samacharsecretary.com

भोपाल में आपराधिक न्याय प्रणाली में AI के उपयोग पर राष्ट्रीय सम्मेलन का सफलतापूर्वक आयोजन

भोपाल. 
भोपाल में आज पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो (BPR&D) द्वारा एक विशेष सम्मलेन आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम केंद्रीय पुलिस प्रशिक्षण अकादमी (CAPT) और राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी के सहयोग से "आपराधिक न्याय प्रणाली में एआई (AI) का उपयोग" विषय पर आधारित था। 

आलोक रंजन (महानिदेशक, NCRB एवं BPR&D) के नेतृत्व में आयोजित इस बैठक में न्यायपालिका, पुलिस, फॉरेंसिक और जेल प्रशासन के 170 से अधिक विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। इसका मुख्य उद्देश्य यह समझना था कि नई तकनीक की मदद से न्याय प्रणाली को कैसे बेहतर बनाया जाए। सम्मेलन का उद्घाटन संबोधन माननीय न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस, निदेशक, राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी, भारत, भोपाल द्वारा किया गया, साथ ही आलोक रंजन, आईपीएस, महानिदेशक, एनसीआरबी एवं बीपीआरएंडडी, नई दिल्ली, गृह मंत्रालय द्वारा विशेष संबोधन दिया गया।

सम्मेलन में आपराधिक न्याय प्रणाली के पांच प्रमुख स्तंभों—न्यायपालिका, पुलिस, अभियोजन, फॉरेंसिक तथा सुधारात्मक प्रशासन—में एआई की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला गया तथा इसके संतुलित एवं जिम्मेदार उपयोग की आवश्यकता पर बल दिया गया।

प्रतिभागियों ने एल्गोरिदमिक पक्षपात, फॉल्स पॉजिटिव तथा स्वचालित प्रणालियों पर अत्यधिक निर्भरता जैसी प्रमुख चुनौतियों पर भी विचार किया। भारत में विधिक एवं संस्थागत प्रतिक्रियाओं, जैसे उच्चतम न्यायालय की एआई पहलों तथा विभिन्न उच्च न्यायालयों द्वारा जेनरेटिव एआई के उपयोग को विनियमित करने हेतु जारी दिशा-निर्देशों पर भी चर्चा की गई।

प्रत्येक सत्र के पश्चात प्रश्नोत्तर, संवाद, सर्वोत्तम अभ्यास एवं केस स्टडी पर विचार-विमर्श किया गया। सम्मेलन में एआई-जनित साक्ष्यों की स्वीकार्यता, डीपफेक से संबंधित चिंताओं तथा इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की प्रामाणिकता बनाए रखने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया। साथ ही, गोपनीयता, निगरानी एवं मानवाधिकारों से संबंधित नैतिक पहलुओं को भी विशेष रूप से रेखांकित किया गया।

सम्मेलन का निष्कर्ष यह रहा कि एआई आपराधिक न्याय प्रणाली में एक महत्वपूर्ण “फोर्स मल्टीप्लायर” है, परंतु इसके प्रभावी उपयोग हेतु क्षमता निर्माण, स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रियाएं (SOPs) तथा मानव निगरानी आवश्यक है, ताकि पारदर्शिता, जवाबदेही एवं विधिक वैधता सुनिश्चित की जा सके। आपराधिक न्याय प्रणाली के प्रत्येक स्तंभ में एआई के उपयोग के संभावित क्षेत्रों की पहचान की गई, जिससे इसके शीघ्र एवं प्रभावी क्रियान्वयन हेतु एक ठोस रोडमैप तैयार किया जा सके।

Leave a Comment

हम भारत के लोग
"हम भारत के लोग" यह वाक्यांश भारत के संविधान की प्रस्तावना का पहला वाक्य है, जो यह दर्शाता है कि संविधान भारत के लोगों द्वारा बनाया गया है और उनकी शक्ति का स्रोत है. यह वाक्यांश भारत की संप्रभुता, लोकतंत्र और लोगों की भूमिका को उजागर करता है.
Click Here
जिम्मेदार कौन
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here
Slide 3 Heading
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here