samacharsecretary.com

नसों के बीच फंसा ट्यूमर, निजी अस्पतालों ने किया मना, एम्स में माइक्रोसर्जरी से सफल निकासी

भोपाल 

नसों के बीच विकसित हुए खतरनाक ट्यूमर ने एक 40 वर्षीय महिला की जिंदगी पूरी तरह बदल दी थी। हालत यह हो गई थी कि उनका उठना-बैठना तक मुश्किल हो गया और धीरे-धीरे वे बिस्तर पर निर्भर हो गईं। कई निजी अस्पतालों ने इस जटिल सर्जरी को जोखिम भरा बताकर हाथ खड़े कर दिए थे। 

बिस्तर तक सीमित हो गई थी जिंदगी
भोपाल निवासी 40 वर्षीय महिला पिछले कई महीनों से इस न्यूरोलॉजिकल समस्या से जूझ रही थीं। स्थिति इतनी खराब हो गई थी कि वे खुद से उठ-बैठ भी नहीं पा रही थीं। धीरे-धीरे उन्होंने अपने शरीर पर नियंत्रण खोना शुरू कर दिया, जिसमें सबसे बड़ी समस्या मल और मूत्र पर नियंत्रण खत्म होना था।

डॉक्टरों ने बताया कि महिला को इंट्रामेडुलरी स्पाइनल ट्यूमर की समस्या थी। यह वह गांठ होती है जो रीढ़ की हड्डी (स्पाइनल कॉर्ड) के अंदर विकसित होती है। यह बेहद दुर्लभ स्थिति है और कुल स्पाइनल ट्यूमर मामलों में इसका प्रतिशत बहुत कम होता है। इस तरह के ट्यूमर में सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि यह सीधे नसों के बीच विकसित होता है, जिससे सर्जरी के दौरान जरा सी चूक स्थायी लकवे का कारण बन सकती है। इसके लक्षणों में शरीर के हिस्सों में कमजोरी, सुन्नपन, चलने में दिक्कत, और मल-मूत्र नियंत्रण में समस्या शामिल हैं। समय पर पहचान और विशेषज्ञ इलाज ही इससे बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।

एक प्रतिशत मामलों में होती है यह बीमारी
यह ट्यूमर स्पाइनल श्वाननोमा के बेहद कम, लगभग 1.1 प्रतिशत मामलों में ही देखने को मिलता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्थिति रीढ़ की सर्जरी में सबसे जटिल मानी जाती है, क्योंकि इसमें स्पाइनल कॉर्ड के भीतर से ट्यूमर निकालना होता है। जरा सी चूक भी स्थायी लकवा जैसी गंभीर समस्या पैदा कर सकती है।

कई अस्पतालों ने ठुकराया, एम्स में मिली उम्मीद
मरीज और उनके परिजनों ने इलाज के लिए कई अस्पतालों का रुख किया, लेकिन कहीं सर्जरी को टाल दिया गया तो कहीं इसे अत्यधिक जोखिम भरा और महंगा बताया गया। लगातार निराशा और आर्थिक संकट के बीच परिवार ने लगभग उम्मीद छोड़ दी थी। ऐसे कठिन समय में उन्होंने एम्स का रुख किया, जहां उन्हें नई उम्मीद मिली।

ऑर्थोपेडिक्स विभाग के डॉ. पंकज मिश्रा के नेतृत्व में विशेषज्ञों की टीम ने इस चुनौतीपूर्ण केस को स्वीकार किया। सर्जरी से पहले विस्तृत जांच और सटीक योजना बनाई गई। ऑपरेशन के दौरान माइक्रोसर्जिकल तकनीक का इस्तेमाल किया गया, जिससे स्पाइनल कॉर्ड के भीतर मौजूद ट्यूमर को सावधानीपूर्वक हटाया गया। इस प्रक्रिया में नसों को सुरक्षित रखना सबसे बड़ी चुनौती थी, जिसे टीम ने सफलतापूर्वक पूरा किया।

ये सावधानियां जरूरी

  •     किसी व्यक्ति को लंबे समय तक पीठ दर्द, पैरों में कमजोरी, चलने में असंतुलन या शरीर के किसी हिस्से में सुन्नपन महसूस हो रहा है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह स्पाइनल ट्यूमर का शुरुआती संकेत हो सकता है। ऐसे में तुरंत न्यूरोलॉजिस्ट या ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए।
  •     नियमित स्वास्थ्य जांच, एमआरआई जैसी जांचों से समय रहते बीमारी की पहचान संभव है।
  •     सर्जरी के बाद फिजियोथेरेपी और पुनर्वास बेहद जरूरी होता है, जिससे मरीज तेजी से सामान्य जीवन में लौट सके।

अलग-अलग विभागों के डॉक्टरों ने मिलकर की सर्जरी
इस जटिल सर्जरी को सफल बनाने में कई विभागों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. एसआरएएन भूषण ने ऑपरेशन के दौरान मरीज की स्थिति को स्थिर बनाए रखा। वहीं, शारीरिक चिकित्सा एवं पुनर्वास विभाग के डॉ. विट्ठल पुरी ने सर्जरी के बाद मरीज की रिकवरी में अहम भूमिका निभाई। उनकी देखरेख में मरीज ने धीरे-धीरे अपनी शारीरिक क्षमता वापस पाना शुरू किया।

आयुष्मान योजना से मिला फ्री इलाज
इस पूरे इलाज की एक और खास बात यह रही कि सर्जरी और उपचार पूरी तरह आयुष्मान भारत योजना के तहत फ्री किया गया। इससे मरीज और उसके परिवार पर किसी प्रकार का आर्थिक बोझ नहीं पड़ा। यह योजना गंभीर बीमारियों से जूझ रहे गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है।

तेजी से हो रहा सुधार, लौट रही सामान्य जिंदगी
सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति में तेजी से सुधार देखने को मिला। उन्होंने धीरे-धीरे अपनी ताकत वापस पाना शुरू कर दिया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उन्होंने फिर से मल-मूत्र पर नियंत्रण प्राप्त कर लिया है, जो उनके लिए बड़ी राहत की बात है। अब वह धीरे-धीरे सामान्य और आत्मनिर्भर जीवन की ओर बढ़ रही हैं।

Leave a Comment

हम भारत के लोग
"हम भारत के लोग" यह वाक्यांश भारत के संविधान की प्रस्तावना का पहला वाक्य है, जो यह दर्शाता है कि संविधान भारत के लोगों द्वारा बनाया गया है और उनकी शक्ति का स्रोत है. यह वाक्यांश भारत की संप्रभुता, लोकतंत्र और लोगों की भूमिका को उजागर करता है.
Click Here
जिम्मेदार कौन
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here
Slide 3 Heading
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here