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NSA केस में अमृतपाल सिंह की याचिका खारिज: हाई कोर्ट ने नहीं दी राहत

चंडीगढ़. एनएसए के तहत तीसरे निरोधक आदेश को चुनौती देने वाली अमृतपाल सिंह की याचिका हाई कोर्ट ने खारिज की। खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह द्वारा दायर याचिका, जिसमें अमृतसर के जिला मजिस्ट्रेट की ओर से पारित तीसरे निरोधक आदेश को चुनौती दी गई थी। यह मामला अमृतपाल सिंह द्वारा दायर उस याचिका के चलते हाईकोर्ट के समक्ष लंबित था , जिसमें उसने एनएसए के तहत जारी अपनी तीसरी लगातार हिरासत को चुनौती दी थी। अमृतपाल अप्रैल 2023 से असम की डिब्रूगढ़ जेल में निवारक हिरासत में बंद है। उसके विरुद्ध पहला हिरासत आदेश 18 मार्च 2023 को पारित हुआ था। याचिका में उसने 17 अप्रैल 2025 को जारी तीसरे नए हिरासत आदेश को चुनौती दी है, जिसे राज्य सरकार ने 25 अप्रैल 2025 को मंज़ूरी दी और बाद में 24 जून 2025 को इसकी पुष्टि की थी। इसके अलावा हाई कोर्ट आज पंजाब सरकार की उस याचिका पर भी सुनवाई करेगा जिसके तहत अमृतपाल सिंह को असम जेल में रखने की मांग की गई है। पंजाब सरकार का कहना है कि अमृतपाल सिंह की गतिविधियों को लेकर पहले भी राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित हो चुकी है, ऐसे में उसे पंजाब लाना सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसी कारण उसे असम में ही सुरक्षित स्थान पर रखकर जांच और सुनवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की योजना बनाई गई है।

अजनाला केस में बड़ा अपडेट: अमृतपाल सिंह की NSA हटते ही गिरफ्तारी, डिब्रूगढ़ से शिफ्ट नहीं होंगे

चंडीगढ़. खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह के मामले में पंजाब सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट रणनीति तय कर ली है। सूत्रों के अनुसार, 22 अप्रैल को समाप्त हो रही राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत हिरासत को आगे बढ़ाने की संभावना नहीं है, लेकिन इसके साथ ही अमृतपाल की रिहाई भी नहीं होगी। राज्य पुलिस अजनाला थाना हमले के मामले में उसे औपचारिक रूप से गिरफ्तार करेगी, जिसके बाद वह असम की डिब्रूगढ़ जेल में ही बंद रहेगा। पंजाब गृह विभाग ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर साफ किया है कि कानून-व्यवस्था और सुरक्षा कारणों से अमृतपाल को एनएसए समाप्त होने के बाद भी डिब्रूगढ़ जेल में ही रखा जाए। राज्य और केंद्रीय एजेंसियों के संयुक्त आकलन के बाद यह निर्णय लिया गया है। हालांकि, अधिकारियों ने अंतिम समय में किसी भी बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया है। फरवरी 2023 में अमृतसर के अजनाला थाने पर हुए हमले के मामले में अमृतपाल सिंह को मुख्य आरोपित बनाते हुए कुल 41 लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की कई गंभीर धाराओं में आरोप तय किए गए हैं। इनमें धारा 307 (हत्या का प्रयास), 353 (लोक सेवक पर हमला), 186 (सरकारी कार्य में बाधा), 506 (आपराधिक धमकी), 332 और 333 (लोक सेवक को चोट व गंभीर चोट पहुंचाना), 120बी (आपराधिक साजिश), 427 (नुकसान), 148 (दंगा), 149 (गैरकानूनी जमावड़ा) और 201 (साक्ष्य मिटाना) शामिल हैं। इसके अलावा आर्म्स एक्ट की धारा 25 भी लगाई गई है। जांच के अनुसार, अमृतपाल अपने समर्थकों के साथ हथियारों से लैस होकर अजनाला थाने पहुंचा था। आरोप है कि भीड़ ने पुलिस बैरिकेड तोड़े, थाने में घुसकर पुलिसकर्मियों से टकराव किया और एक साथी को जबरन छुड़ाने की कोशिश की। इस घटना के बाद राज्यभर में व्यापक सुरक्षा अभियान चलाया गया था। मामले की सुनवाई अब तक शुरू नहीं हो सकी है, क्योंकि अमृतपाल एनएसए के तहत निरुद्ध था। अब आरोप तय होने के बाद ट्रायल प्रक्रिया आगे बढ़ने की संभावना है। पुलिस ने डिब्रूगढ़ जेल जाकर गिरफ्तारी की औपचारिकताएं पूरी करने के लिए टीम तैयार कर ली है। इसी मामले में सरकार पहले ही अमृतपाल के नौ करीबी सहयोगियों की एनएसए हिरासत समाप्त कर उन्हें पंजाब ला चुकी है। इनमें पापलप्रीत सिंह (मीडिया सलाहकार), कुलवंत सिंह राउके, हरजीत सिंह चाचा, गुरिंदर पाल सिंह उर्फ गुरी, गुरमीत सिंह बुक्कनवाला, भगवंत सिंह, दलजीत सिंह कालसी, बसंत सिंह और वरिंदर सिंह उर्फ फौजी शामिल हैं। सभी आरोपित वर्तमान में पंजाब की विभिन्न जेलों में बंद हैं और पुलिस कस्टडी में हैं। अमृतपाल सिंह को अप्रैल 2023 में मोगा के रोड़े गांव से गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद से वह डिब्रूगढ़ जेल में निरुद्ध है। 2024 के लोकसभा चुनाव में उसने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में 1.9 लाख मतों से जीत दर्ज की थी। उसने 5 जुलाई 2024 को शपथ ली, लेकिन इसके बाद किसी संसदीय कार्यवाही में भाग नहीं ले सका। संसद सत्र में शामिल होने के लिए दायर उसकी पैरोल याचिकाएं भी अदालत ने कानून-व्यवस्था के आधार पर खारिज कर दी थीं। 22 अप्रैल के बाद की कार्रवाई इस पूरे मामले में निर्णायक होगी। मौजूदा संकेत यही हैं कि एनएसए हटेगा, लेकिन अमृतपाल की हिरासत समाप्त नहीं होगी और अजनाला कांड में गिरफ्तारी के साथ कानूनी शिकंजा ढीला नहीं पड़ेगा और अजनाला कांड में गिरफ्तारी के साथ मामला अगले चरण में प्रवेश करेगा।

सांसद अमृतपाल सिंह की मांग ठुकराई, कोर्ट ने पैरोल देने से किया इनकार

चंडीगढ़. पंजाब की लोकसभा सीट खडूर साहिब से सांसद व खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय से बड़ा झटका लगा है। संसद सत्र में शामिल होने के लिए पैरोल दिए जाने की मांग को लेकर दायर उनकी याचिका को उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया है। इस फैसले के बाद अब अमृतपाल सिंह को मौजूदा संसद सत्र में भाग लेने की अनुमति नहीं मिल पाएगी। जानकारी के अनुसार, अमृतपाल सिंह इस समय राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत हिरासत में हैं। उन्होंने न्यायालय में याचिका दाखिल कर यह आग्रह किया था कि वह एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि हैं, इसलिए उन्हें संसद की कार्यवाही में भाग लेने के लिए अस्थायी रूप से रिहा किया जाए। उनकी ओर से यह भी कहा गया कि जनता ने उन्हें चुनकर भेजा है, ऐसे में उनका संसद सत्र से दूर रहना मतदाताओं के अधिकारों का भी हनन है। वहीं, राज्य सरकार और सुरक्षा एजेंसियों ने इस मांग का कड़ा विरोध किया। सरकार की ओर से न्यायालय को बताया गया कि अमृतपाल सिंह की रिहाई से कानून व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। साथ ही, सुरक्षा से जुड़े गंभीर खतरे भी उत्पन्न हो सकते हैं। अधिकारियों ने यह भी कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में उन्हें बाहर आने की अनुमति देना उचित नहीं होगा। दोनों पक्षों को सुनने के बाद लिया गया फैसला दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि सुरक्षा और कानून व्यवस्था सर्वोपरि हैं। राज्य सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के तर्कों पर विचार करते हुए याचिका खारिज कर दी गई। फिलहाल, उच्च न्यायालय के इस आदेश के चलते अमृतपाल सिंह को संसद सत्र में शामिल होने की अनुमति नहीं मिल सकी है और वह हिरासत में ही रहेंगे।

सदस्यता बची रहेगी! अमृतपाल को केंद्र से राहत, कंडोनेशन के लिए मिलेगा अवसर

चंडीगढ़. खडूर साहिब से लोकसभा सदस्य अमृतपाल सिंह से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। जानकारी के अनुसार संसद से लगातार गैरहाजिर रहने को लेकर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने मंगलवार को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के सामने साफ किया कि इस समय अमृतपाल सिंह की लोकसभा सदस्यता को तुरंत कोई खतरा नहीं है। ASG सत्यपाल जैन ने जानकारी दी कि सांसद अमृतपाल सिंह की लोकसभा सदस्यता फिलहाल रद्द नहीं की जाएगी और उन्हें अनुपस्थिति के लिए माफी (कंडोनेशन) के लिए आवेदन करने का अवसर मिलेगा। सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। नियमों के अनुसार यदि कोई सांसद लगातार 60 दिनों तक सदन से अनुपस्थित रहता है तो उसकी सीट खाली घोषित की जा सकती है। हालांकि, अमृतपाल सिंह अपनी एनएसए के तहत हिरासत को अनुपस्थिति का उचित कारण बताकर सीट खाली होने से बचा सकते हैं। ऐसे मामलों में लोकसभा की एक समिति सांसद द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण पर विचार करती है और सामान्य तौर पर उचित कारण होने पर अनुपस्थिति को मंजूरी दे दी जाती है।

NSA के खिलाफ अमृतपाल की याचिका पर कोर्ट में सुनवाई खत्म, अब फैसले का इंतजार

चंडीगढ़ खडूर साहिब लोकसभा क्षेत्र से सांसद अमृतपाल सिंह ने संसद के आगामी बजट सत्र में भाग लेने के लिए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का रुख किया है। उन्होंने सत्र की अवधि के लिए पैरोल देने की मांग करते हुए याचिका दाखिल की है। असम के डिब्रूगढ़ जेल में बंद खडूर साहिब से निर्दलीय सांसद व खालिस्तानी समर्थक अमृतपाल की तरफ से नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (एनएसए) के खिलाफ पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट में लगाई गई याचिका पर बुधवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद अदालत ने अमृतपाल सिंह पर लगाए तीसरे एनएसए के खिलाफ दायर याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। याचिका पर सांसद अमृतपाल सिंह, पंजाब सरकार और केंद्र सरकार की दलीलें सुनी गई। वहीं संसद के बजट सत्र में शामिल होने की मांग को लेकर अमृतपाल सिंह की तरफ से जो याचिका दायर की गई है, उस पर अब बहस शुरू हो गई है। याचिका में अमृतपाल की तरफ से कहा गया है कि संसद का बजट सत्र दो चरणों में प्रस्तावित है। पहला चरण 28 जनवरी, 2026 से 13 फरवरी 2026 तक और दूसरा चरण 9 मार्च, 2026 से 2 अप्रैल, 2026 तक चलेगा। अमृतपाल सिंह ने इस पूरी अवधि में संसद में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने की अनुमति देने की मांग की है। याची का कहना है कि वह अपने निर्वाचन क्षेत्र के लोगों का प्रतिनिधित्व करना चाहते हैं और क्षेत्र से जुड़े अहम मुद्दों को सदन में उठाना उनका संवैधानिक दायित्व है। उन्होंने मादक पदार्थों के बढ़ते दुरुपयोग, बुनियादी ढांचे के विकास और अन्य जनहित के विषयों का उल्लेख किया है, जिन्हें वह अब तक संसद में नहीं उठा सके हैं। याचिका में यह भी कहा गया है कि इससे पहले शीतकालीन सत्र में शामिल होने के लिए पैरोल मांगी गई थी, लेकिन उस पर सुनवाई पूरी होने से पहले ही सत्र समाप्त हो गया था। ऐसे में अब हाईकोर्ट से सरकार को आवश्यक निर्देश जारी करने की मांग की गई है।

बजट सत्र में शामिल नहीं हो पाएगा अमृतपाल सिंह

चंडीगढ़. पंजाब सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत असम की डिब्रूगढ़ जेल में बंद खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह को अस्थायी रिहाई देने से साफ इनकार कर दिया है। सरकार की ओर से कहा गया कि राज्य की सुरक्षा, लोक व्यवस्था और सार्वजनिक शांति के हित सर्वोपरि हैं। ऐसे में उसे रिहाई की अनुमति नहीं दी जा सकती। अमृतपाल ने बजट सत्र में भाग लेने की अनुमति देने के लिए हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। गृह विभाग ने सोमवार को अमृतपाल की अर्जी खारिज कर दी। सरकार ने कहा कि हिरासत में रहते संसद सत्र में भाग लेना कोई संवैधानिक अधिकार नहीं है। 23 फरवरी 2023 को थाना अजनाला में खालिस्तानी समर्थक व सांसद अमृतपाल सिंह ने अपने साथी को छुड़वाने के लिए हमला कर दिया था। इस हमले में एसपी जुगराज सिंह, एएसआइ जतिंदर सिंह, पुलिस होमगार्ड का जवान सुरजीत सिंह गंभीर रूप से घायल हो गया था। थाना अजनाला की पुलिस ने अमृतपाल सिंह सहित 19 लोगों का बायनेम व 250 के करीब अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था। इसके बाद पंजाब सरकार की ओर से इन पर एनएसए लगाया गया था और इन्हें असम की डिब्रूगढ़ जेल में भेज दिया था। खडूर साहिब सीट से बना सांसद पिछले साल लोकसभा चुनाव में अमृतपाल सिंह ने पंजाब की खडूर साहिब सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव में भाग लिया और यहां से वह सांसद चुना गया।

अमृतपाल की पार्टी ने मनदीप सिंह पर खेला सियासी जुआ, तरनतारन उपचुनाव में बढ़ी हलचल

तरनतारन खालिस्तान समर्थक व खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह की पार्टी वारिस पंजाब दे ने तरनतारन उप-चुनाव के लिए हिन्दू नेता सुधीर सूरी के हत्यारे सन्नी के बड़े भाई मनदीप सिंह को उम्मीदवार बनाया है। अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह ने पत्रकार वार्ता में इसकी जानकारी दी।  उन्होंने कहा कि संदीप सिंह द्वारा किए काम और पंथ व पंजाबियों को एकजुट करने के लिए भी मनदीप को चुनाव में उतारा गया है। तरसेम ने कहा कि तरनतारन का यह चुनाव सिर्फ एक राजनीतिक मुकाबला नहीं बल्कि सच्चाई, न्याय और जुल्म के खिलाफ लड़ाई है। उन्होंने कहा कि तरनतारन को हमेशा नशे, भ्रष्टाचार और धोखे की राजनीति के रास्ते पर जिन्होंने धकेला है, जनता उन्हें दोबारा मौका नहीं देगी। खालिस्तान समर्थक व खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह की पार्टी वारिस पंजाब दे ने तरनतारन उप-चुनाव के लिए हिन्दू नेता सुधीर सूरी के हत्यारे सन्नी के बड़े भाई मनदीप सिंह को उम्मीदवार बनाया है।