सीरियल अनुपमा की शुरुआत अनु की चिंता से होती है, जहां वह सोचती है कि जैसे ही राही को कैफे के बारे में पता चलेगा, बड़ा तूफान खड़ा हो सकता है. उसे लगता है कि उसने सही किया है, लेकिन राही उसकी भावनाओं को समझ नहीं पा रही. दूसरी तरफ राही से प्रेम अपने व्यवहार के लिए माफी मांगता है और कहता है कि उसे दुख देने का कोई हक नहीं है. वह राही को एक घड़ी गिफ्ट करता है और वादा करता है कि वह हमेशा उसके साथ रहेगा. राही के मन में डर है कि जब प्रेम को अनुपमा के कैफे के बारे में पता चलेगा, तो उसका रिएक्शन क्या होगा.
मंदिर में अनुपमा और श्रुति का आमना-सामना
कहानी में बड़ा मोड़ तब आता है जब अनुपमा मंदिर जाती है और वहां उसकी मुलाकात श्रुति से होते-होते रह जाती है. श्रुति अपनी बेटी के लिए प्रार्थना कर रही होती है, जिससे मंदिर में भीड़ रुक जाती है. अनुपमा लोगों से अपील करती है कि एक मां की भावना को समझें. इस बीच अनुपमा को एक लॉकेट मिलता है, जिसे वह लौटाने की कोशिश करती है. लेकिन जब वह उसमें अनुज और राही की तस्वीर देखती है, तो चौंक जाती है. तभी श्रुति वहां आ जाती है और दोनों के बीच तीखी बहस शुरू हो जाती है.
श्रुति ने अनु को दी चुनौती
श्रुति दावा करती है कि वह राही की जिंदगी में उसकी जगह लेगी, क्योंकि राही खुद को अकेला महसूस करती है. अनुपमा इस बात का विरोध करती है और कहती है कि मां-बेटी के रिश्ते को किसी को साबित करने की जरूरत नहीं. दोनों के बीच बहस इतनी बढ़ जाती है कि श्रुति खुलकर चुनौती देती है कि वह राही को अनुपमा से छीन लेगी. उधर राही एक डरावना सपना देखती है, जिसमें प्रेम अनुपमा के कैफे को लेकर गुस्से में होता है. सपना टूटने के बाद भी वह डरी रहती है और सोचती है कि वह अपने रिश्ते को कैसे बचाए.





