samacharsecretary.com

Chandigarh में बड़ा बदलाव! अब ग्रुप हाउसिंग सोसायटी बनाकर बेचे जाएंगे फ्लैट

चंडीगढ़

चंडीगढ़ में अब लोग प्लॉट खरीदकर फेवरेट डिजाइन की कोठी नहीं बनवा सकेंगे। चंडीगढ़ प्रशासन अब शहर में प्लॉटेड डेवलपमेंट नहीं करेगा, यानी लोगों को प्लॉट नहीं बेचे जाएंगे। इसकी जगह अब केवल ग्रुप हाउसिंग यानी फ्लैट्स बनाने की परमिशन दी जाएगी।

चंडीगढ़ प्रशासन ने संशोधित मास्टर प्लान में इसे शामिल करने का सुझाव दिया गया है। इससे सिटी की अब हॉरिजॉन्टल की जगह वर्टिकल ग्रोथ होगी। इतना ही नहीं, फेज-II के सेक्टरों में जो भी खाली प्लॉट क्लस्टर बचे हैं, उन्हें अब व्यक्तिगत प्लॉट के बजाय ग्रुप हाउसिंग के लिए फिर से प्लान किया जाएगा।

इतना जरूर है कि 1 से 30 सेक्टर को छोड़कर ही मल्टीस्टोरी बिल्डिंग बन पाएंगी। ऐसा इसलिए क्योंकि यह एरिया हेरिटेज में शामिल है। इसके अलावा अब मिक्स्ड लैंड जमीन का एरिया भी बढ़ाया जाएगा। वहीं, पार्किंग की दिक्कत का भी हल निकालने की तैयारी है। कुल मिक्स्ड लैंड यूज क्षेत्र 252 एकड़ (0.89%) से बढ़कर 428 एकड़ (1.5%) हो गया है।

जानिए, प्रशासन ने ये फैसला क्यों लिया चंडीगढ़ देश की आजादी के बाद बसा पहला प्लांड सिटी है। इसकी नींव 1952 में रखी गई थी। इसके बाद, 1 नवंबर 1966 को पंजाब के पुनर्गठन के समय इसे एक केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया और यह पंजाब व हरियाणा दोनों राज्यों की संयुक्त राजधानी बना। वर्ष 1976 में चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड गठित किया गया।

लेकिन अब यह लगभग पूरी तरह बस गया है। साथ ही जमीन की कमी दिख रही है। इसी चीज को मद्देनजर रखते हुए संशोधित मास्टर प्लान में यह चीज शामिल की गई। फेज-II में सेक्टर-43 (सब-सिटी सेंटर) वाला एरिया आता है। यहां लगभग 78 एकड़ खाली क्षेत्र है, जिसे विकास मार्ग के साथ एकीकृत करते हुए मिश्रित भूमि उपयोग के तहत लाया गया है।

फेज-II के विभिन्न सेक्टरों में कई खाली पॉकेट्स और बिना बिके खाली प्लॉटों के क्लस्टर होने का उल्लेख है। हालांकि इनका कोई एक विशिष्ट कुल क्षेत्रफल नहीं दिया गया है, लेकिन इन्हें अब व्यक्तिगत प्लॉट के बजाय ग्रुप हाउसिंग के लिए फिर से प्लान करने का निर्देश है।

जानिए, इस फैसले के बाद किस तरह की इमारतें बनेंगी फेज-III के सेक्टरों में लगभग 146 एकड़ जमीन खाली पड़ी है, जिसे अब 4 से 6 मंजिला फ्लैटों वाले हाई-डेंसिटी हाउसिंग के लिए इस्तेमाल करने का प्रस्ताव है। फेज-III और बाहरी इलाके में व्यक्तिगत प्लॉटों का आवंटन पूरी तरह बंद (डिसकंटीन्यू) कर दिया गया है।

यहां अब घनी आबादी वाले 4 से 6 मंजिला फ्लैट्स बनाए जाएंगे, ताकि ज्यादा लोगों को घर मिल सके। चंडीगढ़ प्रशासन ने के विभिन्न सेक्टरों में लगभग 215 एकड़ जमीन हाउसिंग बोर्ड दी है, जिसे अभी विकसित किया जाना बाकी है। गांव मलोया के पास 178 एकड़ जमीन आवासीय उपयोग के लिए प्रस्तावित है, जहां हाई-राइज इमारतें बनाने की योजना है।

इंडस्ट्रियल एरिया में जोनिंग एरिया इंडस्ट्रियल एरिया फेज-I और फेज-II में जमीन के बेहतर उपयोग के लिए FAR (फ्लोर एरिया रेश्यो) बढ़ाकर 2.0 कर दिया गया है। साथ ही, ग्राउंड कवरेज 60% तय की गई है। 2 कनाल तक के प्लॉटों के लिए अधिकतम ऊंचाई 68 फीट 3 इंच निर्धारित की गई है। 2 कनाल (5 से 15 मरला) तक के प्लॉट मालिक अब ‘आर्किटेक्चरल कंट्रोल’ या ‘जोनिंग फ्रेमवर्क’ में से किसी एक विकल्प को चुन सकेंगे। हालांकि, यदि वे बढ़े हुए एफएआर 2.0 का लाभ लेना चाहते हैं, तो उन्हें जोनिंग फ्रेमवर्क अपनाना अनिवार्य होगा।

अब औद्योगिक प्लॉटों के भीतर ही श्रमिकों, लेबर और सुरक्षा गार्डों के रहने के लिए हॉस्टल या डॉरमेट्री बनाने की अनुमति दी गई है। 1 एकड़ तक के प्लॉटों में यह सुविधा कुल स्वीकृत FAR का 5% तक और 1 एकड़ से बड़े प्लॉटों में 2.5% तक सीमित होगी। इन कमरों का उपयोग केवल मजदूरों के रहने के लिए किया जा सकेगा। इन्हें किराये या अन्य व्यावसायिक उपयोग के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा।

पार्किंग के संकट से बचाएगा यह फार्मूला
लोगों को पार्किंग के संकट से बचाने के लिए अब स्टिल्ट पार्किंग बनाई जाएगी। फेज-II के सेक्टरों के लिए स्टिल्ट पार्किंग को इमारत की निर्धारित ऊंचाई से छूट दी गई है, ताकि परिसर के भीतर ही पार्किंग की सुविधा मिल सके। फेज-III और पेरिफेरी में इसे कुल ऊंचाई में गिना जाएगा।

इंटिग्रेटेड रेजिडेंशियल हाउसिंग में कुल पार्किंग स्थान घरों के संचित फर्श क्षेत्रफल के कम से कम 30% के बराबर होना चाहिए। स्टिल्ट के नीचे पार्किंग के लिए 7 फीट 6 इंच की स्पष्ट ऊंचाई होनी चाहिए। इस क्षेत्र का उपयोग घरों की संख्या बढ़ाने या उप-विभाजन के लिए नहीं किया जा सकेगा। इसके अलावा कॉमर्शियल, इंडस्ट्रियल व अन्य एरिया के लिए भी प्लानिंग की गई है।

इंडस्ट्रियल एरिया फेज-III के लगभग 60 एकड़ अविकसित क्षेत्र को अब ‘मिक्स्ड लैंड यूज’ के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके तहत आवासीय, व्यावसायिक, संस्थागत और सांस्कृतिक गतिविधियों को शामिल किया जाएगा, ताकि क्षेत्र का समग्र विकास सुनिश्चित हो सके।

Leave a Comment

हम भारत के लोग
"हम भारत के लोग" यह वाक्यांश भारत के संविधान की प्रस्तावना का पहला वाक्य है, जो यह दर्शाता है कि संविधान भारत के लोगों द्वारा बनाया गया है और उनकी शक्ति का स्रोत है. यह वाक्यांश भारत की संप्रभुता, लोकतंत्र और लोगों की भूमिका को उजागर करता है.
Click Here
जिम्मेदार कौन
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here
Slide 3 Heading
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here