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ज्येष्ठ मास की शुरुआत के साथ 19 साल बाद बना अधिक मास का संयोग, बदलेगा त्योहारों का कैलेंडर

 सीकर आज यानी 2 मई से ज्येष्ठ मास की शुरुआत हो रही है, जिसका हिंदू धर्म में विशेष धार्मिक महत्व है. इस बार 19 साल बाद 'अधिक मास' का विशेष संयोग बन रहा है, जिसके चलते पूरे साल के त्योहारों का कैलेंडर बदल गया है. अगले 15 दिनों तक तो मांगलिक कार्य हो सकेंगे, लेकिन 17 मई से 15 जून तक विवाह, मुंडन और गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्यों पर पूरी तरह रोक रहेगी. अगस्त के अंत में रक्षा बंधन, नवंबर में दीपावली अधिक मास के प्रभाव से इस साल रक्षाबंधन अगस्त के अंत में और दीपावली अक्टूबर की जगह नवंबर में मनाई जाएगी. मान्यताओं के अनुसार, अधिक मास में भगवान विष्णु की आराधना और दान-पुण्य का अक्षय फल मिलता है. खाटूश्यामजी मंदिर में क्यों बदला आरती का समय? जेठ के महीने में पड़ रही भीषण गर्मी और अधिक मास के धार्मिक महत्व को देखते हुए सीकर जिले के प्रसिद्ध खाटू धाम में आरती के समय में परिवर्तन किया गया है. श्री श्याम मंदिर कमेटी से मिली जानकारी के अनुसार, अब बाबा श्याम की श्रृंगार आरती प्रातः सुबह 7:00 बजे होगी. वहीं, सायंकालीन संध्या आरती अब शाम को 7:30 बजे की जाएगी. मंदिर आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है ताकि भक्त भीषण गर्मी से बच सकें. श्रद्धालुओं के लिए मंदिर कमेटी के विशेष इंतजाम मंदिर कमेटी के मंत्री मानवेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि ज्येष्ठ माह की तपती गर्मी को देखते हुए श्याम भक्तों के लिए मंदिर परिसर में कूलर और पंखों की पुख्ता व्यवस्था की गई है. भक्तों को राहत देने के लिए तोरण द्वार से लेकर मंदिर आने तक के सभी मुख्य मार्गों पर समय-समय पर पानी का छिड़काव करवाया जा रहा है. इसके अलावा अधिक मास में दान-पुण्य की विशेष महत्ता को देखते हुए मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की उम्मीद है, जिसके लिए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है. क्या होता है अधिक मास और क्यों बढ़ जाते हैं दिन? ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सौर वर्ष और चंद्र वर्ष के बीच सामंजस्य बिठाने के लिए हर तीसरे वर्ष पंचांग में एक अतिरिक्त महीना जोड़ दिया जाता है, जिसे 'अधिक मास' या 'मलमास' कहा जाता है. सौर वर्ष 365 दिन का होता है, जबकि चंद्र वर्ष करीब 354 दिनों का. इस 11 दिन के अंतर को पाटने के लिए हर तीन साल में एक महीना बढ़ जाता है. इस बार यह संयोग 19 साल बाद आया है, जो धार्मिक दृष्टि से विष्णु पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है.

2026 में आएगा 13वां महीना: अधिकमास से बदलेंगी त्योहारों की तारीखें

 हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल 2026 यानी विक्रम संवत 2083 खास रहने वाला है, क्योंकि इस बार पूरे साल में 12 नहीं बल्कि 13 महीने होंगे. ऐसा इसलिए क्योंकि ज्येष्ठ मास इस साल दो बार आएगा. यही अतिरिक्त महीना 'अधिक मास' कहलाता है, जिसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है. मान्यता है कि इस महीने के स्वामी भगवान विष्णु हैं, इसलिए इस समय उनकी पूजा का विशेष महत्व होता है. कब पड़ेगा अधिकमास 2026? पंचांग के अनुसार, साल 2026 में अधिकमास ज्येष्ठ महीने में पड़ेगा. इसकी शुरुआत 17 मई 2026 से होगी और समापन 15 जून 2026 को होगा. इस अतिरिक्त महीने की वजह से आगे आने वाले कई बड़े त्योहारों की तारीखें भी आगे खिसक जाएंगी. जैसे- रक्षाबंधन, जो आमतौर पर अगस्त के मध्य में आता है, 2026 में 28 अगस्त को मनाया जाएगा. दीपावली भी इस बार 8 नवंबर को पड़ेगी अधिकमास क्यों आता है? अधिकमास का सीधा संबंध सूर्य और चंद्र कैलेंडर के अंतर से है. एक सौर वर्ष लगभग 365 दिन का होता है. वहीं चंद्र वर्ष करीब 354 दिन का. हर साल करीब 11 दिनों का फर्क रह जाता है. यही अंतर जब 3 साल में बढ़कर लगभग 32-33 दिन हो जाता है, तब उसे संतुलित करने के लिए एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है. इसी को अधिक मास कहा जाता है. अधिकमास में क्या करना शुभ माना जाता है? अधिकमास को भक्ति और साधना का विशेष समय माना जाता है. इस दौरान रोजाना भगवान विष्णु की पूजा करना और उनके मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है. साथ ही जप, तप और दान-पुण्य पर विशेष ध्यान देना चाहिए. जरूरतमंद लोगों की मदद करना और अन्न दान करना भी इस महीने में बहुत पुण्यदायी होता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय श्रीमद्भगवद गीता का पाठ करने से भी विशेष फल प्राप्त होता है. इस दौरान ना करें ये काम अधिक मास में कुछ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है. इस दौरान शादी, गृह प्रवेश, नामकरण और मुंडन जैसे मांगलिक कार्य नहीं करने चाहिए. नए बिजनेस या किसी बड़े शुभ काम की शुरुआत भी टालना बेहतर माना जाता है. इसके अलावा मांसाहार और शराब का सेवन करने से बचना चाहिए और किसी गरीब या कमजोर व्यक्ति का अपमान नहीं करना चाहिए. क्या खास है पुरुषोत्तम मास? अधिकमास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है, क्योंकि इसे भगवान विष्णु को समर्पित माना गया है. मान्यता है कि इस महीने में की गई पूजा और भक्ति का फल कई गुना बढ़कर मिलता है, जिससे जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है.