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हार्ट डिजीज का खतरा: महिलाओं से 10 साल पहले पुरुषों को होती है बीमारी, नई स्टडी में बड़ा खुलासा

मुंबई 

अक्सर हम यह मान लेते हैं कि दिल की बीमारी उम्र बढ़ने के साथ ही होती है. ज्यादातर लोग सोचते हैं कि हार्ट अटैक या दिल से जुड़ी परेशानियां सिर्फ 60–70 साल की उम्र के बाद ही आती हैं. लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग है. आज की भागदौड़ भरी लाइफ, गलत खानपान, तनाव, कम नींद और फिजिकल एक्टिविटी की कमी ने दिल की बीमारियों को चुपचाप युवाओं तक पहुंचा दिया है सबसे खतरनाक बात यह है कि दिल की बीमारी धीरे-धीरे बढ़ती है.  शुरुआत में न तो तेज दर्द होता है और न ही कोई साफ चेतावनी मिलती है. इसी वजह से लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं और जब तक समझ आता है, तब तक नुकसान काफी बढ़ चुका होता है. अब एक नए वैज्ञानिक अध्ययन ने दिल की बीमारी को लेकर एक और अहम बात सामने रखी है, जो खासतौर पर पुरुषों के लिए चिंता बढ़ाने वाली है. 
 
क्या कहती है नई स्टडी? 
 
अमेरिका में 18 से 30 साल की उम्र के 5,000 से ज्यादा युवाओं पर लंबे समय तक किए गए एक बड़े अध्ययन से पता चला है कि पुरुषों में महिलाओं की तुलना में कोरोनरी हार्ट डिजीज (CHD) लगभग 10 साल पहले विकसित हो जाती है. यह अध्ययन CARDIA (Coronary Artery Risk Development in Young Adults) नाम से जाना जाता है और इसके नतीजे जर्नल ऑफ द अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (JAHA) में प्रकाशित हुए हैं. शोधकर्ताओं के अनुसार 20 से 29 साल की उम्र तक पुरुष और महिलाओं में दिल की बीमारी का खतरा लगभग समान रहता है, लेकिन 35 साल की उम्र के आसपास पुरुषों में यह खतरा तेजी से बढ़ने लगता है. यह अंतर मध्य आयु तक बना रहता है. हैरानी की बात यह है कि ब्लड प्रेशर, धूम्रपान और कोलेस्ट्रॉल जैसे कारकों को ध्यान में रखने के बाद भी यह अंतर खत्म नहीं होता है. 
 
पुरुषों में दिल की बीमारी पहले क्यों होती है?

रीजेन्सी हॉस्पिटल, लखनऊ के वरिष्ठ इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. हर्षित गुप्ता बताते हैं कि इसके पीछे कई कारण हैं. जैसे पुरुषों में हार्मोनल सुरक्षा महिलाओं की तुलना में कम होती है, महिलाओं में एस्ट्रोजन हार्मोन कुछ समय तक दिल को सुरक्षा देता है, पुरुषों में कम उम्र से ही धूम्रपान, शराब, तनाव और अनियमित जीवनशैली अधिक देखने को मिलती है, जैविक (Biological) अंतर भी इस जोखिम को बढ़ाते हैं, हालांकि डॉक्टर यह भी स्पष्ट करते हैं कि महिलाओं को मिलने वाली हार्मोनल सुरक्षा स्थायी नहीं होती है. उम्र बढ़ने के साथ महिलाओं में भी दिल की बीमारी का खतरा तेजी से बढ़ता है. 

दुनिया में मौत का सबसे बड़ा कारण

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनिया में होने वाली कुल मौतों में से 32 प्रतिशत मौतें हार्ट डिजीज के कारण होती हैं. साल 2022 में करीब 19.8 मिलियन लोगों की मौत दिल की बीमारियों से हुई. ये आंकड़े साफ बताते हैं कि दिल की बीमारी कोई छोटी समस्या नहीं है. 

समाधान क्या है?

शोधकर्ताओं का मानना है कि दिल की बीमारी से बचाव की शुरुआत युवावस्था से ही होनी चाहिए.  20–30 साल की उम्र में ही दिल की सेहत की जांच और सही लाइफस्टाइल अपनाना बेहद जरूरी है. बैलेंस डाइट, नियमित एक्सरसाइज, तनाव से दूरी, धूम्रपान से बचाव और समय-समय पर हेल्थ चेकअप, यही दिल को लंबे समय तक स्वस्थ रखते हैं. 

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