samacharsecretary.com

12 साल पुराने जमीन अधिग्रहण केस में राहत, हाईकोर्ट ने लगाईं 2 शर्तें

जयपुर
राजस्थान हाईकोर्ट ने 12 साल पुराने एक जमीन अधिग्रहण से जुड़े मामले में याचिकाकर्ता को अपनी गवाही पेश करने का अंतिम अवसर प्रदान किया है। न्यायाधीश अनूप कुमार ढंड की अदालत ने राहत देने के साथ पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संदेश भी दिया। कोर्ट ने याचिकाकर्ता पर दो शर्तें लगाईं है। जिनमें पहली यह है कि उसे 10 हजार रुपए जमा कराने होंगे। साथ ही दूसरी यह है कि सार्वजनिक स्थल पर 25 छायादार पेड़ लगाने होंगे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि गवाही का यह अंतिम अवसर है। इस आदेश के जरिए अदालत ने न्यायिक प्रक्रिया के साथ पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी को भी जोड़ा है।

यह पूरा कानूनी विवाद याचिकाकर्ता प्रमिला गुप्ता की जमीन के अधिग्रहण से जुड़ा हुआ है। याचिकाकर्ता ने अपनी जमीन के अधिग्रहण के बाद वर्ष 2014 में जयपुर के सीनियर सिविल जज के समक्ष मुआवजा और अन्य दावों को लेकर रेफरेंस आवेदन (वाद) दायर किया था। सुनवाई के दौरान अदालत द्वारा उन्हें साक्ष्य और गवाही पेश करने के कई अवसर दिए, लेकिन निर्धारित समय पर वे गवाही दर्ज नहीं करा सकीं। निचली अदालत ने 17 सितंबर 2019 को उनकी गवाही का अधिकार बंद कर दिया था। जिसके खिलाफ दायर याचिका में याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि जिस समय गवाही बंद की गई, वह भारत में नहीं थीं। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल विदेश में होना ही गवाही न दे पाने का पर्याप्त कारण नहीं है, क्योंकि उन्हें पहले भी कई मौके दिए जा चुके थे।

पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी प्रमुख शर्तें
याचिकाकर्ता को 15 दिन के भीतर 10 हजार रुपए ‘राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, जयपुर’ के ‘जूनियर एडवोकेट्स वेलफेयर फंड फॉर परचेजिंग ऑफ लॉ बुक्स’ में जमा कराने होंगे। दूसरी शर्त के रूप में कोर्ट ने उन्हें सार्वजनिक जगह पर 25 छायादार पेड़ लगाने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि पेड़ लगाने के बाद उनकी तस्वीरें और उनकी देखभाल करने का लिखित आश्वासन निचली अदालत में जमा कराना होगा। इसके अतिरिक्त, मामले की सुनवाई पूरी होने तक हर छह महीने में उन पेड़ों की स्थिति और उनकी ताज़ा तस्वीरों को भी अदालत में पेश करना होगा।

 

Leave a Comment

हम भारत के लोग
"हम भारत के लोग" यह वाक्यांश भारत के संविधान की प्रस्तावना का पहला वाक्य है, जो यह दर्शाता है कि संविधान भारत के लोगों द्वारा बनाया गया है और उनकी शक्ति का स्रोत है. यह वाक्यांश भारत की संप्रभुता, लोकतंत्र और लोगों की भूमिका को उजागर करता है.
Click Here
जिम्मेदार कौन
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here
Slide 3 Heading
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here