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ट्रेनों में हलाल मीट परोसने की शिकायत पर NHRC सख्त, रेलवे से मांगा जवाब

नई दिल्ली 
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने हाल ही में रेलवे बोर्ड को नोटिस जारी किया है। यह कार्रवाई उस शिकायत पर की गई है जिसमें आरोप लगाया गया था कि भारतीय रेल में परोसे जाने वाले नॉन-वेज भोजन में केवल हलाल प्रमाणित मांस का ही इस्तेमाल किया जा रहा है। आयोग ने प्रथमदृष्टया इस प्रथा को मानवाधिकारों का उल्लंघन बताया है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियांक कनूंगो की अध्यक्षता वाली एनएचआरसी की पीठ ने कहा कि रेलवे में केवल हलाल मांस के प्रयोग का चलन न केवल भोजन विकल्पों को सीमित करता है, बल्कि यह कुछ समुदायों की आजीविका पर भी प्रभाव डालता है। पीठ ने कहा कि इससे विशेष रूप से उन अनुसूचित जाति के हिंदू समुदायों और अन्य गैर-मुस्लिम समुदायों के हित प्रभावित होते हैं, जो परंपरागत रूप से मांस व्यापार से जुड़े हैं।

एनएचआरसी के नोटिस में कहा गया है- शिकायत में लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया मानवाधिकारों के उल्लंघन जैसे प्रतीत होते हैं, क्योंकि केवल हलाल मांस बेचने की प्रथा हिंदू एससी समुदायों, अन्य गैर-मुस्लिम समुदायों की आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है। साथ ही, सरकारी एजेंसी के रूप में रेलवे को सभी धार्मिक आस्थाओं से जुड़े लोगों के भोजन के अधिकारों का सम्मान करना चाहिए, जो भारत के संविधान की धर्मनिरपेक्ष भावना के अनुरूप है।

भोजन विकल्पों में भेदभाव का आरोप
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि रेलवे की यह नीति अनुचित भेदभाव पैदा करती है, क्योंकि इससे वे समुदाय प्रभावित होते हैं जिनकी धार्मिक मान्यताओं में हलाल मांस स्वीकार्य नहीं है। शिकायत में कहा गया कि हिंदू और सिख यात्रियों को उनकी धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप भोजन विकल्प नहीं मिलते। शिकायतकर्ता ने दावा किया कि यह प्रथा संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), 15 (भेदभाव-निषेध), 19(1)(g) (व्यवसाय की स्वतंत्रता), 21 (जीवन व व्यक्तिगत स्वतंत्रता) और 25 (धर्म की स्वतंत्रता) का उल्लंघन करती है।

एनएचआरसी ने 12(ए) के तहत लिया संज्ञान
आयोग ने मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत इस मुद्दे पर स्वतः संज्ञान लिया। इसके साथ ही रेलवे बोर्ड के चेयरमैन को नोटिस जारी करते हुए दो सप्ताह के भीतर कार्यवाही रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया है।

आगे क्या?
इस मामले पर अब रेलवे बोर्ड को यह स्पष्ट करना होगा कि ट्रेनों में मांस की खरीद और प्रमाणन संबंधी नीति क्या है, क्या खाने में विविध विकल्पों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाती है और क्या केवल हलाल मांस पर निर्भरता वास्तव में भेदभाव या आजीविका पर प्रभाव डालती है।

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