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JJM घोटाला: राजस्थान में ACB ने मारा ताबड़तोड़ छापा, 15 संदिग्धों की पहचान

जयपुर 

राजस्थान में बहुचर्चित जल जीवन मिशन (JJM) घोटाला मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने मंगलवार सुबह बड़ा एक्शन लिया। एसीबी की टीमों ने राजस्थान सहित कई राज्यों में एक साथ छापेमारी कर 15 आरोपियों के ठिकानों पर सर्च अभियान शुरू किया। कार्रवाई की जद में रिटायर्ड आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल भी शामिल हैं।

एसीबी सूत्रों के अनुसार, जयपुर, बाड़मेर, जालोर, सीकर के अलावा बिहार, झारखंड और दिल्ली सहित कुल 15 स्थानों पर तड़के दबिश दी गई। छापेमारी के दौरान आधा दर्जन से अधिक आरोपियों को हिरासत में लिया गया है। टीमों ने दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और वित्तीय लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड जब्त किए हैं, जिनकी जांच की जा रही है।
बाड़मेर रेलवे स्टेशन से एक्सईएन हिरासत में

कार्रवाई के तहत पीएचईडी जोधपुर में तैनात एक्सईएन विशाल सक्सेना को मंगलवार सुबह करीब 5 बजे बाड़मेर रेलवे स्टेशन से हिरासत में लिया गया। जानकारी के मुताबिक, सक्सेना विरात्रा माता मंदिर में दर्शन के लिए ट्रेन से बाड़मेर पहुंचे थे। एसीबी की टीम पहले से स्टेशन पर मौजूद थी। जैसे ही वे ट्रेन से उतरे, टीम ने उन्हें हिरासत में लेकर जयपुर रवाना कर दिया।

सूत्रों का कहना है कि विशाल सक्सेना की भूमिका टेंडर प्रक्रिया और फर्जी सर्टिफिकेट मामले में संदिग्ध पाई गई है। उनसे विस्तृत पूछताछ की जा रही है।
SIT चार अहम मामलों की जांच में जुटी

जल जीवन मिशन से जुड़े इस कथित घोटाले में एसीबी द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) चार प्रमुख मामलों की जांच कर रहा है। करीब 20 हजार करोड़ रुपए के स्पेशल प्रोजेक्ट से जुड़े टेंडर्स में अनियमितताओं की आशंका जताई गई है। आरोप है कि टेंडर शर्तों में बदलाव कर बड़ी फर्मों को अनुचित लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई।

जांच में सामने आया है कि टेंडर प्रक्रिया में साइट इंस्पेक्शन की विशेष शर्त जोड़ी गई थी, जिससे यह पहले से पता चल सके कि कौन-कौन सी फर्म भाग ले रही हैं। इससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हुए। हालांकि बाद में वित्त विभाग ने इन टेंडर्स को निरस्त कर दिया था। अब एसीबी उन इंजीनियर्स की भूमिका की पड़ताल कर रही है, जिन्होंने यह शर्तें जोड़ी थीं।
55 करोड़ का फर्जी भुगतान

जांच में यह भी सामने आया है कि श्रीश्याम और गणपति ट्यूबवेल फर्म को बिना कार्य किए 55 करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया गया। इस मामले में कुल 139 इंजीनियर जांच के दायरे में हैं। इनमें 15 एक्सईएन, 40 एईएन और 50 जेईएन शामिल बताए जा रहे हैं।

एसीबी इस बात की भी जांच कर रही है कि भुगतान किस स्तर पर और किन अधिकारियों की अनुमति से किया गया। प्रारंभिक जांच में कई स्तरों पर लापरवाही और मिलीभगत की आशंका जताई गई है।
इरकॉन के नाम पर फर्जी सर्टिफिकेट

मामले का एक बड़ा पहलू इरकॉन कंपनी के नाम पर फर्जी सर्टिफिकेट तैयार कर करीब 900 करोड़ रुपए के टेंडर जारी करने से जुड़ा है। ये टेंडर कथित तौर पर श्रीश्याम और गणपति ट्यूबवेल फर्म को दिए गए।

जांच में यह भी आरोप है कि जब मामला उजागर हुआ तो एक्सईएन स्तर पर जांच के नाम पर केरल जाकर एक रिपोर्ट पेश की गई, जिसे अब झूठा बताया जा रहा है। एसआईटी यह पता लगाने में जुटी है कि इरकॉन के नाम का दुरुपयोग कर फर्जी प्रमाण पत्र तैयार करने में किन-किन इंजीनियरों और अधिकारियों की भूमिका रही।
कई राज्यों में समन्वित कार्रवाई

एसीबी की इस कार्रवाई को समन्वित ऑपरेशन माना जा रहा है, जिसमें राजस्थान के अलावा अन्य राज्यों में भी टीमों ने एक साथ दबिश दी। सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई लंबे समय से चल रही गुप्त जांच के बाद की गई है।

एसीबी अधिकारियों का कहना है कि जब्त दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद आगे और गिरफ्तारियां संभव हैं। जांच एजेंसी पूरे प्रकरण में वित्तीय लेन-देन की कड़ियों को खंगाल रही है, ताकि घोटाले की पूरी साजिश और नेटवर्क का खुलासा हो सके।

जल जीवन मिशन जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट में कथित अनियमितताओं ने प्रशासनिक व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एसीबी की यह कार्रवाई आने वाले दिनों में कई और बड़े खुलासों का आधार बन सकती है।

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