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चिकित्सा क्षेत्र में इतिहास, PGI चंडीगढ़ ने 2 वर्षीय बच्चे के ब्रेन ट्यूमर का किया सफल ऑपरेशन

चंडीगढ़
दुनिया में पहली बार पीजीआई चंडीगढ़ के दो विभागों के डॉक्टरों की संयुक्त टीम ने सबसे बड़े और दुर्लभ मेनिन्जियो ट्यूमर की एंडोस्कोपी के जरिए सफल सर्जरी कर इतिहास रच दिया है। यह ट्यूमर सिर के निचले हिस्से (स्कल बेस) में बनने वाला अत्यंत दुर्लभ ब्रेन मेनिन्जियोमा था। इस जटिल सर्जरी को न्यूरोसर्जरी विभाग के प्रो. धंडापानी और ईएनटी (ओटोलैरिंगोलॉजी) विभाग के प्रो. अनुराग की टीम ने करीब 9 घंटे की मैराथन सर्जरी के दौरान अंजाम दिया। यह सर्जरी सोनीपत के 2 वर्षीय बच्चे पर नाक के रास्ते एंडोस्कोपिक तकनीक से की गई। सर्जरी की सफलता के बाद पीजीआई के डॉक्टरों ने न सिर्फ अपनी विशेषज्ञता साबित की, बल्कि चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में भारत को एक बार फिर दुनिया में अग्रणी साबित किया है। इससे पहले वर्ष 2020 में स्पेन में इसी तकनीक से सर्जरी की गई थी, लेकिन उस समय मरीज की उम्र 12 साल थी और ट्यूमर का आकार भी छोटा था।

दुर्लभ ट्यूमर के कारण कई समस्याओं से जूझ रहा था बच्चा
2 साल का यह बच्चा लंबे समय से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित था, लेकिन परिवार को बीमारी की जानकारी नहीं थी। बच्चे की बाईं आंख का बाहर की ओर निकल आना, आंखों की मूवमेंट रुकना, तेज खर्राटे, नाक में बार-बार गांठ दिखना और आंखों से अधिक पानी आना जैसे लक्षण सामने आ रहे थे। जब परिजन बच्चे को पीजीआई लाए तो डॉक्टरों ने सीटी स्कैन और एमआरआई करवाई, जिसमें पता चला कि बच्चे के सिर के निचले हिस्से में 7 सेंटीमीटर का ट्यूमर है, जो साइनस, ब्रेन और ऑर्बिट (आंख की कोटर) तक फैल चुका था। बायोप्सी के बाद पुष्टि हुई कि यह बेहद दुर्लभ मेनिन्जियो ट्यूमर है।

बेहद चुनौतीपूर्ण थी सर्जरी
मेडिकल साइंस में स्कल बेस मेनिन्जियो ट्यूमर की सर्जरी को अत्यंत चुनौतीपूर्ण माना जाता है, खासकर 2 साल के बच्चे में यह जोखिम और भी ज्यादा था। सर्जरी के दौरान हाइपोथर्मिया, अत्यधिक रक्तस्राव और फ्लूइड डिस्टरबेंस से बच्चे की जान को खतरा हो सकता था। इन जोखिमों को देखते हुए ईएनटी, न्यूरोसर्जरी और न्यूरो-एनेस्थीसिया विभागों की एक विशेष टीम बनाई गई।

एंडोस्कोपिक तकनीक से टाला गया बड़ा जोखिम
रवायती ओपन सर्जरी के जोखिमों को ध्यान में रखते हुए डॉक्टरों ने सभी सुरक्षित विकल्पों पर विचार कर एंडोस्कोपिक तकनीक से सर्जरी करने का फैसला लिया। सर्जरी के दौरान यह सामने आया कि ट्यूमर नाक के जरिए मैक्सिलरी साइनस और सामने की गाल की हड्डी तक फैल चुका था। इसके बाद उन्नत एंडोस्कोपिक तकनीक, 45 डिग्री नेविगेशन एंगल वाले एंडोस्कोप और विशेष उपकरणों की मदद से ब्रेन के बेहद करीब फंसे ट्यूमर को सावधानीपूर्वक निकाला गया। डॉक्टरों ने बताया कि ट्यूमर में अत्यधिक रक्त वाहिकाएं और कई हड्डियों तक फैलाव था, इसके बावजूद टीम ने पूरी सतर्कता के साथ 9 घंटे में नाक के रास्ते ट्यूमर को पूरी तरह निकालने में सफलता हासिल की, जिससे ओपन सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ी।
 
पूरी तरह स्वस्थ है बच्चा
सर्जरी के अंतिम चरण में स्कल बेस में बने सभी लेयर्स को रिपेयर किया गया। सर्जरी के बाद की गई एमआरआई में पुष्टि हुई कि ट्यूमर पूरी तरह निकाल दिया गया है। फिलहाल बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है और उसकी हालत में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। पीजीआई के डॉक्टरों की इस अद्भुत और ऐतिहासिक सर्जरी को चिकित्सा जगत में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

 

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