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क्यूबेक के प्राइमरी स्कूलों में सिख पगड़ी और मुस्लिम नकाब पर लग सकती है पाबंदी

चंडीगढ़  कनाडा के क्यूबेक प्रांत में नई सरकार प्राथमिक स्कूलों में बच्चों के धार्मिक पहनावे पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रही है। इसके तहत सिख बच्चों की पगड़ी, मुस्लिम बच्चों के नकाब और यहूदी समुदाय के धार्मिक प्रतीकों पर रोक लगाई जाएगी। सरकार के इस फैसले का सबसे अधिक असर सिख, मुस्लिम और यहूदी समुदाय के बच्चों पर पड़ने की आशंका है। इस प्रस्ताव ने धार्मिक स्वतंत्रता और बच्चों के अधिकारों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। चुनावी वादे को पूरा करने की तैयारी में नई सरकार क्यूबेक में अक्टूबर में हुए प्रांतीय चुनाव में अलगाववादी पार्टी क्यूबेक्वा सत्ता में आई है। पार्टी ने अपने चुनावी एजेंडे में प्राथमिक स्कूलों के बच्चों के धार्मिक पहनावे पर प्रतिबंध लगाने का वादा किया था। प्रांत के शिक्षा मंत्री जोएल अर्सेन्यू ने कहा है कि सरकार इसी वादे के आधार पर आगे बढ़ेगी। उनका कहना है कि पार्टी को इसी एजेंडे पर जनादेश मिला है और वह इसे लागू करने के लिए काम करेगी। प्रांत के नए प्रीमियर पॉल सेंट-पियरे प्लामोंडन भी इस प्रस्ताव का समर्थन कर चुके हैं। सितंबर में उन्होंने कहा था कि जब अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजते हैं तो उन्हें वहां के नियमों का पालन करना होता है। उनके मुताबिक, लोगों को यह समझना चाहिए कि स्कूल के नियमों के तहत धार्मिक प्रतीकों को हटाया जा सकता है। 2019 से शुरू हुई धार्मिक प्रतीकों पर पाबंदी क्यूबेक में धार्मिक प्रतीकों पर प्रतिबंध लगाने की प्रक्रिया वर्ष 2019 में तत्कालीन कोएलिशन एवेनिर क्यूबेक (सीएक्यू) सरकार के कार्यकाल में शुरू हुई थी। उस समय लागू धर्मनिरपेक्षता कानून के तहत कुछ सरकारी कर्मचारियों को ड्यूटी के दौरान पगड़ी, हिजाब जैसे धार्मिक प्रतीक पहनने से रोक दिया गया था। इसमें सरकारी स्कूलों के शिक्षक, प्रिंसिपल, उप-प्रिंसिपल, पुलिस अधिकारी, न्यायाधीश और अन्य कानून प्रवर्तन अधिकारी शामिल हैं। इस कानून को कनाडा के सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। इसके बाद अप्रैल में पिछली सरकार ने धार्मिक गतिविधियों पर और पाबंदियां लगाई थीं। इनके तहत सार्वजनिक विश्वविद्यालयों, सरकार से आर्थिक सहायता प्राप्त निजी संस्थानों और बाल देखभाल केंद्रों में धार्मिक गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया गया। सड़कों और पार्कों में सामूहिक धार्मिक गतिविधियों पर भी रोक लगाई गई थी। अब नई सरकार इन प्रतिबंधों का दायरा बढ़ाकर प्राथमिक स्कूलों के बच्चों तक ले जाना चाहती है। बच्चों में भेदभाव का संदेश जाएगा: मानवाधिकार संगठन कनाडाई सिविल लिबर्टीज एसोसिएशन की प्रतिनिधि और मौलिक स्वतंत्रता मामलों की निदेशक अनाइस बुसिएर मैकनिकोल ने सरकार के प्रस्ताव की आलोचना की है। उनका कहना है कि क्यूबेक में धार्मिक अभिव्यक्ति पर पाबंदियों का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है। पहले सरकारी कर्मचारियों, फिर स्कूलों और बाल देखभाल केंद्रों के कर्मचारियों पर प्रतिबंध लगाए गए और अब बच्चों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इससे प्राथमिक स्कूलों के बच्चों को अलगाव और दूसरे समुदायों के प्रति अस्वीकार का संदेश जाएगा। उनके अनुसार, यह ऐसी समस्या का समाधान तलाशने जैसा है, जो वास्तव में मौजूद ही नहीं है।

देश में कार खरीदने की होड़, Maruti नंबर-1 तो Tata की बिक्री में बड़ा उछाल

मुंबई   त्योहारी सीजन की रौनक और मजबूत मांग के बीच अक्टूबर 2026 में भारतीय पैसेंजर व्हीकल बाजार ने शानदार प्रदर्शन किया. नवरात्रि और दशहरा के दौरान खरीदारी बढ़ने से कई कंपनियों ने मासिक रिकॉर्ड बनाए. इंडस्ट्री लेवल पर थोक बिक्री करीब 5.25-5.30 लाख यूनिट के आसपास रही, जो पिछले साल से 13-15 प्रतिशत ज्यादा है।  वहीं रिटेल रजिस्ट्रेशन आंकड़ों के मुताबिक कुल बिक्री करीब 4.98 लाख यूनिट रही. मारुति सुजुकी ने टॉप पोजिशन बरकरार रखी, जबकि टाटा मोटर्स ने महिंद्रा को पछाड़कर दूसरी जगह हासिल की. ईवी सेगमेंट में भी अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिली. कुल मिलाकर फेस्टिव डिमांड और जीएसटी 2.0 के असर से बाजार में काफी पॉज़िटिव माहैल है. आइए, कंपनी -वाइज़ सेल्स रिपोर्ट के बारे में जानते हैं।  मारुति सुजुकी ने 2,11,444 यूनिट बेचकर पहली रैंक हासिल की. छोटी कार और यूटिलिटी व्हीकल दोनों सेगमेंट में अच्छी डिमांड रही. कंपनी ने घरेलू बाजार में मजबूत ग्रोथ दर्ज की और नेटवर्क स्टॉक कम रहने के बावजूद अच्छा प्रदर्शन किया।  टाटा मोटर्स ने 73,002 यूनिट की बिक्री के साथ दूसरी जगह पर कब्जा किया. कंपनी की ईवी सेल्स में अच्छी बढ़ोतरी हुई. पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में मजबूत डिमांड के कारण महिंद्रा को पीछे छोड़ने में कामयाबी मिली. महिंद्रा ने 64,248 यूनिट बेचकर तीसरे स्थान पर रही. एसयूवी सेगमेंट में कंपनी की पकड़ मजबूत बनी रही. थोक बिक्री में कंपनी ने अच्छा आंकड़ा दर्ज किया, हालांकि रिटेल आंकड़ों में थोड़ा अंतर दिखा।  हुंडई ने 57,883 यूनिट की बिक्री के साथ चौथे स्थान पर जगह बनाई. घरेलू बाजार में कंपनी ने अच्छी ग्रोथ हासिल की. वेन्यू और अन्य मॉडल की डिमांड ने प्रदर्शन को सहारा दिया।  किआ ने 30,657 यूनिट बेचकर पांचवें स्थान पर रही. कंपनी ने मासिक रिकॉर्ड के करीब पहुंचने वाली बिक्री दर्ज की. एसयूवी मॉडल्स की अच्छी डिमांड ने ग्रोथ में मदद की।  ऊपर बताई गई पिछले महीने की टॉप-5 कार कंपनियों के अलावा अक्तूबर 2026 में टोयोटा ने 28,323 यूनिट, स्कोडा एंड वोक्सवैगन ग्रुप ने 9,083 यूनिट, एमजी मोटर ने 7,014 यूनिट, होंडा ने 5,429 यूनिट, रेनो ने 3,491 यूनिट, निसान ने 3,257 यूनिट, विनफास्ट ने 2,565 यूनिट, स्टेलेंटिस ने 1,077 यूनिट और बीवाईडी ने मात्र 735 यूनिट सेल की हैं। 

Govardhan Puja 2026: दिवाली के बाद कब होगी गोवर्धन पूजा? जानें प्रतिपदा तिथि, पूजा विधि और अन्नकूट का महत्व

दिवाली के बाद गोवर्धन पूजा का पर्व भगवान श्रीकृष्ण के प्रति आस्था और प्रकृति के सम्मान का प्रतीक माना जाता है. इस दिन घरों में गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाई जाती है और भगवान कृष्ण की पूजा की जाती है. साथ ही अन्नकूट तैयार करके भगवान को भोग लगाया जाता है. हालांकि, साल 2026 में गोवर्धन पूजा की तारीख को लेकर लोगों के बीच असमंजस है. कुछ लोग इसे 9 नवंबर को मनाने की बात कर रहे हैं, तो कुछ कैलेंडर में 10 नवंबर की तारीख दी गई है. ऐसे में आइए जानते हैं कि पंचांग के अनुसार गोवर्धन पूजा कब मनाई जाएगी और इस दिन पूजा का शुभ समय क्या रहेगा।   गोवर्धन पूजा 2026 कब है? हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को गोवर्धन पूजा मनाई जाती है. साल 2026 में कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा तिथि 9 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 31 मिनट पर शुरू होकर 10 नवंबर को दोपहर 2 बजे समाप्त होगी. उदया तिथि के आधार पर गोवर्धन पूजा 10 नवंबर 2026, मंगलवार को मनाई जाएगी।  इस दिन भगवान श्रीकृष्ण, गोवर्धन पर्वत और गायों की पूजा करने का विधान है. गोवर्धन पूजा को अन्नकूट पर्व के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन मंदिरों और घरों में कई तरह के पकवान बनाकर भगवान कृष्ण को अर्पित किए जाते हैं।   गोवर्धन पूजा 2026 शुभ मुहूर्त गोवर्धन पूजा के दिन सुबह का समय पूजा के लिए विशेष माना गया है. नई दिल्ली के पंचांग के अनुसार शुभ मुहूर्त इस प्रकार है।  – गोवर्धन पूजा की तारीख: 10 नवंबर 2026, मंगलवार – प्रतिपदा तिथि प्रारंभ: 9 नवंबर, दोपहर 12:31 बजे – प्रतिपदा तिथि समाप्त: 10 नवंबर, दोपहर 2:00 बजे – प्रातःकाल पूजा मुहूर्त: सुबह 6:40 बजे से 8:50 बजे तक – अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:43 बजे से दोपहर 12:26 बजे तक – गोधूलि मुहूर्त: शाम 5:30 बजे से 5:56 बजे तक ध्यान रखें कि पूजा के मुहूर्त में स्थानीय सूर्योदय और पंचांग के अनुसार अंतर हो सकता है. इसलिए अपने शहर के अनुसार समय जरूर देख लें।   गोवर्धन पूजा क्यों मनाई जाती है? पौराणिक कथा के अनुसार, द्वापर युग में ब्रजवासी अच्छी बारिश और फसल के लिए देवराज इंद्र की पूजा करते थे. भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें समझाया कि जीवन और आजीविका के लिए गोवर्धन पर्वत, प्रकृति और गायों का विशेष योगदान है. इसके बाद ब्रजवासियों ने इंद्र की जगह गोवर्धन पर्वत की पूजा की।  इससे नाराज होकर इंद्र देव ने ब्रज में मूसलाधार बारिश शुरू कर दी. लगातार बारिश से लोगों को बचाने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठा लिया. इसके नीचे ब्रजवासियों और उनके पशुओं ने शरण ली. सात दिनों तक बारिश करने के बाद इंद्र देव को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने श्रीकृष्ण से क्षमा मांगी. इसी घटना की याद में गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया जाता है।   गोवर्धन पूजा की विधि गोवर्धन पूजा के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, साफ कपड़े पहनें. इसके बाद घर के आंगन या पूजा स्थल पर गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाएं. इसे फूलों, रोली और अक्षत से सजाएं।  इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करके दीपक जलाएं. गोवर्धन पर्वत की पूजा करें, भगवान को फल, फूल, मिठाई और पकवान अर्पित करें. पूजा के दौरान भगवान कृष्ण का स्मरण करें।  धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन गोवर्धन पर्वत की सात बार परिक्रमा करने का भी विशेष महत्व है. परिक्रमा करते समय जल लेकर चलने की परंपरा भी प्रचलित है।   अन्नकूट का क्या है महत्व? गोवर्धन पूजा के दिन अन्नकूट बनाने और भगवान श्रीकृष्ण को भोग लगाने की विशेष परंपरा है. अन्नकूट का अर्थ है कई तरह के अनाज और पकवानों का समूह. इस दिन घरों और मंदिरों में मौसमी सब्जियों, अनाज, मिठाइयों और अन्य व्यंजनों से भोग तैयार किया जाता है।  कई मंदिरों में भगवान को 56 भोग अर्पित किए जाते हैं. इसे छप्पन भोग भी कहा जाता है. मान्यता है कि अन्नकूट का प्रसाद ग्रहण करने से घर में सुख-समृद्धि और अन्न की कमी नहीं होती। 

MP में पराली जलाने की घटनाओं में 10% का इजाफा, 2025 के मुकाबले बढ़े मामले

भोपाल धान की कटाई के साथ ही मध्य प्रदेश सहित देश के बड़े राज्यों में पराली के मामले तेजी से बढ़े हैं. मध्य प्रदेश में पिछले 45 दिनों में पराली जलाने के 538 मामले आए हैं. यह पिछले साल के मुकाबले करीबन 10 फीसदी ज्यादा हैं।  पराली जलाने के मामले में मध्य प्रदेश पंजाब और राजस्थान के बाद तीसरा राज्य है, जहां इसके सबसे ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं. प्रदेश में पराली जलाने से रोकने के लिए किसानों को समझाइश के साथ कार्रवाई भी की जा रही है. पंजाब में पिछले 15 दिनों में पराली जलाने के 1339 मामले सामने आ चुके हैं।  प्रदेश के 18 जिले बिगाड़ रहे आंकड़े पराली जलाने से रोकने के लिए राज्य सरकार द्वारा जिला स्तर पर किसानों को समझाइश दी जा रही है. पराली जलाने से होने वाले पर्यावरणीय और खेत में पहुंचने वाले नुकसान को लेकर चेताया जा रहा है, साथ ही लगातार कार्रवाई भी की जा रही है. इसके बाद भी प्रदेश के कई जिलों में पराली जलाने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं. इस मामले में प्रदेश के 18 जिलों में पराली जलाने के मामले सामने आ रहे हैं।  45 दिनों में पराली जलाने के 538 मामले इंडियन एग्रीकल्चर रिसर्च इंस्टीट्यूट की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में सबसे ज्यादा 53 मामले सामने आए हैं. इसके अलावा अशोक नगर, दतिया, देवास, धार, गुना, ग्वालियर, हरदा, इंदौर, खंडवा, खरगोन, नर्मदापुरम, सीहोर, सिवनी, शिवपुरी, उज्जैन विदिशा जिलों में लगातार पराली जलाने के मामले सामने आ रहे हैं. पिछले 45 दिनों में इस तरह के 538 मामले सामने आ चुके हैं. जबकि 2025 में इसी समय पराली जलाने के 483 मामले सामने आए थे. हालांकि 2023, 2024 के मुताबिक यह आंकड़े काफी कम हैं. साल 2023 में प्रदेश में 2995 और 2024 में 1780 मामले सामने आए थे।  देश में पंजाब से उठ रहा सबसे ज्यादा धुंआ मध्य प्रदेश सहित देश भर में 15 सितंबर से अभी तक 3071 मामले सामने आ चुके हैं. देश में सबसे ज्यादा पराली जलाने से धुंआ पंजाब से उठ रहा है. पंजाब में 15 सितंबर से 30 अक्टूबर के दौरान पराली जलाने के 1339 मामले सामने आ चुके हैं. 31 अक्टूबर को पंजाब में 292 पराली जलाने के मामने सामने आए हैं।  पंजाब के बाद राजस्थान के आंकडे सबसे ज्यादा हैं. राजस्थान में अभी तक 638 पराली जलाने के मामले सामने आए हैं. इसके बाद मध्य प्रदेश का नंबर आता है. उधर हरियाणा में 35, उत्तर प्रदेश में 345 और उत्तराखंड में 174 मामले सामने आ चुके हैं. दिन- प्रतिदिन हर राज्य में यह आंकड़ा बढ़ता जा रहा है. किसानों को लगातार समझाइश दी जा रही है लेकिन फिर भी पराली जलाने के मामले कम होने की जगह बढ़ते जा रहे हैं। 

Dhanteras 2026: 6 नवंबर को मनाया जाएगा धनतेरस, जानें खरीदारी और पूजा के तीन शुभ मुहूर्त

Dhanteras 2026 :धनतेरस से पहले बाजारों में रौनक बढ़ गई है. पांच दिन तक चलने वाले दीपोत्सव की शुरुआत इसी त्योहार से होती है. धनतेरस पर खरीदारी को विशेष शुभ माना जाता है. इस दिन सोना-चांदी, बर्तन और दूसरी नई चीजें खरीदने की परंपरा है. इस बार धनतेरस की तारीख को लेकर श्रद्धालु बड़े असमंजस में हैं. कोई 6 नवंबर तो कोई 7 नवंबर को धनतेरस का त्योहार बता रहा है. आइए जानते हैं कि धनतेरस का पर्व कब मनाया जाएगा. धनतेरस 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को सुबह करीब 09:30 बजे शुरू होगी इस तिथि का समापन 7 नवंबर को सुबह करीब 11:45 बजे होगा. ऐसे में धनतेरस का त्योहार 6 नवंबर दिन शुक्रवार को मनाया जाएगा. इस दिन शाम 05.49 बजे से रात 08.23 मिनट तक प्रदोष काल रहेगा. इस समय आप भगवान धन्वंतरि और मां लक्ष्मी की पूजा कर सकते हैं. खरीदारी के लिए 3 शुभ मुहूर्त इस तिथि पर खरीदारी के लिए तीन शुभ मुहूर्त बताए गए हैं. धनतेरस पर पहला शुभ मुहूर्त चौघड़िया समय का रहेगा. यह मुहूर्त सुबह 08.16 बजे से लेकर सुबह 09.48 बजे तक रहेगा. इस दौरान आप सोना, चांदी, बर्तन और अपनी जरूरत का सामान खरीद सकते हैं. दूसरा शुभ मुहूर्त अभिजीत मुहूर्त रहेगा. यह मुहूर्त दिन में 11.48 बजे से दोपहर 12.56 बजे तक माना जा रहा है. इस मुहूर्त में भी आप सोना, चांदी, बर्तन और अन्य सामान खरीद सकते हैं. धनतेरस पर तीसरा शुभ मुहूर्त प्रदोष काल के समय रहेगा. शाम 06.02 मिनट से लेकर रात 07.58 बजे तक वृषभ काल का समय है. इस दौरान आप अपनी इच्छानुसार जो चाहे खरीद सकते हैं. क्यों मनाया जाता है धनतेरस? धनतेरस का पर्व कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान इसी दिन भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे. उन्हें देवताओं का वैद्य माना जाता है. इसलिए इस दिन आरोग्य और अच्छे स्वास्थ्य की कामना के साथ भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है. धनतेरस को भगवान कुबेर की पूजा के लिए भी खास माना गया है. कुबेर को धन और संपन्नता का देवता माना जाता है. इस दिन उनकी पूजा करने से सुख-समृद्धि की कामना की जाती है. मान्यता है कि धनतेरस पर पूजा और खरीदारी करने से आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं. इसी वजह से इस दिन सोना, चांदी और नए बर्तन खरीदने की परंपरा चली आ रही है. धनतेरस पर कैसे करें कुबेर और धन्वंतरि की पूजा? धनतेरस की शाम पूजा की तैयारी करें. पूजा स्थल पर उत्तर दिशा की ओर भगवान कुबेर और भगवान धन्वंतरि की स्थापना करें. दोनों के सामने घी का एकमुखी दीपक जलाएं. भगवान कुबेर को सफेद मिठाई और भगवान धन्वंतरि को पीली मिठाई अर्पित करें. इसके बाद सबसे पहले 'ॐ ह्रीं कुबेराय नमः' मंत्र का जाप करें. कुबेर मंत्र के जाप के बाद भगवान धन्वंतरि के स्तोत्र का पाठ करें. पूजा पूरी होने पर प्रसाद ग्रहण करें. दिवाली के दिन भगवान कुबेर को धन रखने के स्थान पर स्थापित करना चाहिए. वहीं, भगवान धन्वंतरि को पूजा स्थल पर विराजमान करना चाहिए. इससे घर में सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना की जाती है.

भारत-न्यूजीलैंड वनडे सीरीज से पहले विराट कोहली पर बड़ा दावा, रोहित शर्मा को छोड़ेंगे पीछे?

नई दिल्ली भारत और न्यूजीलैंड के बीच 4 नवंबर से शुरू होने वाली 5 मैचों की वनडे सीरीज का इंतजार फैन्स बेसब्री के साथ कर रहे हैं. इस सीरीज में एक बार फिर रोहित शर्मा और विराट कोहली के पास अपना दमखम दिखाने का मौका होगा।  वनडे सीरीज से पहले टीम इंडिया के पूर्व टेस्ट बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा ने बड़ा बयान दिया है. पुजारा का मानना है कि न्यूजीलैंड की पेस और स्विंग से भरी परिस्थितियों में रोहित शर्मा के मुकाबले विराट कोहली के पास शतक लगाने के ज्यादा मौके हैं।  जियोस्टार पर बातचीत करते हुए पुजारा ने दोनों खिलाड़ियों के बल्लेबाजी क्रम और उनकी भूमिकाओं को लेकर खुलकर चर्चा की. उन्होंने कहा कि रोहित शर्मा का काम पावरप्ले में तेजी से रन बनाकर टीम को धमाकेदार शुरुआत दिलाना होता है।  हालांकि, न्यूजीलैंड की मुश्किल कंडीशंस में ओपनर्स को नई गेंद के सामने काफी संभलकर खेलना पड़ता है, जिससे रोहित को बल्लेबाजी करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है.  इसके विपरीत विराट कोहली नंबर तीन पर बल्लेबाजी करते हैं, जहां वनडे फॉर्मेट में एंकर की भूमिका निभाने का मौका ज्यादा मिलता है।  दमदार फॉर्म में हैं कोहली पुजारा के मुताबिक नंबर तीन पर आने वाले बल्लेबाज के लिए पारी को संभालते हुए शतक तक पहुंचना थोड़ा आसान हो जाता है. यही वजह है कि वह विराट को रोहित से आगे रख रहे हैं. हालांकि, दोनों ही खिलाड़ी शानदार फॉर्म में हैं. हाल ही में वेस्टइंडीज के खिलाफ विराट ने नाबाद 139 रनों की तूफानी पारी खेली थी तो वहीं रोहित ने भी तीन मैचों में 225 रन बनाए थे।  सीरीज को लेकर पुजारा की बड़ी भविष्यवाणी शतकों की बहस के अलावा पुजारा ने पूरी सीरीज के नतीजे पर भी अपनी राय रखी. उन्होंने बताया कि इस दौरे पर भारतीय टीम दो अलग-अलग हिस्सों में बंटी हुई है, जहां पहले तीन मैचों के लिए एक अलग स्क्वाड है और आखिरी दो मैचों के लिए दूसरे खिलाड़ियों को मौका दिया जाएगा।  पुजारा का मानना है कि इससे न्यूजीलैंड को एक बड़ा रणनीतिक फायदा मिलेगा क्योंकि कीवी टीम पूरी सीरीज में एक ही कॉम्बिनेशन के साथ खेलेगी. उन्होंने भविष्यवाणी की कि भारत शुरुआती तीन मैच जीतकर बढ़त बना सकता है, लेकिन आखिरी के दो मुकाबले काफी चुनौतीपूर्ण होंगे. उन्होंने यह भी अंदेशा जताया कि न्यूजीलैंड के मौसम को देखते हुए सीरीज का कम से कम एक मुकाबला बारिश की भेंट चढ़ सकता है और अंत में यह सीरीज 2-2 की बराबरी पर छूट सकती है। 

त्योहारी सीजन में हिमाचल जाने वालों के लिए खुशखबरी, HRTC की 266 अतिरिक्त बसें चलेंगी

शिमला  दिवाली पर अपने घर जाने की तैयारी कर रहे हिमाचल प्रदेश के लोगों के लिए राहत की खबर है. त्योहार के दौरान बसों में भीड़ और सीटों की कमी से बचाने के लिए हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) ने विशेष व्यवस्था की है. निगम 6 और 7 नवंबर को दिल्ली, चंडीगढ़ और बद्दी से हिमाचल के अलग-अलग क्षेत्रों के लिए 266 अतिरिक्त बस सेवाएं चलाएगा।  उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने इसकी जानकारी दी. उन्होंने बताया कि 6 नवंबर को 134 और 7 नवंबर को 132 अतिरिक्त बस सेवाएं चलाई जाएंगी. इन बसों का संचालन यात्रियों की बढ़ती संख्या को ध्यान में रखकर किया जा रहा है, ताकि दूसरे राज्यों और औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले लोग दिवाली से पहले अपने घर पहुंच सकें।  दिल्ली, चंडीगढ़ और बद्दी से कितनी बसें चलेंगी? दोनों दिनों में अलग-अलग स्थानों से बसों की व्यवस्था की गई है. दिल्ली से कुल 91, चंडीगढ़ से 132 और बद्दी से 43 अतिरिक्त बस सेवाएं चलाई जाएंगी. 6 नवंबर को दिल्ली से 42, चंडीगढ़ से 69 और बद्दी से 23 बसें चलेंगी. वहीं, 7 नवंबर को दिल्ली से 49, चंडीगढ़ से 63 और बद्दी से 20 अतिरिक्त बस सेवाएं उपलब्ध रहेंगी. इन बसों से प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में जाने वाले यात्रियों को सुविधा मिलेगी।  दिवाली की शाम स्थानीय बस सेवाएं रहेंगी बंद 8 नवंबर को दिवाली के दिन शाम 5 बजे से 9 नवंबर की सुबह 8 बजे तक निगम की सभी स्थानीय बस सेवाएं बंद रहेंगी. इसलिए इस अवधि में स्थानीय बसों से यात्रा करने वाले लोगों को पहले से अपनी योजना बनानी होगी।  दिवाली पर लंबी दूरी के यात्रियों के लिए भी बसें स्थानीय बस सेवाएं बंद रहने के बावजूद लंबी दूरी के यात्रियों की सुविधा के लिए 8 नवंबर की शाम विशेष बसें चलाई जाएंगी. निगम दिल्ली से शिमला, धर्मशाला, कुल्लू, मंडी और चंबा जैसे प्रमुख स्थानों के लिए आने-जाने हेतु एक-एक बस सेवा संचालित करेगा. इससे दिवाली के दिन इन रूटों पर यात्रा करने वाले यात्रियों को सुविधा मिलेगी।  बसों की बुकिंग के लिए वेबसाइट देखें निगम ने यात्रियों को बसों की बुकिंग और अन्य जानकारी के लिए HRTC की आधिकारिक वेबसाइट देखने की सलाह दी है. त्योहार के दौरान भीड़ से बचने और सुविधाजनक यात्रा के लिए यात्रियों को समय रहते अपनी यात्रा की योजना बनाने को कहा गया है। 

बैंक जाने की झंझट खत्म, स्मार्टफोन से मिनटों में बनेगा पेंशनर्स का लाइफ सर्टिफिकेट

 नई दिल्ली अगर आप पेंशन लेते हैं या आपके परिवार में कोई पेंशनर है, जिसे लाइफ सर्टिफिकेट बनवाने के लिए बार-बार बैंक के चक्कर लगाने पड़ते है, तो अब आपके लिए राहत की खबर है. आप अपने स्मार्टफोन से ही चेहरा दिखाकर डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट बनवा सकते हैं. खास बात यह है कि इसके लिए किसी फिंगरप्रिंट मशीन या बायोमेट्रिक डिवाइस की जरूरत भी नहीं पड़ेगी।  सरकार ने 1 नवंबर से 30 नवंबर 2026 तक देशभर में डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट का पांचवां अभियान शुरू किया है. यह अभियान देश के 2,000 शहरों और जिलों में चलाया जा रहा है।  सरकार का लक्ष्य इस दौरान 2.30 करोड़ डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट तैयार करना है. इसमें से 1.50 करोड़ सर्टिफिकेट फेस ऑथेंटिकेशन के जरिए बनाने का लक्ष्य रखा गया है।  मोबाइल पर चेहरा दिखाते ही बनेगा सर्टिफिकेट अब सवाल है कि आखिर यह काम कैसे होगा? इसके लिए पेंशनर्स को अपने स्मार्टफोन में Jeevan Pramaan Face App और AadhaarFaceRD ऐप डाउनलोड करना होगा. इसके बाद आधार और मोबाइल नंबर की मदद से रजिस्ट्रेशन करना होगा।  रजिस्ट्रेशन पूरा होने के बाद पेंशनर्स को मोबाइल के फ्रंट कैमरे के सामने अपना चेहरा दिखाना होगा. फेस ऑथेंटिकेशन पूरा होते ही डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट जनरेट हो जाएगा. यानी अब घर बैठे ही यह जरूरी काम पूरा किया जा सकता है।  बुजुर्गों के घर तक पहुंचेगी सरकारी मदद सरकार ने इस अभियान में 19 बैंक, 785 डाकघर और 56 पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन को शामिल किया है. इसके अलावा EPFO, रेलवे और राज्य सरकारें भी इसमें सहयोग करेंगी।  जो बुजुर्ग पेंशनर्स खुद बैंक या कैंप तक नहीं जा सकते, उनके लिए जरूरत के हिसाब से घर पर सुविधा दी जाएगी. इसके अलावा कई जगहों पर विशेष कैंप भी लगाए जाएंगे, जहां हेल्थ चेकअप और आधार अपडेट कराने की सुविधा मिलेगी।  पेंशनर्स ध्यान दें, 30 नवंबर है आखिरी तारीख अगर आप पेंशन लेते हैं और अभी तक अपना डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट जमा नहीं किया है, तो समय रहते यह काम पूरा कर लें. किसी तरह की परेशानी होने पर अभियान के तहत नियुक्त शिकायत अधिकारी से भी मदद ली जा सकती है। 

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बदली सफारी की टाइमिंग, 1 नवंबर से लागू हुई नई समय-सारिणी

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में सफारी और टिकट बुकिंग की समय सारिणी 1 नवंबर से लागू समय-सारणी के अनुसार सुबह और शाम दो पालियों में होगी सफारी भोपाल बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व घूमने जाने वाले पर्यटकों के लिए पार्क सफारी और टिकट काउंटरों के समय की जानकारी जारी की गई है। 1 नवंबर 2026 से प्रभावशील समय-सारणी के अनुसार पर्यटक सुबह और शाम दोनों पालियों में जंगल सफारी का आनंद ले सकेंगे। सुबह और शाम सफारी का समय बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के कोर एवं बफर क्षेत्र में सुबह की सफारी प्रातः 6 बजे से 11:30 बजे तक होगी। वहीं शाम की सफारी दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक संचालित होगी। पर्यटक सफारी के टिकट सुबह 5:15 से 7:30 बजे तक, दोपहर 1:30 से 4 बजे तक और शाम 6 से 7:30 बजे तक टिकट काउंटर से प्राप्त कर सकते हैं। पर्यटक बांधवगढ़ आने से पहले टिकट काउंटर और सफारी के निर्धारित समय का ध्यान रखें, ताकि उन्हें टिकट एवं जंगल सफारी के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो।  

त्योहारों पर घर जाना होगा आसान, रेलवे ने शुरू कीं 45 जोड़ी स्पेशल ट्रेनें; देखें रूट और टाइमिंग

अंबाला दीपावली और छठ पूजा पर घर जाने वाले यात्रियों की भीड़ को देखते हुए रेलवे ने विशेष ट्रेनों का इंतजाम किया है। उत्तर रेलवे ने विभिन्न रेल जोनों के सहयोग से त्योहार विशेष ट्रेनों की समय-सारिणी जारी की है। इनमें 45 जोड़ी ट्रेनें शामिल हैं, जो दिल्ली, अंबाला, चंडीगढ़, अमृतसर, लुधियाना और पंजाब के अन्य स्टेशनों को बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर के प्रमुख शहरों से जोड़ेंगी। इन ट्रेनों का संचालन अलग-अलग तारीखों पर नवंबर के अंतिम सप्ताह और दिसंबर के पहले सप्ताह तक किया जाएगा। त्योहारों के दौरान बिहार जाने वाली नियमित ट्रेनों में लंबी प्रतीक्षा सूची और कन्फर्म टिकटों की कमी रहती है। पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में काम करने वाले बड़ी संख्या में लोग छठ पूजा पर अपने घर लौटते हैं। ऐसे में रेलवे की इस व्यवस्था से यात्रियों को अतिरिक्त विकल्प मिलेंगे। अंबाला के यात्रियों के लिए सहरसा और सरहिंद के बीच चलने वाली विशेष ट्रेन महत्वपूर्ण है। ट्रेन संख्या 04527 सहरसा से छह, 10 और 13 नवंबर को शाम 7:15 बजे रवाना होकर रात 10:20 बजे अंबाला कैंट पहुंचेगी। वापसी में ट्रेन संख्या 04528 सरहिंद से पांच, नौ और 12 नवंबर को सुबह 11:25 बजे चलकर शाम पांच बजे सहरसा पहुंचेगी। चंडीगढ़ से बरौनी के बीच ट्रेन संख्या 04536 प्रत्येक शुक्रवार रात 11:45 बजे चलेगी, जबकि बरौनी से चंडीगढ़ के लिए ट्रेन संख्या 04535 प्रत्येक रविवार को रवाना होगी।  इनका संचालन क्रमश: 27 और 29 नवंबर तक निर्धारित है। पटना, दरभंगा, सहरसा और मुजफ्फरपुर के लिए कई विकल्प नई दिल्ली और पटना के बीच ट्रेन संख्या 02252, 02251, 02254 और 02253 अलग-अलग दिनों में चलेंगी। चंडीगढ़-पटना के बीच 04512 और 04511, फिरोजपुर कैंट-पटना के बीच 04615 और 04616 तथा आनंद विहार-पाटलिपुत्र के बीच 04096 और 04095 का संचालन भी किया जाएगा। दिल्ली और सीतामढ़ी के बीच 04010 व 04009, आनंद विहार-मुजफ्फरपुर के बीच 04028 व 04027 और आनंद विहार-जोगबनी के बीच 04008 व 04007 ट्रेनें चलाई जाएंगी। दिल्ली-सुपौल के बीच 04072 व 04071, नई दिल्ली-हावड़ा के बीच 04052 व 04051, आनंद विहार-भागलपुर के बीच 04062 व 04061 तथा योग नगरी ऋषिकेश-मुजफ्फरपुर के बीच 04314 व 04313 विशेष ट्रेनें चलेंगी। बंगाल और पूर्वोत्तर के यात्रियों को भी सुविधा कोलकाता, बरौनी और अन्य शहरों के लिए भी विशेष रेल सुविधा दी गई है। अमृतसर-कोलकाता के बीच 04624 और 04623, अमृतसर-बरौनी के बीच 04668 और 04667 तथा योग नगरी ऋषिकेश-कोलकाता के बीच 04312 और 04311 ट्रेनें चलेगी। नई दिल्ली-दानापुर के बीच 04090 व 04089, शकूरबस्ती-दरभंगा के बीच 04098 व 04097 तथा दिल्ली-कामाख्या के बीच 04076 व 04075 का संचालन भी निर्धारित किया गया है। अमृतसर-जयनगर के बीच 04652 और 04651 ट्रेनें भी यात्रियों को अतिरिक्त सुविधा देंगी। पंजाब से बिहार के लिए विशेष तारीखों पर ट्रेनें शकूरबस्ती-मानसी के बीच 04406 और 04405, शकूरबस्ती-पटना के बीच 04404 और 04403 तथा शकूरबस्ती-झंझारपुर के बीच 04410 और 04409 का संचालन पांच से 15 नवंबर के बीच अलग-अलग तारीखों पर होगा। अमृतसर-छपरा के बीच 04638 व 04637 और छेहरटा-मुजफ्फरपुर के बीच 04640 व 04639 ट्रेनें भी चलाई जाएंगी। लुधियाना से सहरसा, दरभंगा, गया और कोलकाता के लिए क्रमशः 04656, 04662, 04664 और 04666 तथा वापसी में 04655, 04661, 04663 और 04665 ट्रेने निर्धारित की गई हैं। वाराणसी, अयोध्या और वैष्णो देवी के लिए भी ट्रेनें उत्तर प्रदेश के यात्रियों के लिए वाराणसी-दिल्ली के बीच 04209 व 04210, अयोध्या कैंट-आनंद विहार के बीच 04213 व 04214 और वाराणसी-चंडीगढ़ के बीच 04227 व 04228 ट्रेनें चलेंगी। श्री माता वैष्णो देवी कटरा-वाराणसी के बीच 04604 व 04603 तथा जम्मू तवी-वाराणसी के बीच 04610 व 04609 का संचालन होगा। नई दिल्ली-कटरा के बीच 04081 व 04082, वाराणसी-बठिंडा के बीच 04221 व 04222 और वाराणसी-अयोध्या धाम के बीच 04201 व 04202 ट्रेनें भी सूची में शामिल हैं। इसके अतिरिक्त हजरत निजामुद्दीन-दादर के बीच 04002 व 04001, सुलतानपुर-लोकमान्य तिलक टर्मिनस के बीच 04212 व 04211 तथा वाराणसी-लोकमान्य तिलक टर्मिनस के बीच 04226 व 04225 ट्रेनें चलाई जाएंगी। कटिहार-अमृतसर के बीच 05736 और 05735 भी निर्धारित हैं।