मानसा.
नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड में पुलिस ने एक और एफआईआर दर्ज कर ली है। मुख्य आरोपी अश्वनी कुमार की दुकान को ध्वस्त किए जाने के मामले में 1000 से 1200 अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, परविंदर झोटा की हत्या के बाद स्थानीय लोगों और समर्थकों का गुस्सा फूट पड़ा था। भीड़ ने आरोपी मेडिकल स्टोर संचालक अश्वनी कुमार की दुकान को क्षतिग्रस्त कर गिरा दिया था। इस घटना को कानून व्यवस्था के उल्लंघन के रूप में देखते हुए स्थानीय पुलिस प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। पुलिस ने संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और बिना अनुमति ढांचा गिराने के संबंध में यह मामला दर्ज किया है।
संपत्ति गिराने से पहले जांच क्यों नहीं की गई
जनहित याचिका दायर करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता बलतेज सिंह सिद्धू ने अदालत को बताया कि परविंदर सिंह झोटा की हत्या के आरोपी का घर और दुकान स्थानीय प्रशासन की ओर से ढहा दिए गए हैं। उन्होंने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि आरोपी की दुकान गिराए जाने से हत्या के मामले से जुड़े कई अहम साक्ष्य नष्ट होने की आशंका है। उन्होंने दलील दी कि किसी भी संपत्ति को गिराने से पहले उससे जुड़े मामले की पूरी जांच की जानी चाहिए थी, ताकि संभावित साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जा सके। बिना उचित जांच के की गई इस कार्रवाई से आपराधिक मामले की जांच प्रभावित हो सकती है।




