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क्यूबेक के प्राइमरी स्कूलों में सिख पगड़ी और मुस्लिम नकाब पर लग सकती है पाबंदी

चंडीगढ़
 कनाडा के क्यूबेक प्रांत में नई सरकार प्राथमिक स्कूलों में बच्चों के धार्मिक पहनावे पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रही है। इसके तहत सिख बच्चों की पगड़ी, मुस्लिम बच्चों के नकाब और यहूदी समुदाय के धार्मिक प्रतीकों पर रोक लगाई जाएगी।

सरकार के इस फैसले का सबसे अधिक असर सिख, मुस्लिम और यहूदी समुदाय के बच्चों पर पड़ने की आशंका है। इस प्रस्ताव ने धार्मिक स्वतंत्रता और बच्चों के अधिकारों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

चुनावी वादे को पूरा करने की तैयारी में नई सरकार
क्यूबेक में अक्टूबर में हुए प्रांतीय चुनाव में अलगाववादी पार्टी क्यूबेक्वा सत्ता में आई है। पार्टी ने अपने चुनावी एजेंडे में प्राथमिक स्कूलों के बच्चों के धार्मिक पहनावे पर प्रतिबंध लगाने का वादा किया था।

प्रांत के शिक्षा मंत्री जोएल अर्सेन्यू ने कहा है कि सरकार इसी वादे के आधार पर आगे बढ़ेगी। उनका कहना है कि पार्टी को इसी एजेंडे पर जनादेश मिला है और वह इसे लागू करने के लिए काम करेगी।

प्रांत के नए प्रीमियर पॉल सेंट-पियरे प्लामोंडन भी इस प्रस्ताव का समर्थन कर चुके हैं। सितंबर में उन्होंने कहा था कि जब अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजते हैं तो उन्हें वहां के नियमों का पालन करना होता है। उनके मुताबिक, लोगों को यह समझना चाहिए कि स्कूल के नियमों के तहत धार्मिक प्रतीकों को हटाया जा सकता है।

2019 से शुरू हुई धार्मिक प्रतीकों पर पाबंदी
क्यूबेक में धार्मिक प्रतीकों पर प्रतिबंध लगाने की प्रक्रिया वर्ष 2019 में तत्कालीन कोएलिशन एवेनिर क्यूबेक (सीएक्यू) सरकार के कार्यकाल में शुरू हुई थी। उस समय लागू धर्मनिरपेक्षता कानून के तहत कुछ सरकारी कर्मचारियों को ड्यूटी के दौरान पगड़ी, हिजाब जैसे धार्मिक प्रतीक पहनने से रोक दिया गया था।

इसमें सरकारी स्कूलों के शिक्षक, प्रिंसिपल, उप-प्रिंसिपल, पुलिस अधिकारी, न्यायाधीश और अन्य कानून प्रवर्तन अधिकारी शामिल हैं। इस कानून को कनाडा के सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।

इसके बाद अप्रैल में पिछली सरकार ने धार्मिक गतिविधियों पर और पाबंदियां लगाई थीं। इनके तहत सार्वजनिक विश्वविद्यालयों, सरकार से आर्थिक सहायता प्राप्त निजी संस्थानों और बाल देखभाल केंद्रों में धार्मिक गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया गया। सड़कों और पार्कों में सामूहिक धार्मिक गतिविधियों पर भी रोक लगाई गई थी। अब नई सरकार इन प्रतिबंधों का दायरा बढ़ाकर प्राथमिक स्कूलों के बच्चों तक ले जाना चाहती है।

बच्चों में भेदभाव का संदेश जाएगा: मानवाधिकार संगठन
कनाडाई सिविल लिबर्टीज एसोसिएशन की प्रतिनिधि और मौलिक स्वतंत्रता मामलों की निदेशक अनाइस बुसिएर मैकनिकोल ने सरकार के प्रस्ताव की आलोचना की है। उनका कहना है कि क्यूबेक में धार्मिक अभिव्यक्ति पर पाबंदियों का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है।

पहले सरकारी कर्मचारियों, फिर स्कूलों और बाल देखभाल केंद्रों के कर्मचारियों पर प्रतिबंध लगाए गए और अब बच्चों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इससे प्राथमिक स्कूलों के बच्चों को अलगाव और दूसरे समुदायों के प्रति अस्वीकार का संदेश जाएगा। उनके अनुसार, यह ऐसी समस्या का समाधान तलाशने जैसा है, जो वास्तव में मौजूद ही नहीं है।

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