samacharsecretary.com

मोबाइल स्क्रीन और गिरता बर्थ रेट! रिसर्च के दावे से दुनिया में हलचल

 नई दिल्ली
दुनिया के कई देशों में एक बड़ी समस्या तेजी से बढ़ रही है. लोग पहले के मुकाबले कम बच्चे पैदा कर रहे हैं. कई देशों में हालात ऐसे हो गए हैं कि वहां की आबादी धीरे-धीरे घटने लगी है। पहले माना जाता था कि इसकी सबसे बड़ी वजह महंगाई, नौकरी का दबाव, छोटे घर और बदलती लाइफस्टाइल है. लेकिन अब रिसर्च में एक नया और चौंकाने वाला एंगल सामने आ रहा है. साइंटिस्ट्स और रिसर्चर यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या स्मार्टफोन और सोशल मीडिया भी जन्म दर घटने की बड़ी वजह बन चुके हैं। 

सोशल मीडिया बदल रहा है लाइफ

फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के दो-तिहाई से ज्यादा देशों में बर्थ रेट उस स्तर से नीचे जा चुकी है, जिसे आबादी को स्टेबल रखने के लिए जरूरी माना जाता है। 

आसान शब्दों में कहें तो अब कई देशों में लोग इतने बच्चे पैदा नहीं कर रहे कि अगली पीढ़ी पुरानी आबादी की जगह ले सके. साउथ कोरिया, जापान, चीन, यूरोप और अमेरिका जैसे देशों में यह प्रॉब्लम पहले से थी, लेकिन अब लैटिन अमेरिका, मिडिल ईस्ट और एशिया के कई देशों में भी यही ट्रेंड तेजी से दिख रहा है। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले 10-15 साल में बर्थ रेट में अचानक आई गिरावट सिर्फ आर्थिक वजहों से नहीं समझाई जा सकती. रिसर्चर्स का मानना है कि स्मार्टफोन और सोशल मीडिया ने लोगों की जिंदगी जीने का तरीका बदल दिया है। 

अब लोग पहले की तरह बाहर मिलना-जुलना कम कर रहे हैं. रिलेशनशिप बनाना मुश्किल हो रहा है और अकेलापन बढ़ रहा है. यही चीज आगे चलकर शादी और बच्चों पर असर डाल रही है। 

जहां इंटरनेट फास्ट वहां बर्थ रेट स्लो!
एक स्टडी में अमेरिका और ब्रिटेन में 4G इंटरनेट नेटवर्क आने के बाद के डेटा को देखा गया. इसमें पाया गया कि जिन इलाकों में तेज मोबाइल इंटरनेट पहले पहुंचा, वहां बर्थ रेट ज्यादा तेजी से गिरी. रिसर्चर्स का कहना है कि स्मार्टफोन आने के बाद यंगसटर्स का ज्यादा समय ऑनलाइन जाने लगा और आमने-सामने मिलने का समय कम हो गया। 

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अब डेटिंग, दोस्ती और रिश्तों का बड़ा हिस्सा स्क्रीन तक सीमित होता जा रहा है. सोशल मीडिया पर लोग लगातार दूसरों की परफेक्ट लाइफ देखते रहते हैं, जिससे रिश्तों को लेकर उम्मीदें बदल रही हैं. कई लोग लंबे रिश्ते बनाने से बच रहे हैं. अकेले रहने वाले युवाओं की संख्या भी बढ़ रही है। 

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि पहले जन्म दर इसलिए घटती थी क्योंकि शादीशुदा जोड़े कम बच्चे पैदा करते थे. लेकिन अब सबसे बड़ा कारण यह बन रहा है कि रिश्ते ही कम बन रहे हैं. यानी बड़ी संख्या में लोग शादी या लंबे रिलेशनशिप तक पहुंच ही नहीं रहे। 

हालांकि एक्सपर्ट्स सिर्फ स्मार्टफोन को ही पूरी तरह जिम्मेदार नहीं मानते. महंगे घर, नौकरी का दबाव, बच्चों की पढ़ाई का खर्च और भविष्य को लेकर डर भी बड़ी वजहें हैं. कई देशों में युवाओं को स्थायी नौकरी और घर खरीदना मुश्किल लग रहा है. ऐसे में वे शादी और बच्चों का फैसला टाल रहे हैं। 

सोशल मीडिया का असर मेंटल हेल्थ पर भी देखा जा रहा है. कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि लगातार स्क्रीन पर रहने से अकेलापन, तनाव और डिप्रेशन बढ़ रहा है. इससे लोगों की सोशल लाइफ प्रभावित हो रही है। 

कुछ देशों में सरकारें इस गिरती जन्म दर को रोकने के लिए पैसे भी दे रही हैं. जापान और साउथ कोरिया जैसे देशों में बच्चों के लिए आर्थिक मदद, टैक्स छूट और दूसरी योजनाएं चलाई जा रही हैं. लेकिन इसके बावजूद जन्म दर में खास सुधार नहीं दिख रहा. एक्सपर्ट्स का कहना है कि सिर्फ पैसे देने से समस्या हल नहीं होगी, क्योंकि असली बदलाव लोगों की लाइफस्टाइल और सोशल बिहेवियर में आया है। 

 

Leave a Comment

हम भारत के लोग
"हम भारत के लोग" यह वाक्यांश भारत के संविधान की प्रस्तावना का पहला वाक्य है, जो यह दर्शाता है कि संविधान भारत के लोगों द्वारा बनाया गया है और उनकी शक्ति का स्रोत है. यह वाक्यांश भारत की संप्रभुता, लोकतंत्र और लोगों की भूमिका को उजागर करता है.
Click Here
जिम्मेदार कौन
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here
Slide 3 Heading
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here