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रेलवे की हाईटेक पहल, AI कैमरों से ट्रेनों की होगी मॉनिटरिंग; हादसे रोकने में मिलेगी मदद

फरीदाबाद
 देश के सबसे व्यस्त रेल मार्गों में शामिल दिल्ली-मुंबई रूट पर ट्रेन हादसों को रोकने के लिए रेलवे अब हाईटेक तकनीक का सहारा लेने जा रहा है। फरीदाबाद रेल सेक्शन में एमवीआईएस ( मशीन विजन इंस्पेक्शन सिस्टम ) लगाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। यह सिस्टम ट्रेनों के पहियों और अन्य महत्वपूर्ण पुर्जों की निगरानी करेगा और किसी भी तकनीकी खराबी की जानकारी तुरंत कंट्रोल रूम तक पहुंचाएगा। इस सिस्टम को उत्तर रेलवे के दिल्ली डिवीजन में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लगाने की तैयारी है। ये सिस्टम एआई आधारित एक तकनीक है जिसे चलती ट्रेनों में लटके हुए कल पुर्जे, ढीले या गायब पुर्जों का पता लगाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। रेल मंत्रालय की टीम ने इस परियोजना को लेकर सर्वे कार्य शुरू कर दिया है। यह सिस्टम निजामुद्दीन से पलवल के बीच लगाया जाना है।

300 से अधिक ट्रेनों का होता है परिचालन
दिल्ली मुंबई रूट का यह रेल मार्ग देश के सबसे महत्वपूर्ण और व्यस्त कॉरिडोर में शामिल है। क्योंकि इस रूट से देश की सबसे तेज चलने वाली गतिमान एक्सप्रेस, वंदे भारत समेत रोजाना करीब 300 से अधिक ट्रेनें देश के अलग अलग हिस्सों के लिए आती जाती हैं। इनमें मेल एक्सप्रेस ट्रेनों की संख्या करीब 220 है। जबकि 80 से अधिक मालगाड़ियां संचालित होती हैं। इस रूट से दौड़ने वाले ट्रेनों की रफ्तार 120 से 130 किलोमीटर प्रति घंटे की होती है। बल्लभगढ़ स्टेशन से आगे गतिमान की रफ्तार 140 से 150 किमी की हो जाती है।

एमवीआईएस सिस्टम रखेगा नजर
रेलवे अधिकारियों के अनुसार एमवीआईएस एक अत्याधुनिक एआई आधारित तकनीक है। इसमें ट्रैक के किनारे विशेष कैमरे और सेंसर लगाए जाएंगे, जो तेज गति से गुजर रही ट्रेनों की तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड करेंगे। यह सिस्टम खास तौर पर ट्रेनों के पहियों, एक्सल, ब्रेक सिस्टम और अन्य बाहरी हिस्सों की जांच करेगा। यदि किसी ट्रेन में कोई पुर्जा ढीला, टूटा, लटका हुआ या गायब पाया जाता है तो सिस्टम तुरंत अलर्ट जारी करेगा। सिस्टम की मॉनिटरिंग दिल्ली स्थित कंट्रोल रूम से की जाएगी। वहां मौजूद तकनीकी विशेषज्ञ लगातार ट्रेनों से प्राप्त डेटा और तस्वीरों पर नजर रखेंगे। किसी भी संदिग्ध स्थिति में संबंधित स्टेशन और रेलवे अधिकारियों को तुरंत सूचना भेजी जाएगी, ताकि समय रहते कार्रवाई हो सके।

अभी मैन्युअल तरीके होती है जांच
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इस एमवीआईएस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह चलती ट्रेन की रियल टाइम मॉनिटरिंग करेगी। अभी तक ट्रेनों की तकनीकी जांच मुख्य रूप से मैन्युअल तरीके से की जाती रही है, जिसमें समय अधिक लगता है और कई बार छोटी तकनीकी खामियां पकड़ में नहीं आ पातीं। यही दुर्घटना का कारण बनती है।

सिस्टम ऐसे करेगा काम

    रेल अधिकारियों के मुताबिक एमवीआईएस सिस्टम की ट्रैक के किनारे लगाए जाने वाला हाई-रिज़ॉल्यूशन कैमरों और सेंसर का एक नेटवर्क है।

    जब ट्रेनें तेजी से गुजरती हैं, तो यह सिस्टम उनके पहियों, बोगियों और निचले हिस्सों (अंडर-गियर) की तस्वीरें और वीडियो कैप्चर करता है।

    इसका एआई सॉफ्टवेयर इन तस्वीरों को पल भर में स्कैन करके पता लगा लेता है कि कोई पुर्जा असामान्य रूप से लटक तो नहीं रहा है, कोई स्प्रिंग टूटी हुई तो नहीं है, या कोई बोल्ट/पार्ट्स गायब तो नहीं हैं।

    यदि कोई तकनीकी खराबी मिलती है, तो यह सिस्टम तुरंत संबंधित अधिकारियों को अलर्ट भेज देता है।

सर्वे शुरू, जल्द लगाने की तैयारी
रेल अधिकारियों के मुताबिक उत्तर रेलवे के दिल्ली डिवीजन में इसे फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू किया जा रहा है। भविष्य में इसे देश के अन्य महत्वपूर्ण रेल मार्गों पर भी लगाया जाएगा। रेलवे का मानना है कि आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से न केवल ट्रेनों की सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि यात्रियों को भी अधिक सुरक्षित सफर कर सकेंगे। अधिकारियों ने बताया कि इसे लगाने के लिए सर्वे का काम शुरू कर दिया गया है। संभवत: इसे नीलम पुल के या उसके आसपास इसे लगाया जाएगा।

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