samacharsecretary.com

मिडिल ईस्ट तनाव के बीच राहत, भारी तेजी के बाद थमा कच्चे तेल का रुख

नई दिल्ली
पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) के जरिए आपूर्ति को लेकर चिंताओं के बीच पिछले सत्र में 10 प्रतिशत से अधिक की तेज उछाल के बाद मंगलवार को कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में लगभग 1 प्रतिशत की बढ़त के साथ कुछ स्थिरता देखी गई। अमेरिकी कच्चे तेल के वायदा भाव में 1.4 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई और यह 72.23 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं ब्रेंट क्रूड 1.87 प्रतिशत बढ़कर शुरुआती कारोबार में 79.2 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड करता दिखा। ईरान के जवाबी हमलों से तेल और गैस आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ गई है, जिससे तेल की कीमतों में तेजी आई और महंगाई को लेकर चिंता गहरा गई।

रिपोर्ट के मुताबिक, तेहरान ने सऊदी अरब के तेल और गैस ढांचे को निशाना बनाया और रणनीतिक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों को लेकर चेतावनी दी। विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिकी प्रशासन द्वारा घरेलू ऊर्जा कीमतों को नियंत्रित करने के लिए उठाए जाने वाले कदमों की घोषणा से सोमवार को आई घबराहट कुछ कम हुई। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने बताया कि ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट और ऊर्जा सचिव क्रिस राइट मंगलवार को बढ़ती ऊर्जा कीमतों से निपटने की योजना की घोषणा करेंगे।

हालांकि, वैश्विक तेल आपूर्ति के प्रमुख मार्ग माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों को खतरा बना हुआ है, जिससे कीमतों को समर्थन मिल रहा है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह मार्ग अस्थायी रूप से बंद भी होता है तो भारत कुछ समय तक स्थिति संभाल सकता है। लेकिन अगर जलडमरूमध्य लंबे समय तक बंद रहता है, तो भारत को आपूर्ति के स्रोतों में और विविधता लानी होगी। बताया जा रहा है कि भारत पहले से ही रूस, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका जैसे वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं की तलाश कर रहा है।

निवेश बैंक मॉर्गन स्टेनली ने कहा है कि यदि पश्चिम एशिया में पूर्ण स्तर का संघर्ष होता है और होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति लंबे समय तक बाधित होती है, तो ब्रेंट क्रूड की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। एक अन्य हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि जलडमरूमध्य में व्यवधान की स्थिति में ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जा सकता है और व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष की स्थिति में यह 100 डॉलर प्रति बैरल के पार भी जा सकता है।

अनुमान के मुताबिक, सीमित संघर्ष की स्थिति में तेल की कीमत में 5 से 10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी हो सकती है, जबकि ईरान के तेल ढांचे को सीधा नुकसान होने पर 10 से 12 डॉलर प्रति बैरल तक का इजाफा संभव है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कच्चे तेल की कीमत में हर 1 डॉलर की बढ़ोतरी से भारत का वार्षिक आयात बिल करीब 2 अरब डॉलर बढ़ जाता है, जिससे व्यापार संतुलन पर दबाव पड़ता है। दुनिया के कुल तेल परिवहन का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है, जबकि भारत के 40 प्रतिशत से अधिक कच्चे तेल आयात इसी मार्ग से आते हैं।

Leave a Comment

हम भारत के लोग
"हम भारत के लोग" यह वाक्यांश भारत के संविधान की प्रस्तावना का पहला वाक्य है, जो यह दर्शाता है कि संविधान भारत के लोगों द्वारा बनाया गया है और उनकी शक्ति का स्रोत है. यह वाक्यांश भारत की संप्रभुता, लोकतंत्र और लोगों की भूमिका को उजागर करता है.
Click Here
जिम्मेदार कौन
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here
Slide 3 Heading
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here