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अलफलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जावद अहमद सिद्दीकी को पुलिस ने किया गिरफ्तार

फरीदकोट  दिल्ली पुलिस ने धोखाधड़ी और अनियमितताओं से जुड़े एक मामले में अलफलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जावद अहमद सिद्दीकी को गिरफ्तार किया. इस संबंध में एक अधिकारी की ओर से जानकारी दी गई है. अल फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े लोगों के ठिकानों पर जांच एजेंसी ईडी ने नवंबर 2025 में छापा मारा था. लाल किला विस्फोट मामले के बाद यह बड़ी कार्रवाई की गई थी. धोखाधड़ी के मामले में हुई गिरफ्तारी दिल्ली में विस्फोट के बाद विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की शिकायत पर दर्ज दो प्राथमिकी के आधार पर दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा (क्राइम ब्रांच) ने अल फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जावद अहमद सिद्दीकी को गिरफ्तार किया है. इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा कार्यवाही शुरू करने के बाद दिल्ली पुलिस ने यह कार्रवाई की है. लाल किले के पास हुए विस्फोट के बाद क्राइम ब्रांच ने प्राइवेट यूनिवर्सिटी के कामकाज से संबंधित कथित अनियमितताओं और धोखाधड़ी के संबंध में मामले दर्ज किए थे. दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि सिद्दीकी को स्थानीय अदालत में पेश किया गया. इसके बाद यहां से उसे आगे की पूछताछ के लिए चार दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया. ED भी कर चुकी है जांच इससे पहले ED भी अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े मामलों की जांच कर चुकी है. ED को शक है कि शैक्षणिक अनियमितताओं के जरिए आर्थिक लेन-देन में भी गड़बड़ी हुई है. इसी कड़ी में दस्तावेजों की जांच और पूछताछ पहले ही हो चुकी थी. 4 दिन की पुलिस कस्टडी दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने जवाद अहमद सिद्दीकी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया. कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 4 दिन की पुलिस कस्टडी मंजूर की है. पुलिस इस दौरान आरोपी से पूछताछ कर पूरे नेटवर्क और फर्जीवाड़े की कड़ियां जोड़ने की कोशिश करेगी. पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और जरूरत पड़ने पर और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं. अल-फलाह यूनिवर्सिटी के छात्रों और अभिभावकों से जुड़े सभी पहलुओं की भी जांच की जा रही है, ताकि सच्चाई सामने लाई जा सके.

ED का बड़ा एक्शन: अल-फलाह यूनिवर्सिटी के परिसर पर PMLA के तहत कुर्की की तैयारी

 फरीदाबाद   दिल्ली ब्लास्ट से जुड़े आतंकी मॉड्यूल मामले में फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी की समस्याएं और गहराती दिख रही हैं। न्यूज एजेंसी के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय (ED) मनी लॉन्ड्रिंग रोधी कानून (PMLA) के तहत यूनिवर्सिटी परिसर को अस्थायी रूप से कुर्क करने की तैयारी कर रहा है। जांच एजेंसियों का कहना है कि यूनिवर्सिटी से जुड़े कुछ लोगों की भूमिका दिल्ली ब्लास्ट के मामले में सामने आई है, जिसके बाद संस्थान को कथित तौर पर आतंकी नेटवर्क का केंद्र मानते हुए जांच तेज कर दी गई है। NIA की कार्रवाई, कई गिरफ्तार दिल्ली ब्लास्ट केस में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने यूनिवर्सिटी से जुड़े डॉक्टर शाहीन सईद और डॉ. मुजम्मिल को गिरफ्तार किया है। डॉ. मुजम्मिल पर विस्फोटक जुटाने और डॉ. शाहीन सईद पर आर्थिक मदद देने का आरोप है। इसके अलावा, एजेंसी ने अन्य कर्मचारियों से भी पूछताछ और गिरफ्तारियां की हैं। फंडिंग और निर्माण लागत की जांच प्रवर्तन निदेशालय इस बात की जांच कर रहा है कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी के निर्माण में लगा धन कहीं “प्रोसीड्स ऑफ क्राइम” से तो नहीं जुटाया गया। ईडी ने इस मामले में यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को दिल्ली ब्लास्ट के बाद गिरफ्तार किया था। ईडी का दावा है कि यूनिवर्सिटी ने खुद को यूजीसी और एनएएसी से मान्यता प्राप्त बताकर छात्रों को गुमराह किया, जबकि आवश्यक मान्यताएं मौजूद नहीं थीं। इसके बावजूद यहां छात्रों को दाखिला देकर पढ़ाई कराई गई और भारी फीस वसूली गई। 415.10 करोड़ की अवैध कमाई का आरोप ईडी ने अदालत को बताया है कि यूनिवर्सिटी ट्रस्ट के नाम पर विदेशों से फंडिंग ली गई और कथित तौर पर झूठी मान्यताओं के आधार पर छात्रों व उनके परिजनों से फीस वसूली गई। एजेंसी के अनुसार, इस तरीके से ट्रस्ट ने लगभग 415.10 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की। जांच के दौरान ईडी को कई वित्तीय अनियमितताएं भी मिली हैं। इनमें एक ही पते पर 9 शेल कंपनियों का पंजीकरण, अलग-अलग कंपनियों में एक ही मोबाइल नंबर का इस्तेमाल और EPFO रिकॉर्ड का अभाव शामिल है। PMLA के तहत कुर्की संभव न्यूज एजेंसी के मुताबिक, ईडी PMLA के तहत उन इमारतों को अस्थायी रूप से कुर्क कर सकती है, जिनका निर्माण कथित तौर पर गैरकानूनी फंडिंग से किया गया है। फिलहाल ईडी और एनआईए दोनों एजेंसियां मामले की गहन जांच कर रही हैं और आने वाले दिनों में अल-फलाह यूनिवर्सिटी के खिलाफ कार्रवाई और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

अल फलाह यूनिवर्सिटी में फैकल्टी की कमी से छात्रों को परेशानी, 10 प्रोफेसर छोड़कर गए, MBBS फर्स्ट ईयर स्टूडेंट्स को छुट्टी

फरीदाबाद दिल्ली ब्लास्ट के आतंकी मॉड्यूल का सेंटर पॉइंट बनी फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी इन दिनों फैकल्टी की कमी का सामना कर रही है। इसके चलते MBBS फर्स्ट ईयर के छात्रों को एक सप्ताह की लीव पर घर भेजा जा रहा है। यूनिवर्सिटी के अंदर आतंकी नेटवर्क खड़ा कर रहे लेडी आतंकी डॉ. शाहीन सईद और डॉ. मुजम्मिल शकील के गिरफ्तार होने के बाद से लगातार स्टाफ यहां से जॉब छोड़कर जा रहा है। वहीं, यूनिवर्सिटी में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे छात्रों के लिए नई मुसीबत खड़ी हो गई है। दिल्ली ब्लास्ट के बाद से ही यूनिवर्सिटी पर जांच एजेंसियों का शिकंजा कसता जा रहा है। यूनिवर्सिटी सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली ब्लास्ट के बाद से ही यूनिवर्सिटी सेटल नहीं हो पा रही है। अल-फलाह ग्रुप के चेयरमैन जावेद सिद्दीकी और डॉक्टरों की गिरफ्तारी ने यहां प्रोफेसरों के अंदर डर बैठा दिया है। इन गिरफ्तारियों के बाद यहां से करीब 10 मेडिकल प्रोफेसर अपनी जॉब छोड़कर जा चुके हैं। मेडिकल प्रोफेसरों के अलावा दूसरे विभागों में काम करने वाला स्टाफ भी धीरे-धीरे यहां से निकल रहा है, जिसके चलते मेडिकल की पढ़ाई करने वाले छात्रों की प्रॉपर क्लास नहीं लग पा रही है। यूनिवर्सिटी की तरफ से MBBS फर्स्ट ईयर के छात्रों को एक सप्ताह की अचानक से लीव देकर घर भेजा जा रहा है। हालांकि एक सप्ताह बाद उन्हें वापस यूनिवर्सिटी में जॉइन करने की बात भी कही जा रही है। यूनिवर्सिटी सूत्रों के अनुसार, इस बात से कोई पैनिक न हो, इसलिए सभी को बोला गया है कि वे बाहर जाकर इसे सर्दी की छुट्टी बताएं। दिल्ली ब्लास्ट के बाद से हालात बिगड़े दिल्ली ब्लास्ट के बाद से ही अल-फलाह यूनिवर्सिटी में अफरा-तफरी का माहौल बना है। जांच एजेंसी लगातार यूनिवर्सिटी के चक्कर लगा रही है। लेडी आतंकी शाहीन और मुजम्मिल को यूनिवर्सिटी में लाकर निशानदेही कराई गई। इन दोनों के संपर्क में यूनिवर्सिटी के जितने भी डॉक्टर और दूसरा स्टाफ था, सभी से जांच एजेंसी पूछताछ कर चुकी है। सेफ रहने की कोशिश में छोड़ रहे जॉब यूनिवर्सिटी सूत्रों ने बताया कि 10 के करीब मेडिकल प्रोफेसर अपना रिजाइन देकर जा चुके हैं। जो केवल इसलिए गए है ताकि भविष्य में उन पर कोई आंच ना आ सके। स्टाफ में कई सारे लोग ऐसे हैं, जो पहले परिवार के साथ यहां पर रह रहे थे, लेकिन पहले उन्होंने अपने परिवार को यहां से निकाला और बाद में खुद रिजाइन देकर चले गए। इनमें से अधिकतर लोग ऐसे है, जो छुट्‌टी लेकर घर गए थे और लौटने की बजाय इमेल के माध्यम से अपना रिजाइन भेज दिया।

देशविरोधी नारे और फर्जीवाड़ा! अल-फलाह यूनिवर्सिटी व अस्पताल में हुआ बड़ा खुलासा

फरीदबाद दिल्ली ब्लास्ट के आतंकी मॉड्यूल का सेंटर पॉइंट बनी फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी को लेकर यहां के एक पूर्व नर्सिंग स्टाफ ने बड़ा खुलासा किया है। कर्मचारी ने दावा किया है कि यूनिवर्सिटी के मेडिकल कॉलेज-अस्पताल में रोजाना 100 से लेकर 150 तक नकली मरीजों की फाइलें तैयार की जाती थी। आतंकी डॉ. मुजम्मिल शकील और सुसाइड बॉम्बर बने डॉ. उमर नबी के कहने पर ऐसा किया जाता था। जो कर्मचारी ऐसा नहीं करता था उसकी एबसेंट मार्क कर सैलरी काट दी जाती थी। उसने बताया कि रात के समय काम करने वाला कश्मीरी मेडिकल स्टाफ और डॉक्टर ड्यूटी पर अक्सर पाकिस्तान की तारीफ करते थे। इतना ही नहीं, कई बार हंसी-मजाक में पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे तक लगा दिए जाते थे। सूत्रों की मानें तो डॉ. शाहीन सईद अपने दोस्त और दिल्ली ब्लास्ट के आतंकी मॉड्यूल से डॉ. मुजम्मिल के साथ एनआईटी मार्केट में विस्फोटक या अन्य सामान खरीदने जाती थी। सुरक्षा जांच एजेंसी अब दोनों के आने-जाने, कौन-कौन सा सामान खरीदा, मिलने-जुलने जैसी सारी जानकारी को जुटा रही है। बता दें कि राजस्थान के रहने वाले लक्ष्मण ने साल 2025 में 14 जुलाई को अल-फलाह यूनिवर्सिटी के मेडिकल कॉलेज में जॉइन किया था। लेकिन 25 अक्तूबर को उसने नौकरी छोड़ दी। वह यहां पर नर्सिंग स्टाफ में काम करता था। मेडिकल कॉलेज में उसकी ड्यूटी अस्पताल के आईसीयू में होती थी। लक्ष्मण ने बताया कि रात के समय काम करने वाले स्टाफ से नकली फाइलें तैयार कराई जाती थी। हर कर्मचारी को 5 फाइल तैयार करने का टारगेट दिया जाता था। इन नकली फाइलों पर डॉक्टर के साइन पहले से ही होते थे। फाइल में केवल उनको मेडिकल चार्ट नोट्स बनाने होते थे। इन फाइलों में उन दवाइयों का रिकॉर्ड बनाया जाता, जो यूज ही नहीं होती थी। इन फाइलों को सुबह होते ही डॉक्टर अपने साथ ले जाते थे। फाइलों का क्या यूज होता था किसी भी स्टाफ के कर्मचारी को इसके बारे में नहीं बताया जाता था। लक्ष्मण ने बताया कि उनको लगता है कि इन फाइलों का उपयोग बाहर से गरीबों के इलाज के नाम पर फंड एकत्रित करने के लिए किया जाता था। रोजाना 100 से लेकर 150 तक फाइलों को तैयार किया जाता था। इतना ही नहीं, अगर कोई कर्मचारी फाइलें बनाने से मना करता था तो किसी की सैलरी होल्ड कर दी जाती है या फिर कटौती की जाती है। लेकिन कश्मीरियों के साथ ऐसा नहीं किया जाता है। लक्ष्मण के अनुसार अस्पताल एवं मेडिकल कॉलेज में नर्सिंग स्टाफ से जुड़े करीब 200 लोग काम करते हैं। यहां करीब 80 फीसदी मुस्लिम और 20 फीसदी हिंदू कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें भी करीब 30 से 35 फीसदी मेडिकल स्टाफ और डॉक्टर कश्मीर से आते हैं। पाकिस्तान के समर्थन में नारेबाजी लक्ष्मण ने दावा किया है कि रात के समय जो कश्मीरी मेडिकल स्टाफ और डॉक्टर ड्यूटी करते हैं। वे अक्सर अपनी बातों में पाकिस्तान की तारीफ करते हुए नजर आते थे। कई बार एक दूसरे के साथ वह हंसी-मजाक करते हुए पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाते थे। हर रोज कश्मीर को लेकर कुछ न कुछ चर्चा होती रहती थी। कश्मीरी स्टाफ आरोप लगाते हैं कि जम्मू-कश्मीर में सेना उनके भाइयों पर जुल्म करती है। सेना कश्मीरियों को स्पेशल टारगेट बनाती है। केंद्र और हरियाणा सीएम, मंत्री को भेजा मांग पत्र अल-फलाह यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे स्टूडेंट के पेरेंट्स ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री, मानव संसाधन मंत्री , हरियाणा सीएम, स्वास्थ्य मंत्री, डीएमईआर, NMC को ईमेल के जरिए अपना मांग पत्र भेजा है। मांग पत्र में सभी को इस मामले में जल्दी से जल्दी शामिल होने की बात कही है। एक अभिभावक ने बताया कि उनके साथ 360 से अधिक अभिभावक आपस में जुड़ चुके हैं। इनमें अधिकांश, यूपी, बिहार, पंजाब, दिल्ली और एनसीआर के हैं। सभी अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता में हैं। सरकार हाई लेवल कमेटी गठित करे पेरेंट्स की मांग है कि सरकार एक हाई लेवल कमेटी का गठन करे। कमेटी के अंदर स्वास्थ्य विभाग, NMC सहित दूसरे विशेषज्ञ और अभिभावकों को शामिल किया जाए। कमेटी यह सुनिश्चित करे कि स्टूडेंट्स की पढ़ाई, प्रैक्टिस, इंटर्नशिप, रजिस्ट्रेशन पर किसी प्रकार का कोई खतरा न आए। क्योंकि अभी तक उन्हें केवल मौखिक रूप से आश्वासन दिया जा रहा है। परिजनों का कहना है कि यूनिवर्सिटी का आतंकवाद में नाम आने के बाद हर कोई उनके बच्चों को शक की नजर देख रहा है। ऐसे में उनके बच्चों को आगे परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। उनके बच्चे डर के साये में न तो पढ़ाई कर पा रहे हैं, न ही रातों को सो पा रहे हैं।

आतंकी कनेक्शन का दोहराव! अल-फलाह यूनिवर्सिटी पर रिपोर्ट के सनसनीखेज़ खुलासे

नई दिल्ली  दिल्ली कार ब्लास्ट के बाद अल-फलाह यूनिवर्सिटी का नाम सुर्खियों में आया. दरअसल, दिल्ली में ब्लास्ट करने वाले उमर नबी का कनेक्शन इसी यूनिवर्सिटी से था. तभी से यूनिवर्सिटी पर जांच तेज कर दी गई है. हाल ही में इंटेलिजेंस की एक रिपोर्ट आई, जिसमें चौंकाने वाला खुलासा हुआ. बता दें कि 2008 में अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट में भी एक अल-फलाह स्टूडेंट का नाम सामने आया था. अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट 2008 इंडियन मुजाहिदीन का सक्रिय सदस्य मिर्जा शादाब बेग भी अल-फलाह इंजीनियरिंग कॉलेज का ही छात्र रह चुका है. बेग ने 2007 में फरीदाबाद स्थित अल-फलाह इंजीनियरिंग कॉलेज से बीटेक (इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंस्ट्रूमेंटेशन) पूरा किया था. इसके बाद साल 2008 में अहमदाबाद में हुए सीरियल धमाकों में वह शामिल पाया गया था. यह आतंकी पिछले कई सालों से गायब है. सूत्रों के मुताबिक, इसकी लोकेशन अफगानिस्तान में बताई जाती है.   धौज स्थित यूनिवर्सिटी पर जांच दिल्ली धमाके के बाद फरीदाबाद के धौज में स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी एक बार फिर से जांच एजेंसियों के रडार पर आ गई है. अल-फलाह कॉलेज की शुरुआत अल-फलाह स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के रूप में हुई थी. बाद में 2014 में हरियाणा प्राइवेट यूनिवर्सिटीज अमेंडमेंट एक्ट के तहत इसे यूनिवर्सिटी का दर्जा मिला. 2008 जयपुर ब्लास्ट में अहम भूमिका मिर्जा शादाब बेग इंडियन मुजाहिदीन के लिए एक बेहद अहम सदस्य था. 2008 के जयपुर धमाकों में विस्फोटक इकट्ठा करने के लिए मिर्जा शादाब बेग उडुपी गया था. वहीं पर मिर्जा ने रियाज और यासीन भटकल को बड़ी मात्रा में डेटोनेटर और बेयरिंग मुहैया कराए थे, जिनसे IED तैयार किए गए. इंस्ट्रूमेंटेशन इंजीनियरिंग की पढ़ाई के कारण बेग बम बनाने की तकनीक में काफी माहिर माना जाता था. अहमदाबाद-सूरत धमाकों में बड़ी भूमिका अहमदाबाद धमाकों से करीब 15 दिन पहले बेग अहमदाबाद पहुंचा था और उसने पूरे शहर की रेकी की थी. बेग ने तीन टीमों के साथ मिलकर धमाकों की प्लानिंग की और लॉजिस्टिक, IED फिटिंग और बम तैयार करने का काम किया था. इसके अलावा, गोरखपुर में हुए 2007 के बम धमाकों में भी शादाब बेग का नाम सामने आया था. इन धमाकों में 6 लोग घायल हुए थे. बाद में आईएम से लिंक जुड़ने पर गोरखपुर पुलिस ने उसकी संपत्ति कुर्क कर ली थी.

अल-फलाह यूनिवर्सिटी की सदस्यता खत्म, लाल किला ब्लास्ट के बाद छात्रों की स्थिति क्या?

फरीदाबाद देश की राजधानी दिल्ली के दिल में हुई लाल किला ब्लास्ट की गूंज अब हरियाणा के फरीदाबाद तक पहुंच चुकी है. सोमवार शाम करीब 6:52 बजे लाल किला मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर-1 के पास सफेद i20 कार में धमाका हुआ, जिसमें 12 लोगों की मौत हो गई. जांच में सामने आया कि इस साजिश के तार अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े हो सकते हैं. इसी बीच, एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज (AIU) ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी की सदस्यता रद्द कर दी है. AIU ने कहा कि अब यूनिवर्सिटी को AIU का नाम या लोगो इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं है. यह फैसला न केवल संस्थान के लिए बड़ा झटका है, बल्कि हजारों छात्रों के करियर पर भी गहरा असर डाल सकता है. छात्रों के लिए क्या रास्ते बचे हैं? छात्र फिलहाल UGC और AICTE से मान्यता प्रमाणपत्र लेकर भारतीय विश्वविद्यालयों या सरकारी नौकरियों में आवेदन कर सकते हैं. लेकिन विदेशी एडमिशन के लिए उन्हें AIU समकक्ष सर्टिफिकेट नहीं मिलेगा. इससे बाहर पढ़ाई मुश्किल हो जाएगी. विशेषज्ञ मानते हैं कि यूनिवर्सिटी को अब सुधारात्मक कदम उठाकर AIU से सदस्यता पुनः प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए. कैसे अल-फलाह यूनिवर्सिटी बनी आतंकी साजिश का अड्डा जांच एजेंसियों के मुताबिक अल-फलाह यूनिवर्सिटी की बिल्डिंग नंबर 17 आतंकियों की गुप्त बैठकों का केंद्र थी. बताया जा रहा है कि ये मीटिंग्स रूम नंबर 13 में होती थीं, जहां दिल्ली और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में सीरियल ब्लास्ट की योजना बनाई जा रही थी. लाल किला ब्लास्ट केस की जांच में अल-फलाह यूनिवर्सिटी की बिल्डिंग नंबर 17 से आतंकी लिंक सामने आए हैं. यह कमरा डॉ. मुजम्मिल अहमद गाई का था जो पुलवामा का रहने वाला बताया जा रहा है. जांच में सामने आया कि वह नियमित रूप से कुछ कट्टरपंथी डॉक्टरों और छात्रों से मिलता था. एजेंसियों को संदेह है कि यूनिवर्सिटी की लैब से IED की क्षमता बढ़ाने वाले केमिकल इसी कमरे में लाए गए थे. फिलहाल पुलिस ने कमरा नंबर 13 को सील कर दिया है, और वहां से लैपटॉप, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, कैमिकल कंटेनर, और डिजिटल नोट्स बरामद किए गए हैं. AIU ने आधिकारिक बयान में कहा- अल-फलाह यूनिवर्सिटी को अपनी किसी भी गतिविधि में AIU का नाम या लोगो इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं है. विश्वविद्यालय की वेबसाइट से तुरंत AIU का लोगो हटाया जाए. AIU के अनुसार यह फैसला संस्था की “Good Standing” नीति के तहत लिया गया है. अगर किसी यूनिवर्सिटी का नाम किसी विवाद, आपराधिक जांच या फर्जी गतिविधि में सामने आता है, तो उसकी सदस्यता निलंबित या समाप्त की जा सकती है. AIU क्या है और क्यों है इतनी अहम संस्था? AIU यानी Association of Indian Universities भारत की सबसे पुरानी उच्च शिक्षा संस्था है, जो 1925 में स्थापित हुई थी. यह संस्था भारत के सभी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों (केंद्रीय, राज्य, डीम्ड, निजी, ओपन) का प्रतिनिधित्व करती है और विदेशी डिग्रियों की समानता (Equivalence) तय करती है. AIU की मुख्य जिम्मेदारियां     भारत के सभी विश्वविद्यालयों को एक शैक्षणिक मंच पर लाना.     विदेशी डिग्रियों की भारतीय स्तर पर वैधता तय करना.     यूनिवर्सिटीज के बीच रिसर्च, नीति और खेल सहयोग बढ़ाना.     विश्वविद्यालयों को सदस्यता, स्पोर्ट्स पार्टिसिपेशन और इंटरनेशनल रिप्रेजेंटेशन देना.     यदि कोई यूनिवर्सिटी विवादों में हो तो उसकी सदस्यता निलंबित या रद्द करना. AIU सदस्यता रद्द होने के परिणाम प्रभाव का क्षेत्र    संभावित असर विदेशी शिक्षा    विदेशों की यूनिवर्सिटीज में प्रवेश मुश्किल, Equivalence सर्टिफिकेट नहीं मिलेगा सरकारी नौकरियां    UPSC, SSC, PSU जैसी नौकरियों में आवेदन रुक सकता है यूनिवर्सिटी की साख    प्रतिष्ठा में गिरावट, एडमिशन में 40-50% कमी संभव रिसर्च फंडिंग    अंतरराष्ट्रीय सहयोग और परियोजनाएं ठप खेलकूद    AIU के यूनिवर्सिटी गेम्स से प्रतिबंध छात्र    करियर अनिश्चित, डिग्रियों की वैल्यू घटेगी अल-फलाह यूनिवर्सिटी पर असर: साख और भविष्य पर संकट अल-फलाह यूनिवर्सिटी फरीदाबाद की प्रतिष्ठित निजी यूनिवर्सिटीज में मानी जाती रही है. लेकिन अब इस विवाद और सदस्यता रद्द होने से-     यूनिवर्सिटी की अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां खत्म होंगी,     नए छात्र एडमिशन से कतराएंगे,     खेल और रिसर्च फंडिंग प्रभावित होगी,     और विदेश में डिग्री की वैधता खत्म हो जाएगी.     हालांकि, राहत यह है कि UGC और NMC की मान्यता फिलहाल बरकरार है, इसलिए यूनिवर्सिटी की डिग्रियां घरेलू स्तर पर वैलिड रहेंगी. दिल्ली ब्लास्ट के बाद अल-फलाह यूनिवर्सिटी पर दोहरी मार पड़ी है. एक तरफ आतंकवादी साजिश के तारों से जुड़ने के आरोप, दूसरी ओर AIU सदस्यता का रद्द होना. यह मामला न सिर्फ एक विश्वविद्यालय के भविष्य बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाता है. अब देखना होगा कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी खुद को इस संकट से कैसे बाहर निकालती है. अल-फलाह यूनिवर्सिटी का चांसलर, जानें कहां-कहां से होती है कमाई? हरियाणा के फरीदाबाद जिले में बसा अल फलाह विश्वविद्यालय हाल ही में राष्ट्रीय स्तर पर जांच के घेरे में आ चुका है. रिपोर्ट्स के मुताबिक इसके कुछ डॉक्टरों का दिल्ली बम धमकों से संबंध है. जांच जारी रहने के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन ने किसी भी संस्थागत संलिप्तता से इनकार कर दिया है. लेकिन एक बात सबका ध्यान आकर्षित कर रही है वह इसके चांसलर जावेद अहमद सिद्दीकी का व्यवसायिक बैकग्राउंड. आइए जानते हैं की यूनिवर्सिटी के अलावा किन कंपनियों का मालिक है जावेद अहमद सिद्दीकी. कहां से हुई सफर की शुरुआत  जावेद अहमद सिद्दीकी का सफर 1990 के दशक के अंत में शुरू हुआ. 1990 के दशक के अंत में जावेद अहमद सिद्दीकी ने दिल्ली एनसीआर में कई व्यवसाय स्थापित किए. आज के समय में वह अल फलाह विश्वविद्यालय के चांसलर के रूप में काम करते हैं. इसी के साथ वह अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी भी हैं. यह ट्रस्ट विश्वविद्यालय और स्कूलों, अनाथालय और मदरसों के साथ-साथ कई शैक्षणिक और कल्याणकारी संस्थानों की देखरेख करता है.  जावेद अहमद सिद्दीकी के स्वामित्व और प्रबंधन वाली कंपनियां  भारत के कारपोरेट मामलों के मंत्रालय के रिकॉर्ड के मुताबिक जावेद अहमद सिद्दीकी 9 पंजीकृत कंपनियों से निर्देशक या प्रबंध प्रमुख के रूप में जुड़े हुए हैं. इनमें अल फलाह इन्वेस्टमेंट लिमिटेड, अल फलाह सॉफ्टवेयर प्राइवेट लिमिटेड, अल फलाह कंसलटेंसी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड, अल फलाह एक्सपोर्ट्स लिमिटेड, अल फलाह एनर्जी लिमिटेड, अल … Read more

बिल्डिंग-17 की गुत्थी: आखिर क्यों सुर्खियों में आया अल फलाह यूनिवर्सिटी का रूम-13?

नई दिल्ली  राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सोमवार (10 नवंबर) की शाम लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास हुए कार धमाका मामले की जाँच कर रही एजेंसियों ने अल फलाह यूनिवर्सिटी स्थित डॉ. उमर नबी और डॉ. मुजम्मिल के कमरों से उनकी डायरियाँ बरामद की हैं। फरीदाबाद में करीब 70 एकड़ में फैला यह यूनिवर्सिटी अब आतंकी धमाके का केंद्र बनकर उभरा है, जहां आतंकियों ने न केवल प्लानिंग की बल्कि आतंक को अंजाम देने के लिए कई गुप्त बैठकें की औंर फंड की व्यवस्था की। एक पुलिस सूत्र ने बताया, "ये डायरियाँ मंगलवार और बुधवार को अल फलाह यूनिवर्सिटी कैम्पस के अंदर से बरामद की गईं। इनमें से एक डॉ. उमर के कमरा नंबर चार से और दूसरी डॉ. मुजम्मिल के कमरा नंबर 13 से बरामद की गईं हैं। डॉ. मुज़म्मिल का कमरा नंबर 13 अब सील कर दिया गया है, जहाँ से कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और पेन ड्राइव भी बरामद किए गए हैं। इसके अलावा, पुलिस ने डॉ. मुजम्मिल द्वारा इस्तेमाल किए गए एक अन्य कमरे से भी एक डायरी ज़ब्त की हैं। यह वही जगह है जहाँ से पहले 360 किलोग्राम विस्फोटक ज़ब्त किया गया था। यह कमरा यूनिवर्सिटी से लगभग 300 मीटर की दूरी पर स्थित है। रूम नंबर 13 का रहस्य पुलिस सूत्रों ने बताया, "बरामद डायरियों और नोटबुक्स में कोड शब्द हैं, जिनमें 8 नवंबर से 12 नवंबर के बीच की तारीखों का ज़िक्र है। डायरियों में 'ऑपरेशन' शब्द कई बार लिखा गया है।" पुलिस सूत्रों ने बताया कि डॉ. उमर और उनके साथी अल फलाह यूनिवर्सिटी की बिल्डिंग नंबर 17 में गुप्त रूप से मिलते थे। इसी बिल्डिंग का कमरा नंबर 13 डॉ. मुज़म्मिल का था, जहाँ आतंकवादी अक्सर मिलते थे। पुलिस को शक है कि इसी कमरे में उन्होंने दिल्ली और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में विस्फोट करने की योजना बनाई थी। यूनिवर्सिटी की लैब से जुटाए केमिकल सूत्रों के मुताबिक, आतंकियों ने सबसे पहले यूनिवर्सिटी की लैबोरेटरी से बम बनाने के लिए रसायनों की तस्करी करने की योजना बनाई थी। यह लैब मुज़म्मिल के कमरे से कुछ ही मीटर की दूरी पर है। विश्वविद्यालय के दोनों फैकल्टी मेंबर डॉ. उमर और डॉ. शाहीन, रसायनों का प्रबंध करने में कामयाब रहे। फिर उन्हें फरीदाबाद के धौज और तागा गाँवों में किराए के मकानों में रखा गया। 26 लाख रुपये से ज्यादा की रकम जुटाई सूत्रों ने यह भी बताया है कि ‘सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल’ के सिलसिले में गिरफ्तार किए गए डॉक्टरों ने लाल किले के पास विस्फोट में इस्तेमाल की गई सामग्री खरीदने के लिए 26 लाख रुपये से ज्यादा की रकम जुटाई थी। एक अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि चार संदिग्धों – डॉ मुजम्मिल गनई, डॉ अदील अहमद राथर, डॉ शाहीन सईद और डॉ उमर नबी ने मिलकर नकद राशि जमा की थी, जिसे सुरक्षित रखने और आगे इस्तेमाल के लिए डॉ उमर को सौंप दिया गया था। डॉ. उमर चला रहा था आई20 कार जम्मू-कश्मीर के पुलवामा निवासी और और अल फलाह में बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर कार्यरत डॉ. उमर सोमवार की शाम को लाल किले के व्यस्त इलाके में हुए विस्फोट में इस्तेमाल हुंडई आई20 कार चला रहा था। जांचकर्ताओं का मानना ​​है कि यह धनराशि एक बड़ी आतंकी साजिश के लिए थी। जमा की गई इस राशि से आतंकियों ने कथित तौर पर गुरुग्राम, नूंह और आसपास के शहरों से लगभग 3 लाख रुपये मूल्य का लगभग 26 क्विंटल एनपीके खाद खरीदा था। आतंकियों के बीच धन के लेन-देन को लेकर थे मतभेद अधिकारियों ने बताया कि अन्य रसायनों के साथ मिश्रित इस उर्वरक का इस्तेमाल आमतौर पर इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) बनाने में किया जाता है। सूत्रों ने पहले बताया था कि दिल्ली विस्फोट में अमोनियम नाइट्रेट और ईंधन तेल युक्त विस्फोटक यौगिक एएनएफओ की एक अनिर्दिष्ट मात्रा का इस्तेमाल किया गया था। पुलिस सूत्रों ने बताया कि समूह द्वारा इतनी बड़ी मात्रा में खाद की खरीद, जांच में एक अहम सुराग बन गई है। उन्होंने बताया कि वित्तीय लेन-देन और आपूर्ति रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। सूत्रों ने यह भी बताया कि विस्फोट से पहले के दिनों में उमर और मुजम्मिल के बीच धन के लेन-देन को लेकर मतभेद था। जांचकर्ता इस बात की पड़ताल कर रहे हैं कि क्या इस विवाद की वजह से इस समूह की योजनाओं या हमले के समय पर असर पड़ा?