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जैसलमेर एयरपोर्ट पर ऐतिहासिक शुरुआत, जयपुर के लिए सीधी हवाई सेवा चालू

 जैसलमेर स्वर्ण नगरी जैसलमेर के लिए रविवार (3 मई) का दिन ऐतिहासिक बन गया. पहली बार समर शेड्यूल में हवाई सेवा का संचालन शुरू हुआ. इस फ्लाइट की मांग काफी समय से उठती रही है. अब लंबे इंतजार के बाद जैसलमेर के लोगों की मांग पूरी हुई है. जब एलाइंस एयर की उड़ान एयरपोर्ट पर पहुंची तो राजस्थानी लोक गीतों के साथ भव्य स्वागत किया गया. यात्रियों के पहुंचते ही पर्यटन व्यवसायियों और स्थानीय लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला.  फ्लाइट सप्ताह में दो दिन रविवार और गुरुवार को संचालित होगी. इससे ऑफ-सीजन में भी शहर की कनेक्टिविटी बनी रहेगी. पहली उड़ान में जयपुर से 12 यात्री जैसलमेर पहुंचे, जिनमें जिला कलेक्टर अनुपमा जोरवाल, एसपी अभिषेक शिवहरे, पूर्व राजपरिवार की सदस्य राजेश्वरी राजलक्ष्मी और उद्योगपति मयंक भाटिया शामिल रहे. जैसलमेर से 4 यात्रियों ने जयपुर के लिए उड़ान भरी. करीब 9 घंटे का समय बचेगा दरअसल, भीषण गर्मी के चलते अप्रैल से सितंबर के बीच जैसलमेर में पर्यटन गतिविधियां धीमी पड़ जाती हैं. ऐसे में अब नाइट टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए ऐतिहासिक स्थलों पर लाइटिंग, डेजर्ट सफारी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की योजना बनाई जा रही हैय जयपुर से सीधी हवाई सेवा जुड़ने से मेडिकल, व्यापार और प्रशासनिक कार्यों में भी सहूलियत मिलेगी. अब 10-12 घंटे का सफर महज 1 घंटा 45 मिनट में पूरा होगा, जिससे जैसलमेर की पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है. गर्मियों में भी पर्यटकों को आकर्षित करने की कोशिश जिला कलेक्टर अनुपमा जोरवाल ने बताया कि जैसलमेर में पर्यटन को वर्षभर सक्रिय बनाने के लिए नए आयाम स्थापित किए जा रहे हैं. सर्दियों तक सीमित पर्यटन की धारणा को बदलते हुए अब गर्मियों में भी पर्यटकों को आकर्षित करने पर जोर दिया जा रहा है. इसके तहत ड्यून्स वॉक, प्लेजेंट ईवनिंग और स्टार गेजिंग जैसे नए अनुभव विकसित किए जा रहे हैं. उन्होंने हाई वैल्यू, लो वॉल्यूम टूरिज्म को बढ़ावा देने और कंटेंट क्रिएटर्स व एडवेंचर प्रेमियों को जोड़ने की बात कही. होटल संचालकों और टूर ऑपरेटर्स की अहम भूमिका इस हवाई सेवा को शुरू करने में स्थानीय होटल संचालकों और टूर ऑपरेटर्स की अहम भूमिका रही है. बिजनेसमेन मयंक भाटिया ने बताया कि इस सीजन में टूरिज्म को प्रमोट करने के उद्देश्य से आज जयपुर के लिए हवाई सेवा शुरु की गई. यह सेवाएं पब्लिक प्राइवेट पार्टनर के तहत किया गया नवाचार है. जैसलमेर के होटेलियर, बिजनेसमैन और कंपनियों के लोगों ने मिलकर 'वायबिलिटी गैप फंडिंग' के लिए कमीटमेंट किया.   क्षेत्र में वंदेभारत की भी है मांग जैसलमेर के पूर्व राजपरिवार की सदस्य राजेश्वरी राजलक्ष्मी ने सेना और वायुसेना के परिवारों का जिक्र करते हुए कहा कि उनके लिए भी देश के अन्य हिस्सों से जुड़ना जरूरी है. उन्होंने वंदेभारत जैसी आधुनिक ट्रेनों की कमी पर चिंता जताई, लेकिन ग्रीष्मकाल में हवाई सेवाओं के विस्तार को एक सकारात्मक कदम बताया.

रेगिस्तान में नजर आया कैराकल, जैसलमेर बना वन्यजीव संरक्षण का नया केंद्र

जैसलमेर राजस्थान के पश्चिमी छोर पर स्थित भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे शुष्क मरुस्थलीय इलाकों में एक बेहद अहम वन्यजीव खोज सामने आई है। विलुप्ति की कगार पर पहुंच चुके दुर्लभ वन्य जीव कैराकल की मौजूदगी ने वन विभाग और वैज्ञानिकों में नई उम्मीद जगा दी है। जैसलमेर के सीमावर्ती क्षेत्र में इस प्रजाति की लगातार गतिविधियों के प्रमाण मिलने से यह इलाका अब संरक्षण के लिहाज से बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, जैसलमेर का यह पूरा क्षेत्र शुष्क मरुस्थलीय घासभूमि (डेजर्ट ग्रासलैंड) का हिस्सा है, जो कैराकल के प्राकृतिक आवास के लिए अत्यंत उपयुक्त माना जाता है। यहां खुले मैदान, कम वनस्पति और छोटे शिकार जीवों की उपलब्धता इस प्रजाति के लिए आदर्श परिस्थितियां बनाती हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय से यह प्रजाति मानव गतिविधियों और आवास खत्म होने के कारण नजर नहीं आ रही थी, लेकिन अब इसके फिर से दिखने से संकेत मिलते हैं कि यह क्षेत्र उनके लिए सुरक्षित ठिकाना बन सकता है। निगरानी के लिए हाईटेक इंतजाम इस दुर्लभ जीव की मौजूदगी की पुष्टि के बाद वन विभाग और Wildlife Institute of India ने मिलकर संरक्षण प्रयासों को तेज कर दिया है। क्षेत्र में कुल 9 मोशन सेंसिंग कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं, जो दिन-रात गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं। इन कैमरों से मिले फुटेज ने कई अहम जानकारियां सामने रखी हैं, जिनमें कैराकल की आवाजाही, उसके शिकार के तरीके और रहने के पैटर्न को समझने में मदद मिल रही है। रेडियो कॉलर से हो रही ट्रैकिंग वन विभाग ने दो महीने पहले एक नर कैराकल को पकड़कर उसे रेडियो कॉलर लगाया और फिर सुरक्षित तरीके से जंगल में छोड़ दिया। इसके बाद उसकी हर मूवमेंट को ट्रैक किया जा रहा है। रेडियो कॉलर से प्राप्त डेटा के अनुसार, यह कैराकल भारत-पाकिस्तान सीमा से लगे विस्तृत क्षेत्र में विचरण कर रहा है। इससे यह भी स्पष्ट हुआ है कि इस प्रजाति का आवास सीमाओं से परे फैला हुआ है, जो संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत को भी दर्शाता है। तीन कैराकल की पुष्टि, बढ़ी उम्मीद अब तक मिले कैमरा ट्रैप फुटेज में रेडियो कॉलर लगे कैराकल के अलावा एक अन्य नर और एक मादा कैराकल की मौजूदगी दर्ज की गई है। इस तरह क्षेत्र में कुल तीन कैराकल के होने की पुष्टि हो चुकी है। इसके अलावा एक गुफा में दो नर कैराकल के एक साथ रहने के संकेत भी मिले हैं, जो इस प्रजाति के व्यवहार को समझने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आमतौर पर कैराकल एकाकी जीवन जीते हैं, ऐसे में यह व्यवहार शोध का विषय बन गया है। फूड चेन की भी हो रही पहचान निगरानी के दौरान वैज्ञानिकों ने कैराकल की फूड चेन को भी आंशिक रूप से पहचान लिया है। यह जीव मुख्यतः छोटे स्तनधारियों, पक्षियों और सरीसृपों का शिकार करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्र में शिकार की पर्याप्त उपलब्धता इस प्रजाति के टिके रहने का एक बड़ा कारण हो सकती है। संरक्षण के लिए बढ़ी सक्रियता वन विभाग की टीमें लगातार क्षेत्र में गश्त कर रही हैं और कैराकल की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं। साथ ही स्थानीय लोगों को भी इस दुर्लभ जीव के महत्व के बारे में जागरूक किया जा रहा है, ताकि किसी प्रकार का खतरा न उत्पन्न हो।

राजस्थान के मशहूर टूरिस्ट स्पॉट पर लगेगा पर्यटक टैक्स

जोधपुर/जैसलमेर. नगर परिषद जैसलमेर क्षेत्र में अब पर्यटक वाहनों से यात्रीकर वसूल किया जाएगा। स्वायत शासन विभाग ने नगर परिषद को अधिकृत किया है। इसके लिए बाड़मेर रोड और जोधपुर रोड पर दो टोल नाके स्थापित किए जाएंगे। वसूली से होने वाली आय शहर विकास कार्यों में खर्च की जाएगी। स्वायत शासन विभाग ने विभिन्न वाहनों पर वसूली की दरें निर्धारित की हैं। 35 सीटर बस से 200 रुपए, 25 सीटर बस से 150 रुपए, बड़ी कारों से 100 रुपए, पर्यटक टैक्सी कार या जीप से 50 रुपए तथा अन्य कारों से 50 रुपए लिए जाएंगे। सभी प्रकार के सरकारी वाहन, एंबुलेंस और स्थानीय निजी वाहन (टैक्सी को छोड़कर) कर से मुक्त रहेंगे। सोनार दुर्ग क्षेत्र में गोल्फ कार्ट सेवा शुरू होगी, जिससे पर्यटकों को नीरज बस स्टैंड से दुर्ग तक आवागमन की सुविधा मिलेगी। 10 से 40 गोल्फ कार्ट इलेक्ट्रिक प्रणाली पर संचालित होंगे। सेवा का किराया प्रति यात्री 30 रुपए तय हुआ है। इन कार्टों से दुर्ग क्षेत्र में वाहनों का दबाव कम होगा और प्रदूषण में कमी आएगी। इस व्यवस्था से नगर परिषद को प्रतिवर्ष 4,66,100 रुपए मिलेंगे, जिस पर 10 प्रतिशत सालाना वृद्धि लागू होगी। नगर परिषद ने शहर में भीड़भाड़ और दुर्घटनाओं पर नियंत्रण के लिए 10 चौराहों पर ट्रैफिक लाइट लगाने का निर्णय किया है। संबंधित फर्म सिग्नल सिस्टम का निर्माण और संचालन करेगी। जबकि आय के रूप में परिषद को प्रतिवर्ष 4,14,180 रुपए प्राप्त होंगे, जिस पर 10 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि लागू होगी। इन तीनों नवाचारों से नगर परिषद को राजस्व में वृद्धि होगी। साथ ही पर्यटक सुविधाओं और यातायात प्रबंधन में सुधार से शहर को राहत मिलेगी।