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संवेदनशील फैसला: हाथियों के झुंड के कारण रोकी गईं 6 ट्रेनें, बड़ा हादसा टला

चक्रधरपुर

हावड़ा–मुंबई मुख्य रेल मार्ग पर रेलवे ने एक सराहनीय कदम उठाते हुए हाथियों की जान बचाने के लिए देर रात ट्रेनों का परिचालन रोक दिया। चक्रधरपुर रेल मंडल की सतर्कता से एक हाथी के बच्चे समेत पूरे झुंड को सुरक्षित जंगल की ओर जाने का मौका मिला।

मंगलवार देर रात चक्रधरपुर रेल मंडल ने बड़ा और संवेदनशील फैसला लेते हुए हावड़ा–मुंबई मुख्य रेल मार्ग पर ट्रेनों का परिचालन करीब आधे घंटे के लिए पूरी तरह रोक दिया। जानकारी के अनुसार, भालूलता–जरायकेला रेलखंड के महपानी गेट (किमी 389/5-7) के पास रेलवे ट्रैक पर पांच हाथियों का झुंड घूमता हुआ देखा गया। इस झुंड में एक छोटा बच्चा भी शामिल था। रात करीब 2:50 बजे ट्रैक पर हाथियों की सूचना मिलते ही रेलवे ने तुरंत कार्रवाई की। मुंबई मेल, हावड़ा मेल, बिलासपुर–टाटानगर एक्सप्रेस समेत छह मालगाड़ियों को रोक दिया गया। इससे किसी भी बड़े हादसे को टाल दिया गया।

पेट्रोलमैन की सतर्कता से बची जान
रेल मंडल के एलीफेंट जोन में तैनात कोल्ड वेदर ट्रैक पेट्रोलमैन नियमित गश्त पर थे। गश्त के दौरान उन्होंने ट्रैक पर हाथियों को देखा और तुरंत वरीय अनुभाग अभियंता को सूचना दी। सूचना मिलते ही ट्रेनों का परिचालन रोक दिया गया। पेट्रोलमैन की सतर्कता के कारण हाथियों, खासकर बच्चे की जान बच सकी। हालांकि अचानक ट्रैक पर हाथियों के आने से ट्रैकमेंटनर, गेटमैन और की-मैन में डर का माहौल है। रेलकर्मियों ने रात में ड्यूटी के दौरान अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की मांग की है।

चार घंटे तक धीमी रफ्तार से चली ट्रेनें
हाथियों के ट्रैक से हटने के बाद भी एहतियात के तौर पर रेलवे ने कॉशन ऑर्डर जारी किया। रात 12:20 बजे से सुबह 4:00 बजे तक इस रेलखंड पर सभी ट्रेनों को 20 किमी प्रति घंटे की धीमी रफ्तार से चलाया गया। लोको पायलट लगातार हॉर्न बजाते हुए और सतर्क नजर रखते हुए ट्रेनें चलाते रहे। हाथियों की मौजूदगी के कारण महपानी गेट को रात में बंद कर दिया गया, जिससे सड़क यातायात भी प्रभावित रहा। गेट पर तैनात रेलकर्मी भी सुरक्षित स्थानों पर चले गए। सुबह होते-होते हाथियों का झुंड पास के जंगल में चला गया। रेलवे की इस मानवीय पहल की स्थानीय लोगों ने सराहना की है। यह घटना दिखाती है कि रेल परिचालन और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना कितना जरूरी है।

 

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