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पंजाब ने पराली प्रबंधन में की बड़ी उपलब्धि, 94% कमी आई जलाने की घटनाओं में, मिला स्कॉच सिल्वर अवॉर्ड

चंडीगढ़ 

पंजाब सरकार द्वारा फसल अवशेष प्रबंधन के क्षेत्र में अपनाई गई दूरदर्शी रणनीति को बड़ी राष्ट्रीय मान्यता मिली है। राज्य को पर्यावरण श्रेणी में प्रतिष्ठित 'स्कॉच सिल्वर अवॉर्ड 2025' से नवाजा गया है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने शुक्रवार को चंडीगढ़ में आयोजित एक पत्रकार वार्ता में इस उपलब्धि की जानकारी दी।

कृषि मंत्री ने आंकड़ों के जरिए पंजाब की सफलता को रेखांकित करते हुए बताया कि राज्य में पराली जलाने की घटनाओं में 94 प्रतिशत की ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है। उन्होंने बताया, "वर्ष 2020-21 में पराली जलाने के 83,002 मामले सामने आए थे, जो 2025-26 के सीजन में घटकर मात्र 5,114 रह गए हैं। यह पंजाब के किसानों की जागरूकता और प्रशासन की रियल-टाइम निगरानी का सुखद परिणाम है।" उन्होंने यह सम्मान उन किसानों को समर्पित किया जिन्होंने धुएं के बजाय मशीनों को चुना।

मशीनीकरण पर 600 करोड़ का प्रावधान
सरकार फसल अवशेषों को मिट्टी में ही खपाने के लिए मशीनों पर 50 से 80 प्रतिशत तक सब्सिडी दे रही है। मंत्री खुड्डियां ने बताया कि इस वर्ष 25,000 नई सी.आर.एम. मशीनों की खरीद के लिए 600 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है।

अब तक लगभग 13,000 मशीनें खरीदी जा चुकी हैं और 427 करोड़ रुपये की सब्सिडी सीधे किसानों के खातों में जारी की जा चुकी है। कृषि विभाग ने मशीनों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए ऑनलाइन आवेदन की खिड़की खोल दी है, जहाँ किसान 24 अप्रैल तक आवेदन कर सकते हैं। सरकार के इस मॉडल ने न केवल वायु गुणवत्ता में सुधार किया है, बल्कि मिट्टी की उर्वरक शक्ति को भी बढ़ाने में मदद की है।

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