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शराब कांड में प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, 3 आरोपियों के 5 ठिकाने ध्वस्त; मौतों का आंकड़ा 30 पहुंचा

 सागर

 जहरीली शराब कांड के आरोपियों पर प्रशासन की कार्यवाही भी तेज हो गई है। गुरुवार को इस कांड के तीन आरोपितों के बंडा कस्बे में स्थित पांच मकान-गोदामों को बुल्डोजर चलाकर ढहा दिया गया।

इसके साथ काली कमाई से खड़े किए गए उनके अवैध साम्राज्य का रसूख भी मिट्टी में मिल गया।
तीन ठिकाने ढहाए

बंडा एसडीएम कार्यालय में गुरुवार दोपहर एक बजे कार्यवाही करने वाली पूरी टीम को एकत्र किया गया। वहां अधिकारियों ने उन्हें ब्रीफ किया उसके बाद तीन अलग-अलग टुकड़ियां एक-एक बुल्डोजर लेकर तीन टीमें आरोपितों मनीष लोधी उर्फ यशवंत ठाकुर, चंद्रभान उर्फ चंदू सिंह राजपूत और आशीष साहू के चिन्हित ठिकानों पर पहुंची।

10 मिनट के भीतर भवनों में तोड़फोड़ शुरू हो गई। कार्रवाई के दौरान मनीष लोधी के घर से एक महिला कुछ दस्तावेज लेकर अधिकारियों के पास पहुंची, जिसे बिना सुने हटा दिया गया।

करणी सेना के संभागीय अध्यक्ष और ततरवारा गांव के सरपंच चंद्रभान उर्फ चंदू सिंह राजपूत की करीब 2500 वर्गफीट में बनी आलीशान कोठी को पांच-छह घंटों में तोड़ दिया गया। कोठी का अधिकांश हिस्से का निर्माण एक साल पूर्व ही किया गया था। भवन इतना बड़ा था कि परिसर में करीब दस गाड़ियों की पार्किंग आसानी से हो सकती थी।

एक आरोपी आशीष साहू के कॉलेज रोड स्थित करीब 20 साल पुराना मकान दो घंटे के भीतर ही पूरी तरह ढहा दिया गया। इसके आगे का हिस्सा कच्चा था। आशीष को मनीष लोधी का सहयोगी बताया जा रहा है। उसका मुख्य काम अलग-अलग गांवों में शराब की तस्करी करना था। आशीष के खिलाफ छह-सात मामले दर्ज हैं।
रवि लखेरा ने खड़ा किया नेटवर्क

पुलिस के अनुसार आबकारी ठेकेदार मनीष लोधी ने अंतरराज्यीय नकली शराब माफिया रवि लखेरा के साथ मिलकर नकली शराब का नेटवर्क खड़ा किया। उसने ततरवारा सरपंच चंदू राजपूत के साथ अवैध शराब की फैक्र्ट्री बनाई। चंदू तो पकडा गया, लेकिन मनीष और रवि फरार हैं।

पुलिस ने इन तीनों पर 20 -20 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है। आरोपित बनाए गए 30 लोगों में से 14 पकड़े जा चुके हैं।
मनीष के गोदाम में भट्ठी, कड़ाही और मशीनें

वार्ड-11 स्थित मनीष लोधी उर्फ यशवंत के गोदाम में भट्ठी, कड़ाही और मशीनें मिलीं। खाद्य पदार्थों के रैपर भी मिले। अंदर पांच बाइकें खड़ी थीं और जिसमें से तीन पर नंबर प्लेट तक नहीं थी।

आशंका जताई गई कि इन्हीं वाहनों का इस्तेमाल अवैध शराब की सप्लाई और तस्करी में किया जाता था। इसको देखने से साफ हुआ कि पुलिस इस गोदाम को देखने तक नहीं पहुंची थी।

प्रशासन की बुल्डोजर कार्रवाई में पूरा गोदाम इन मशीनों के साथ जमींदोज हो गया। इस अनदेखी पर सवाल उठ रहे हैं। कहा जा रहा है कि अगर इन मशीनों का संबंध अवैध शराब बनाने से हो तो उसके सबूत भी हमेशा के लिए

इस मामले में बंडा नगर पालिका की निष्क्रियता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। 10-10, 20-20 वर्षों से अवैध निर्माण था, लेकिन कभी कोई कार्रवाई नहीं हुई। आरोपी मनीष लोधी का गोदाम तो सरकारी जमीन पर कब्जा कर बनाया गया था, लेकिन उसे भी खाली कराने की कोई कोशिश नहीं हुई।

सीएमओ आरसी अहिरवार का कहना था कि ये निर्माण उनके कार्यकाल के पहले हुए हैं, इसलिए अभी स्पष्ट नहीं बता सकता कि उन पर कोई कार्रवाई की गई थी या नहीं? हाल में हुई जांच में यह बगैर परमिशन अवैध निर्माण पाए गए, जिसके आधार पर कार्रवाई की गई।

जहरीली शराब से एक और मौत

जहरीली शराब से मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बुंदेलखंड मेडिकल कालेज में गुरुवार को पिपरिया किल्लाई निवासी राम सिंह (30) की भी मौत हो गई। इसके साथ ही जहरीली शराब से मरने वालों की संख्या 30 पहुंच गई है।

    जहरीली शराब के आरोपित के पांच अवैध निर्माण को चिन्हित किया गया था। प्रशासन द्वारा सभी पर कार्रवाई की गई है। उन्हें 24 घंटे पहले ही नोटिस जारी कर दिए गए थे। आरोपितों के अन्य निर्माणों की जांच की जा रही है। उन पर भी कार्रवाई की जाएगी – संजय जैन, एसडीएम बंडा

 

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