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रेल पर सवार होकर चीन पहुंचे किम जोंग उन, शाही बेड़े में क्या-क्या शामिल?

बीजिंग
आमतौर पर किसी देश का सर्वोच्च नेता दूसरे देश की यात्रा के लिए हवाई जहाज का उपयोग करता है, ताकि कम समय में वह वहां पहुंचे और वापस लौट आए। लेकिन उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन हवाई जहाज के बजाय ट्रेन का इस्तेमाल करते हैं। वे बख्तरबंद रेलगाड़ी में सवार होकर दूसरे देश की सीमा में प्रवेश करते हैं। एक बार फिर उन्होंने चीन जाने के लिए इसी रेलगाड़ी का उपयोग किया और मंगलवार को चीन पहुंचे।

1300 किलोमीटर की दूरी तय की
ट्रेन ने उत्तर कोरिया की राजधानी प्योंगयांग से चीन की राजधानी बीजिंग तक लगभग 1300 किलोमीटर की दूरी तय की। बुधवार को बीजिंग में 'विक्ट्री डे' परेड होने वाली है, जिसमें किम जोंग उन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अन्य विश्व नेताओं के साथ शामिल होंगे। उम्मीद है कि इस सैन्य परेड के जरिए वे अमेरिका के खिलाफ अपनी त्रिपक्षीय एकता का प्रदर्शन करेंगे।

किम जोंग उन पहली बार लेंगे हिस्सा
किम और व्लादिमीर पुतिन उन 26 विश्व नेताओं में शामिल हैं, जो बीजिंग में आयोजित होने वाली इस विशाल सैन्य परेड में शी जिनपिंग के साथ हिस्सा लेंगे। यह परेड द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति और जापानी आक्रामकता के खिलाफ चीन के प्रतिरोध की 80वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में हो रही है। यह ऐसा अवसर होगा, जिसमें किम जोंग उन अपने 14 साल के शासनकाल में पहली बार किसी बड़े बहुपक्षीय आयोजन में भाग लेंगे। साथ ही यह पहला मौका होगा, जब अमेरिका को चुनौती देने वाले देशों के नेता किम, शी और पुतिन एक ही स्थान पर एक साथ नजर आएंगे।

इस ट्रेन में क्या-क्या है?
उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन के लिए ट्रेन से इतनी लंबी यात्रा करना कोई नई बात नहीं है। उनके पिता और दादा भी ऐसा कई बार कर चुके हैं। यानी, यह परंपरा उनके दादा ने शुरू की थी, जिसे आज तक कायम रखा गया है। किम जोंग उन के पिता, किम जोंग इल ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया। कहा जाता है कि किम जोंग इल को हवाई जहाज से यात्रा करने में डर लगता था, इसलिए वे ट्रेन से सफर करते थे।
किम जोंग उन ट्रेन यात्रा

बुलेटप्रूफ ट्रेन में 90 डिब्बे
इस गहरे हरे रंग की ट्रेन में कॉन्फ्रेंस रूम, ऑडियंस चैंबर, बेडरूम, सैटेलाइट फोन और फ्लैट स्क्रीन टीवी जैसे साधन मौजूद हैं। नवंबर 2009 में दक्षिण कोरिया के एक समाचार आउटलेट ने बताया था कि इस बुलेटप्रूफ ट्रेन में कुल 90 डिब्बे हैं। इन डिब्बों में लाल रंग की लेदर आर्मचेयर हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस ट्रेन की गति 50 किलोमीटर प्रति घंटा है। इस रेलगाड़ी का नाम 'टाएयेनघो' है, जिसका कोरियाई भाषा में अर्थ 'सूरज' है। यह उत्तर कोरिया के संस्थापक किम इल सुंग का प्रतीक माना जाता है।

उत्तर कोरियाई नेताओं का ट्रेन से क्या है संबंध?
बताया जाता है कि लंबी दूरी की यात्राओं के लिए ट्रेन का उपयोग करने की परंपरा किम इल सुंग ने शुरू की थी। किम जोंग उन के दादा, किम इल सुंग, वियतनाम और पूर्वी यूरोप तक ट्रेन से यात्रा करते थे। इस ट्रेन की सुरक्षा की जिम्मेदारी उत्तर कोरिया के सुरक्षा एजेंट संभालते हैं। वे बम या अन्य खतरों को ध्यान में रखते हुए ट्रेन के मार्ग और अगले स्टेशनों की जांच करते हैं। बता दें कि 2001 में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मिलने के लिए किम जोंग इल ने दस दिन की ट्रेन यात्रा कर मॉस्को पहुंचे थे।

 

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