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खादी एवं ग्रामोद्योग मंत्री बोले– खादी केवल वस्त्र नहीं, बल्कि विचार है

उद्यमियों को मिलेगा निःशुल्क स्टॉल

प्रदेश के सभी जिलों में पहली बार इतने बड़े स्तर पर आयोजन

खादी वस्त्र नहीं, विचार है– राकेश सचान

जीएसटी सुधार से एमएसएमई सेक्टर को मिली ताकत

मोदी सरकार के प्रयासों से खादी की बिक्री में दोगुनी बढ़ोतरी

ग्रेटर नोएडा
केंद्र सरकार द्वारा जीएसटी स्लैब में कटौती के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने उद्यमियों को बड़ा तोहफा दिया है। खादी एवं ग्रामोद्योग मंत्री राकेश सचान ने घोषणा की कि प्रदेश के सभी 75 जिलों में 9 से 16 अक्टूबर तक आठ दिवसीय ट्रेड शो आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में उद्यमियों को निःशुल्क स्टॉल उपलब्ध कराए जाएंगे ताकि वे अपने उत्पादों का व्यापक प्रचार-प्रसार कर सकें। यह घोषणा मंत्री ने यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो (UPITS) के चौथे दिन “खादी फॉर नेशन, खादी फॉर फैशन” विषय पर आयोजित सेमिनार में की।

एमएसएमई सेक्टर को मिली नई ऊर्जा
राकेश सचान ने कहा कि जीएसटी लागू होने के बाद पहली बार इतने बड़े स्तर पर सुधार किया गया है, जिससे एमएसएमई सेक्टर को नई ऊर्जा मिली है। पहले केवल मंडल स्तर पर ट्रेड शो आयोजित होते थे, लेकिन यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो की सफलता को देखते हुए सरकार ने इसे अब जिला स्तर पर भी ले जाने का निर्णय लिया है। इन शो में खादी, टेक्सटाइल, ODOP समेत सभी सेक्टर के उद्यमी भाग लेंगे। अधिकारियों को इसके लिए उपयुक्त स्थान तय करने के निर्देश दे दिए गए हैं।

खादी उत्पादन और शोरूम घटने पर चिंता
मंत्री ने कहा कि खादी के उत्पादन और शोरूम की संख्या घटने पर सरकार गंभीर है। इस पर विशेषज्ञों और स्टेकहोल्डर्स से लगातार विमर्श हो रहा है। युवाओं को खादी से जोड़ने के लिए विश्वविद्यालयों में खादी शोरूम खोलने की योजना पर भी विचार किया जा रहा है।

पर्यावरण व स्वास्थ्य के लिए बेहतर है खादी
राकेश सचान ने कहा कि बाजार में उपलब्ध अधिकांश कपड़े पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों के लिए हानिकारक हैं, जबकि खादी पूरी तरह शुद्ध और सुरक्षित है।
उन्होंने खादी को महंगा मानने की धारणा को गलत बताते हुए कहा कि अन्य कपड़ों की तुलना में खादी सस्ती है।

दोगुनी हुई खादी की बिक्री
मंत्री ने बताया कि जब से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कार्यभार संभाला है, तब से खादी को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है। प्रधानमंत्री लगातार खादी को डिजाइन और तकनीक से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप बीते वर्षों में खादी की बिक्री दोगुनी से अधिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

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