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शैक्षणिक सत्र 2026-27 से बड़ा बदलाव: विश्वविद्यालयों में अपार आईडी से होगा एडमिशन

रांची  राज्य के विश्वविद्यालयों एवं अंगीभूत कालेजों में चांसलर पोर्टल से नामांकन में अनिवार्य रूप से अपार आइडी देनी होगी। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने इसे अनिवार्य किया है। विभाग ने इसे लेकर सभी विश्वविद्यालयों को पत्र जारी कर दिया है। यह शैक्षणिक सत्र 2026-27 से ही लागू होगा। दरअसल, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के आलोक में राज्य में एकेडमिक बैंक आफ क्रेडिट, नेशनल एकेडमिक डिपाजिटरी, क्रेडिट ट्रांसफर तथा मल्टीपल एंट्री-एग्जीट जैसी सुविधाएं लागू की गई हैं। इन सभी सुविधाओं के लिए शैक्षणिक प्रमापपत्रों का डिजिटल प्रबंधन तथा सत्यापित अपार आइडी अनिवार्य है। इसे ध्यान में रखते हुए विभाग ने नामांकन के समय सत्यापित अपार आइडी अपलोड करने को कहा है। विभाग ने यह भी कहा है कि चांसलर पोर्टल पर इसके सफल प्रमाणीकरण के बिना आवेदन प्रक्रिया पूरी नहीं होगी। विद्यार्थियों को यह भी जानकारी दी गई है कि प्रवेश, नामांकन, पंजीकरण सहित अन्य प्रक्रियाएं भी चांसलर पोर्टल के माध्यम से संचालित होंगी, जिनमें अपार आइडी अनिवार्य होगा। विभाग ने सभी अभ्यर्थियों से सत्यापित अपार आइडी तैयार रखने तथा नामांकन प्रक्रिया में उसके इस्तेमाल का सुझाव दिया है। साथ ही सभी विश्वविद्यालयों को भी इसे सख्ती से अनुपालन कराने को कहा गया है। कैसे बनाएं अपार आइडी? अपार आइडी अर्थात एकेडमिक बैंक आफ क्रेडिट्स कार्ड डिजी लाकर या एबीसी पोर्टल के माध्यम से घर बैठे बनाया जा सकता है। इसके लिए सबसे पहले डिजीलाकर की वेबसाइट पर लागिन कर अपना अकाउंट बनाएं। डिजीलाकर मोबाइल ऐप का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। यदि आप नए यूजर हैं, तो 'साइन अप' पर क्लिक कर अपना आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर दर्ज करें और ओटीपी के माध्यम से उसे सत्यापित करें। इसके बाद छह अंकों का सेक्युरिटी पिन सेट करें। इसके बाद अपने अकाउंट में लागिन कर सर्च डाक्यूमेंट में जाएं और एबीसी आइडी और अपार सर्च करें। इसमें मांगी गई सभी जानकारी भरने के बाद कंसेंट बाक्स को चेक करें ओर गेट डाक्यूमेंट या सबमिट पर क्लिक करें। इसी के साथ आपकी अपार आइडी जेनरेट हो जाएगी।  

30 मार्च तक ऑनलाइन करना होगा आवेदन

भोपाल  राज्य शिक्षा केंद्र, स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा संचालित शासकीय छात्रावासों में वर्ष 2026 के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस वर्ष विभाग ने प्रवेश प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया है। इसके लिए एजुकेशन पोर्टल 3.0 के माध्यम से विशेष ई-हॉस्टल प्रबंधन प्रणाली विकसित की गई है। संचालक राज्य शिक्षा केंद्र  हरजिंदर सिंह ने बताया कि प्रदेश में संचालित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों तथा नेताजी सुभाष चंद्र बोस बालिका एवं बालक छात्रावासों में विशेष रूप से वंचित वर्ग के बालक-बालिकाओं को उच्च प्राथमिक स्तर की शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पारदर्शी ऑनलाइन प्रवेश प्रणाली प्रारंभ की गई है। संचालक  सिंह ने बताया कि ई-हॉस्टल प्रबंधन प्रणाली एक समेकित डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसे आवासीय विद्यालयों एवं छात्रावासों में प्रवेश प्रक्रिया, सीट आवंटन, अभिलेख संधारण और प्रशासनिक कार्यों को ऑनलाइन एवं पारदर्शी तरीके से संचालित करने के लिए विकसित किया गया है। ई-हॉस्टल प्रबंधन प्रणाली विशेष रूप से कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (केजीबीवी) टाइप-I एवं टाइप-III तथा नेताजी सुभाष चंद्र बोस (एनएससीबी) बालक/बालिका छात्रावासों के पारदर्शी प्रबंधन और उनमें प्रवेश की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विकसित की गई है। https://educationportal3.in पर जाकर करना होगा आवेदन छात्रावासों में कक्षा 6वीं एवं अन्‍य कक्षाओं की रिक्‍त सीटों पर प्रवेश के लि‍ए विद्यार्थी प्रथम चरण में 30 मार्च 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। प्रथम चरण के बाद सीट्स रिक्त रहने की स्थिति में द्व‍ितीय चरण के आवेदन की प्रक्र‍िया शुरू होगी। यह 06 अप्रैल 2026 से 10 जून 2026 तक चलेगी। छात्रावास में प्रवेश के लिए अभिभावकों, विद्यार्थियों को ऑनलाइन आवेदन करना होगा। यह आवेदन एमपी ऑनलाइन कियोस्क सेन्टर के माध्यम से स्कूल शिक्षा विभाग की वेबसाइट https://educationportal3.in पर जाकर करना होगा। इसके साथ ही यदि किसी अभिभावक/पालक/विद्यार्थी को आवेदन फॉर्म भरने में किसी प्रकार की समस्या आती है, तो वे संबंधित वार्डन के सहयोग से भी आवेदन फॉर्म भर सकते हैं। छात्रावासों में लक्ष्य के अनुसार 50, 100, 150, 175, 200, 220 तथा 275 सीटें उपलब्ध हैं। कक्षा 6 से 8 तक की बालिकाओं को कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (टाइप-I) एवं नेताजी सुभाष चंद्र बोस बालिका छात्रावासों में प्रवेश दिया जाता है। वहीं कक्षा 6 से 12 तक की बालिकाओं को कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (टाइप-III) में प्रवेश की पात्रता होती है। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में छात्रावास की मार्गदर्शिका के अनुसार 75 प्रतिशत सीटें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक वर्ग की बालिकाओं के लिए निर्धारित हैं, जबकि 25 प्रतिशत सीटें गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) जीवन-यापन करने वाले परिवारों की बालिकाओं के लिए आरक्षित हैं। इनमें अस्थि बाधित, अनाथ एवं बेसहारा बालिकाओं को चयन में प्राथमिकता दी जाती है। प्रदेश में संचालित 66 नेताजी सुभाष चंद्र बोस बालक छात्रावासों में कक्षा 3 से 8 तक के पात्र बालकों को प्रवेश दिया जाता है। ये छात्रावास विशेष रूप से शाला अप्रवेशी एवं शाला त्यागी बालकों के लिए संचालित किए जाते हैं। ऐसे बालकों को उनकी आयु के अनुरूप कक्षा में दर्ज कर विशेष प्रशिक्षण के माध्यम से आवश्यक दक्षताएं विकसित कर उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जाता है। छात्रावासों में विशेष रूप से ऐसे बच्चों को प्रवेश दिया जाता है, जो रेलवे स्टेशन एवं बस स्टैंड के प्लेटफॉर्म पर रहने वाले, पन्नी बीनने वाले, पलायन करने वाले परिवारों के बच्चे, घर से भटके हुए बच्चे, विमुक्त (डिनोटीफाइड ट्राइब्स) एवं प्रिमिटिव ट्राइबल परिवारों के बच्चे और वन ग्राम पट्टाधारी परिवारों के बच्चों को आवासीय सुविधाएं प्रदान कर शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़कर प्रारंभिक शिक्षा पूर्ण कराई जाती है। प्रदेश में 597 छात्रावास हैं संचालित राज्य शिक्षा केंद्र अंतर्गत प्रदेश में कुल 597 छात्रावास संचालित है। इनमें 207 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, 324 नेताजी सुभाष चंद्र बोस बालिका छात्रावास तथा 66 नेताजी सुभाष चंद्र बोस बालक छात्रावास शामिल हैं। इन छात्रावासों में ऐसे बालक-बालिकाओं को आवासीय सुविधा प्रदान की जाती है, जो शाला से बाहर हैं या प्रारंभिक शिक्षा से वंचित हैं। साथ ही पारिवारिक कारणों से परिवार के साथ रहते हुए शिक्षा प्राप्त नहीं कर सकते हैं। उन्हें छात्रावास में रखकर प्रारंभिक शिक्षा की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।