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ग्रामीण महिलाओं ने बदली गांव की तस्वीर, जीविका दीदियां बन रहीं आत्मनिर्भरता की मिसाल

बगहा/पश्चिम चंपारण.

मुख्यमंत्री रहते हुए नीतीश कुमार ने जीविका दीदियों को सशक्त बनाने के लिए एक से बढ़कर एक योजनाएं शुरू कीं। उनको आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में की गई पहल का प्रभाव अब जमीन पर दिखने लगा है। बगहा-दो प्रखंड में जीविका समूह से जुड़ीं महिलाएं सिर्फ पोशाक नहीं सिल रहीं, बल्कि अपने श्रम और हुनर से आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं।

30 हजार सेट पोशाक तैयार करने का लक्ष्य
आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों के लिए पोशाक तैयार करने का जिम्मा मिलने के बाद यहां की महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होने के साथ सामाजिक बदलाव की वाहक भी बन रही हैं। बगहा दो प्रखंड के 370 आंगनबाड़ी केंद्रों के करीब 15 हजार बच्चों के लिए 30 हजार सेट पोशाक तैयार करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस कार्य में जीविका समूह की करीब 150 महिलाएं सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। बच्चों की जरूरत और निर्धारित मानकों के अनुसार चार, पांच और छह वर्ष आयु वर्ग के लिए पोशाक तैयार की जा रही है। लड़कों के लिए हाफ शर्ट और फुल पैंट, जबकि लड़कियों के लिए दो शर्ट और स्कर्ट तैयार किए जा रहे हैं।

सिलाई और फिनिशिंग से रोजगार
इस पूरी प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाने के लिए विभाग की ओर से कपड़ों की कटिंग कर जीविका कार्यालय को उपलब्ध कराया जा रहा है, जबकि सिलाई और फिनिशिंग का कार्य महिलाएं कर रही हैं। प्रत्येक तैयार सेट पर 55 रुपये का भुगतान किया जा रहा है, जो ग्रामीण महिलाओं के लिए आय का स्थायी स्रोत बन रहा है। अब तक 13,274 सेट पोशाक तैयार की जा चुकी है।

महिला सशक्तीकरण के केंद्र बने गांव
दुधौरा, सेमरा, हरनाटांड़ और वाल्मीकिनगर स्थित चार सिलाई केंद्र आज महिला सशक्तीकरण के केंद्र बन चुके हैं। यहां मशीनों की आवाज केवल उत्पादन का संकेत नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ते कदमों की पहचान बन गई है।
जीविका दीदी सावित्री देवी का कहना है कि पहले उनकी भूमिका केवल घरेलू कार्यों तक सीमित थी, लेकिन प्रशिक्षण और रोजगार से जुड़ने के बाद उनमें आत्मविश्वास बढ़ा है। अब वे परिवार की आय बढ़ाने के साथ बच्चों की शिक्षा और घरेलू जरूरतों में आर्थिक सहयोग भी कर रही हैं। हरनाटांड़ सिलाई केंद्र की जीविका दीदी कलावती देवी इस बदलाव की प्रेरक बनकर उभरी हैं। वे महिलाओं को सिलाई का प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ रही हैं। उनके प्रयासों से कई महिलाएं कौशल सीखकर आज नियमित आय अर्जित कर रही हैं।

अन्य सरकारी योजनाओं से भी जोड़ा जाएगा –
बगहा-दो प्रखंड की यह पहल ग्रामीण विकास की नई दिशा दिखा रही है। जीविका समूहों को केवल स्वरोजगार तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि भविष्य में अन्य सरकारी योजनाओं से भी जोड़ा जाएगा। यदि अवसर, प्रशिक्षण और जिम्मेदारी मिले तो ग्रामीण महिलाएं रोजगार सृजन और सामाजिक बदलाव की सबसे मजबूत धुरी बन सकती हैं।
– हिमांशु कुमार सैनी, बीपीएम( ब्लॉक प्रोजेक्ट मैनेजर), बगहा दो प्रखंड

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