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फर्जीवाड़े पर बड़ा एक्शन: स्टोन क्रशरों के रिकॉर्ड में गड़बड़ी, पोर्टल सील कर करोड़ों का घोटाला उजागर

यमुना नगर.

जिले में खनन से जुड़े ई-रवाना तंत्र में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने साल 2024-25 में सील किए स्टोन क्रशर व स्क्रीनिंग प्लांट के पोर्टल बंद करने की सिफारिश की है। बोर्ड ने इस संबंध में पत्र लिखा है। इससे कार्रवाई में देरी और अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

अवैध खनन रोकने के लिए 37 स्टोन क्रेशर व 17 स्क्रीनिंग प्लांट सहित 54 इकाइयों को सील किया गया था। बोर्ड के आरोप है कि कई जगह सील के बावजूद संचालन जारी रहा। पोर्टल पर खनिज की खरीद-बिक्री भी दर्ज होती रही। जांच में रिकार्ड और वास्तविक गतिविधियों में बड़ा अंतर मिला। इससे करोड़ों रुपये के अवैध लाभ और निगरानी तंत्र की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। खान एवं भू-विज्ञान विभाग के एक बड़े अधिकारी और बिजली निगम पर मिलीभगत के गंभीर आरोप लग रहे हैं। विशेष एजेंसी से इस मामले की गोपनीय जांच भी शुरू हो गई। जिसमें बड़ी कार्रवाई की संभावना है।

एंट्री कप्शन सोसायटी और यमुना सेवा समिति ने भी प्रधानमंत्री के नाम भी पत्र भेजा
वहीं हरियाणा एंट्री कप्शन सोसायटी और यमुना सेवा समिति ने भी प्रधानमंत्री के नाम भी पत्र भेजा है, जिसमें खनन विभाग के पोर्टल पर पांच साल के खरीद-बिक्री ब्योरे की जांच की मांग रखी। आरोप है कि कई विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से निर्धारित खनन सामग्री से कई गुना ज्यादा अवैध खनन रिकार्ड में किया गया। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा पोर्टल बंद करने के लिए पत्र लिखना चर्चा का विषय बना हुआ है। सवाल उठ रहे हैं कि जब लंबे समय से गड़बड़ियां सामने आ रही थीं, तब पहले सख्त कदम क्यों नहीं उठाए गए। सूत्रों के अनुसार, कई इकाइयों के सील होने के बाद भी उनके पोर्टल सक्रिय रहे। इससे आशंका मजबूत होती है कि सिस्टम का दुरुपयोग हुआ। सीलिंग टीम में बोर्ड के अलावा बिजली निगम, खनन विभाग, खरीद व बिक्री विभाग, पुलिस विभाग सहित छह विभाग के अधिकारी व कर्मचारी होते हैं। इसकी रिपोर्ट इलाके के एसडीएम व जिला उपायुक्त के पास भी जाती थी। वहां से भी उचित निगरानी नहीं हुई।

अप्रैल को व्यासपुर एसडीएम जसपाल गिल की जांच के बाद मामले से पर्दा उठा
गत एक अप्रैल को व्यासपुर एसडीएम जसपाल गिल की जांच के बाद मामले से पर्दा उठा था। हिंदुस्तान स्टोन ओरा इकाई पर गंभीर अनियमितताएं मिलीं। 16 अक्टूबर 2025 को सील हटाए जाने के बाद भी नियमों का पालन नहीं किया गया। मौके पर करीब 1500 मीट्रिक टन तैयार खनिज मिला। इससे साफ है कि संचालन जारी था। रिकार्ड की जांच में बड़े अंतर सामने आए। अक्टूबर 2025 से मार्च 2026 तक 1,28,753 मीट्रिक टन खनिज की बिक्री दिखाई गई। 83,253 मीट्रिक टन खरीद दर्ज की गई। बाजार में खनिज का भाव 250 से 300 रुपये प्रति टन है। जबकि रिकार्ड में इसे करीब 100 रुपये प्रति टन दिखाया गया। इस अंतर के आधार पर कई करोड़ के अवैध लाभ की आशंका है। यहां पर खनन सामग्री पंचकूला स्थित कृष्णा इंटरप्राइजेज से दिखाई गई। बिजली की सप्लाई भी जारी थी। व्यासपुर थाना प्रभारी का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है। मामले से जुड़े दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं।

ॉपोर्टल एंट्री व वाहनों की आवाजाही का मिलान किया गया
जांच में ई-रवाना डाटा, पोर्टल एंट्री व वाहनों की आवाजाही का मिलान किया गया। इसमें भारी अंतर मिला। कई ट्रकों की आवाजाही का रिकार्ड नहीं मिला, जबकि पोर्टल पर सप्लाई दर्ज थी। यहीं से पूरे नेटवर्क की परतें खुलनी शुरू हुईं। बाहर की आपूर्ति दिखाकर स्थानीय स्तर पर लेन-देन करने के संकेत भी सामने आए हैं। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, कार्रवाई सीमित होती गई। यह भी बड़ा सवाल बन गया है। जिन इकाइयों पर सील लगी थी, उनके पोर्टल समय पर बंद नहीं किए गए। इससे निगरानी तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं। दूसरी ओर जिले में प्रदूषण को लेकर पहले भी बड़ा अभियान चलाया गया था। वर्ष 2024 से 2025 के दौरान 37 स्टोन क्रशर और 17 स्क्रीनिंग प्लांट सील किए गए थे। इन इकाइयों के खिलाफ बंद करने के आदेश जारी किए गए थे। मौके पर जाकर प्लांट बंद कर सील लगाए गए।

ये स्टोन क्रशर शामिल
डीप स्क्रीनिंग प्लांट एवं स्टोन क्रशर, चौधरी इंडस्ट्रीज, जय भोले स्टोन क्रशर, दहिया एंड कंपनी स्क्रीनिंग प्लांट व सतलुज स्टोन क्रशर, जय लक्ष्मी मिनरल स्टोन क्रशर महियुद्दीनपुर, पोला स्क्रीनिंग एंड स्टोन क्रशर, वैष्णवी स्टोन क्रशर नगली-32, इंजनिक्स इन्फ्रा प्राइवेट लिमिटेड, सालासर स्टोन क्रशर रुलाखेड़ी, मोहित स्टोन क्रशर, जय गणपति स्टोन क्रशर, हजारा बिल्डर ग्रुप स्टोन क्रशर, हीरा स्टोन क्रशर, कश्मीर स्टोन क्रशर डोईवाला, पटियाला स्टोन क्रशर, प्रकाश स्टोन क्रशर बल्लेवाला, जय माता दी स्टोन क्रशर, गोयल स्टोन क्रशर डोईवाला, सरवारा स्टोन क्रशर, कमलेश स्टोन क्रशर, संधू स्टोन क्रशर, जय मां वैष्णो इंटरप्राइजेज स्टोन क्रशर, रेबुटल स्टोन क्रशर बेलगढ़, श्री बालाजी हनुमान ट्रेडर कांसली, शिव शक्ति घोड़ो पीपली, नीलकंठ स्टोन क्रशर एंड स्क्रीनिंग प्लांट, हरियाणा स्टोन क्रशर, सतगुरदेव स्टोन क्रशर, अम्बे इंटरप्राइजेस, अधिष्टा स्टोन क्रशर माजरी टापू, हिंदुस्तान स्टोन ओरा रानीपुर, खुशी स्टोन क्रशर, बीआर स्टोन क्रशर रामपुर गैंदा, जय श्रीराम स्टोन क्रशर नथनपुर, श्रीशिव साईं स्टोन क्रशर घीरोबानी, भारत कंस्ट्रक्शन कंपनी स्टोन क्रशर भगवानपुर।

ये स्क्रीनिंग प्लांट सूची में
एएन ट्रांसपोर्टेशन स्क्रीनिंग प्लांट नगली-32, शिवम स्क्रीनिंग प्लांट लाकड़मय प्रतापनगर, अमीन स्क्रीनिंग प्लांट, ढांडा वाशिंग एंड स्क्रीनिंग प्लांट, कायतुरन हिंदुस्तान प्राइवेट लिमिटेड स्वाबरी, आरके एंटरप्राइजेज मांडेवाला, जय भोले स्क्रीनिंग प्लांट, डोगरा स्क्रीनिंग प्लांट महियुद्दीनपुर, शिव शक्ति मिनरल बेलगढ़, जीएस स्क्रीनिंग प्लांट यूनिट-2 भटूवाला, श्री राम स्क्रीनिंग प्लांट निजामपुर, यमुना स्क्रीनिंग प्लांट, गुरु नानक मिनरल स्क्रीनिंग प्लांट, गुरदयाल सिंह स्क्रीनिंग प्लांट बेलगढ़, हिंदुस्तान स्टोन ओरा स्क्रीनिंग प्लांट (रानीपुर) प्रमुख हैं। अन्य कई इकाइयों पर भी कार्रवाई की गई थी। इन इकाइयों पर कार्रवाई वायु अधिनियम 1981 और जल अधिनियम 1974 के तहत की गई। जिनके पास संचालन की अनुमति नहीं थी या जो निर्धारित मानकों से अधिक प्रदूषण फैला रहे थे, उन्हें पहले नोटिस दिया गया। इसके बाद भी सुधार न होने पर सीलिंग की कार्रवाई की गई। सबसे अधिक कार्रवाई यमुना किनारे व खनन क्षेत्र में की गई। महियुद्दीनपुर, बेलगढ़, माजरी टापू, डोईवाला, नगली-32, रुलाखेड़ी, रानीपुर व प्रतापनगर में काफी संख्या में इकाइयों को सील किया गया। इन प्लांटों से निकलने वाली धूल के कारण आसपास के क्षेत्रों में वायु प्रदूषण की शिकायतें मिल रही थीं।

ई-रवाना पोर्टल बंद कराने को पहले ही लिखा था पत्र
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी प्रदीप सिंह ने बताया कि जिन 54 प्लांटों पर सीलिंग की कार्रवाई की गई थी, उसी समय खनन विभाग को उनके ई-रवाना पोर्टल बंद कराने के लिए पत्र भेज दिया गया था। इसके बावजूद सील लगे प्लांटों के पोर्टल पर खरीद-बिक्री जारी रहने का मामला सामने आया है, जिससे व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। उन्होंने बताया कि जैसे ही यह गड़बड़ी सामने आई, विभाग ने तुरंत खनन विभाग को दोबारा पत्र लिखकर संबंधित पोर्टल बंद कराने के लिए लिखा है। जांच के दौरान सात स्टोन क्रशर ऐसे भी मिले, जहां सील तोड़ दी गई थी। इससे साफ है कि नियमों की खुलकर अनदेखी की गई। बिजली निगम को कनेक्शन काटने के लिए भी लिखा हुआ है। उधर, इस मामले में खनन विभाग अधिकारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी।

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