपोर्ट नहीं हुई है। 20 भारतीय जहाज वर्तमान में पर्शियन गल्फ क्षेत्र में संचालित हो रहे हैं, और इन जहाजों पर 540 भारतीय नाविक मौजूद हैं, और सभी सुरक्षित हैं। संबंधित एजेंसियां और शिपिंग अधिकारी लगातार संपर्क में हैं और स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।" अंतर मंत्रालयी प्रेस ब्रीफ में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने अपने विभाग की तैयारियों और एलपीजी-पीएनजी को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब दिया। उन्होंने बताया कि कच्चे तेल की पर्याप्त उपलब्धता है और रिफाइनरियां अपनी उच्चतम क्षमता पर काम कर रही हैं। देश में सालाना लगभग 26 करोड़ टन कच्चे तेल को रिफाइन करने की क्षमता मौजूद है। हाल के दिनों में कुछ जगहों पर पेट्रोल पंपों पर लाइन और पैनिक बाइंग देखी गई, लेकिन पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है। सभी पंपों और सप्लाई टर्मिनलों पर पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। शर्मा ने आगे कहा, पाइप्ड नैचुरल गैस (पीएनजी) और सीएनजी की आपूर्ति सामान्य है। सरकार पीएनजी विस्तार पर जोर दे रही है और कई कदम उठाए गए हैं। लगभग 2.2 लाख उपभोक्ता एलपीजी से पीएनजी में शिफ्ट हो चुके हैं और करीब 2.5 लाख नए आवेदन प्राप्त हुए हैं। एलपीजी के मामले में किसी भी डिस्ट्रीब्यूटर पर ड्राई-आउट नहीं है (एलपीजी उपलब्ध है)। ऑनलाइन बुकिंग लगभग 92 फीसदी तक पहुंच गई है। सरकार ने कमर्शियल एलपीजी का आवंटन 20 फीसदी से बढ़ाकर 50 फीसदी किया है, ताकि ढाबा, होटल, कैंटीन, कम्युनिटी किचन और प्रवासी मजदूरों को प्राथमिकता मिल सके। अब तक 26 राज्यों ने करीब 22,000 टन कमर्शियल एलपीजी आवंटित किया है। इसके तहत 5 किलो के सिलेंडर भी बड़ी संख्या में उपलब्ध कराए जा रहे हैं। जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए सख्त कार्रवाई जारी है। हाल ही में 2700 से ज्यादा छापे और करीब 2000 सिलेंडर जब्त किए गए हैं।

2 लाख से अधिक बालिकाओं के टीकाकरण की उपलब्धि पर स्वास्थ्य टीम, जागरूक अभिभावकों की भूमिका की सराहना की

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश में एचपीवी टीकाकरण अभियान में 2 लाख से अधिक बालिकाओं के टीकाकरण की उपलब्धि के लिए स्वास्थ्य विभाग, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा कार्यकर्ताओं सहित समन्वय विभागों के अधिकारियों कर्मचारियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह सफलता समर्पण, मेहनत और जनजागरूकता का परिणाम है। उन्होंने विशेष रूप से "जागरूक अभिभावकों" की भूमिका को भी सराहा, जिनकी समझदारी और सकारात्मक दृष्टिकोण के कारण यह अभियान गति पकड़ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह उपलब्धि केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि प्रदेश की बेटियों के सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार नागरिकों को सुलभ, गुणवत्तापूर्ण और समग्र स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। सुरक्षित मातृत्व, कुपोषण मुक्त बचपन और नवजात शिशुओं की बेहतर देखभाल के लिए कई योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है। संस्थागत प्रसव को बढ़ावा, टीकाकरण कवरेज का विस्तार और पोषण सेवाओं के सुदृढ़ीकरण के माध्यम से प्रदेश एक स्वस्थ और सशक्त भविष्य की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार बेटियों के स्वास्थ्य और सशक्तिकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। एचपीवी टीकाकरण अभियान इसी दिशा में एक मजबूत पहल है, जो आने वाले समय में सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के खतरे को कम करेगा। उन्होंने सभी नागरिकों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों से अपील की कि वे इस अभियान को जन-आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाते रहें, जिससे कोई भी पात्र बालिका इस सुरक्षा कवच से वंचित न रहे। उन्होंने यह विश्वास भी जताया कि जिस प्रकार प्रदेश ने अल्प समय में देश में अग्रणी स्थान प्राप्त किया है, उसी प्रकार आने वाले दिनों में शत-प्रतिशत लक्ष्य की प्राप्ति भी सुनिश्चित की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह उपलब्धि "स्वस्थ मध्यप्रदेश, सशक्त मध्यप्रदेश" के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के समग्र सुदृढ़ीकरण पर निरंतर कार्य किया जा रहा है। अस्पतालों के इन्फ्रास्ट्रक्चर के विस्तार, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता और विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में निरंतर सुधार हो रहा है। साथ ही, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर जिला अस्पतालों तक सेवाओं का उन्नयन किया जा रहा है, जिससे हर नागरिक को समय पर और बेहतर उपचार सुनिश्चित हो सके। अभिभावकों की जागरूकता और मैदानी अमले के समर्पण से प्राप्त हुई सफलता उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने स्वास्थ्य विभाग की पूरी टीम, संबंधित विभागों की सराहना की है और सामाजिक संगठनों और जागरूक अभिभावकों का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी द्वारा 28 फरवरी 2026 को अजमेर, राजस्थान से इस विशेष एचपीवी टीकाकरण अभियान का राष्ट्रीय शुभारंभ किया गया था। मध्यप्रदेश ने इस अभियान के तहत एक लाख से अधिक बालिकाओं का टीकाकरण कर देश में अग्रणी स्थान प्राप्त किया और अब 2 लाख का आंकड़ा पार कर अपनी नेतृत्वकारी भूमिका को और मजबूत किया है। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने विशेष रूप से मंडला, बालाघाट, डिंडोरी, राजगढ़ और खरगोन जिलों के योगदान की सराहना की, जहाँ अभियान को उल्लेखनीय सफलता मिली है। राज्य स्तर पर इस अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कलेक्टर की अध्यक्षता में जिला स्तर पर समन्वय स्थापित किया गया। स्कूल शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, पंचायत विभाग और विभिन्न स्वैच्छिक संगठनों ने मिलकर इसे जन-आंदोलन का रूप दिया। प्रदेश के अभिभावकों से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि वे अपनी 14 से 15 वर्ष आयु की बालिकाओं का एचपीवी टीकाकरण अवश्य कराएं, जिससे उन्हें सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से सुरक्षित रखा जा सके। उन्होंने विश्वास जताया कि स्वास्थ्य विभाग शेष पात्र बालिकाओं का टीकाकरण भी शीघ्र पूर्ण करेगा। प्रदेश में अब तक अभियान में 2,00,538 का बालिकाओं का एचपीवी टीकाकरण किया जा चुका है। डिंडोरी (74.70%), राजगढ़ (69.61%), बालाघाट (68.95%), मंडला (66.44%), खरगोन (55.06%) और खंडवा (53.15%) 50% से अधिक कवरेज के साथ उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं।  

खुरई में एक जिला एक उत्पाद निर्यात कार्यशाला स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने की पहल

भोपाल  मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम द्वारा सागर जिले के खुरई में एक जिला एक उत्पाद निर्यात कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस आयोजन का उद्देश्य स्थानीय उद्यमियों एवं उत्पादकों को निर्यात की प्रक्रियाओं, संभावनाओं और शासकीय सहयोग तंत्र की समग्र जानकारी प्रदान करना रहा। विभिन्न निर्यात संवर्धन संस्थाओं और वित्तीय संस्थानों की सहभागिता से कार्यक्रम को व्यवहारिक एवं मार्गदर्शी स्वरूप मिला। कार्यक्रम में कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण, भारतीय स्टेट बैंक, भारतीय डाक विभाग, मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग के प्रतिनिधियों ने निर्यात से संबंधित आवश्यक पंजीयन, गुणवत्ता मानकों, पैकेजिंग, परिवहन व्यवस्था, वित्तीय सहयोग एवं शासकीय योजनाओं की जानकारी दी। उद्यमियों को यह बताया गया कि स्थानीय स्तर पर निर्मित उत्पादों को किस प्रकार राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय बाजार तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सकता है। कार्यशाला में विशेष रूप से क्षेत्र के उत्पादों के लिए निर्यात की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। निर्यात जैसे निर्यात उन्मुख मॉडल के माध्यम से उत्पादों की पहचान, प्रमाणन और विपणन सहयोग की प्रक्रिया को स्पष्ट किया गया, जिससे उत्पादकों को बेहतर बाजार और प्रतिस्पर्धी मूल्य प्राप्त हो सकें। अधिकारियों ने बताया कि एक जिला एक उत्पाद पहल का उद्देश्य प्रत्येक जिले की विशिष्टता को आर्थिक सशक्तिकरण से जोड़ना है। निर्यात को प्रोत्साहित कर स्थानीय उद्योगों को नई दिशा देने, आय वृद्धि सुनिश्चित करने और रोजगार के अवसरों का विस्तार करने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। कार्यक्रम में उपस्थित उद्यमियों ने विभिन्न विभागों के साथ प्रत्यक्ष संवाद कर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। यह आयोजन स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक सार्थक प्रयास सिद्ध हुआ। 

चेंबर अध्यक्ष सतीश थौरानी का नया कदम, व्यापारियों के हित में विशेषज्ञों की टीम तैयार

रायपुर छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के प्रदेश अध्यक्ष सतीश थौरानी ने व्यापारिक हितों के संरक्षण और व्यापारियों को तकनीकी व कानूनी अड़चनों से राहत दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है. चेम्बर द्वारा प्रदेश भर के विषय विशेषज्ञों को विभिन्न विभागों के लिए सलाहकार के रूप में नियुक्त किया गया है. यह विशेषज्ञ टीम व्यापारियों को जीएसटी, आयकर, बैंकिंग और श्रम कानून जैसे जटिल विषयों पर आ रही परेशानियों का निराकरण करने और उन्हें सही मार्गदर्शन देने के लिए सीधे संपर्क में रहेगी. जीएसटी एवं अप्रत्यक्ष कर विभाग में चेतन तारवानी, भावेश मित्तल, जितेन्द्र खनूजा, नितिन गोयल और रश्मि वर्मा सहित 20 अनुभवी विशेषज्ञों को जिम्मेदारी सौंपी गई है. ये विशेषज्ञ रायपुर, बिलासपुर, अंबिकापुर, भिलाई और अन्य शहरों के व्यापारियों को जीएसटी संबंधी कानूनी पेचीदगियों पर सलाह देंगे. आयकर एवं मुकदमेबाजी से संबंधित व्यापारियों को आयकर से संबंधित नोटिस और अन्य विधिक कार्यों में सहयोग के लिए हार्दिक पाटनी, मुकुल चोरड़िया, डिंपल वल्र्यानी और रितेश जायसवाल सहित 9 विशेषज्ञों की टीम गठित की गई है. MSME सब्सिडी, बैंकिंग एवं वित्त (MSME Subsidy, Banking Finance) जैसे विषय पर छोटे और मध्यम उद्योगों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने और बैंकिंग संबंधी सहायता के लिए अरिहंत जैन, दाहवाल शाह और विक्रम देवनानी सहित 9 सलाहकार नियुक्त किए गए हैं. साथ ही श्रम कानून और रेरा से संबंधित विषयों के लिए हिमांशु लालवानी और सीए टुटेजा जी को विशेषज्ञ नियुक्त किया गया है. चेम्बर प्रदेश अध्यक्ष सतीश थौरानी ने बताया कि छत्तीसगढ़ का व्यापारी वर्ग हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है. अक्सर जीएसटी, आयकर और बैंकिंग जैसे जटिल तकनीकी विषयों के कारण व्यापारियों को अनावश्यक मानसिक और आर्थिक दबाव झेलना पड़ता है. हमारा लक्ष्य केवल व्यापार करना नहीं, बल्कि ”व्यापार सुगमता” को धरातल पर उतारना है. इसी उद्देश्य के साथ हमने प्रदेश के चोटी के विशेषज्ञों की एक ”एडवाइजरी टीम” तैयार की है. ये सलाहकार केवल कागजों पर नहीं, बल्कि सीधे फील्ड में उतरकर व्यापारियों की समस्याओं का समाधान करेंगे. अब किसी भी व्यापारी को नोटिस या कानूनी पेचीदगियों से घबराने की जरूरत नहीं है. हमारी टीम उनके साथ खड़ी है. हम एक ऐसा वातावरण बनाना चाहते हैं, जहां छत्तीसगढ़ का हर व्यापारी निडर होकर अपने व्यापार का विस्तार कर सके और प्रदेश की उन्नति में सहभागी बने.

खिलाड़ियों के बेहतर प्रदर्शन के लिये प्रशिक्षकों को दी जिम्मेदारी

भोपाल  खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने एशियन गेम्स में होने वाले वॉटर स्पोर्ट्स के प्रशिक्षकों से वन-टू-वन संवाद कर कहा कि प्रत्येक खेल में मध्यप्रदेश के खिलाड़ी बेहतर प्रदर्शन करें, इसके लिये विशेष प्रशिक्षण दिया जाये। उन्होंने खिलाड़ियों की जरूरत और सुविधाओं पर ध्यान देने के निर्देश दिये। राज्य सरकार की ओर से किसी भी प्रकार की सुविधा या अपेक्षा हो, तो तत्काल बतायें। किसी भी प्रकार की परेशानी या समस्या होने पर भी नियुक्त अधिकारी से सतत सम्पर्क करें। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को उच्च गुणवत्ता का प्रशिक्षण उपलब्ध कराने में किसी भी प्रकार की कोताही न बरतें। मंत्री  सारंग ने कहा कि मध्यप्रदेश की वॉटर स्पोर्ट्स अकादमी में विश्व स्तर की सुविधाएँ उपलब्ध हैं। इन सुविधाओं का अधिकतम उपयोग करते हुए खिलाड़ियों को विशेष रूप से तैयार करें। मंत्री  सारंग बुधवार को टी.टी. नगर स्टेडियम के मेजर ध्यानचंद हॉल में विभागीय अधिकारियों और प्रशिक्षकों के साथ सितम्बर माह में होने वाले एशियन गेम्स के संबंध में चर्चा कर रहे थे। उन्होंने वन-टू-वन संवाद कर प्रशिक्षण व्यवस्थाओं, खिलाड़ियों की प्रगति और आवश्यक संसाधनों की स्थिति की जानकारी प्राप्त की। खिलाड़ी की व्यक्तिगत क्षमताओं के अनुरूप विशेष रणनीति हो तैयार मंत्री  सारंग ने प्रशिक्षण प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी एवं परिणामोन्मुखी बनाने को कहा। साथ ही प्रत्येक खिलाड़ी की व्यक्तिगत क्षमताओं के अनुरूप विशेष रणनीति तैयार करने के भी निर्देश दिये। उन्होंने अगली बैठक में संभावित खिलाड़ियों के साथ सीधे संवाद कर उनका फीडबेक लेने के भी निर्देश दिये। मंत्री  सारंग ने कहा कि खिलाड़ियों को प्रोत्साहित कर उनकी हौसला अफजाई की जाये, जिससे वे बेहतर परिणाम दे सकें। हमारा लक्ष्य है कि वॉटर स्पोर्ट्स में अधिक से अधिक अर्जित हों, इसके लिये सभी को समर्पण, अनुशासन और टीम भावना के साथ कार्य करना होगा। खिलाड़ियों को शारीरिक एवं मानसिक रूप से सशक्त होकर उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिये प्रोत्साहित किया जाये। मंत्री  सारंग ने निर्देश दिये कि खेल की प्रत्येक गतिविधि की जानकारी की खबर विभिन्न समाचार माध्यमों से प्रकाशित एवं प्रसारित की जाये। एशियन गेम्स की गतिविधियों की जानकारी भी सोशल मीडिया और समाचार-पत्रों के माध्यम से समय-समय पर आती रहे। बैठक में खेल संचालक  अंशुमान यादव और संयुक्त संचालक  बी.एस. यादव भी उपस्थित थे। 

महंगाई का डबल झटका! LPG के बाद अब खाने के तेल की कीमतें बढ़ने के आसार

नई दिल्ली मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर अब धीरे-धीरे भारतीय घरों तक पहुंचने लगा है। इस बार मामला सिर्फ एलपीजी तक सीमित नहीं है, बल्कि किचन की सबसे जरूरी चीज (खाने का तेल) भी महंगा होने लगा है। भारत में पूड़ी, पराठा, समोसा, जलेबी से लेकर रोजमर्रा की सब्जियों तक, हर चीज में तेल का इस्तेमाल होता है। ऐसे में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी सीधे आम आदमी की जेब पर असर डाल रही है। क्या है डिटेल पिछले एक महीने में खाने के तेल की कीमतों में साफ उछाल देखने को मिला है। 24 फरवरी से 24 मार्च 2026 के बीच सूरजमुखी तेल की कीमत 175 रुपये से बढ़कर 181 रुपये प्रति किलो हो गई। वहीं पाम ऑयल 5 रुपये महंगा होकर 141 रुपये प्रति किलो पहुंच गया। सोयाबीन तेल में भी 4 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है, जबकि मूंगफली, वनस्पति और सरसों तेल की कीमतों में करीब 3 रुपये प्रति किलो का इजाफा हुआ है। भारत में खाने के तेल का महत्व सिर्फ स्वाद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पोषण का भी अहम स्रोत है। यह शरीर को जरूरी फैट, ऊर्जा और विटामिन देता है, खासकर उन लोगों के लिए जो कुपोषण का सामना करते हैं। लेकिन समस्या यह है कि देश में तेल की मांग तेजी से बढ़ रही है और घरेलू उत्पादन उतनी तेजी से नहीं बढ़ पा रहा है। अगर खपत की बात करें तो 2022-23 में शहरी भारत में एक व्यक्ति औसतन 12 किलो और ग्रामीण इलाकों में करीब 11 किलो तेल सालाना इस्तेमाल करता है। वहीं 2004-05 में यह खपत काफी कम थी। बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए भारत करीब 56 फीसदी तेल आयात करता है, जबकि सिर्फ 44 फीसदी घरेलू उत्पादन से आता है। आयात के आंकड़े भी इस निर्भरता को साफ दिखाते हैं। 2017 में भारत ने 11.8 अरब डॉलर का तेल आयात किया था, जो 2022 में बढ़कर 21.1 अरब डॉलर हो गया। 2025 में यह थोड़ा घटकर 18.6 अरब डॉलर रहा। इसमें पाम ऑयल की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा 41 फीसदी, सोयाबीन तेल 35 फीसदी और सूरजमुखी तेल 18 फीसदी रहा। सरकार ने क्या कहा हालांकि, सरकार का कहना है कि मौजूदा ईरान से जुड़े तनाव के बावजूद भारत में तेल की सप्लाई पर बड़ा खतरा नहीं है। भारत मलेशिया, इंडोनेशिया और अमेरिका जैसे कई देशों से तेल आयात करता है, जिससे अगर किसी एक देश से सप्लाई प्रभावित होती है तो दूसरे विकल्प मौजूद रहते हैं। साथ ही सरकार ने आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए ‘नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल्स-ऑयलसीड्स’ भी शुरू किया है, जिसका मकसद आने वाले वर्षों में देश में तेल उत्पादन बढ़ाना है।

मधुमक्खी पालन से किसानों की आय में 20 से 25 प्रतिशत तक वृद्धि संभव

रायपुर  मधुमक्खी पालन  शहद, मोम और पराग उत्पादन के लिए एक अत्यंत लाभदायक कृषि-आधारित व्यवसाय है। भारत में  वैज्ञानिक तकनीक से मधुमक्खियों को बक्सों में पालकर, मौसमी फूलों के अनुसार स्थानांतरित कर बड़े पैमाने पर शहद निकाला जाता है, जो किसानों की आय बढ़ाने का एक प्रमुख साधन है। मधुमक्खी पालन अपनाने पर किसानों की आय में 20 से 25 प्रतिशत तक वृद्धि संभव है।             कृषि आधारित आय को सुदृढ़ करने और किसानों को अतिरिक्त रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य स्तर पर मधुमक्खी पालन एवं शहद उत्पादन विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला सह प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण में  जिले भर से आए किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।            जिला पंचायत सीईओ बलरामपुर मती नयनतारा सिंह तोमर ने कहा कि वर्तमान समय में किसानों को पारंपरिक एकल फसल पद्धति को आगे बढ़ते हुए फसल विविधिकरण अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि धान के साथ-साथ दलहन, तिलहन एवं मधुमक्खी पालन जैसे कृषि आधारित व्यवसाय अपनाकर किसान अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं।          उप संचालक कृषि  रामचंद्र भगत ने फसल चक्र एवं विविधिकरण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इससे उत्पादन लागत कम होती है तथा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को भी कम किया जा सकता है। कृषि विज्ञान केन्द्र के प्रमुख डॉ. जी. के. निगम ने बताया कि मधुमक्खी पालन एक लाभकारी व्यवसाय है, जिसे कम पूंजी और सीमित श्रम में शुरू किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जलवायु इस व्यवसाय के लिए अनुकूल है, जिससे लघु एवं सीमांत किसानों को आय का बेहतर विकल्प मिल सकता है।        प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञ प्राध्यापक डॉ. जी. पी. पैकरा ने वैज्ञानिक पद्धति से मधुमक्खी पालन एवं गुणवत्तायुक्त शहद उत्पादन की विस्तृत जानकारी दी। उद्यानिकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता  परमेश्वर गोरे ने बताया कि मधुमक्खी पालन से शहद के अलावा मोम, रॉयल जेली और प्रोपोलिस जैसे बहुमूल्य उत्पाद भी प्राप्त होते हैं, जिनकी बाजार में अच्छी मांग है। विशेषज्ञ डॉ. सचिन जायसवाल ने बताया कि पारंपरिक खेती के साथ मधुमक्खी पालन अपनाने पर किसानों की आय में 20 से 25 प्रतिशत तक वृद्धि संभव है। वैज्ञानिक  अनिल कुमार सोनपाकर ने तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी।          अनुभवी मधुमक्खी पालक कृषक  बैद्यनाथ ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि किसान अपने खेत में 5 से 10 मधुमक्खी पेटियां स्थापित कर आसानी से अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं। उन्होंने अन्य किसानों को भी इस व्यवसाय को अपनाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के अंत में प्रशिक्षण में भाग लेने वाले किसानों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। इस जिला स्तरीय प्रशिक्षण में कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, वैज्ञानिकों सहित बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया।