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विपक्ष का महाभियोग प्रस्ताव न्यायपालिका पर दबाव? मद्रास HC जज मामले में पूर्व जज का बड़ा बयान

मुंबई 
मद्रास हाई कोर्ट के जस्टिस जी. आर. स्वामीनाथन के खिलाफ विपक्षी सांसदों द्वारा लाए जा रहे महाभियोग प्रस्ताव पर पूर्व जजों ने अपनी नाराजगी जाहिर की है। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाईकोर्ट्स के 56 रिटायर्ड न्यायाधीशों ने एक बयान जारी कर जस्टिस स्वामीनाथन के खिलाफ लाए जा रहे महाभियोग की निंदा की और इसे न्यायाधीशों को डराने-धमकाने का 'बेशर्म प्रयास' करार दिया।
 
इस बयान पर हस्ताक्षर करने वाले 56 जजों में शामिल मध्यप्रदेश हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस के.के. त्रिवेदी ने पीटीआई से बात करते हुए महाभियोग को पूरी तरह से गलत करार दिया। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों का यह प्रयास राजनीतिक रूप से प्रेरित है या फिर दबाव बनाकर अपने पक्ष में फैसला हासिल करने का प्रयास है।

पूर्व जज त्रिवेदी ने कहा, "हम सभी इस बात पर सहमत हैं कि विपक्षी दलों द्वारा उठाया गया यह कदम पूरी तरह गलत है, खासकर तब जब यह मामला अभी अदालत में विचाराधीन है। यह कार्रवाई या तो पूरी तरह से राजनीतिक उद्देश्य की वजह से की गई है, या फिर किसी एक पक्ष के हिसाब से फैसला दिलाने के लिए न्यायाधीश पर दबाव बनाने का प्रयास है।"

पूर्व न्यायाधीश ने कहा कि दोनों ही परिस्थितियों को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि इससे न्यायपालिका और भारतीय न्याय व्यवस्था की साख को खतरा है। इससे जनता का विश्वास कमजोर होता है। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुसार किसी भी जज को पद से हटाने का प्रस्ताव केवल कदाचार या अक्षमता के आधार पर होता है, जो आरोप विपक्षी सांसद लगा रहे हैं वह कानूनी रूप से ही मान्य नहीं है।
 
क्या है मामला?
यह पूरा मामला तमिलनाडु के मदुरै जिले में स्थित अरुलमिघु सुब्रमणिया स्वामी मंदिर के दीपथून मामले से जुड़ा हुआ है। 1 दिसंबर को जस्टिस स्वामीनाथन ने एक याचिका के संदर्भ में मंदिर प्रशासन को यह जिम्मेदारी दी कि वह उची पिल्लेयार मंडपम के पास परंपरागत रूप से जलाए जाने वाले दीप के अलावा पहाड़ी के पत्थर स्तंभ पर भी दीप जलाएं। वहां पर मौजूद दरगाह का जिक्र करते हुए एकल पीठ ने कहा कि दीप जलाने से पास स्थित दरगाह या मुस्लिम संगठन के अधिकारों का उल्लंघन नहीं होता है।

हाई कोर्ट की तरफ से मिले इस आदेश के बाद स्थानीय समुदाय के लोगों ने दीप जलाने की कोशिश की लेकिन उन्हें पुलिस ने ऐसा करने से रोक दिया। इसके बाद 3 दिसंबर को न्यायाधीश ने एक और आदेश पारित करते हुए श्रद्धालुओं को दीप जलाने की अनुमति दी और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल को उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी। इसके बाद तमिलनाडु सरकार ने यह मामला सुप्रीम कोर्ट में उठाया।

हाई कोर्ट के जज के आदेश का पालन न होने पर राज्य में विपक्षी पार्टियों और हिंदू समुदाय ने इसका विरोध किया। इसके बाद सत्ताधारी डीएमके के सांसदों ने अन्य विपक्षी सांसदों के साथ मिलकर लोकसभा अध्यक्ष को जज स्वामीनाथन के खिलाफ महाभियोग का नोटिस सौंप दिया। दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी ने विपक्षी सांसदों के इस प्रस्ताव को केवल वोट की राजनीति नहीं बल्कि भारत की मूल पहचान पर किया गया हमला करार दिया।

 

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