samacharsecretary.com

पंजाब विधानसभा में बच्चों की मोबाइल लत पर गंभीर चर्चा

चंडीगढ़.

पंजाब विधानसभा में बुधवार को बच्चों में बढ़ती मोबाइल और इंटरनेट मीडिया की लत का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। विधायक राणा इंद्र प्रताप सिंह ने काल अटेंशन नोटिस के जरिए सरकार का ध्यान इस गंभीर विषय की ओर दिलाते हुए कहा कि कम उम्र के बच्चों में मोबाइल फोन और इंटरनेट मीडिया के अत्यधिक इस्तेमाल से उनके मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक विकास पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।

उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या पंजाब में भी बच्चों की ओर से इंटरनेट मीडिया के उपयोग को सीमित करने या इसके लिए उम्र सीमा तय करने पर विचार किया जा रहा है। राणा इंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म पर बड़ी मात्रा में ऐसी सामग्री प्रसारित हो रही है जो बच्चों के लिए उपयुक्त नहीं होती। इसके कारण अभिभावकों और शिक्षकों में चिंता बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि कई देशों और राज्यों ने इस खतरे को देखते हुए बच्चों के लिए इंटरनेट मीडिया के उपयोग को सीमित करने की दिशा में कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। इस मुद्दे पर जवाब देते हुए कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने कहा कि यह केवल आईटी विभाग का मामला नहीं है, बल्कि ऐसा विषय है जिस पर हेल्थ, एजुकेशन, पुलिस और सोशल वेलफेयर विभाग सहित कई विभागों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार भी इस मुद्दे को गंभीरता से देख रही है और बच्चों के हित में आवश्यक कदमों पर विचार किया जा रहा है।

कई देश इस पर बना चुके सख्त नियम
अमन अरोड़ा ने कहा कि पूरी दुनिया में बच्चों पर इंटरनेट मीडिया के प्रभाव को लेकर चिंता बढ़ रही है। अधिकतर इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को अकाउंट बनाने की अनुमति नहीं देते, लेकिन इसके बावजूद बच्चे आसानी से इन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसी वजह से कई देशों में सख्त नियम बनाने पर काम चल रहा है। उन्होंने बताया कि ऑस्ट्रेलिया और फ्रांस जैसे देशों में बच्चों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग को सीमित करने के नियमों पर विचार किया जा रहा है, जबकि अमेरिका के कुछ राज्यों—जैसे यूटा और आर्कांसस—में 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया अकाउंट बनाने के लिए अभिभावकों की अनुमति जरूरी करने जैसे कानून बनाए गए हैं। अमन अरोड़ा ने यह भी कहा कि भारत में भी इस दिशा में चर्चा शुरू हो चुकी है। कर्नाटक, महाराष्ट्र और दिल्ली जैसे राज्यों में स्कूलों में मोबाइल फोन के उपयोग को नियंत्रित करने और बच्चों में डिजिटल एडिक्शन को कम करने के लिए नीति बनाने पर विचार किया जा रहा है। कुछ राज्यों में स्कूलों के भीतर मोबाइल फोन के उपयोग पर पहले ही सख्ती की गई है।

अत्यधिक गलत इस्तेमाल नुकसानदायक
उन्होंने कहा कि नई तकनीक के फायदे और नुकसान दोनों होते हैं। इंटरनेट मीडिया के जरिए जहां जानकारी तक तेजी से पहुंच, शिक्षा के नए अवसर और दुनिया से जुड़ने की सुविधा मिलती है, वहीं इसका अत्यधिक और गलत इस्तेमाल बच्चों के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है। इसलिए जरूरी है कि सरकार के साथ-साथ समाज भी बच्चों को इसके जिम्मेदार उपयोग के लिए जागरूक करे। इस दौरान सेहत मंत्री डा बलबीर सिंह ने भी कहा कि यह विषय उनके विभाग से भी जुड़ा हुआ है क्योंकि मोबाइल और इंटरनेट मीडिया की बढ़ती लत बच्चों और युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है। उन्होंने कहा कि आज के समय में मोबाइल एडिक्शन एक गंभीर समस्या बनती जा रही है, जिसके कारण बच्चों में एंग्जायटी, डिप्रेशन और स्लीप डिसऑर्डर जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं।

चाइल्ड साइकोलॉजी से जुड़े प्रशिक्षण के जरिए लोग हो रहे जागरुक
डाॅ. बलबीर सिंह ने बताया कि सरकार इस समस्या से निपटने के लिए जिलों में मनोवैज्ञानिकों को प्रशिक्षण दे रही है ताकि जरूरत पड़ने पर बच्चों और उनके अभिभावकों को सही मार्गदर्शन मिल सके। इसके अलावा चाइल्ड साइकोलॉजी से जुड़े प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है। विधानसभा में इस मुद्दे पर चर्चा के दौरान सदस्यों ने कहा कि बच्चों के भविष्य और मानसिक स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने के लिए सोशल मीडिया के जिम्मेदार उपयोग को लेकर ठोस नीति और व्यापक जागरूकता अभियान चलाना समय की बड़ी जरूरत बन गया है।

Leave a Comment

हम भारत के लोग
"हम भारत के लोग" यह वाक्यांश भारत के संविधान की प्रस्तावना का पहला वाक्य है, जो यह दर्शाता है कि संविधान भारत के लोगों द्वारा बनाया गया है और उनकी शक्ति का स्रोत है. यह वाक्यांश भारत की संप्रभुता, लोकतंत्र और लोगों की भूमिका को उजागर करता है.
Click Here
जिम्मेदार कौन
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here
Slide 3 Heading
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here