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तेंदूपत्ता तोड़कर लौट रहे मजदूर हादसे का शिकार, 6 की हालत नाजुक

 श्योपुर मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले से एक बड़े हादसे की खबर आ रही है। यहां आवदा थाना इलाके के भोजका गांव के पास तेंदूपत्ता तोड़कर लौट रहे मजदूरों से भरी एक ट्रैक्टर-ट्रॉली अनियंत्रित होकर पलट गई। इस दर्दनाक हादसे में ट्रॉली में सवार करीब 40 मजदूर घायल हो गए हैं। बताया जा रहा है कि सभी मजदूर काम खत्म करके वापस लौट रहे थे, तभी यह हादसा हुआ। घटना के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। सभी घायलों को तुरंत जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां 6 मजदूरों की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।  

टायर फटने से वीडियोकोच बस में लगी आग, पुलिस ने कांच तोड़ 21 यात्रियों को बचाया

भोपाल मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा नागरिक सुरक्षा एवं जनसेवा के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता का एक उत्कृष्ट उदाहरण ग्वालियर में सामने आया है, जहां थाना झांसी रोड पुलिस की त्वरित, साहसिक एवं संगठित कार्रवाई से एक संभावित बड़ा हादसा टल गया। पुलिस बल ने आग की चपेट में आई यात्री बस में से 21 लोगों को सुरक्षित बाहर निकालकर बड़ी जनहानि होने से बचा लिया। प्राप्त जानकारी के अनुसार 26 अप्रैल को प्रातः लगभग 5:40 बजे जयपुर से छतरपुर स्थित बागेश्वर धाम जा रही यात्री बस झांसी रोड थाना क्षेत्र से गुजर रही थी। बस में 18 यात्री, 02 चालक,01कंडक्टर सहित 21 लोग सवार थे।अधिकतर यात्री सो रहे थे जिन्हें जगाकर बाहर निकाला गया। बस जैसे ही झांसी रोड थाना परिसर के सामने पहुंची, अचानक तेज धमाके के साथ बस का पिछला टायर फट गया। टायर फटने से उत्पन्न चिंगारी बस के पिछले हिस्से तक पहुंची, जिससे वहां आग लग गई। कुछ ही क्षणों में बस से धुआं उठने लगा और आग फैलने लगी। थाना परिसर में उपस्थित पुलिसकर्मियों ने तेज धमाके की आवाज सुनते ही तत्काल बाहर आकर देखा तो बस से धुआं एवं आग की लपटें उठ रही थीं। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए पुलिसकर्मियों ने बिना समय गंवाए तत्काल राहत एवं बचाव कार्य प्रारंभ किया।पुलिसकर्मियों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए बस की खिड़कियों के कांच तोड़े और एक-एक कर सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला। इस पूरी कार्रवाई के दौरान पुलिस ने संयम, त्वरित निर्णय क्षमता एवं उच्च स्तर की संवेदनशीलता का परिचय दिया। पुलिस की त्‍वरितप्रतिक्रिया से बस में सवार सभी 21 लोगों की जान सुरक्षित बचाई जा सकी। यात्रियों को सुरक्षित निकालने के बाद पुलिस टीम ने आग बुझाने हेतु तत्काल स्थानीय संसाधनों का उपयोग किया। थाना परिसर में स्थापित बोरवेल से पानी लाकर आग पर काबू पाने का प्रयास प्रारंभ किया। सूचना प्राप्त होते ही दमकल दल भी मौके पर पहुंचा और संयुक्त प्रयासों से आग पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित किया गया। उक्त सराहनीय एवं साहसिक कार्यवाही में थाना प्रभारीशक्ति यादव, प्रधान आरक्षक शिव सिंह गुर्जर, प्रधान आरक्षक रामभरण लोधी, प्रधान आरक्षक सुशांत चौहान, आरक्षक हरिओम जाट, आरक्षक सलमान, आरक्षक रवि भदौरिया तथा आरक्षक आकाश छारी की विशेष एवं उल्लेखनीय भूमिका रही। 

ट्रेन हादसे से टली बड़ी दुर्घटना, डॉक्टर की मां को RPF ने सुरक्षित निकाला

कानपुर  यूपी के फर्रुखाबाद की एक 60 वर्षीय महिला महिमा गंगवार के लिए कहावत 'जाको राखे साइयां, मार सके न कोय' सच साबित हुई, जब वह शनिवार देर रात कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर एक चलती ट्रेन से गिर गईं। आरपीएफ (रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स) के जवानों की त्वरित कार्रवाई और सूझबूझ से उनकी जान बच गई। महिला का बेटा कानपुर के हैलट अस्पताल में डॉक्टर है। महिमा अपने पति राजवीर सिंह के साथ कानपुर से भोपाल जाने के लिए 12593 गरीब रथ एक्सप्रेस में सवार होने की कोशिश कर रही थीं। ट्रेन आधी रात 12:35 बजे स्टेशन पर आई और उन्हें अपना कोच ढूंढने में देर हो गई। जब तक वे कोच तक पहुंचे, ट्रेन चल पड़ी थी। जल्दबाजी में चढ़ने की कोशिश में महिमा का पैर फिसल गया और वह ट्रेन के पायदान और प्लेटफॉर्म के बीच की जगह में गिर गईं। आसपास के लोग शोर मचाने लगे। यह देखकर, वहां मौजूद आरपीएफ के एएसआई सीपी सिंह तुरंत हरकत में आए। उन्होंने महिमा को प्लेटफॉर्म की तरफ खिसकने की हिदायत दी और अपने साथी सिपाहियों अनिल कुमार और श्रवण कुमार को तुरंत ट्रेन की चेन खींचने का आदेश दिया। सिपाहियों ने बिना एक पल की भी देरी किए चेन खींची और ट्रेन रुक गई। इसके बाद, आरपीएफ टीम ने महिमा को सुरक्षित बाहर निकाला और प्राथमिक उपचार के लिए स्टेशन पर ही बनी मोटर कार से प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर ले गए। शुरुआती इलाज के बाद, उन्हें आगे के उपचार के लिए हैलट अस्पताल रेफर किया गया। आरपीएफ ने बताया कि महिमा का बेटा हैलट अस्पताल में डॉक्टर है। इस घटना के कारण ट्रेन को 15 मिनट की देरी हुई, लेकिन महिमा की जान बच गई। इस घटना प्रत्यक्षदर्शी आरपीएफ की दिल खोलकर तारीफ कर रहे हैं और कह रहे हैं कि यह घटना आरपीएफ कर्मियों की तत्परता और उनके सेवाभाव का शानदार उदाहरण है। थोड़ी देर तक स्तब्ध रहे लोग चलती ट्रेन से महिमा गंगवार के फिसलने और प्लेटफार्म-सीढ़ियों के बीच उनके फंस जाने की घटना जिसने भी देखी वो कुछ देर के लिए स्तब्ध रह गया। आरपीएफ की चुस्ती और त्वरित ऐक्शन से ट्रेन रोक दी गई और महिमा गंगवार की जान बच गई। इसके बाद ही लोगों की जान में जान आई।